G.K. Gaurav

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@GKGaurav13

Katılım Haziran 2016
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COCKROACH JANTA PARTY UTTAR PRADESH 🪳
हम सारे कॉकरोचों ने मिलकर अपना विज़न तैयार कर लिया है। अगर सरकार होश में नहीं आई तो वो सोच नहीं सकती कि हम काकरोच मिलकर क्या कर सकते हैं। अब हम सारे काकरोच मिलकर खुद एक दूसरे के मुद्दे उठाएंगे। जुड़िए और संगठन को मजबूत शक्ति प्रदान करिए ✊✊
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Arpita
Arpita@Arpitayadavv·
Dear boy's which one 👀
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Kousar Azam
Kousar Azam@kousarazam1510·
ट्रेन लेट है? कहाँ है ? ये सवाल एक प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर पूछा और करोड़ों की कमाई और Google की नजर में आ गया कभी रात के 2 बजे स्टेशन पर खड़े होकर सोचा है भाई मेरी ट्रेन आखिर कहाँ फँसी है अहमद निज़ाम मोहाइदीन ने ठीक यही सवाल पूछा था उसी झुंझलाहट से जन्म हुआ Where Is My Train ऐप का खास बात, बिना इंटरनेट, बिना GPS सिर्फ मोबाइल टावर से ट्रेन की लाइव लोकेशन भारत के हर कोने में करोड़ों यात्रियों का भरोसा जीता 100 मिलियन से ज्यादा यूज़र्स तक पहुँचा और 2018 में Google ने इसे खरीद लिया पहली भारतीय प्रोडक्ट एक्विजिशन एक छोटी सी रोज़मर्रा की परेशानी एक बड़ा आइडिया और पूरी ज़िंदगी बदल गई अगली बार ट्रेन का इंतज़ार हो तो याद रखना वो ऐप सिर्फ लोकेशन नहीं दिखाता एक आम इंसान की जीत दिखाता है तुम्हारी ज़िंदगी में भी कोई ऐसा सवाल है जो बड़ा बन सकता है कमेंट में शेयर करो
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🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳
इन नीच कांग्रेसी चमचो के षड़यंत्र को जानकर आप चौक जायेंगे यह सत्ता के लिए क्या कुछ नहीं कर सकते भारत के बड़े दलित नेता बाबू जगजीवन राम काफी तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे थे.... दशकों तक केंद्रीय मंत्री थे..... केंद्र में उप प्रधानमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री भी रहे और उस समय के सभी पत्रिकाओं तथा अखबारों में यह चर्चा थी कि देश को बहुत जल्द पहला दलित प्रधानमंत्री मिलने वाला है और वह दलित प्रधानमंत्री होगा बाबू जगजीवन राम आप लोगों को लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार याद होंगी... मीरा कुमार इन्हीं बाबू जगजीवन राम की बेटी थी इंदिरा गांधी बाबू जगजीवन राम की बढ़ती लोकप्रियता से बेहद चिंतित थी क्योंकि उस जमाने में इंदिरा गांधी की सभाओं से भी ज्यादा भीड़ बाबू जगजीवन राम की सभाओं में आती थी और वह ऐसे दलित नेता थे जो उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत दोनों जगहों पर दलितों में काफी लोकप्रिय थे उस वक्त अखबार और यह पत्रिका लिखते थे कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बाद देश को पहला ऐसा दलित नेता मिला है तो पूरे भारत के दलितों की आवाज बंद कर गया उभरा है फिर इंदिरा गांधी के निर्देश पर कांग्रेस का डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट सक्रिय हुआ बाबू जगजीवन राम के एक पुत्र थे उनका नाम था सुरेश राम ....वह दूर दूर तक राजनीति में नहीं थे फिर दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा सुमन चौधरी को मोहरा बनाया गया और फिर कनॉट प्लेस पर स्थित एचकेएल भगत के होटल में उस लड़की और सुरेश कुमार ने मिलने का कार्यक्रम बनाया फिर दोनों की अश्लील तस्वीरें खींच ली गई और उस वक्त मेनका गांधी कांग्रेस में ही थी और मेनका गांधी एक पत्रिका चलाती थी जिसका नाम था सूर्या और एक महिला होते हुए भी मेनका गांधी ने उन सभी अश्लील तस्वीरों को बगैर सेंसर किए बगैर उस लड़की का चेहरा छुपाए अपनी मैगजीन में छाप दिया यह सीधे-सीधे एक लड़की की निजता का उल्लंघन था लेकिन कांग्रेस के संस्कारों में रची बसी मेनका गांधी को इससे भला क्या मतलब वह तो अपनी सास और पति के निर्देशों का पालन कर रही थी और फिर हंगामा मच गया हालांकि बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम राजनीति में नहीं थे सुरेश राम भी बालिग थे और वह लड़की भी बालिग थी लेकिन उस जमाने में नेताओं के अंदर नैतिकता हुआ करती थी बाबू जगजीवन राम का इस्तीफा ले लिया गया उन्हें इंदिरा गांधी के इशारे पर माया पत्रिका से लेकर तमाम पत्रिकाओं में खूब बदनाम किया गया धीरे-धीरे बाबू जगजीवन राम एकाकी जीवन जीने लगे और राजनीति से सन्यास ले लिए बहुत सालों बाद खुशवंत सिंह ने खुलासा किया था कि बाबू जगजीवन राम को बर्बाद करने के लिए एक पूरी प्लानिंग रची गई थी और इस प्लानिंग में एचकेएल भगत मेनका गांधी संजय गांधी और 8 अन्य लोग शामिल थे पूर्व गवर्नर सतपाल मलिक भी इस षड्यंत्र के एक अहम किरदार थे
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Ritu Jaiswal
Ritu Jaiswal@activistritu·
बोतलबंद पानी के कई नकली variants बाज़ार में खुलेआम बिक रहे हैं। इनके नाम, पैकिंग और रंग इतने मिलते-जुलते होते हैं कि आम आदमी असली-नकली में फर्क ही नहीं कर पाता। सवाल यह है कि Food Safety Department को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? जिन इलाकों में ये पानी तैयार और पैक किया जाता है, वहां की स्थानीय पुलिस को इसका पता क्यों नहीं चलता? और अगर सबको जानकारी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती? इन्हें #PublicHealth के साथ खिलवाड़ करने की खुली छूट किसने दी है? #BottledWater
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G.K. Gaurav
G.K. Gaurav@GKGaurav13·
@UIDAI @ajaykr1502 @ceo_uidai ये अच्छी खबर है की तुरन्त रिप्लाई दिया गया है officialy
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Aadhaar
Aadhaar@UIDAI·
@ajaykr1502 @ceo_uidai आपका case आगे के समाधान के लिए संबंधित प्रभाग को सौंप दिया गया है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया आगे के संचार और ट्रैकिंग के लिए अपना केस नंबर नोट कर लें। (S2051325354000)
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Ajay kumar
Ajay kumar@ajaykr1502·
आधार में जन्म तिथि परिवर्तन के लिए 10 वीं की मार्कशीट दस्तावेज मान्य है तो आवेदन अस्वीकार क्यों किया जा रहा है @UIDAI @ceo_uidai
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G.K. Gaurav
G.K. Gaurav@GKGaurav13·
@food_bihar @LeshiSingh @IPRDBihar पहली बात तो लिन्क काम नहीं करता है. दूसरी बात अप्रूवल के लिए फिर वही आपके अफसरसाही का सिर दर्द
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Rashtriya Janata Dal
Rashtriya Janata Dal@RJDforIndia·
बिहार में एनडीए नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देकर वोट खरीदने और सत्ता पाने की इतनी हड़बड़ी थी कि बेचारे भयंकर गड़बड़ी कर बैठे। बेचैनी और असुरक्षा इतनी ज्यादा थी कि महिलाओं की बजाय 10,000 रुपए पुरुषों के खाते में भेज दिए। अब पुरुषों को दस हजार रुपए लौटाने के लिए लव लेटर लिखे जा रहे है। बिहार में भुखमरी, महंगाई, पलायन और बेरोजगारी इतनी अधिक है कि ये हजार तो तो जिस वक्त डाले होंगे उसी समय खर्च हो गया होगा। बेचारे पुरुष अब यह लोन राशि बिल्कुल भी नहीं लौटायेंगे क्योंकि पहले उनका वोट लौटाओं। EVM, धांधली, वोट खरीदी, वोट चोरी और मशीनरी से बनाई सरकारों को कितने दिन छुपाओगे? सच एक दिन बाहर निकलेगा। #Bihar #RJD
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News24
News24@news24tvchannel·
"जब भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए तो पुलिस उसे लिखकर बताए कि उसे क्यों पकड़ा गया है" ◆ सुप्रीम कोर्ट ने कहा #SupremeCourt | Supreme Court
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Shahid Raza
Shahid Raza@IMohdShahidRaza·
मुख्यमंत्री पद की गरिमा उस वक्त छोटी लगने लगती है, जब शब्दों में संयम की जगह तंज और अपमान ले लेता है। योगी आदित्यनाथ जी शायद भूल गए कि जिस तेजस्वी को आज “बंदर” और “टप्पू” कह रहे हैं, कभी उन्हीं के पिता लालू यादव जी को कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाकर विनम्रता से फीता कटवाया करते थे। आज जब खुद फीता काटने की हैसियत मिल गई, तो भाषा में थोड़ी शालीनता और संस्कार की उम्मीद करना गलत नहीं होगा। क्योंकि पद बड़ा हो सकता है, लेकिन भाषा ही इंसान का असली परिचय होती है।
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खुरपेंच Satire
आज हर कोई दो सिम रखता है — एक इंटरनेट के लिए , दूसरा सिर्फ जरूरत पड़ने पर कॉल के लिए। लेकिन उस दूसरे सिम को चालू रखने के लिए भी हर महीने ₹200-₹300 का रिचार्ज ठोकना पड़ता है। ना इंटरनेट चाहिए , ना रोज बात करनी फिर भी लूट जारी है। Jio , Airtel , Vi सबने मिलकर जनता को निचोड़ने का धंधा बना लिया है। हर जगह “अनलिमिटेड” का झांसा लेकिन कोई सस्ता प्लान नहीं। TRAI बस सो रहा है या शायद कंपनियों की जेब में बैठा है। गरीब और मिडिल क्लास लोग जो अपने घरवालों, बुजुर्गों या काम के लिए दूसरा नंबर रखते हैं , उनसे जबरदस्ती पैसा वसूला जा रहा है। सवाल सीधा है — जब इंटरनेट नहीं चाहिए, तो क्यों महंगा रिचार्ज कराओगे? क्यों नहीं ₹50-₹100 का सस्ता प्लान लाते, जिसमें बस 100-200 मिनट कॉल और थोड़ा SMS हो? हर चीज महंगी, अब बात करना भी लग्जरी हो गया है। TRAI और कंपनियां मिलकर गरीब का खून चूस रही हैं। अब जनता बोलेगी सस्ता प्लान दो , वरना बंद करो ये लूट।
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Vishal Pandey
Vishal Pandey@Vishal_aawaj·
बिहार में वो सब होता है जिसकी आप सब कल्पना तक नहीं कर पाइएगा 😂 पत्रकार - आप कितने दिनों बाद जेल से बाहर आए है ? बिहारी युवक - 1 साल पर पत्रकार - कौन से जुर्म में ? बिहारी युवक - शराब बेचने के जुर्म में पत्रकार - तो आप शराब लाते कहां से थे ? बिहारी युवक - पुलिस चौकी से ! पत्रकार - फिर ऐसा क्या हुआ, जो आपको जेल जाना पड़ा ? बिहारी युवक - पहले पुलिस चौकी से 1 पेटी का 5 हजार रुपए में शराब लाते थे. बाद में उन लोगों का रेट बढ़ गया ! 1 पेटी का 8 हजार रुपए कर दिए. मैने वहां से शराब लाना बंद कर दिया इसलिए मुझे पकड़ के जेल भेज दिए। बिहार में इसी लिए जनसूराज जरूरी है !
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
जैसे ही गांधी जी की हत्या की खबर पंडित नेहरू को मिली.. वे दौड़े हुए आए। और गांधी की बाँह पकड़, सिसकने और और काँपने लगे। मानो कोई अनाथ बेटा, पिता की लाश से लिपटकर चीत्कार कर रहा हो! वहीं मौजूद सरदार पटेल का चेहरा, घोर विषाद में डूबा था। आँसू तो उन्होंने जब्त कर लिये, मगर भीतर से उनकी छाती हमेशा के लिए टूट गई। ●● माउंटबेटन ने आते ही पहला काम यह किया कि जवाहर और पटेल को खींचकर वे पास के कमरे में ले गए। कहा- गांधी जी से पिछली बार जब मेरी मुलाकात हुई, उन्होंने मुझसे कहा था- "मेरी सबसे बड़ी इच्छा यह है कि सरदार और जवाहरलाल मिलकर परस्पर एक हो जाएँ" ●● सरदार पटेल 1917 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। नेहरू ने 1912 में ही कांग्रेस के डेलीगेट बनकर आये थे, लेकिन सक्रिय आधिकारिक रूप से पिता की अनुमति के बाद 1919 में कांग्रेस से जुड़े। नेहरू उत्तरप्रदेश और सरदार गुजरात से आगे बढ़े। 30 के दशक के अंत तक दोनों दिल्ली में मिले, कांग्रेस के राष्ट्रीय विस्तार को सम्हालने लगे। नेहरू स्वप्नजीवी थे, लिबरल, सोशलिस्ट सोच और विश्वदृष्टि के धनी। सरदार ठेठ, प्रेक्टिकल, काफी हद तक यथास्थितिवादी थे। जरूरत के मुताबिक कठोर निर्णय करते। उनकी सोच कुछ हद तक पूंजीवादी थी। रजवाड़ों से उनके सम्बन्ध बेहतरीन थे। स्वभावांतर के कारण विषयो में मतांतर होना स्वाभाविक था। मगर शायद सुभाष बोस से जुड़ा घटनाक्रम, एक बड़ी गांठ बनी। ●● अध्यक्ष के रूप में सुभाष, नेहरू का चयन थे। दोनों मित्र थे, समाजवादी सोच के थे, वैश्विक नजरिया रखते थे। स्वयं दो बार अध्यक्ष रहने के बाद, अगले अध्यक्ष के रूप में जब, नेहरू ने सुभाष को प्रस्तावित किया, उस वक्त सुभाष तो कई बरसों से भारत मे थे ही नही। अध्यक्ष मनोनीत होने की सूचना पर ही वे यूरोप से लौटे, कार्यभार सम्हाला। और सुभाष से सरदार की, निजी अदावत थी। यह मामला, सरदार के बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल (जिनकी मौत यूरोप में हुई, और अंत समय सुभाष ने सेवा की थी) की प्रॉपर्टी, सुभाष द्वारा अपनी संस्था को दान करवा लेने का मसला था। सरदार पटेल ने वसीयत को कोर्ट में जाकर खारिज करवाया था। यह एक बदसूरत, बुरी लड़ाई थी। अब वही शख्स कांग्रेस अध्यक्ष था। सरदार को उन्हें सहयोग करना था। ●● एक ही साल में में सुभाष के तानाशाही रवैये, और एकपक्षीय फ़ैसले लेने की शैली ने कांग्रेस में भारी असन्तोष पैदा किया। इस अंसतोष के मुखिया सरदार पटेल थे। तो अगले बरस, उन्हें अध्यक्ष पद पर रिपीट किये जाने पर सरदार पटेल सहित कई नेताओं ने आपत्ति की। सर्वानुमति न होने पर भी सुभाष अड़े हुए थे। वे मामले को ओपन इलेक्शन तक ले गए। जीतकर दोबारा अध्यक्ष भी बन गए। लेकिन अब रार ठन गयी थी। आधे कार्यकाल तक वे कार्यसमिति की बैठक न बुला सके। उनकी चयनित 20 सदस्यों की कार्यसमिति से 17 ने इस्तीफा दे दिया था। बचे 3 में एक खुद सुभाष थे, दूसरा उनके भाई शरत चन्द्र। और तीसरे नेहरू। ●● उस धर्मसंकट के दौर में अगर सुभाष चंद्र बोस के साथ कोई बड़ा नेता खड़ा था- तो वे थे अकेले नेहरू गतिरोध बढ़ा, तो अंततः गांधी ने भी सरदार का ही पक्ष सही माना। नेहरू भी गांधी के फैसले के आगे सर झुका गए। सुभाष को इस्तीफा देना पड़ा। ●● आगे भी नेहरू और पटेल ने, बरसों साथ काम किया। लेकिन अपने अपने मत से पीछे नही हटते थे। तब में गांधी ही अंतिम मार्ग निकालते। जो आदेश होता, दोनों चुपचाप पालन करते। आज वह रौशनी की मीनार गिर चुकी थी। उन्हें राह दिखाने वाला, लाश बनकर बगल के कमरे में पड़ा था। ●● माउंटबेटन ने जवाहर और सरदार से कहा- अपने गुरु की मृत देह पर शपथ लो कि तुम दोनों एक रहोगे? जवाहर और सरदार ने एक क्षण एक–दूसरे को कातरता से देखा। अब तक जिस वृक्ष की छाया में दोनों जी रहे थे, वह कटकर गिरा हुआ था। अब तो वे दोनो ही एक दूजे के सर का साया थे। सरदार का धैर्य टूट गया। उस दिन, शव के पास सरदार और जवाहरलाल, एक दूसरे को बाहों भरकर, जार जार रोये। मन का सारा मवाद बह गया। ●● वह निर्मल धारा पटेल के दिल मे अंत तक बहती रही। आखरी बार जब वे दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हुए, स्वास्थ्य बेहद खराब था।अपनी मृत्यु के पूर्वाभास में उन्होंने पुत्री मणिबेन और वीपी मेनन से कहा- "मेरे बाद जवाहर अकेला पड़ जायेगा। उसका साथ मत छोड़ना" कुछ दिन बाद सरदार की मौत पर, भावुक नेहरू बोले -मेरा दाहिना हाथ कट गया। ●● पटेल के प्रति नेहरू के प्रेम, और श्रद्धा का आलम यह था, कि फरवरी 1949 में सरदार पटेल के जीवन काल में ही, उनकी पहली प्रतिमा का अनावरण, अपने हाथों से किया था। तस्वीर उसी मौके की है, और शहर है गोधरा। जो आज किसी और कारण से, इतिहास में बदनाम है। 🙏
Manish Singh tweet media
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Science Journey
Science Journey@ScienceJourney2·
✍️ “कैसे ब्राह्मणों ने छुआछूत को धर्म बना दिया — पाराशर स्मृति के उदाहरणों के आधार पर” भूमिका: भारतीय समाज में छुआछूत की जड़ें ब्राह्मणवादी धार्मिक ग्रंथों में गहराई तक फैली हुई हैं। पाराशर स्मृति जैसे ग्रंथ इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि कैसे एक योजनाबद्ध तरीके से “शुद्ध” और “अशुद्ध” की अवधारणा गढ़ी गई, ताकि वर्ण व्यवस्था को स्थायी और ब्राह्मणवादी सत्ता को अखंड रखा जा सके। ⸻ १. चाण्डाल-दर्शन मात्र से अशुद्धि पाराशर स्मृति (श्लोक 24) में कहा गया है कि यदि कोई ब्राह्मण चाण्डाल को देख ले, तो उसे तुरंत स्नान कर सूर्य-नारायण का दर्शन कर “शुद्ध” होना चाहिए। 👉 इससे स्पष्ट है कि केवल “देख लेने” मात्र से भी ब्राह्मण को “अशुद्ध” मान लिया जाता था — यह मानसिक गुलामी का पहला बीज है। ⸻ २. चाण्डाल द्वारा छुए जल के उपयोग पर कठोर प्रायश्चित्त श्लोक 25–27 में कहा गया है कि यदि किसी ब्राह्मण ने अज्ञानवश चाण्डाल द्वारा खूदवाए या छुए जल का उपयोग किया, तो उसे उपवास, वमन (उल्टी करके पानी निकालना), अथवा तीन दिन तक गौमूत्र और यवागू (जौ का दलिया) से बना भोजन करना चाहिए। 👉 इसका अर्थ है कि स्वच्छता नहीं, बल्कि जाति-आधारित घृणा को “धर्म” घोषित किया गया। ⸻ ३. चाण्डाल के घर या वस्तुओं का स्पर्श ‘पाप’ घोषित श्लोक 40–42 में कहा गया है कि यदि किसी ब्राह्मण ने चाण्डाल के घर में प्रवेश किया, तो उस घर को जलाना(?) चाहिए और फिर अग्नि-होम आदि के द्वारा भूमि को “शुद्ध” करना चाहिए। 👉 यह न केवल घृणा की चरम सीमा है, बल्कि यह समाज में अलगाव, हिंसा और अपमान को वैध ठहराने का धार्मिक औजार है। ⸻ ४. ‘प्रायश्चित्त’ के नाम पर अमानवीय दंड इन श्लोकों में हर “स्पर्श” या “संपर्क” के बाद ब्राह्मण को गोमूत्र पीने, उल्टी करने, उपवास करने, या जौ के सूप खाने जैसे कर्मों का आदेश है। 👉 यह दिखाता है कि “शुद्धता” का पूरा ढांचा जातिगत श्रेष्ठता के भ्रम पर टिका हुआ था — जहाँ एक समूह को “दैवीय” और दूसरे को “अपवित्र” कहा गया। ⸻ ५. महिलाओं और अन्य वंचित समुदायों के प्रति भेदभाव अध्याय 6, 44, 45 श्लोकों में कहा गया है कि यदि किसी के घर में चाण्डाल या दासवृत्ति करने वाली स्त्री (जैसे धोबिन, चमारिन, व्याधिनी आदि) घुस जाए, तो घर की मिट्टी और पात्र तक बदल देने के निर्देश हैं। 👉 यह इस बात का प्रमाण है कि “धर्मग्रंथों” का उद्देश्य समानता नहीं, बल्कि जातिगत अपमान को स्थायी बनाना था। ⸻ ६. दार्शनिक और सामाजिक विश्लेषण पाराशर स्मृति जैसे ग्रंथों में “शुद्धता” का विचार आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक नियंत्रण का औजार भी था। •ब्राह्मण को “देवता” और शूद्र को “अपवित्र” घोषित कर दिया गया। •“प्रायश्चित्त” के बहाने शारीरिक कष्ट और भय को धार्मिक अनिवार्यता बना दिया गया। •धर्म के नाम पर मनुष्य की गरिमा, समानता और सहअस्तित्व की भावना को नष्ट किया गया। ⸻ ७. निष्कर्ष: धर्म या सामाजिक साजिश? इन श्लोकों से स्पष्ट है कि छुआछूत “आध्यात्मिक गलती” के साथ साथ एक सामाजिक नीति भी थी — जिसका उद्देश्य वर्णव्यवस्था की दीवारों को सुदृढ़ बनाना था। पाराशर स्मृति जैसे ग्रंथों ने न केवल असमानता को वैध बनाया, बल्कि उसे “ईश्वरीय आदेश” का रूप देकर सदियों तक समाज पर थोप दिया। ⸻ ८. आधुनिक दृष्टिकोण आज के युग में जब संविधान समानता और मानवता का प्रतीक है, तब यह आवश्यक है कि हम इन ग्रंथों की आलोचनात्मक समीक्षा करें और समझें कि “धर्म” के नाम पर रची गई जातिगत हिंसा का मुकाबला केवल वैज्ञानिक सोच, करुणा और समानता से ही संभव है।
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RAAJ 🎭
RAAJ 🎭@Raaj_unfiltered·
"🚀 टाटा मोटर्स की नई एंट्री टू व्हीलर मार्केट में! 🇮🇳 Tata Classic 125: रेट्रो स्टाइल, दमदार 125cc इंजन, 85km/लीटर माइलेज और स्मार्ट फीचर्स के साथ सिर्फ ₹55,999 में! 2025 में इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च की भी तैयारी, जिसने रुकने का नाम ही नहीं लिया! ⚡️💥 #TataMotors
RAAJ 🎭 tweet mediaRAAJ 🎭 tweet media
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Kranti Kumar
Kranti Kumar@KraantiKumar·
देश का हर मैनस्ट्रीम न्यूज़ चैनल अनंत सिंह के पक्ष में खबर चला रहा है. NDTV पर शुभंकर मिश्रा और इस कन्याकुमारी ने तो जमकर अनंत सिंह का महिमामंडन किया. एक घंटे चले कार्यक्रम में दोनों ने मिलकर दुलारचंद यादव को बाहुबली और आरजेडी का करीबी बताने की भरपूर कोशिश की. पूरे कार्यक्रम में अनंत सिंह को छोटे सरकार और बाहुबली संबोधित किया गया, सूरजभान और दुलारचंद यादव का जमकर चरित्र हनन किया गया. दुलारचंद यादव अगर बाहुबली भी थे तो क्या उनकी हत्या करने का अनंत सिंह को लाइसेंस मिला है ?
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Shahid Raza
Shahid Raza@IMohdShahidRaza·
ये जिसके सामने मोदी जी हाथ जोड़कर खड़े नीले घिरे मे है मेधा रूपम जी जिला अधिकारी हैं जो वर्तमान में चुनाव आयोग के मुख्य अधिकारी ज्ञानेश गुप्ता जी की बेटी है इधर बिहार विधानसभा चुनाव में आचार संहिता लागू होने के बाद भी भाजपा NDA का उम्मीदवार खुद मीडिया के सामने कह रहा है कि उसको 10 गाड़ियों के साथ घूमने की चुनाव आयोग से अनुमति मिली है लेकिन #दुलारचंद यादव की हत्या के समय वह 40 गाड़ियों के साथ घूम रहा था अब RJD और कांग्रेस इस बात पर आरोप लगा रही है कि आचार संहिता के #उल्लंघन के मामले में उम्मीदवार माफिया आनंद सिंह पर कार्रवाई हो लेकिन सुनने में आ रहा है चुनाव आयोग द्वारा करवाई तो हुई नहीं हत्या के आरोप लगने के बाद बिहार सरकार द्वारा आनंद सिंह की सुरक्षा और बढ़ा दी गई🙃... इसको कहते हैं मनुवाद की सत्ता भाजपा की जड़े दलितों पिछड़ों में ही बहुत गहरे में इनको उखाड़ पाना मुश्किल है l
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G.K. Gaurav
G.K. Gaurav@GKGaurav13·
Ye sab chalta tha
Mallikarjun Kharge@kharge

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह बयान कि पंडित जवाहर-लाल नेहरू कश्मीर का भारत में विलय नहीं चाहते थे सरासर झूठा और निंदनीय है। 1. जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की प्रक्रिया के दौरान पंडित नेहरू कश्मीर की जनता के नेता शेख़ अब्दुल्ला के संपर्क में थे, वहीं सरदार पटेल जम्मू कश्मीर की तत्कालीन महाराजा श्री हरि सिंह के संपर्क में थे। दोनों नेता शेख़ अब्दुल्ला और हरि सिंह को इस बात के लिए समझा रहे थे कि जम्मू कश्मीर राज्य का भारत में विलय जम्मू कश्मीर की प्रजा के हित में है। 2. सरदार पटेल के निजी सचिव श्री वी शंकर ने ,जो ख़ुद भी जम्मू कश्मीर के विलय की बातचीत में सरदार पटेल का साथ निभा रहे थे, "सरदार पटेल चुना हुआ पत्र-व्यवहार" नाम से सरदार पटेल और अन्य नेताओं के बीच पत्राचार की पूरी पुस्तक तैयार की है। इस पुस्तक के प्रथम खंड में वी शंकर ने स्पष्ट लिखा है कि जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को लेकर पंडित नेहरू और सरदार पटेल समान रूप से रुचि ले रहे थे। इस पुस्तक में ही जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को लेकर कम से कम 50 पत्रों का संकलन है। अगर पंडित नेहरू जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की प्रक्रिया में शामिल नहीं होते तो क्या सरदार पटेल और पंडित नेहरू के बीच उस दौरान इतना सारा पत्र व्यवहार होता? 3. जम्मू कश्मीर में अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में क़बायली हमले से क़रीब एक महीने पहले 27 सितंबर 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सरदार पटेल को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से बताया था कि पाकिस्तान कबाइलियों के भेष में जम्मू कश्मीर पर हमला करने वाला है। इस पत्र में पंडित नेहरू ने विस्तार से पाकिस्तान के षडयंत्र और रणनीति का ख़ुलासा किया। पंडित नेहरू ने यह भी कहा कि सर्दी आने के बाद जम्मू कश्मीर में युद्ध करना कठिन होगा इसलिए तत्काल जम्मू कश्मीर राज्य का विलय भारत में करा लिया जाए। इस पत्र के तुरंत बाद 2 अक्टूबर 1947 को सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर के महाराजा को पत्र लिखकर उनसे भारत में जल्द से जल्द ही विलय करने का आग्रह किया। 5 अक्टूबर 1947 को पंडित नेहरू ने एक बार फिर सरदार पटेल को तत्काल जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। दुर्भाग्य से पंडित नेहरू और सरदार पटेल के समझाने के बावजूद जम्मू कश्मीर के महाराजा तत्काल कोई फ़ैसला नहीं ले सके और जम्मू कश्मीर के भारत में विलय से पहले ही पाकिस्तान ने क़बायली हमला कर दिया। 4. वी शंकर ने स्पष्ट रूप से लिखा है जम्मू कश्मीर तो भारत में विलय कराने के लिए धारा 370 सरदार पटेल की एक उपलब्धि थी। धारा 370 के माध्यम से ही पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर और भारत के बीच एक पुल बनाया था। नेहरूजी और सरदार पटेल में इतनी ज़्यादा घनिष्ठता थी कि जब धारा 370 भारत की संविधान सभा में पास की गई उस दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू अमेरिका में थे और सरदार पटेल ने अपने निर्देशन में इस धारा को संविधान सभा में पास कराया था। 5. पंडित नेहरू ने अंतरराष्ट्रीय दबाव को नकारते हुए कश्मीर का भारत में विलय कराया। पंडित नेहरू ने भारत के संविधान सभा में भी स्पष्ट किया था कि न सिर्फ़ सांस्कृतिक कारणों से बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए भी, जम्मू कश्मीर की सीमा कई देशों से लगती है ऐसे में जम्मू कश्मीर का भारतीय संघ में विलय होना ही श्रेयस्कर है। महात्मा गाँधी के निजी सचिव श्री प्यारेलाल लिखित पुस्तक “पूर्णाहुति” में बताया गया है कि मोहम्मद अली जिन्नाह यहाँ तक कहा करते थे कि जब तक पंडित जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री हैं और शेख़ अब्दुल्ला कश्मीर की जनता के नेता है तब तक कश्मीर की जनता किसी भी सूरत में पाकिस्तान का समर्थन नहीं कर सकती। .@narendramodi जी, मैं आपको चुनौती देता हूँ कि आप उस समय का सरदार पटेल और पंडित नेहरू का पत्राचार पढ़ें उस समय की संविधान सभा में हुई चर्चाओं पर नज़र डालें। आपको ये भी पता चलेगा कि हिंदू महासभा व RSS और बाद में जनसंघ से जुड़े एक प्रमुख नेता बलराज मधोक ने खुले तौर पर कहा कि वे कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना चाहते हैं। सावरकर और गोलवलकर दोनों महाराजा हरि सिंह के मेहमान थे, और फरवरी 1947 में ही हिंदू सभा ने भारत में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र कश्मीर के समर्थन की घोषणा कर दी। 15 अगस्त, 1947 को उस समय RSS व महासभा ने भारतीय तिरंगे की जगह महाराजा का झंडा फहराया था।

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