Gunahon Ka Devata
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🇺🇸 अमेरिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफ*रत
बीते समय में अमेरिका में मुस्लि*म समु*दाय को निशाना बनाकर नफ*रत, भेदभाव और हिं*सा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
मस्जिदों पर हम*ले, आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार और सोशल मीडिया पर नफरती बयान !!
One Question to all Mulleee log
-----Where is your All*ahhhh 🤣
#america
#muslimcommunity
#islamophobia
#humanrights
#gujaratupdatenews
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@GK010200 सिर्फ “कुत्तों को घी हज़म नहीं होता” ये साबित करने के लिए ऐसा बोला।
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ये शीशे के सामने खड़े हो जाए तो ख़ुद पर शर्म आने लगेगी।
ये झूठा-मक्कार-ढोंगी-फ़रेबी अभिनेता है।
जनता सच्चाई जान चुकी है। कितने दिन तक चुनाव आयोग का सहारा लेकर जीतते रहेंगे? #india
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ilahi Sheikh from Dhanori, Pune, had occupied a Hindu’s land for 10 years.
When the court ordered the Hindu owner to retake possession, ilahi with burqa-clad women and attacked the Hindu family.
The idol of Bajrang Bali was desecrated, pepper spray was thrown into their eyes, abuses were hurled, and the Hindu family was forced to flee from their own land.
@Dev_Fadnavis @PuneCityPolice Strict action must be taken without any laxity!
@DGPMaharashtra @CPPuneCity @kajal_jaihind
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नॉर्वे के क्राउन प्रिंस ने नागरिकता प्रदान करने के समारोह में एक महिला से मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन उस महिला ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया क्योंकि यह "इस्लाम में हराम है।"
हाथ मिलाना ‘हराम’ है, लेकिन गैर-मुस्लिम देश में शरण लेना, मुफ्त घर और भोजन लेना, और सभी कल्याणकारी योजनाओं पर जीवन बिताना ‘हलाल’ है.. 🤪😂

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@AjeetPataudi72 कुत्तों को घी हज़म नहीं होता, ये साबित करने के लिए टकले ने ऐसा कहा वरना अजय राय का सिर और दिल, दोनों साफ हैं।
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@PrashantTandy @umashankarsingh शोले फिल्म का एक डायलॉग याद आ गया ठाकुर कहता है डाकू से गब्बर से जाकर कहना कालिया रामगढ़ वालों ने कुत्तों को रोटी डालना बंद कर दिया और जो लोग हिंदू होकर गाय माता को कुर्बानी के लिए बेचते हैं वह कुत्ते से काम नहीं है मुस्लिम भाइयों को धन्यवाद
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सौ साल लगे गाय पर राजनीति का सही जवाब आने में:
आरएसएस सौ साल से गाय की राजनीति करता आया है. उद्देश्य गाय को बचाना नहीं था बल्कि इसके सहारे मनुवाद को स्थापित करना था और टार्गेट मुसलमान को बनाया गया.
गाय की राजनीति ने सबको डिफेंसिव कर दिया था, गांधी तक को. गाय भारत के संविधान तक में आ गई आर्टिकल 48 में.
इस पूरी शताब्दी में एक बात स्थापित कर दी गई कि मुसलमान गाय काटता है लेकिन एक दूसरा सच छुपाया गया कि गाय कटवाता कौन है, काटने के लिए बेचता कौन है और पैसा कौन कमाता है.
बंगाल के मुसलमानों ने इस छुपे हुए सच से पर्दा हटा दिया.
बकरीद पर बंगाल के मुसलमानों ने तय कर लिया कि वो गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे. हाहाकार मचा हुआ है क्योंकि गाय बेचने का काम हिंदू करते हैं जिनमें घोष समाज का बड़ा कब्जा है. बकरीद पर कुर्बानी के लिए मुंह मांगी कीमत मिलती है जो साल भर का खर्चा निकलती है व्यापारियों का. करोड़ों का कर्ज़ा लिया जानवार खरीदने और उसके रख रखाव में कि बकरीद में माल काटेंगे. मुसलमानों के फैसले ने सब किए धरे पर पानी फेर दिया. अब वहां मुसलमान हिंदू व्यापारियों से कह रहा कि अपनी मां को मत बेचो, ले जाओ और सेवा करो.
अब इस आंदोलन को बंगाल के बाहर भी निकलना चाहिये.
पहली बार गाय की राजनीति पर सही जवाब मिला है.
लोकतंत्र में कौन क्या खाता है ये उसका चुनाव है लेकिन अगर इस पर बीजेपी राजनीति करती है और बेकसूर लोग मारे जाते हैं तो रणनीतिक फैसले समय की मांग है.
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