Acharya Azad Singh

28.6K posts

Acharya Azad Singh

Acharya Azad Singh

@AzadSin17497289

Read good books Reader of Good Books

Katılım Haziran 2020
211 Takip Edilen302 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
Acharya Azad Singh
Acharya Azad Singh@AzadSin17497289·
धर्म व्यवसाय ही है और इसमें गलत भी कुछ नहीं है,जो गलत है वह यह है कि इस व्यवसाय या व्यापार में केवल एक ही जाति का प्रवेश है एवं वहां उस जाति का 99% से ज्यादा आरक्षण है। मैं धर्म का सम्मान करता हूँ और बस यह चाहता हूँ कि वहा पुजारी और ट्रस्ट में आनुपातिक प्रतिनिधित्व हो।
हिन्दी
2
3
12
2.5K
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
अशोक गहलोत जी टीम द्वारा प्रायोजित PR के लिए बुलाए गए इन्फ्लूएसर बाबा बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाते हुए मैंने 2025 शुरू में ही बता दिया था कि जिस लाइन में गहलोत जी को लेकर जा रही है, ये PR टीम उन्हें बर्बाद बदनाम कर के रख देगी।
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali@Khalbaali

एक चीज आप ने गौर की है? जो अशोक गहलोत जी मुख्यमंत्री रहते हुए तो कांग्रेस पार्टी के विधायकों और मंत्रियों से भी नहीं मिलते हैं, जैसे ही मुख्यमंत्री पद जाता है उन्हें गरीब याद आ जाते हैं, फिर PR के लिए इस प्रकार की स्क्रिप्टेड रीलें बनती है और इस बार तो उनका PR इतना घटिया तरीके से कराया जा रहा है कि बच्चा भी बोल सकता है ये पुरी तरह से स्क्रिप्टेड है। अशोक गहलोत जैसे व्यक्ति को अगर अपने आपको गरीबों का गणेश और राजनीति में रिलेवेंट दिखने के लिए इस प्रकार के प्रायोजित चीजें करनी पड़े तो आप समझ सकते हैं कि वर्तमान राजनीति में उनकी पकड़ कहां तक है और उनकी जादूगरी कांग्रेस आलाकमान के आशीर्वाद के बिना कितनी गहरी है? मैंने हमेशा से कहा है और फिर कह रहा हूं कि ये आदमी जादूगर से ज्यादा एक कठपुतली की तरह इस्तेमाल किए गए नेता हैं। आप आजादी से पहले राजस्थान का इतिहास, सामाजिक वर्चस्व और आजादी के बाद में 2018 तक भाजपा की स्थिति समझेंगे तो हर चीज आपको समझ आएगी कि जिस वर्ग ने कांग्रेस में कठपुतली के तौर पर इन्हें क्यों चुना गया था और आज उन्हीं लोगों द्वारा राजनीति से ही क्यों साइडलाइन किया जा रहा है जिसमें " चौथी बार गहलोत सरकार, नहीं तो भाजपा सरकार" के नारे खुद गहलोत जी साइड से लगवाए जा रहे हैं। उस वर्ग ने अब अशोक गहलोत को कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर के छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें बीजेपी में अपनी चीजें सुदृढ़ सुसज्जित मिल गई है, ऊपर से कांग्रेस आलाकमान का आशीर्वाद खुद गहलोत जी ठुकरा चुके हैं, तो इनकी जादूगरी ( जो कभी थी नहीं) अब सिर्फ रील में दिख रही है जो खुद अपने आप में अशोक गहलोत को फिर से delusion में रखकर किया जा रहा एक स्वांग है, ठीक वैसे ही जैसे 2020-2023 के बीच किया गया था जिसकी वजह से कांग्रेस की सरकार रिपीट नहीं हो पाई थी, लोग भी वही है, चाल भी वही है। अब गहलोत जी के हाथ में है कि वो खुद की राजनीति के साथ बेटे की राजनीति खत्म करवाते हुए कांग्रेस को हरवाने के लिए इस्तेमाल होते हैं या अपने आप को मजबूत करते हुए, कांग्रेस की मजबूती के लिए प्रयास कर के वैभव गहलोत के साथ राजस्थान कांग्रेस के लिए भी एक शानदार राजनीतिक विरासत, मजबूत सामाजिक गठजोड़ छोड़ कर जाते है, खुद की जादूगरी, खुद के वर्चस्व के दम पर चौथी बार गहलोत सरकार बना पाते हैं।

हिन्दी
1
4
20
1.7K
Acharya Azad Singh retweetledi
Priyanka Deshmukh
Priyanka Deshmukh@anarkaliofara·
विपक्ष को तमिलनाडु का चुनाव प्रियंका भारती ने हरवा दिया! विपक्ष को बंगाल का चुनाव कंचना यादव ने हरवा दिया! विपक्ष को असम का चुनाव प्रियंका देशमुख ने हरवा दिया! लेफ्ट को केरल का चुनाव प्रतिक पटेल ने हरवा दिया! विपक्ष को पुड्डुचेरी का चुनाव प्रियांशु कुशवाहा ने हरवा दिया! और कोई OBC रह तो नहीं गया blame करने के लिए? बिहार के चुनाव का जिस दिन रिजल्ट आया था उस दिन हार पर हमको उतना गुस्सा नहीं आया था क्यूंकि वहां तो धांधली साफ़ दिख रहा था! लेकिन कुछ आस्तीन के सांप सामंति ब्राह्मणवादियों के हरमजदगी देख ज़रूर बहुत कुछ समझ आया था। ये लोग गिद्ध की तरह हम सभी को नोचने के लिए कूद पड़े थें! आज चुप काहे हो? बको न अब!!
Priyanka Deshmukh tweet media
हिन्दी
22
40
181
15.9K
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
मैं पुनः अपनी बात दोहरा रहा हूँ कि ग्रामीण भारत की समस्याओं को स्वर देने के लिए जिस #स्वतंत्र_पत्रकारिता की नींव बड़ी निष्ठा से रखी गई थी, उसे राहुल गांधी विरोधी और वैचारिक रूप से बिके हुए कुछ पत्रकार #गोदी_मीडिया की दुर्गति तक पहुँचा कर ही दम लेंगे। इस पतन के लिए वे निष्पक्ष पत्रकार भी समान रूप से उत्तरदायी हैं, जो अपनी आँखों के सामने स्वतंत्र पत्रकारिता के इस क्षरण को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं। पश्चिम बंगाल की प्रचण्ड सत्ता विरोधी लहर समझने एवं भाजपा की मशीनरी के दुरुपयोग को छुपाने के लिए दोष राहुल गांधी - कांग्रेस के माथे मढ़ने की कुत्सित चेष्टा की जा रही है। यदि आप उन 15 सीटों के बजाय 50 सीटें भी कम कर लें, तब भी ममता बनर्जी अपनी सरकार नहीं बचा सकती थीं। वास्तविकता यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने 208 सीटों पर विजय प्राप्त की है, न कि 148 पर, जहाँ कांग्रेस द्वारा मतों के विभाजन से टीएमसी की पराजय हुई हो। यह सीधे तौर पर भाजपा की मशीनरी के साथ TMC विरोधी जनभावनाओं का जनादेश है। किंतु अशोक गहलोत के संरक्षण में पनप रहे इन पत्रकारों का 'बौद्धिक छिछोरापन' और घृणा इस स्तर की है कि वे लगातार राहुल गांधी को नीचा दिखाने के प्रयास में अब बीजेपी की वोट चोरी - SIR एवं बंगाल की पूरी जनभावना को ही नकार रहे हैं। यदि इन तथाकथित विश्लेषकों से उन 15 सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम या वहाँ के सामाजिक समीकरणों और मतों के स्थानांतरण (Vote Transfer) पर प्रश्न पूछ लिया जाए, तो ये एक भी सीट का तार्किक विवरण नहीं दे पाएंगे। राजस्थान में कांग्रेस 'संगठन सृजन अभियान' की आड़ में राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन को दुर्बल सिद्ध करने हेतु गहलोत द्वारा पालित यह 'पत्रकार समूह' राजस्थान की स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए उन बाड़मेर के कॉपी पेस्ट पत्रकारों से भी कहीं अधिक आत्मघाती सिद्ध होगा। आने वाले समय में जनता इन छद्म पत्रकारों के विश्लेषणों पर उसी प्रकार संशय करेगी, जैसा आज गोदी मीडिया के सूचना तंत्र पर किया जाता है। इनकी विश्वसनीयता का अंत निकट है। @ashokgehlot51 @8PMnoCM @SachinPilot @JitendraSAlwar @drcpjoshi @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @Barmer_Harish @HC_meenaMP
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet media
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan

जंगीपाड़ा, भवानीपुर, रैना, सतगछिया, खड़ग्राम, नवग्राम, कांडी, जंगीपुर, बेलडांगा सहित लगभग 15 सीटें तो ऐसी हैं, जहाँ तृणमूल जितने वोटों से हारी है, उससे थोड़ा ही अधिक वोट राहुल गांधी के उम्मीदवार लेकर गए हैं।

हिन्दी
3
19
66
4.1K
Acharya Azad Singh retweetledi
मनीष यादव रायबरेली
अखिलेश यादव भैंस चराए जा के यहां आने की जरूरत नहीं है वो यादव है तो भैंस चराए जाके.. यादवों की 12 बजे बुद्धि खुलती है अखिलेश यादव से बात देना कि और भैंस खरीद ले जाके दूध बेचे केवल.. बताओ ये भाजपाई महिला किस जाति से हो सकती हैं जो अखिलेश यादव जी को यादव होने के नाते भैंस चराने को बोल रही है।
हिन्दी
71
114
426
28.4K
Acharya Azad Singh retweetledi
Dr. Laxman Yadav
Dr. Laxman Yadav@DrLaxman_Yadav·
भारतीय जनता पार्टी के शासन में ओडिशा ‘जंगलराज’ की भयावह तस्वीर बन चुका है। दिनदहाड़े गुंडे कानून को कुचल रहे हैं - लूट, मारपीट और अब लोगों पर गाड़ियाँ चढ़ाकर “सज़ा” देने का खौफनाक मंजर। यह सिर्फ अपराध नहीं, राज्य की नाकामी का खुला सबूत है। जब सत्ता संरक्षण दे या आँख मूँद ले, तो अपराधी ऐसे ही दरिंदे बनते हैं। सवाल साफ है - सरकार किसके साथ खड़ी है? पीड़ितों के या अपराधियों के? यह सिर्फ शर्म नहीं, लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
हिन्दी
12
162
349
2.6K
Acharya Azad Singh retweetledi
Dr Anil 'JaiHind' 🇮🇳
न कुर्मी, न अहीर, न मुसलमान, न जाटव! मोगेम्बो तो कोई और है।
Dr Anil 'JaiHind' 🇮🇳 tweet media
हिन्दी
8
107
232
2.9K
Acharya Azad Singh
Acharya Azad Singh@AzadSin17497289·
@qunisk96 जाति को बदनाम मत कीजिए। यह मेरी जाति का ही है लेकिन कितने ही यादवों ने इसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शायद ही कोई यादव होगा इसके समर्थन में होगा।
हिन्दी
2
0
2
104
Qunisk
Qunisk@qunisk96·
SC ST ACT का नाम सुनते ही ‘बाबूलाल यादव’ का माफीनामा आ गया क्योंकि ग्वाला भी जानता है कि 33 करोड़ मिलकर भी नहीं बचा पाएंगे। 🔥यह खौफ बना रहना चाहिए🔥 ।। जय भीम ।।
Qunisk@qunisk96

सीकर, राजस्थान यज्ञ में दलित समाज के व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। ~ वैदिक पंडित @SikarPolice इस जातिवादी कीड़े को sc-st act में अरेस्ट करें हालांकि दलितों के इस तरह के फिजूल कार्यक्रमों में जाने पर कानूनी रोक भी लगनी चाहिए।

हिन्दी
30
90
251
6.8K
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
मध्यप्रेश में आए दिन किसी दलित - आदिवासी की पिटाई करने से लेकर ऊपर मूतने तक की खबरें, फोटो या वीडियो आते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट को इस राज्य में बढ़ते ऐसे केसों पर स्वतः संज्ञान नहीं लेना चाहिए?
हिन्दी
3
8
28
443
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
वैदपुरा (नोएडा) की रियासत के स्वघोषित राजकुमार सचिन पायलट के इर्द-गिर्द भीड़ को हटाते ये युवा कोई भीड़ मैनेज करने के लिए किराए पर लाए बाउंसर नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कसौटी पर खरे उतरे लाडनूं के दो बार के विधायक, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष और राजस्थान NSUI के पूर्व अध्यक्ष मुकेश भाकर हैं। लाडनूं के सर्वसमाज—विशेषकर कांग्रेस के दलित, मुस्लिम और जाट वर्ग—ने एकतरफा उन्हें अपना विश्वास देकर सदन में भेजा है। जब एक लोकतांत्रिक प्रतिनिधि को सार्वजनिक रूप से या सोशल मीडिया रील बनाने के लिए 'राजकुमार' के चरणों में झुकने को विवश किया जाता है, तो यह केवल मुकेश भाकर का नहीं, बल्कि लाडनूं की उस जनता का अपमान है जिसने उन्हें अपना सिरमौर बनाया है। मुकेश भाकर के साथ आज केवल एक राजनीतिक पद नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से जाट और मीणा समाज का वह सामाजिक गौरव और पुत्रवत स्नेह जुड़ा है, जिसे वैदपुरा (नोएडा) के राजकुमार के PA द्वारा बंद कमरों में राजनीतिक धमकियों या सार्वजनिक रैली में गला पकड़कर धक्के देने जैसी सामंती हरकतों से नहीं झुकाया जा सकता। सचिन पायलट को यह समझना होगा कि राजनीति जनसेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वैभव के प्रदर्शन का नहीं। यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था के विधायकों और सामाजिक प्रतिष्ठा वाले जननेताओं एवं युवाओं को 'चरणवंदना' के लिए विवश करने की यह परिपाटी जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस समर्थक स्वाभिमानी किसान, दलित, मुस्लिम और आदिवासी वर्ग टोंक की गलियों में इसका हिसाब मांगेगा। अगर स्वाभिमान के स्थान पर केवल 'राजकुमार' की छवि को ही प्राथमिकता दी गई, तो आगामी समय में जनता ऐसे नेतृत्व को नकार कर उन्हें उनकी वास्तविक रियासत—वैदपुरा के सुरक्षित कमरों तक ही सीमित कर देगी। लोकतंत्र में जनता का प्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होता है, किसी 'रियासत' के प्रति नहीं। @Khalbaali @RahulGandhi @kharge @kcvenugopalmp @SachinPilot @MukeshBhakar_ @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @INCIndia @INCRajasthan
हिन्दी
45
22
97
10.1K
Acharya Azad Singh retweetledi
Science Journey
Science Journey@ScienceJourney2·
ऋषि "भारद्वाज" का जन्म कैसे हुआ @grok महाभारत में डिटेल्स में बताना।
Science Journey tweet media
हिन्दी
33
84
376
23K
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
राजस्थान में कांग्रेस सरकार कभी रिपीट क्यों नहीं होती का जवाब काफी हद तक यहां हैं - बाड़ी विधानसभा में जहां आज तक बीजेपी को जीत नहीं मिली, कांग्रेस 2013 में भी जीत गई थी वहां 2023 में कांग्रेस को सिर्फ 11,601 वोट मिले थे..कारण सचिन पायलट और अशोक गहलोत जी बता सकते हैं। दो खबरें है, और दोनों अलग अलग सरकारों के समय की है, पहली अभी गंगानगर में भाजपा विधायक ने AEn बैरवा को पीटने और दुसरी खबर अशोक गहलोत सरकार के दौरान 2022 में AEn वाल्मीकि की कांग्रेस विधायक गिरिराज सिंह द्वारा हड्डियां तोड़ने की है, दोनों अधिकारी दलित वर्ग से हैं। अब आप अनुमान लगा सकते हैं कि जिस बाड़ी विधानसभा से भाजपा आज तक कभी जीत नहीं सकी वहां पर कांग्रेस को 2023 में सिर्फ 11601 (5.7%) वोट ही क्यों मिले और क्यों राजस्थान में 1985 के बाद कभी कांग्रेस सरकार रिपीट नहीं होती। ये सिर्फ एक ही मामला है, जबकि ऐसे कई मामले दलितों के खिलाफ अत्याचार के अशोक गहलोत के कार्यकाल में हुए थे जहां त्वरित न्याय की जगह राजनीतिक ठगबंधन बैठाने की कोशिश की गई थी और हर बार की तरह दलितों को कांग्रेस जैसी पार्टी की सरकार से निराश होना पड़ा था।
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet mediaअमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet mediaअमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet media
हिन्दी
10
12
89
9.3K
Acharya Azad Singh
Acharya Azad Singh@AzadSin17497289·
निकृष्ट लोग नहीं सुधरेंगें जबतक संविधान का डंडा नहीं पड़ेगा। वतथाकथित वैदिक युग के पीछे छुपकर स्वयं की जातिगत सोच दिखायेंगे। #Caste_Matters
Amit Yadav 🇮🇳@AmitYaddav

क्या ऐसे बयान पर मुक़दमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए??? जो व्यक्ति सरेआम वैदिक परंपरा के नाम पर एक वर्ग विशेष को अपमानित करने का प्रयास कर रहा है उसे जेल के सलाखों के अंदर होना चाहिए!

हिन्दी
0
0
1
21
Acharya Azad Singh retweetledi
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
ये अशोक गहलोत द्वारा खरीदे हुए पत्रकार अब स्वतंत्र पत्रकारिता को भी गोदी मीडिया बनाकर रहेंगे!! यह तर्कहीन ट्वीट इन 'पत्रकार महोदय' की मूर्खता नहीं, अपितु जनता की समझदारी को चुनौती देने वाली एक कुटिल चतुराई है। अशोक गहलोत की नई "एंटी-आलाकमान गैंग" के इन स्वघोषित प्रणेताओं ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की तानाशाही नीतियों पर पर्दा डालने और कांग्रेस आलाकमान को अक्षम सिद्ध करने का षड्यंत्र रचा है( इनके दर्जनों ट्वीट दिखा सकता हूं, जहां कांग्रेस आलाकमान को अक्षम दिखाने की कोशिश करते दिख जाएंगे, किसके इशारे पर वो अशोक गहलोत जी जानें!) पवन खेड़ा के संदर्भ का सहारा लेकर यहाँ भी वास्तविक निशाना राहुल गांधी जी को बनाया गया है। यह अत्यंत हास्यास्पद है कि यहाँ नेताओं को 'जेल' जाने के बजाय 'बेल' (जमानत) लेने के लिए कोसा जा रहा है। कोई इन 'विशेषज्ञों' से यह पूछे कि जिस नेता के संरक्षण में आप यह कांग्रेस विरोधी, राहुल गांधी विरोधी नैरेटिव चला रहे हैं, वे अशोक गहलोत स्वयं अपने राजनीतिक जीवन में कितनी बार और कितने समय के लिए जेल गए हैं? गोदी मीडिया के बाद लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले स्वतंत्र पत्रकारिता को खत्म करने की सोच लेकर आए ये लोग आज भाजपा की दमनकारी राजनीति को बेनकाब करने के बजाय उन कांग्रेस नेताओं को अपमानित कर रहे हैं जो सत्ता के झूठे मुकदमों का सामना कर रहे हैं। जिस पत्रकारिता को जनता की आवाज़ बनना चाहिए था, वह आज एक विशिष्ट गुट के स्वार्थों की पूर्ति के लिए कांग्रेस आलाकमान के विरुद्ध कुप्रचार का माध्यम बन गई है। अपनी वैचारिक कुंठा को पत्रकारिता का नाम देकर आप सत्य को नहीं दबा सकते। राजनीति बाद में सिखाइएगा, पहले सत्ता के संरक्षण में पल रही अशोक गहलोत की राजनीति की गुलाम अपनी इस पक्षपाती कलम की मर्यादा बचा लीजिए। @RahulGandhi @kharge @kcvenugopalmp @ashokgehlot51 @SachinPilot @GovindDotasra @drcpjoshi @TikaRamJullyINC @Barmer_Harish
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet mediaअमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet mediaअमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali tweet media
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan

कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी वाले हलकान किए रखते हैं। एक ऐसी पार्टी जिसने देश में आज़ादी के बाद से राज किया और जो 1885 में बनी है, उसे 1980 में बनी पार्टी ने नहीं, कांग्रेस में कल तक रहे एक अदने से उस नेता ने हलकान कर रखा है, जिसे राहुल गांधी ने अपने कुत्ते से भी अधिक तवज्जो देना उचित नहीं समझा। खेड़ा साहब को कई पीढ़ियों के एक महान् वकील साहब ने सिर्फ़ जमानत भर दिलवाई है और वो भी सुप्रीम कोर्ट से। एफ़आईआर क्ववैश नहीं करवाई। यह तो ऐसा ही है कि बेटा माँ से रोटी माँग रहा था तो माँ ने उसे दीवार में बने आळे में बिठा दिया। बेटा रोटी मांगना भूल गया और आळे में फंसने से बेहाल होकर वहाँ से उतारने के लिए रोने लगा। माँ ने उतारा नहीं, बस कहा कि उतार रही हूँ तो बच्चा चुप हो गया। ऐसे कोई राजनीति होती है भला। क्या इतने बड़े नेताओं को एंटीसिपेट्री बेल करवानी चाहिए? क्या नेहरू, गांधी और दूसरे महान् नेताओं से यही सीखा। वे किस दिन एंटी सिपेट्री बेल करवाकर बाहर आए थे? आज भी देश में जाने कितने ही युवा लोग जेलों में बिना किसी कारण फ्रेम्ड केसेज में बंद हैं। लेकिन ये लोग उन्हें बाहर करवाने के लिए कुछ नहीं करेंगे। फ़ुज़ैल जाफ़री का एक शेर है : एहसास-ए-जु़र्म जान का दुश्मन है 'जाफ़री' है जिस्म तार तार सज़ा के बग़ैर भी।

हिन्दी
4
13
50
3K
Acharya Azad Singh retweetledi
Mukesh saran
Mukesh saran@muksaran·
RGHS में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सेवा की मांग है । कर्मचारियों का सम्मान हमारा अधिकार, हमारी पहचान @SachBedhadak @RajGovOfficial @1stIndiaNews @ZeeNews #RGHS_कर्मचारियों_का_हक
Mukesh saran tweet media
हिन्दी
1
3
7
90
Acharya Azad Singh retweetledi
SANJNA JATAV
SANJNA JATAV@IncSanjanajatav·
गंगानगर में पानी के संकट के बीच विधायक–इंजीनियर प्रकरण में आख़िर क्या हुआ, किसने - किसको पीटा विवाद की गहन जांच होना अति आवश्यक है जिससे पता चल सके कि आख़िर हुआ क्या था। भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी और इंजीनियरों के बीच मारपीट के बारे में नए खुलासे भरमाने वाले हैं, एक दिन पहले विधायक ने आरोप लगाए और अब इंजीनियर यह आरोप लगा रहे हैं कि विधायक ने उनके साथ मारपीट की। AEN श्री जगनलाल बैरवा जी की चोट लगे शरीर की तस्वीरें चौंकाने वाली हैं, जहां उनकी आंख के साथ साथ शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटों के निशान दिखाई दे रहे हैं। मेरा माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए AEN श्री जगनलाल बैरवा जी की चोटों की मेडिकल बोर्ड से जांच हो और उच्चस्तरीय जांच करके सच्चाई सामने लाई जाए।
हिन्दी
6
80
247
2.7K
Acharya Azad Singh retweetledi
Hinglaj Dan OBC
Hinglaj Dan OBC@kodaratnoo·
उच्च शिक्षा विभाग को ठेकेदारी प्रथा से श्रीगणेश कर दिया है। क्या अब यह भी मान लिया जाए कि आने वाले कुछ सालों में स्कूल शिक्षा विभाग को भी इसी माध्यम से अमलीजामा पहनाया जायेगा। आखिर आने वाली पीढ़ी को शैक्षणिक रूप से पंगु बनाने के लिए जिम्मेदार कौन हैं ? ऐसी अनिश्चितता से सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्र इतना कमजोर और रुग्णता से ग्रसित हो जाएगा कि कोई इसे वापस ऊपर उठाने की हिमाकत नहीं कर पायेगा। #Rajasthan
Hinglaj Dan OBC tweet media
हिन्दी
8
99
212
8.2K
Acharya Azad Singh retweetledi
अल्हड़ पत्रकार
1-2022 को बाड़ी में डिस्कॉम ऑफिस के अंदर विधायक और उनके समर्थकों ने एईएन (AEN) हर्षाधिपति वाल्मीकि पर हमला किया था 2 - अब श्रीगंगानगर में RUIDP एईएन जगनलाल बैरवा को विधायक ने थप्पड़ मारें, जातिसूचक गालियां दी गईं और विधायक के समर्थकों ने लात-घूंसों और पाइपों से पीटा। #Rajasthan
अल्हड़ पत्रकार tweet mediaअल्हड़ पत्रकार tweet media
हिन्दी
8
99
181
11.6K
Acharya Azad Singh retweetledi
Alok Yadav
Alok Yadav@alokyadav520·
योगिराज में ये पिट रहा व्यक्ति यूपी पुलिस का जवान राजीव है 👇 फर्रुखाबाद में देशी शराब के ठेके में पकड़कर इस पुलिस के सिपाही को सिर्फ इसलिए मारा जा रहा है क्योंकि इसने इन गुंडों को शराब पिलाने से मना कर दिया था। उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी चरम पर है
हिन्दी
11
48
92
1.5K
Acharya Azad Singh retweetledi
राजस्थानी ट्वीट
भाजपा विधायक जयदीप बिहानी ने दलित सरकारी इंजीनियर छगनलाल बैरवा के साथ मारपीट कर उन्हें ही गिरफ्तार करवा दिया। राजस्थान के निर्लज्ज मीडिया ने बिना किसी पड़ताल और तथ्य-जांच के इंजीनियर को दोषी ठहराते हुए मनगढ़ंत सुर्खियाँ गढ़ दीं।
राजस्थानी ट्वीट@8PMnoCM

विधायक की शिकायत पर पुलिस ने तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन क्या शिकायत को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य भी जुटाए गए हैं? जिस तरह विधायक हमले और आंख में चोट का वर्णन कर रहे हैं, वह उनके हाव–भाव और सार्वजनिक उपस्थिति से मेल नहीं खाता। संबंधित कर्मचारी अनुसूचित जाति से आते हैं और निजी कर्मचारी एक प्रतिष्ठित कंपनी से है ऐसे में उनका पक्ष सुने बिना की गई कार्रवाई एकतरफ़ा प्रतीत होती है।

हिन्दी
16
184
456
22.2K