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Shailendra Dubey- CHAIRMAN ALL INDIA POWER ENGINEERS FEDERATION

Katılım Eylül 2012
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा। बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है। ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा @myogiadityanath @UPPCLLKO
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रा०वि०प०प्राविधिक कर्मचारी संघ - पूर्वांचल
@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में“दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है @myogioffice @aksharmaBharat @ANI @RVPPKSUP
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
बिजली के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के विरोध में आज राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन पर हुआ जोरदार विरोध प्रदर्शन। व्यापक जनहित में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल व प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लिया जाये।
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंता संघ ने मनाया अभियंता एकात्म दिवस : प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने नेताजी की जन्म जयंती पर अर्पित किए श्रद्धा सुमन : ऊर्जा निगमों को आत्मनिर्भर बनाने एवं बेहतर प्रबंधन हेतु सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण किया जाये :प्रबन्धन स्तर पर विशेषज्ञ विद्युत अभियंताओं को तैनात किये जाने की मांग : आन्दोलन के दौरान की गयी समस्त कार्यवाहियों को अतिशीघ्र समाप्त किये जाने की मांग : उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ द्वारा आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 130 वीं जयंती एवं विद्युत अभियंताओं के 1973 के ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति में ‘अभियन्ता एकात्म दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर लखनऊ में नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वर्ष 1973 के ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने ऊर्जा निगमों में प्रबन्धन स्तर पर विशेषज्ञ विद्युत अभियन्ताओं की तैनाती किये जाने तथा सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण किये जाने की मांग की। उन्होंने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की। साथ ही निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त किये जाने की मांग की। शैलेंद्र दुबे ने सभा को सम्बोधित करते हुए बताया कि 53 वर्ष पूर्व 1973 में अभियन्ताओं के संघर्ष के परिणामस्वरूप आज ही के दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा में यह घोषणा की थी कि विद्युत परिषद का चेयरमैन एक बिजली इंजीनियर होगा। व्यवस्था में इस रचनात्मक परिवर्तन के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद देश में अग्रणी संस्था बनी और एक बिजली इंजीनियर के चेयरमैन रहते हुए उत्तर प्रदेश के विद्युत अभियंताओं की धाक देशभर में मानी जाती थी। यूपीएसईबी के चेयरमैन और प्रमुख सचिव ऊर्जा के पद पर 1973 में अभियन्ताओं की तैनाती के बाद सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष को भी प्रमुख सचिव सिंचाई का दायित्व दिया गया था। परिणामस्वरूप 70 का दशक अभियन्त्रण सेवाओं का स्वर्णिम काल साबित हुआ। उत्तर प्रदेश देश मे सबसे पहले 100 मेगावाट,200 मेगावाट की उत्पादन इकाइयां तथा 400 केवी एवं 765 केवी पारेषण लाइनों , उपकेन्दों एवं छिबरो में भूगर्भ जल विद्युत गृह निर्माण करने वाला प्रान्त बना। अभियन्त्रण और विकास में उत्तर प्रदेश पूरे देश का अग्रणी प्रान्त बन गया था। एन टी पी सी, एन एच पी सी, पॉवर ग्रिड कारपोरेशन की स्थापना में उप्र के बिजली इंजीनियरों की प्रमुख भूमिका रही है। केन्द्र सरकार के सभी अभियन्त्रण निगमों में प्रबंधन आज भी अभियन्ताओं के पास है। इसी के चलते ये उपक्रम सफलतापूर्वक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि विशेषज्ञ सेवाओं को पुनः स्थापित किया जाए और उत्तर प्रदेश में बिजली निगमों का प्रबंधन योग्य विशेषज्ञ विद्युत अभियंताओं को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सपनों का भारत निर्माण करने में हम अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन कर सके, नेताजी के प्रति यही हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने अपनी एकता बनाये रखने, आत्मनिर्भर ऊर्जा निगम बनाने, विद्युत व्यवस्था में सुधार व बेहतर उपभोक्ता सेवा प्रदान करने के लिए सभी तकनीकी विकल्पों पर विचार कर अमल किये जाने का सुझाव दिया। केन्द्रीय पदाधिकारियों समेत अन्य सदस्यों ने नेता जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके जीवन, उनके आदर्शों एवं संघर्ष करने के विचार साझा किए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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आज राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई संपन्न। बैठक में निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया गया। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए तथा लोकतांत्रिक तरीके से किए गए आंदोलन के दौरान की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त किया जाए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय - निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा। निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे। 01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे। 01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। 08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे । 08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे। 21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @mlkhattar @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है। डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए जारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता है कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है। संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की निजी घरानों के साथ मिली भगत है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है । डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर हैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पावर उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है। संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी। संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र में बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। आज मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके। संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं। बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पावर कारपोरेशन के IAS प्रबंधन ने जनता से बिजली के बिल के रूप में वसूला गया एक करोड़ 30 लाख 80 हजार सरकारी राजस्व को एक निजी संस्था को चंदे में दे दिया है वह निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन है जिसके महासचिव कोई और नहीं बल्कि स्वयं पावर कारपोरेशन के चेयरमैन है, यह पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा मामला है। दोषियों पर कठोरता से कार्रवाई होनी चाहिए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली की माँग 30251 मेगावॉट पहुंचने के बाद निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाये रखने की बिजली कर्मियों से अपील : निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं को कोई कठिनाई न होने पाये: निजीकरण के विरोध में अगले सप्ताह से केन्द्रीय पदाधिकारियों के प्रांतव्यापी दौरे विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली कर्मियों से अपील की है कि निजीकरण के विरोध में चलाये जा रहे आंदोलन के दौरान बढ़ी हुई बिजली की मांग को देखते हुए बिजली उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 266 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जनसंपर्क कर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 19 अगस्त को रात 10.21 बजे 30251 मेगावॉट बिजली की माँग पहुंच गई जिसके आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है। जून में 31486 मेगावॉट की अब तक की सबसे अधिक मांग रही है। अगस्त सितम्बर में बिजली की मांग इससे भी अधिक रहने की सम्भावना है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में चल रहे संघर्ष में उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं । यह अपने आप में एक कीर्तिमान है कि विगत 266 दिन के आन्दोलन में बिजली कर्मियों ने आन्दोलनरत रहते हुये भी महाकुम्भ में बिजली की अद्वितीय व्यवस्था बनाये रखी और मई जून की भीषण गर्मी में अधिकतम बिजली आपूर्ति के कीर्तिमान बनाये। संघर्ष समिति का बिजली कर्मियों को निर्देश है कि आंदोलन के कारण किसी भी उपभोक्ता को कठिनाई नहीं होनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा है कि जहां बिजली कर्मी आंदोलन के साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं का भी समाधान कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन बिजली कर्मियों का दमन कर कार्य का वातावरण लगातार बिगाड़ रहा है। हजारों बिजली कर्मियों का जून, जुलाई माह का वेतन काम करने के बावजूद नहीं दिया गया है जो सबसे अधिक निन्दनीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि चाहे जितना दमन किया जाए बिजली कर्मियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण वापस नहीं होता और उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियां निरस्त नहीं की जाती। संघर्ष समिति का निर्णय है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर होने पर सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर देंगे और शुरू होगा सामूहिक जेल पर हुआ आंदोलन। आज राजधानी लखनऊ में संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों की बैठक में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई गई। अधिकतम अभियंताओं तक जनसंपर्क तेज करने की दृष्टि से अभियन्ता संघ ने आज से परियोजना वार ऑनलाइन मीटिंग करना प्रारम्भ किया है। आज हरदुआगंज और पारीछा ताप बिजली घरों के अभियंताओं की ऑनलाइन मीटिंग हुई। अगले सप्ताह से संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के प्रांतव्यापी दौर प्रारंभ होंगे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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