
एक बार जंगल में आग लगी, तो बड़े-बड़े जानवर दूर खड़े होकर सिर्फ तमाशा देख रहे थे। कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था। उसी समय एक छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरकर लाती और आग पर डाल देती। पास बैठे कौवे ने हँसते हुए पूछा - “तुम्हारी इस छोटी सी कोशिश से क्या फर्क पड़ेगा?” चिड़िया ने बहुत शांत होकर जवाब दिया - “फर्क पड़े या न पड़े, लेकिन जब भी कभी जंगल की इस आग की चर्चा होगी, तो मेरा नाम आग बुझाने वालों में लिया जाएगा, न कि दूर बैठकर तमाशा देखने वालों में।” आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट की लाखों की आबादी रोज़ ट्रैफिक, जाम, असुरक्षा और खराब कनेक्टिविटी की “आग” में झुलस रही है। अब सवाल ये है - क्या हम भी किनारे खड़े होकर सिर्फ शिकायत करते रहेंगे? या उस छोटी चिड़िया की तरह आगे बढ़कर अपने हक के लिए आवाज़ उठाएंगे? मेट्रो कनेक्टिविटी कोई सुविधा नहीं, हमारी बुनियादी ज़रूरत है। और इसे पाने के लिए हर एक आवाज़ मायने रखती है। आइए, एकजुट हों, आवाज़ बुलंद करें - क्योंकि बदलाव तभी आता है जब “छोटी-छोटी कोशिशें” मिलकर एक बड़ा आंदोलन बन जाती हैं। इतिहास तमाशा देखने वालों को नहीं, बदलाव लाने वालों को याद रखता है। @Shwetabharti22














































