
rakesh dubey
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rakesh dubey
@rkdspeaks
Microfinance professional and development enabler...working in rural India,




माननीय रील मंत्री जी टिकट कैंसिलेशन का एक नया स्कीम लेकर आए है , 8 घंटे पहले कैंसल करोगे तो 0% रिफंड 8 से 24 घंटे पहले करने पर 50% रिफंड 24 से 72 घंटे पहले करने पर 25% रिफंड और 72 घंटे पहले करने पर कुछ रुपए कटेंगे 🤡

Qutub Ind Area To Sec 55: Ola Prime ₹472 Bharat Taxi WagonR 658 Bharat Taxi Sedan 1022 What did I miss?


मध्यम वर्ग को क्या मिला? जानकार बताएँ

काशी पहले लोग पैदल जाते थे। आज वायुयान और वंदे भारत से जाते हैं। जो हवाई अड्डे पर उतरते हैं, उनका मानना है कि हवाई अड्डा बनने तक आधुनिकीकरण स्वीकार्य है, इसके आगे कुछ नया बनेगा या रेलवे स्टेशन भी बेहतर होगा तो नगर के पौराणिक चरित्र का हनन हो जाएगा, जो वंदे भारत से आते हैं, उनके अनुसार स्टेशन तक सुविधाएँ विश्व स्तरीय हो जाएँ परंतु बस स्टॉप के आस पास कोई विस्तार, अवैध निर्माण का भंजन शहर के मूल चरित्र को प्रभावित कर देगा। जो पाँच सितारा में ठहरते हैं, उन्हें पाँच सितारा के निर्माण तक विकास स्वीकार्य है, जिनकी सामर्थ्य में तीन सितारा है, उन्हें तीन सितारा तक विकास शास्त्रोचित लगता है, धर्मशाला विश्व स्तरीय हॉस्टलों के स्तर की हो जाये तो तीर्थ टूरिज्म हो जाएगा। यह कौन तय करेगा कि किस स्तर तक पहुँचने की कठिनाई, रहने खाने की असुविधा तीर्थ को शास्त्रों के अनुरूप स्वीकार्य होगी। कई ऐसे मंदिर होंगे जिन पर लिखा हुआ है कि यह एक ऐसी गुफा थी जिसमे साहसी लोग ही घुसते थे और अहिल्या बाई ने वहाँ मंदिर बनवाया। कितने ही घाट राजाओं के बनवाये हुए काशी में हैं और अब वाराणसी का प्रतिनिधि चित्र हैं। महाराजा रणजीत सिंह में जब स्वर्ण कलश ज्ञानवापी पर बैठाया होगा तो क्या उसका चरित्र दूषित हुआ या कच्चे घाटों पर कब सीढ़ियाँ बनी तो काशी का स्तर गिर गया? या उनका सौभाग्य था कि यह सब परिवर्तन सोशल मीडिया के आने के पहले हुए, और जिसे जो तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने का साधन सूझा, धर्म की प्रतिष्ठा बढ़ाने का साधन सूझा, उसने बनाया। मक्का में पैगंबर साहब के जीवन से जुड़े भवन ध्वस्त हुए, वेटिकन में एक सुनियोजित नगर व्यवस्था के लिए नई व्यवस्था बनायी गई। धर्म की निरंतरता के लिए राजा तालाब और बावड़ी बनवाते रहे हैं। तीर्थयात्रियों के आगमन को सुगम बनाने के लिए राजशाही में भी शासन प्रयासरत रहा है। विशाल हज हाउस बनते रहे हैं, अरब देशों से आने वाले धन से विराट मस्जिदें बनती रही हैं। यह धर्म की शक्ति का प्रतिबिंब बन के युवाओं को अपने धर्म में गौरव की अनुभूति करा के उन्हें अपनी ओर खींचता रहा है। सात सौ वर्ष एक हिंदुओं से घृणा करने वाले शासन और सत्तर साल के हिन्दू लज्जा और अपराधबोध पर आधारित व्यवस्था ने हिंदू तीर्थों को बढ़ती जनसंख्या के साथ आगे नहीं बढ़ने दिया और अधिकांश तीर्थ दुर्गम क्षेत्रों, संकरी गलियों और गन्दगी का पर्याय हो गए। हिंदू बच्चे गोवा में चर्च के विस्तृत प्रांगणों में रील बनाते रहे और माँ बाप के साथ काशी विश्वनाथ की संकरी गलियों में पंडों की कृपा से दर्शन करने से बचते रहे। इनकी अगली पीढ़ी छुट्टियों में कहाँ जाएगी सोचिएगा ज़रूर।

लीजिए, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा कम था कि अब चीन भी आ गया! चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार 30 दिसंबर, 2025 को ये दावा कर दिया है कि “भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव” ख़त्म करने में चीन की “मध्यस्थता” शामिल थी! @the_hindu की रिपोर्ट thehindu.com/news/internati…

मेरा ये स्वेटर नहीं मिल रहा… आपका ये जैकेट मिला क्या @Rajeevranjantv ? 😃 चित्र : 1998, शिमला




