अमित शाह जी द्वारा एक टीवी चैनल को दिया गया इंटरव्यू सुनिए। वो साफ़ साफ़ कह रहे हैं कि सीबीआई स्वतंत्र नहीं है और वे सीधे सीबीआई को निर्देश देते हैं। उन्होंने इंटरव्यू में कहा -
“ये सेशन कोर्ट का फ़ैसला है जिसे ‘हमने’ दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है”
सेशन कोर्ट का फ़ैसला सीबीआई के ख़िलाफ़ आया है। उस फ़ैसले को सीबीआई ने चुनौती दी है। फिर वे कैसे कह रहे हैं कि “हमने” चुनौती दी है। इसका मतलब वे ख़ुद ही सीबीआई हैं।
यही नहीं। आगे अमित शाह जी ऐलान करते हैं कि हाई कोर्ट का जो फ़ैसला आएगा, उसके ख़िलाफ़ मुझे सुप्रीम कोर्ट जाना होगा। यानी कि उन्हें अभी से पता है कि हाई कोर्ट का फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ आएगा। कैसे?
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भाटी जी , क्षमा करना पर यह आपका दोगलापन है, आप आज केवल इसलिए सही बता रहे है क्योंकि इसने माननीय डिम्पल जी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था , अन्यथा आपने इससे पहले कभी इसका विरोध नहीं किया जब यह औरों पर अभद्र टिप्पणी करता था। इसलिए कहा जाता है , कभी कभी दूसरों के घर में आग लगाते लगाते खुद के घर में लग जाती हैं।
यद्यपि मैं हिंसा का बिल्कुल भी समर्थक नहीं हूं। किन्तु इस असभ्य, जंगली और बेहूदे मौलाना का पिटना मुझे कतई खराब नहीं लगा। बहनों और बेटियों पर अश्लील-अशोभनीय टिप्पणी करने वाले हर बदतमीज का यही हश्र होना चाहिए। समाजवादी पार्टी इतनी कमजोर नही है कि उसकी सम्मानित नेता को गाली देकर कोई यूं ही खुला घूमेगा। यह बदतमीज अब जहां सड़क पर दिखेगा वहीं पिटेगा।
Today, the government is deciding the lifespan of vehicles.
Tomorrow, they might start deciding the lifespan of your fridge, AC, or computer. Instead of focusing on real issues like pollution checks, scientific research, or promoting sustainable practices, arbitrary age limits are being imposed on vehicles.
1) If vehicle age is the real concern, then what's the point of a Pollution Under Control (PUC) certificate? Scrap that first.
2) If pollution is the issue, then: Why do new luxury cars that emit more pollutants than well-maintained older cars get a free pass?
3) Why aren't government buses, planes, and other public vehicles held to the same emission standards?
4) Not every family can afford a brand-new car. Many rely on 5–6-year-old second-hand cars that are affordable and functional.
Should they now drive them for just 3–4 years and then sell them as scrap?
5) Why don’t authorities check the lifespan and quality of roads and bridges, which develop potholes right after construction?
6) Frequent power cuts, happening 8–10 times a day, seem designed to benefit the inverter and battery industry rather than address infrastructure problems.
This isn’t about pollution — it’s a ruthless, pro-industry policy that primarily benefits automobile companies.
At this rate, the government might soon start punishing people for living beyond average life expectancy, claiming they are putting pressure on limited public resources.
क्या सरकार का काम सिर्फ चुनाव लड़ना है?
अमेरिका भारतीयों को बेइज्जत कर रहा है लेकिन मोदीजी के मुँह से बोली नहीं निकल रही है.
सरकार ने विदेशों में भारतीयों के अपमान की सुपारी ली है क्या?
सरकार में किस तरह के लोग बैठे हैं?
ये विश्वगुरु के लक्षण तो नहीं हैं!
@narendramodi
@iNikhilsaini If this is not permissible, then @KiaInd should be fined for providing illegal things in their cars.Customer is the simple using these features provided by the manufacturer.Iy should be blocked at the manufacturing level itself.
Why are common people fined for company-fitted sunshades when the same are used by celebrities in their high-end cars without question? Some even use dark black tints openly in the name of privacy. If companies are fitting them by default, why should the aam aadmi pay fines?
@AamAadmiParty उत्सुकता पूर्वक जानना चाहता हु, क्या पंजाब सरकार खरीद रही है कि भारत सरकार? पंजाब सरकार इसमें कितने पैसे दे रही है , या बिना निमंत्रण शादी में घूम रहे हो
सिर्फ बड़े विन्रम भाव से सवाल इनके सभी फॉलोवर से हैं, कोई आपके निजी घर पर आक्रमण करेगा , आपके भाई या बहन ,बेटे या बेटी पर आक्रमण करके उनके प्राण ले लेगा तो क्या आप उसका स्वागत करेंगे या उसका प्रतिकार करेंगे ..जरा सोचिएगा जरूर ,शायद उसके बाद आप तुरन्त इनको अनफॉलो कर देंगे ओर इनकी मानसिकता को जान जाएंगे।
#WATCH | Mumbai: On the controversy over YouTuber Ranveer Allahbadia's remarks on a show, Advocate Ashish Rai says, "A complaint has been lodged to the Mumbai Police Commissioner about some viral videos of the show 'India's Got Latent'. There are a lot of videos with obscene language which can make any common person uncomfortable... Two days ago, videos emerged which are obscene and vulgar... The videos they are creating are popular... The intention behind it seems to be that they wanted to earn more money... We have also given a written complaint to the Presidents of NCW and Maharashtra's Women Commission..."
जब लगा जेल जाने का डर, तब मांग रहे हैं माफी हाथ जोड़कर
रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में उनकी मां कहती है कि उन्होंने अपने बेटे को अच्छे संस्कार दिए हैं, जिस पर रणवीर हामी भरते हैं
फिर ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ जैसे भद्दे शो में मां पर बेहद शर्मनाक टिप्पणी करते हैं
और अब माफी मांग रहे हैं
#Beerbiceps#RanveerAllahbadia
आप सही कह रहे है अजीत जी टिकट तो लगाया जा सकता है, लेकिन शीश महल की भव्यता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए बेइंतह पैसा खर्च होगा जिसकी भरपाई टिकट से कभी हो ही नहीं पाएगी। जितने भी स्मारक है देश में ,कोई भी अपना खर्चा निकाल नहीं पाता टिकट से, क्योंकि टिकट भी सब्सिडाइज ही होता है 😊।
@vinay_g@BJP4India उसका एक भाग म्यूजियम में बनाया जा सकता है। बहुत बड़ा क्षेत्र है। इसका एक हिस्सा रेस्तराँ में बदल कर रेवेन्यू बनाया जा सकता है। म्यूजियम बने तो उसमें टिकट लगे।
रेवड़ी और शीशमहल के अंतर्द्वंद्व में फँसी भाजपा
वैसे तो रेवड़ी की राजनीति @BJP4India के लिए कभी अंतर्द्वंद्व तो नहीं रही क्योंकि खातों में सीधे पैसे देने की परंपरा का आरंभ ही मध्यप्रदेश की भाजपा से होता है। चिह्नित वर्ग को पैसे देना ‘जन कल्याण’ है, परंतु सबको वही लाभ देना ‘कैश फॉर वोट्स’ का एक परिष्कृत संस्करण मात्र है।
गरीब महिलाओं को पैसे देने से उनके हाथ में आया अतिरिक्त धन उनके बच्चों की शिक्षा में, कोचिंग आदि के व्यय के रूप में प्रयुक्त हो सकता है, पर जब नेता यह कहने लगें कि एक-एक हजार के दो सूट लेती हैं, सौ रुपए के गोलगप्पे खाती हैं, और बस तो हमने फ्री कर ही रखी है, तो वही ‘कल्याण’ रेवड़ी का रूप ले लेती है।
रेवड़ी भी वह सरकार दे सकती है जिसका बजट सरप्लस है, उसके यहाँ के बाकी सारे कार्य हो चुके हैं, और हाथ में पैसा है। हालाँकि, टूटी सड़कें, फटे सीवर और कम स्कूल-हॉस्पिटल कमोबेश हर राज्य की न झुठलाई जा सकने वाली वास्तविकता है।
दिल्ली में दर्जनों कार्य धन की कमी के कारण रुके हुए थे और पैसा निर्बाध बाँटा जा रहा था। जल, बिजली, बस आदि फ्री में नहीं आते, किसी को कहीं तो पैसा देना पड़ता है। ये सारे विभाग हजारों करोड़ की क्षति उठा चुके हैं।
नई @BJP4Delhi सरकार के समक्ष यह समस्या है कि उसने घोषणापत्र में लम्बे-लम्बे अनुच्छेद बना रखे हैं कि किसको कितने हजार दे देंगे। यदि वो इसे ‘टार्गेटेड स्कीम्स’ नहीं बनाते तो यह उन नागरिकों के साथ छल होगा जो सत्यनिष्ठा से कार्य करते हैं, टैक्स देते हैं।
‘गरीब कल्याण’ अवश्य कीजिए, लेकिन उसे भी ‘तेरी बेटी का विवाह मैं करा दूँगा’, ‘तेरे बेटे को कोचिंग मैं भेजूँगा’, ‘तेरा बीमा मैं करा दूँगा’, ‘तेरी पत्नी को सूट मैं सिलवा दूँगा’ आदि सुन कर, यदि वो स्वाभिमानी है, स्वयं पर ही प्रश्न उठाने का अवसर मत दीजिए कि ‘सब तू ही कर देगा, तो मैं क्या करूँगा?’
या, इसका दुष्प्रभाव वही होगा जो मनरेगा-गरीब कल्याण के अनाज-अन्य ऐसी योजनाओं के कारण बिहार के गाँवो में हो रहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था चौपट होती जा रही है। लोग आलसी होते जा रहे हैं और कार्य न करने ‘जातिगत’ कारण ढूँढने लगे हैं। वही व्यक्ति एक सवर्ण ठेकेदार के नीचे मनरेगा का पाँच सौ ले लेगा, लेकिन गाँव में गेहूँ की फसल काटने में उसे अपना जातीय अभिमान दिखने लगता है।
भाजपा के सारे मुख्यमंत्रियों को ऐसी योजना का पुनरावलोकन करते हुए, चिह्नित तरीके से, क्रियान्वयन करना चाहिए। वही मार्ग है, जो निर्धनों को सशक्त भी करेगा और करदाताओं को मानसिक शांति देगा कि उसके कर के पैसों को राजनैतिक दुरुपयोग के स्थान पर सामाजिक सदुपयोग में लगाया जा रहा है।
शीशमहल की नैतिकता
भाजपा दिल्ली के समक्ष दूसरी नैतिक समस्या है ‘शीशमहल’ की। यह आवास इतनी वैभवी अश्लीलता समेटे हुए है कि पूरी चुनावी कैम्पेन का आधारबिन्दु इसे भ्रष्टाचरण का प्रतिमान बनाने पर केन्द्रित था। और वह सत्य भी है। अब इसमें भाजपा का मुख्यमंत्री रहने लग जाए, तो इससे बड़ा पाप क्या होगा!
सर्वप्रथम तो इसका ऑडिट होना चाहिए और जनता के समक्ष सारे तथ्य बाहर लाए जाने चाहिए। हर एक नल से ले कर झूमर तक, कहाँ कितना लगा, किसने लगाया, क्यों लगाया के उत्तर के साथ इसे संग्रहालय में परिवर्तित कर देना चाहिए।
दिल्ली में और जितने भी घोटाले हुए हैं, उन्हें शीशमहल के 98 इंच वाले टेलिविजनों पर ऑडियो-विजुअल माध्यम से लूप पर चलाते रहना चाहिए। आप शीशमहल को ऐसे दिखाओ कि ‘आम आदमी की लम्बी शर्ट’ और रेनॉल्ड्स की कलम के आडम्बर के पीछे का सत्य कितना भयावह है।
यदि केजरीवाल का वैगनआर न मिले तो रैंडम वैगनआर खरीद कर, प्रतीकात्मक रूप से, उसे प्रवेशद्वार के पास लगा दें। वहीं केजरीवाल का कटआउट हो, जहाँ उसकी पुरानी स्पीच लूप पर चलती रहे कि घर क्यों लेना, कार क्यों लेना, दिल्ली का VIP यहाँ का आम आदमी है।
उस अश्लील आवास में किसी का भी रहना जनता के मुँह पर थूकने जैसा है, और यह स्वीकारना है कि ‘भाई घर तो केजरीवाल ने मजेदार बना रखा है यार!’ आप यदि इसे केवल एक फ़िज़ूलख़र्ची का नमूना बता कर आगे बढ़ जाते तो संभवतः रह लेते, पर इसे भ्रष्टाचार का प्रतिमान बता कर उसी में रहना, मेरी समझ से यह प्रश्न नैतिकता का हो जाता है।
इसे ‘म्यूजियम ऑफ करप्शन’ या ‘भ्रष्टाचार का संग्रहालय’ बना कर, केजरीवाल के चरित्र को दोगलापन प्रदर्शित करना चाहिए। यह दिल्ली की जनता के लिए भी लज्जा का विषय होना चाहिए कि दो बार 67 और 62 सीटें दे कर आपने ही उसे इस योग्य बनाया कि वो स्वयं को भरी विधानसभा में ‘दिल्ली के मालिक’ हैं हम कह कर हँस देता है।
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@narendramodi@p_sahibsingh