DeVrIsHi (देवेश)🇮🇳
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DeVrIsHi (देवेश)🇮🇳
@DvSh9412
राजनीतिक विश्लेषक, (पार्ट टाइम) मजदूर (फुल टाइम) कवि , शायर (दुर्घटनावश)





#SawaalIndiaKa | 'मैं OBC समाज से आता हूं, इसलिए मेरे खिलाफ षड्यंत्र किया जा रहा है'- राजकुमार भाटी, प्रवक्ता, समाजवादी पार्टी #UttarPradesh #Brahmin #PoliticalControversy #SamajwadiParty @sucherita_k @rajkumarbhatisp


इस आदमी का बीएसपी से कोई संबद्ध नहीं न कोई पदाधिकारी है न ढंग का कार्यकर्ता है बीएसपी का इसका काम लोगो को गाली गलौज और उल्टा सीधा बोलना है, यही उल्टा उल्टा सीधा इसने सूरज बौद्ध भाई को बोला था तब सूरज भाई ने इसे ब्लॉक कर दिया था फिर इसे मुझसे कहा सूरज से अनब्लॉक कराओ इसके पिता जब BHU भर्ती थे तो दिन में 5 बार फोन लगा के कहता था सलभ मणि त्रिपाठी से सहायता हो सकती है क्या तब इसने यह नहीं सोचा कि मै भाजपा विधायक से मदद मांग रहा, मतलब मुसीबत में रहो तब पार्टी मायने नहीं रखती,फिलहाल सलभ मणि से कोई संबद्ध नहीं तो बात भी हो पाई फिलहाल हम लोगो से जितना मदद हुआ सूरज भाई से बात करके क्राउड फंडिंग किया QR साझा करके ,पर कहते है न भारत में कोई किसी का अहसान नहीं मानता इसमें से एक रवि आर्या है क्या लिखूं और मै मेरे अपने है गाली गलौज मुझे आता नहीं न उल्टा सीधा बोलना आता है, बस यही कहना है सावधान रहना है इनके जैसे लोगो से

“मुझे पीटा...लात मारी, CCTV बंद कर दिया” ◆ CM ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप @MamataOfficial | Mamata Banerjee | Bengal | पश्चिम बंगाल | #ElectionResult_2026









मैं student हूँ और मैं उत्तर प्रदेश का एक सामान्य नागरिक हूँ। हाल ही में मैंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AI-जनरेटेड तस्वीर/वीडियो के माध्यम से देश में संभावित तेल कमी को लेकर एक सवाल उठाया था। मेरा उद्देश्य किसी को भड़काना, अफवाह फैलाना या किसी संस्था की छवि खराब करना नहीं था बल्कि एक प्रतीकात्मक तरीके से जनहित का मुद्दा उठाना था। लेकिन इस पोस्ट के बाद मेरे खिलाफ FIR दर्ज हो गई। कानून का मैं पूरा सम्मान करता हूँ और जांच में सहयोग भी कर रहा हूँ। फिर भी एक सामान्य नागरिक के रूप में मन में कुछ सवाल हैं, जो मैं विनम्रता के साथ सरकार और प्रशासन से पूछना चाहता हूँ। पहले अखबारों में सरकारों पर कार्टून बनते थे। कार्टूनिस्ट नीतियों पर तीखा व्यंग करते थे। टीवी पर “So Sorry” जैसे कार्यक्रम बनते थे, जहाँ एनिमेशन और व्यंग के जरिए व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते थे। तब इसे लोकतंत्र का हिस्सा माना जाता था। आज वही काम तकनीक के माध्यम से AI से किया गया और वह FIR तक पहुँच गया। अगर माध्यम बदल गया है, तो क्या सवाल पूछने का अधिकार भी बदल गया है? क्या प्रतीकात्मक तस्वीर/वीडियो के जरिए सवाल उठाना इतना गंभीर हो सकता है कि एक सामान्य नागरिक पर FIR दर्ज हो जाए? क्या जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना गलत है? क्या नागरिकों को अब पोस्ट करने से पहले यह सोचना पड़ेगा कि सवाल पूछने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है? मैं किसी टकराव में नहीं पड़ना चाहता। न ही मेरा उद्देश्य किसी संस्था या सरकार को अपमानित करना था। लेकिन इस पूरी घटना के बाद मानसिक दबाव महसूस हो रहा है। पहली बार ऐसी स्थिति का सामना कर रहा हूँ और एक सामान्य नागरिक के रूप में डर और अनिश्चितता स्वाभाविक है। मैं सिर्फ इतना चाहता हूँ कि इस मामले को संवेदनशीलता से देखा जाए। अगर मेरी पोस्ट में कोई तथ्यात्मक कमी थी, तो समझाया जा सकता था, पोस्ट हटाने को कहा जा सकता था, या नोटिस दिया जा सकता था। लेकिन सीधे FIR दर्ज होना एक कड़ा कदम है, जो सवाल उठाने वाले नागरिकों के मन में भय पैदा कर सकता है। मैं उत्तर प्रदेश सरकार से विनम्र निवेदन करता हूँ कि इस मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि क्या प्रतीकात्मक व्यंग और जनहित के सवाल भी अब अस्वीकार्य हैं। लोकतंत्र में संवाद और सवाल व्यवस्था को मजबूत करते हैं, कमजोर नहीं। सभी जनप्रतिनिधियों, विपक्ष के नेताओं, मीडिया और जागरूक नागरिकों से अनुरोध है कि इस मामले पर ध्यान दें और उचित मार्गदर्शन/सहायता प्रदान करें। गोपनीयता के कारण FIR में कुछ व्यक्तिगत जानकारी छिपाई गई है... @AkhileshYadav @yadavakhilesh @samajwadiparty @INCIndia @RahulGandhi @priyankagandhi


















