Pushpendra Singh

323 posts

Pushpendra Singh banner
Pushpendra Singh

Pushpendra Singh

@AS_UPRVPAS

सहायक सचिव (पूर्वांचल), उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ

Gorakhpur Katılım Ekim 2024
89 Takip Edilen51 Takipçiler
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा। बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
हिन्दी
11
62
80
1.3K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंता संघ में 12 अप्रैल को लखनऊ में बुलाई केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक :मार्च 2023 के आंदोलन व निजीकरण के विरोध में जारी आंदोलन के फलस्वरुप की समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में होगा निर्णायक संघर्ष का ऐलान: @myogiadityanath @aksharmaBharat @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
1
39
49
2.1K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा। माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
34
191
176
3.3K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए तथा उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियां को वापस लेने की कृपा करें। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
3
22
36
767
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में दिनांक 20 नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन प्रारंभ। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें। @UPPCLLKO @chairmanuppcl
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
7
107
104
1.9K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है। आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
42
201
206
3.6K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करें अन्यथा केन्द्र सरकार ग्रांट देना बंद कर देगी : ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : निजीकरण थोपने की हर कोशिश का होगा राष्ट्रव्यापी विरोध विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यह विदित हुआ है कि 16 सितम्बर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ऑफ पॉवर की मीटिंग में यह सहमति बनी है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन हेतु राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए और जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केन्द्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बन्द कर दी जाय। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से उद्वेलित सारे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जायेगा जिसका निर्णय आगामी 03 नवम्बर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जायेगा। संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की इसी मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के मसौदे को अन्तिम रूप दिया गया था जिसे 09 अक्टूबर को विद्युत मंत्रालय ने जारी कर दिया है। संघर्ष समिति निजीकरण हेतु लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का प्रबल विरोध करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाय। उन्होंने बताया कि मुम्बई में 04 एवं 05 नवम्बर को हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा "विद्युत वितरण निगमों के सस्टेनेबिलिटी के लिए पी पी पी मॉडल" है जिसका अर्थ निजीकरण ही है। संघर्ष समिति ने बताया कि सात राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण पर राज्यों को तीन विकल्प देने जा रही है, अन्यथा की स्थिति में केंद्र सरकार की ग्रांट बंद कर दी जाएगी। पहला विकल्प है - राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों की 51% हिस्सेदारी बेंच दे और पीपीपी मॉडल पर विद्युत वितरण कंपनियां चलाई जाए। दूसरा विकल्प है - विद्युत वितरण कंपनियों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी जाए और प्रबंधन बिजी कंपनी को सौंप दिया जाए। तीसरा विकल्प है - जो राज्य निजीकरण नहीं करना चाहते तो वह अपनी विद्युत वितरण कंपनियों को सेबी और स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कर लिस्टिंग कर दें। यह पता चला है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में यह सहमति हुई है कि जो राज्य यह तीनों विकल्प न दें उनका केंद्र से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए और आगे कोई आर्थिक मदद न की जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में कॉन्करेंट लिस्ट पर है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में चुनिंदा सात प्रांतों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) की राय लेकर निजीकरण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर कैसे थोपा जा सकता है ? संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति की कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड है उसे ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में किस हैसियत से और क्यों बुलाया जा रहा है ? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिया की भूमिका में आ गई है। उन्होंने बताया कि मुंबई में चार और पांच नवंबर को होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का एकमात्र एजेंडा भी यही है। अब स्पष्ट हो गया है कि इस डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी में 2025 में यही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग की राय है। ऐसा लगता है कि सारे देश में निजीकरण की मुहिम बहुत तेज गति से चलाई जानी है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह शर्तें निजीकरण हेतु राज्य सरकारों पर बेजा दबाव डालना है और एक प्रकार से ब्लैक मेल है जिसके विरोध में देशव्यापी आन्दोलन चलाया जाएगा। उप्र में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 324 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
53
181
164
4.7K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी। संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय । संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया। दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए। तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है। चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है। पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
73
288
237
3.4K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
अत्यंत दुखद सूचना- लेसा में दुबग्गा डिवीजन के अधिशासी अभियंता इं• विशाल वर्मा जो 2012 बैच के अभियंता थे अभी मात्र 38 साल के थे उनके असामयिक निधन हो गया है उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश के विद्युत अभियंताओं में भारी शोक व्याप्त हो गया है। इं• विशाल वर्मा जी अपने कार्यों के प्रति बहुत ही निष्ठावान, ईमानदार और मेहनती अभियंता थे तथा अभियंता संघ के बहुत ही समर्पित एवं सक्रिय सदस्य भी थे। इस प्रकार अचानक से उनका निधन हो जाना पूरे अभियंता समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है। अभियंता संघ द्वारा फील्ड हॉस्टल पर दिवंगत पुण्य आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक सभा की गई। ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें और इस दुख की घड़ी में शोक संतृप्त परिवार को साहस प्रदान करें।
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
40
45
110
4.1K
Pushpendra Singh
Pushpendra Singh@AS_UPRVPAS·
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
हिन्दी
0
3
4
264
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें। संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी। पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है। बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
87
290
248
3.6K
Pushpendra Singh retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में कल वाराणसी में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" के कार्यक्रम में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
5
66
78
1.3K
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का उल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक्टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।" संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था। संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुए समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।" #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
78
264
245
4.9K