G.K. Gaurav
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह बयान कि पंडित जवाहर-लाल नेहरू कश्मीर का भारत में विलय नहीं चाहते थे सरासर झूठा और निंदनीय है। 1. जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की प्रक्रिया के दौरान पंडित नेहरू कश्मीर की जनता के नेता शेख़ अब्दुल्ला के संपर्क में थे, वहीं सरदार पटेल जम्मू कश्मीर की तत्कालीन महाराजा श्री हरि सिंह के संपर्क में थे। दोनों नेता शेख़ अब्दुल्ला और हरि सिंह को इस बात के लिए समझा रहे थे कि जम्मू कश्मीर राज्य का भारत में विलय जम्मू कश्मीर की प्रजा के हित में है। 2. सरदार पटेल के निजी सचिव श्री वी शंकर ने ,जो ख़ुद भी जम्मू कश्मीर के विलय की बातचीत में सरदार पटेल का साथ निभा रहे थे, "सरदार पटेल चुना हुआ पत्र-व्यवहार" नाम से सरदार पटेल और अन्य नेताओं के बीच पत्राचार की पूरी पुस्तक तैयार की है। इस पुस्तक के प्रथम खंड में वी शंकर ने स्पष्ट लिखा है कि जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को लेकर पंडित नेहरू और सरदार पटेल समान रूप से रुचि ले रहे थे। इस पुस्तक में ही जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को लेकर कम से कम 50 पत्रों का संकलन है। अगर पंडित नेहरू जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की प्रक्रिया में शामिल नहीं होते तो क्या सरदार पटेल और पंडित नेहरू के बीच उस दौरान इतना सारा पत्र व्यवहार होता? 3. जम्मू कश्मीर में अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते में क़बायली हमले से क़रीब एक महीने पहले 27 सितंबर 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सरदार पटेल को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से बताया था कि पाकिस्तान कबाइलियों के भेष में जम्मू कश्मीर पर हमला करने वाला है। इस पत्र में पंडित नेहरू ने विस्तार से पाकिस्तान के षडयंत्र और रणनीति का ख़ुलासा किया। पंडित नेहरू ने यह भी कहा कि सर्दी आने के बाद जम्मू कश्मीर में युद्ध करना कठिन होगा इसलिए तत्काल जम्मू कश्मीर राज्य का विलय भारत में करा लिया जाए। इस पत्र के तुरंत बाद 2 अक्टूबर 1947 को सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर के महाराजा को पत्र लिखकर उनसे भारत में जल्द से जल्द ही विलय करने का आग्रह किया। 5 अक्टूबर 1947 को पंडित नेहरू ने एक बार फिर सरदार पटेल को तत्काल जम्मू कश्मीर के भारत में विलय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। दुर्भाग्य से पंडित नेहरू और सरदार पटेल के समझाने के बावजूद जम्मू कश्मीर के महाराजा तत्काल कोई फ़ैसला नहीं ले सके और जम्मू कश्मीर के भारत में विलय से पहले ही पाकिस्तान ने क़बायली हमला कर दिया। 4. वी शंकर ने स्पष्ट रूप से लिखा है जम्मू कश्मीर तो भारत में विलय कराने के लिए धारा 370 सरदार पटेल की एक उपलब्धि थी। धारा 370 के माध्यम से ही पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर और भारत के बीच एक पुल बनाया था। नेहरूजी और सरदार पटेल में इतनी ज़्यादा घनिष्ठता थी कि जब धारा 370 भारत की संविधान सभा में पास की गई उस दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू अमेरिका में थे और सरदार पटेल ने अपने निर्देशन में इस धारा को संविधान सभा में पास कराया था। 5. पंडित नेहरू ने अंतरराष्ट्रीय दबाव को नकारते हुए कश्मीर का भारत में विलय कराया। पंडित नेहरू ने भारत के संविधान सभा में भी स्पष्ट किया था कि न सिर्फ़ सांस्कृतिक कारणों से बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए भी, जम्मू कश्मीर की सीमा कई देशों से लगती है ऐसे में जम्मू कश्मीर का भारतीय संघ में विलय होना ही श्रेयस्कर है। महात्मा गाँधी के निजी सचिव श्री प्यारेलाल लिखित पुस्तक “पूर्णाहुति” में बताया गया है कि मोहम्मद अली जिन्नाह यहाँ तक कहा करते थे कि जब तक पंडित जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री हैं और शेख़ अब्दुल्ला कश्मीर की जनता के नेता है तब तक कश्मीर की जनता किसी भी सूरत में पाकिस्तान का समर्थन नहीं कर सकती। .@narendramodi जी, मैं आपको चुनौती देता हूँ कि आप उस समय का सरदार पटेल और पंडित नेहरू का पत्राचार पढ़ें उस समय की संविधान सभा में हुई चर्चाओं पर नज़र डालें। आपको ये भी पता चलेगा कि हिंदू महासभा व RSS और बाद में जनसंघ से जुड़े एक प्रमुख नेता बलराज मधोक ने खुले तौर पर कहा कि वे कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना चाहते हैं। सावरकर और गोलवलकर दोनों महाराजा हरि सिंह के मेहमान थे, और फरवरी 1947 में ही हिंदू सभा ने भारत में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र कश्मीर के समर्थन की घोषणा कर दी। 15 अगस्त, 1947 को उस समय RSS व महासभा ने भारतीय तिरंगे की जगह महाराजा का झंडा फहराया था।







