AMIT SRIVASTAVA

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@AMITSRI26845825

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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद। मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
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AMIT SRIVASTAVA
AMIT SRIVASTAVA@AMITSRI26845825·
@nagarnigamknp Gujaini g block me kuda uthane koi nahi a raha 5 din se house number 447 mobile number 8115205161 plz samsya ka samdhan kare
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Kanpur Nagar Nigam
Kanpur Nagar Nigam@nagarnigamknp·
Dear citizens, We request you to lodge your complaints through our grievance redressal platforms eg. Kanpur smart city app, toll free number(18001805159) or control room numbers 2526004, 2526005.
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा। माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट* मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए। निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई। संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया। संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है। आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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AMIT SRIVASTAVA
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@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt निजीकरण तत्काल रोकने के लिए विचार करें जिससे कि कर्मचारियों का भविष्य एवं विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलती रहे यदि निजीकरण का प्रयास हुआ तो बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहे
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है। आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है। संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है। संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है । संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं। निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें। संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी। पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है। बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।" संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था। संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।" #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण के दस्तावेज को अनुमोदित कराने हेतु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन पर गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी का आरोप : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने हेतु पावर कार्पोरेशन प्रबंधन गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी कर रहा है और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 304 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदो पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने के लिए नियामक आयोग से लेकर शासन के उच्च स्तर तक दौड़ लगा रहे हैं। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष मुख्य सचिव के पास जाकर गलत आंकड़ों के आधार पर घाटा दिखाकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पैरवी कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से अपील की है कि वह निजी घरानों से मिली भगत में बनाए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को किसी भी प्रकार मंजूरी न दें। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को भी पत्र भेजकर मांग की है कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई भी मंजूरी देने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का पक्ष विद्युत नियामक आयोग को सुनना चाहिए क्योंकि निजीकरण से बिजली उपभोक्ताओं के साथ सबसे अधिक प्रभाव बिजली कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ने वाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और उन्होंने सरकारी विभागों के बकाया और सब्सिडी की धनराशि को घाटे में जोड़कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के घाटे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त दोनों विद्युत वितरण निगमों की एक ए टी एंड सी हानियां बढ़ा चढ़ा कर दिखाइ गई हैं। यह पता चला है कि ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों की बिजली खपत कम करके आंकी जा रही है। उल्लेखनीय है कि निजी नलकूपों को उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार मुफ्त बिजली मिलती है। ए टी एंड सी हानियों को बढ़ा कर दिखाने से गत वर्ष की तुलना में विद्युत वितरण निगमों की अधिक हानि दिखाई गई है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार इस बात का प्रचार करती रही है कि 2017 में 41% ए टी और सी हानियों को वर्तमान सरकार ने घटाकर 16% के नीचे कर दिया है। अब निजीकरण के लिए इसके विपरीत ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर बताया जा रहा है जिससे चुनिंदा निजी घरानों को लाभ दिया जा सके । संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि आगरा और कानपुर के निजीकरण के समय भी आगरा और कानपुर शहर की ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाया गया था। आगरा के विषय में कैग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है और निजी कम्पनी को बेजा लाभ देने का आरोप लगाया गया है । इसके बावजूद आगरा का फ्रेंचाइजी करार रद्द करने के लिए पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरिएट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार की जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आज यहां सार्वजनिक किया। संघर्ष समिति ने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों। संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी। उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल बंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे। संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्रस्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से इस संबंध में डाटा मांगा है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में पहली बार हो रही है। संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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AMIT SRIVASTAVA
AMIT SRIVASTAVA@AMITSRI26845825·
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt निजीकरण व्यवस्था सत्यकाल समाप्त की जाए या किसी के हित में नहीं है इससे जनता महंगाई की मार जलेगी और महंगी बिजली गरीब लोगों को मिलेगी
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मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये। मेरठ में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा। अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार के दृष्टिगत बिजली के निजीकरण निरस्त करने की मांग:बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज यहां कहा कि कल दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए अप्रत्याशित सुधार की चर्चा की गई । मीटिंग में बिजली की तकनीकी और वाणिज्यिक हानि में निरंतर कमी की सराहना की गयी है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा अरविन्द कुमार शर्मा जी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं की गई है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए एटीएंडसी हानियों में काफी गुणात्मक कमी हुई है और प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण का प्रयोग विफल हो गया है तथा निजीकरण में हुए घोटाले व देश में अन्य जगहों पर निजीकरण के विफल प्रयोग को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की दलील दे रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंधन घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए,जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है । संघर्ष समिति ने कहा कि ए टी एंड डी हानियां के गलत आंकड़ों के कारण से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा जिससे विगत 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 293 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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'अभियन्ता दिवस' पर बिजली कर्मी और अभियन्ता मुख्यमंत्री जी से ऊर्जा निगमों में अभियन्ता प्रबन्धन और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की अपील करेंगे : शिक्षक दिवस की तरह बिजली कर्मियों को भी अभियन्ता दिवस पर तोहफे की उम्मीद* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश 15 सितम्बर को अभियन्ता दिवस' के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करती है कि वे उप्र राज्य विद्युत परिषद की तरह प्रदेश के ऊर्जा निगमों में विशेषज्ञ बिजली इंजीनियरों को शीर्ष प्रबंधन के पदों पर तैनात करने की घोषणा कर विद्युत परिषद के समय के स्वर्णिम काल को वापस करें। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि बिजली कर्मी और अभियंता मुख्यमंत्री जी से उम्मीद करते हैं कि वे अभियन्ता दिवस के अवसर पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने का तोहफा बिजली कर्मियों को देंगे जिससे बिजली कर्मी उनके अत्यन्त कुशल नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार कर 2047 में समर्थ उत्तर प्रदेश - विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार करने में पूरी एकाग्रता से जुट जाएं। उल्लेखनीय है कि 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री जी ने शिक्षकों को कैशलैस इलाज का तोहफा देकर सुखद आश्चर्य दिया था। इसी क्रम में बिजली कर्मी और अभियन्ता सरकारी क्षेत्र में बने रहने के तोहफे की उम्मीद लगाए हुए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी किसी भी चुनौती के समय सदा ही कसौटी पर खरे उतरे हैं। चाहे महाकुंभ में निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात हो या भीषण गर्मी में देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का नया कीर्तिमान बनाने की बात। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी क्षेत्र की नौकरी ज्वाइन की थी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के सरकारी क्षेत्र में बने रहते हुए उन्हें सेवा पूरी करने का अवसर मिले यही आकांक्षा है। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण के पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है। संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है । संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार मध्यांचल में,लेसा और केस्को में और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों मत समाप्त किये जा रहे हैं उससे बिजली कर्मियों की यह आशंका और बलवती हो गई है की संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण किया जा जाने वाला है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम तो शुरुआत मात्र है। इससे बिजली कर्मियों का गुस्सा और बढ़ गया है। निजीकरण हेतु किये जा रहे उत्पीड़न और पदों को समाप्त करने की कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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AMIT SRIVASTAVA
AMIT SRIVASTAVA@AMITSRI26845825·
सर नमस्कार मैं अमित श्रीवास्तव जी ब्लॉक गुजैनी कानपुर नगर मकान संख्या 447 का निवासी हूं मेरे घर के सामने एक 25 फीट आरसीसी रोड है जो की ठेकेदार द्वारा मिलकर जबरदस्ती तोड़कर कुछ अराजक तत्व द्वारा नाली बनाने का प्रयास किया जा रहा है जो कि नक्शे में भी नहीं है#AkSharmaforUP
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कॉर्पोरेट घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने निजीकरण पर उठाए पांच सवाल ऊर्जा निगमों के निजीकरण के मामले में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी। इसे देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रारंभिक तौर पर ही निजीकरण के सारे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। समिति ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे बड़ी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया से भी इस बाबत विचार विमर्श किया। विस्तृत विचार विमर्श के बाद ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के मामले में बहुत बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार होने जा रहा है। संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की मीटिंग है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि यही तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई है। निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया। दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए। तीसरी बात बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना जा रहा है जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी कीआपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है। चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने हाल ही में तीसरी बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल पूर्व निर्धारित निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी के आधार पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी। संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने कहा कि यह सब बहुत ही गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश में बिजली की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को लूट से बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को तत्काल हस्तक्षेप कर सारी प्रक्रिया रोकनी चाहिए और चल रहे घोटाले की उच्च स्तरीय सीबीआई कराई जानी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, व्हीसल ब्लोअर, सरकारी कर्मचारी, राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन सब मिलकर निजीकरण के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते रहेंगे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat
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उड़ीसा में निजी कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने हेतु स्वतः संज्ञान लेकर विद्युत नियामक आयोग ने सुनवाई की तारीख तय की : उड़ीसा के निजीकरण के विनाशकारी परिणाम को देखते हुए उप्र में बिजली के निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग: निजीकरण के विरोध मे सितम्बर माह में किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के सम्मेलन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उड़ीसा में हुए बिजली वितरण के निजीकरण के प्रयोग के विनाशकारी परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि निजीकरण के विरोध में सितंबर माह में किसानों, गरीब व मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों के सम्मेलन प्रदेश भर में किए जाएंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए 10 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय की है। पहले यह तारीख 28 अगस्त को तय की गई थी लेकिन 29 अगस्त को उड़ीसा में स्थानीय अवकाश होने के कारण इसे 10 अक्टूबर को पुनर्धारित कर दिया गया है। संघर्ष समिति ने बताया कि उड़ीसा के सभी उपभोक्ता फोरमों की ओर से श्री किशोर पटनायक ने 16 अगस्त को टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों के विरुद्ध उपभोक्ता सेवा में पूरी तरह अक्षम रहने और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने के आरोप लगाते हुए इन कंपनियों का विद्युत वितरण का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी। उपभोक्ता फोरमों ने उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग रेगुलेशन 2004 की धारा 9(1) और (4) के अंतर्गत उपभोक्ता सेवाओं में पूरी तरह विफल रहने के आरोप लगाते हुए दाखिल की थी। उपभोक्ता फोरमों ने अपनी प्रेयर में कहा है कि विद्युत परिषद को विघटित करने का और उसके उपरांत विद्युत वितरण का निजीकरण करने का सबसे पहला प्रयोग उड़ीसा में हुआ। यह दोनों ही प्रयोग पूरी तरह विफल रहे हैं। निजीकरण के परिणाम विनाशकारी हैं और उपभोक्ता दर दर भटक रहे हैं। उपभोक्ता फोरमों का आरोप है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली की कटौती की जा रही है, बिना प्रॉपर नोटिस के विद्युत विच्छेदन किया जा रहा है, बेतहाशा बढ़े हुए गलत बिल भेजे जा रहे हैं और सबसे अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। उपभोक्ता फोरमों ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि उड़ीसा के पूर्व बिजली कर्मियों को टाटा पावर द्वितीय श्रेणी का नागरिक मानती है। उनको बिना काम के किनारे बैठा रखा गया है और उनका करियर बर्बाद हो रहा है। संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में सबसे पहले 1999 में निजीकरण किया गया था। निजीकरण के एक साल बाद ही अमेरिका की एईएस कंपनी वापस चली गई। रिलायंस पावर की बाकी तीनों कंपनी का लाइसेंस फरवरी 2015 में विद्युत नियामक आयोग ने पूरी तरह अक्षम रहने के कारण रद्द कर दिया था। 2020 में चारों कंपनियों का लाइसेंस टाटा पावर को दिया गया और अब विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब उपभोक्ता सेवा का स्वत: संज्ञान लेते हुए 15 जुलाई 2025 को टाटा पावर की चारों कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। टाटा पावर का लाइसेंस निरस्त करनी हेतू 10 अक्टूबर को सुनवाई हो रही है। संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में कृषि क्षेत्र उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत कम है। बिजली के क्षेत्र में घाटा मुख्यतः ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में होता है। निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा जैसे औद्योगिक ।प्रांत में विफल रहा है और निजीकरण के लाइसेंस निरस्त करने हेतु सुनवाई हो रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की गरीब जनता पर निजीकरण न थोपा जाय। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल* पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न केवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्युत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार सेवानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर आशीष गोयल को या तो अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा गया है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना इस प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करोड़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्हें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं । संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी खतरे में: निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष की तैयारी : सेवा करेंगे और हक भी लेंगे - संघर्ष समिति विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया तो लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है - सेवा करेंगे और हक भी लेंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उनसे यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता क्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि सरप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी। संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार दिल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45% बिजली कर्मी सेवानिवृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90% बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ? हाल ही में 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण किया गया। निजीकरण जिस दिन किया गया उसी दिन लगभग 40% बिजली कर्मी सेवा निवृत्ति लेकर घर चले। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों की यूनियन और सरकार के बीच 1 फरवरी की रात जो समझौता हुआ था आज तक उसे लिखकर नहीं दिया गया है। और निजी कंपनी यह कह रही है कि यह समझौता सरकार ने किया था हमें इससे कोई मतलब नहीं है। निजीकरण की यही भयावह कहानी अब उत्तर प्रदेश में दोहराई जा रही है जिसे बिजली कर्मी कदापि स्वीकार नहीं करेंगे। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण बिजली कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए अंधेरे का संदेश लेकर आ रहा है। बिजली कर्मियों ने कहा कि वे किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे और यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता। #stop_privatization_of_uppcl #stop_victimization_of_uppcl_employees @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण का टेण्डर होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का संघर्ष समिति ने जारी किया एलर्ट : निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए- विद्युत नियामक आयोग को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी जाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त श्री संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः श्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर देना चाहिए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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