Khantravels Shamsher

9.2K posts

Khantravels Shamsher banner
Khantravels Shamsher

Khantravels Shamsher

@KhanMahul

TRAVEL

Mahul Up India Katılım Nisan 2013
911 Takip Edilen183 Takipçiler
Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
मैं जहां रहता हूं वहां राज्य सरकार बीजेपी की है. केंद्र सरकार तो है ही. यहां साल में 365 दिन मछली मिलती है. बीजेपी को मछली-विरोधी कहने वाले झूठे हैं. फरेबी हैं. कोई भी भारतीय पार्टी मछली-विरोधी कैसे हो सकती है? देश के ज्यादातर लोग खाते हैं. हां, शाकाहारियों का भी सम्मान होना चाहिए. जो होता भी है.
हिन्दी
68
75
549
23.2K
Rajat Sharma
Rajat Sharma@RajatSharmaLive·
अपने आत्म सम्मान के लिए अगर कुछ छोड़ना पड़े, तो तुरंत छोड़ दो.
हिन्दी
3.8K
571
5K
492.1K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@yadavakhilesh जनपद आजमगढ़ फूलपुर पवई विधानसभा के जनता के हमदर्द श्री राम अवतार यादव जी
Khantravels Shamsher tweet media
हिन्दी
0
0
0
14
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@DineshRedBull अधिकारी क्या करें अधिकारी तो सिर्फ आदेश का पालन करते हैं सरकार से सवाल करिए
हिन्दी
0
0
0
13
Dinesh Kumar
Dinesh Kumar@DineshRedBull·
नवजात शिशु को गोद में लेकर एक महिला धूप में ही UPPCL दफ्तर पहुंची और रो पड़ी। उसका कहना है कि 15 दिनों में 6500 रुपये का बिल भरने के बावजूद बार-बार मीटर से बिजली काट दी जाती है, और बैलेंस भी नेगेटिव दिखाता है—जिससे वह बेहद परेशान है। लोग अब स्मार्ट मीटर को लेकर नाराज़गी जता रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों से समाधान की मांग कर रहे हैं।
हिन्दी
37
158
280
5.2K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@Profdilipmandal सारे आरक्षण खत्म कर देना चाहिए सिर्फ गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए
हिन्दी
0
0
0
13
Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
आदरणीय रामगोपाल यादव जी, मुसलमान भारत के बड़े हिस्से में छह सौ साल शासक रहे, जजिया वसूला, ब्रिटिश काल में नवाब और जमींदार रहे. ब्रिटिश फौज में 65% तक रहे. कांग्रेस से लेकर टीएमसी और सपा आदि शासन में वे दामाद की तरह रहे. आठ सौ साल के जलवे के बाद भी आज अगर उनकी हालत दलितों से बुरी हो गई है, तो मुसलमानों को अब घर वापसी कर मूल भारतीय धर्मों में लौट आना चाहिए. मान लीजिए उनकी समस्या, जहालत वगैरह मजहब और मौलवियों के कारण पैदा हुई समस्या है, जिसके बारे में रंगनाथ मिश्रा कमीशन रिपोर्ट में लिखा है. आपको पढ़ना चाहिए. दलितों ने शिक्षा को अपनाया. वे किसी उम्मा या मदरसों के चक्कर में नहीं पड़े. सपा नेता जिस रिपोर्ट के हवाले से मुसलमानों को दलितों से भी बुरी हालत में बता रहे हैं, वह सच्चर रिपोर्ट मोदी के पीएम बनने से 8 साल पहले यानी 2006 की है. इसमें मोदी जी को वे दोषी नहीं बता रहे हैं. अपने ऊपर ही टिप्पणी कर रहे हैं. मुसलमानों के सामने सपा गाजर लटका रही है. सपा जानती है कि वो मुसलमानों को मजहबी आधार पर आरक्षण नहीं दिला पाएगी. मोदी जी के रहते तो ये नहीं हो पाएगा.
हिन्दी
28
143
548
19.4K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@RubikaLiyaquat जाहिल औरत, मस्जिद में रिजर्वेशन नहीं होता जिसका दिल चाहे मस्जिद में पढ़े या घर पर
हिन्दी
0
0
0
2
Rubika Liyaquat
Rubika Liyaquat@RubikaLiyaquat·
मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में आरक्षण दिलवाने से शुरू करें? Charity begins at home है ना
Munazir Ali@Ali_munazir0

@RubikaLiyaquat Madam apne religion ki महिलाओं ke baare me bhi kuch आवाज उठा लेतीं ki unko bhi आरक्षण मिल जाता

हिन्दी
1.1K
4.4K
18.2K
418.2K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@news24tvchannel @AmitShah जनता को बेवकूफ समझ रखा है,अभी किसकी सरकार है असम में यूसीसी क्यूं नहीं लाए 10 साल में
हिन्दी
0
0
0
3
News24
News24@news24tvchannel·
"असम में हमारी सरकार बनेगी तो हम UCC लाएंगे और कोई चार शादी नहीं कर पाएगा" ◆ गृहमंत्री अमित शाह ने कहा @AmitShah | Amit Shah #UCC
News24 tweet media
हिन्दी
273
44
447
20.7K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@UPPCLLKO स्मार्ट मीटर से सप्लाई बंद है फिर भी बिल बढ़ रही है कैसे ? लूट मचा रखी है स्मार्ट मीटर वालों ने
हिन्दी
0
0
0
2
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@ajeetbharti उनका कथित इस्लाम विरोध संदिग्ध है, पोस्ट का सारांश यही है
हिन्दी
0
0
0
4
Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है दो बकचोदियाँ भाजपा के कंटेंट ग्रुप में चल रही हैं: १. PM मोदी ने जो ओबीसी में मुस्लिम आरक्षण की बात की वह तो 1784 या 1498 से ही है जब वास्को डी गामा भारत आया था। २. मैं यूजीसी पर बोलते बोलते अब फॉरेन विजिट, सर्वोच्च नागरिक सम्मान और बिल गेट्स की वैक्सीन पर क्यों कटाक्ष कर रहा हूँ। — पहले विषय में मेरा उत्तर यह है कि जब पीएम ओबीसी में मुस्लिम के होने पर छाती ठोकते हैं और उनकी पार्टी कर्नाटक और महाराष्ट्र में मुसलिम को मजहबी आधार पर आरक्षण देने पर बवाल करती है, तो यह दोगलापन है। यदि आपको मुसलमानों को आरक्षण से बाहर रखना है तो ओबीसी से बाहर करो। नहीं करना है तो ये टेक्निकल बकलोली मत करो कि मजहबी में नहीं देंगे पर जातिहीन इस्लाम में जातियाँ बना कर उन्हें हिन्दू ओबीसी के कोटे का आरक्षण दे देंगे। दूसरे विषय में यह कहना है कि मैं भाजपा का दास नहीं हूँ, स्वतंत्र पत्रकार हूँ। मेरा मन करेगा मैं यूजीसी पर पचास दिन तक लिखूँगा, मैं मोदी को मिलने वाले नागरिक सम्मान पर भी मजे लूँगा और मैं बिल गेट्स जैसे दरिंदों के सरकारी एक्सेस पर भी बोलूँगा। तुम यह तय करोगे कि मैं यूजीसी पर बोलते-बोलते अन्य विषयों पर न बोलूँ? मान लेते हैं कि मैं मोदी से एकदम घृणा करने लगा हूँ, तो क्या यह तुम बताओगे कि मुझे घृणा करना चाहिए या नहीं? कैसे-कैसे तर्क ले आते हैं लोग! भाई मेरे, मैं जब भाजपा के समर्थन में लिखता हूँ और वामपंथियों को पेलता हूँ, तो तुम मुझे अकारण ही ‘भाजपाई’ मान लेते हो। तुम्हें लगता है कि मैं पार्टी के समर्थन में हूँ, जबकि मैं केवल अपने विवेक के आधार पर नीतियों का समर्थन करता हूँ। किसी पीएम के विजन और क्रियान्वयन का समर्थन करता हूँ। वही पत्रकार का कार्य है। तुम अपनी आशाएँ क्यों बढ़ा लेते हो कि अब मैं पार्टी का दास हो जाऊँ? ‘पर आपको कर्नाटक पुलिस से…’ हाँ बचाया, पर क्यों बचाया? क्योंकि मैं दस साल से पार्टी और नेता की सकारात्मक नीतियों के समर्थन में लिखता रहा, जिसके प्रतिफल में यूपी पुलिस से ले कर कई भाजपा नेताओं ने लिखा-बोला। दस वर्ष का निवेश था मेरा, फिर भी हायकोर्ट में केस लड़ने में दो लाख रुपए मेरे गए। पंजाब में केस हुआ, दो-दो बार, कहाँ थी पार्टी? बंगाल में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? बिहार में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? तेलंगाना में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? हर केस में औसतन दो-तीन लाख लगे हैं, कितने केस के बारे में तुम या तुम्हारी पार्टी जानती है? कितने के बारे में किसी ने लिखा या बोला? नहीं लिखा क्योंकि मैंने कभी सहयोग माँगा नहीं। मैं जानता हूँ कि जो मैं लिख और बोल रहा हूँ, वह मेरा अपना विवेक है, पार्टी ने मुझे लिखने नहीं बोला, तो मैं यह आशा क्यों रखूँ कि पार्टी मेरा सहयोग करे? मुझे न तो किसी ने बनाया है, न फंड किया है, इसलिए मुझसे यह आशा क्यों रखना कि मैं पार्टी या संघ की आलोचना न करूँ, चालीसा पढूँ? हाँ, मेरे नाम पर कोई पार्टी से फंड ले रहा है, और इसके बारे में आप जानते हैं, तो आप यह आशा कर रहे हैं कि यह तो पाला हुआ कुत्ता है, भौंक क्यों रहा है मालिक पर, तो मैं बता दूँ कि उस दलाल को पकड़ो क्योंकि मैंने कोई पैसा नहीं लिया है। मैं पार्टी के पैसे लेने का मतलब जानता हूँ: अपनी स्वतंत्रता पर कुल्हाड़ी मारना। पाँच लाख ले कर आँख मूँद लेना वैसे विषयों पर जिस पर बोलना आवश्यक है। मुझसे वह संभव नहीं है, इसलिए मैं लूसिफर के लिए डॉक्टर फॉस्टस नहीं बनना चाहता। मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी यह डील। जो पार्टी वामपंथियों की सास के मरने पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय से शोक संदेश भेजती हो, और मेरी माँ के देहांत पर अपने ट्रोलों से भद्दी गालियाँ दिलवाती है, या चुपचाप देखती है, वह मुझसे यह आशा रखती है कि मैं पीएम का उपहास न करूँ, सरकार और बिल गेट्स के इतिहास पर न लिखूँ? मैंने जो लिखा वह दुर्भावना नहीं है, बिल गेट्स जैसों के इतिहास को ले कर है। वह व्यक्ति संदिग्ध है। भाजपा की आरक्षण की नीतियाँ संदिग्ध हैं, उनका कथित इस्लाम विरोध संदिग्ध है, उनकी कथनी-करनी का अंतर संदिग्ध है। तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है। मेरा समर्थन नीतियों का है, विजन का है, एक्जीक्यूशन का है। और हाँ, मैंने यह नाम, यह स्थान और यह दर्शक-पाठक-श्रोता अपने परिश्रम से बनाए हैं। जो मेरी आय है वह मेरे शब्दों के आधार पर, याचक वृत्ति से, क्यूआर कोड लगा कर भिक्षाटन कर के अर्जित किया है। वही मुझे पालता है। मेरे नाम से पेट पालते दलालों के घर और कार को देख कर मुझे ईर्ष्या नहीं होती क्योंकि जो मेरे प्रारब्ध में होगा वही होगा। यदि तुम्हें ऐसा लगता है कि पार्टी ही पाल रही है तो (तुम्हारे अनुसार) जो दे रहे थे, मत दो।
हिन्दी
232
1.9K
5.8K
119.4K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@Profdilipmandal बिकने वाले ये लिख रहे हैं इनको 3 लाख महीना मिलता है मुसलमानों के खिलाफ लिखने के लिए कल को कोई 5 लाख देगा तो ये साहब हिंदू के खिलाफ लिखने लगेंगे सभी लोग इनसे सावधान रहो
हिन्दी
0
0
0
20
Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
मैं नहीं कह रहा हूं. बाबा साहब की रचनाओं को जिसने भी पढ़ा है, वह बताएगा कि बाबा साहब के साथ पानी को लेकर एकमात्र हिंसा मुसलमानों ने की थी. "पवित्र" रमजान के महीने में. बाबा साहब की आत्मकथा "वेटिंग फॉर ए वीजा" पढ़ लीजिए. बाबा साहब ने ये भी लिखा है कि मुसलमान सुधर नहीं सकते.
डॉ रमाकान्त राय@RamaKRoy

प्रो दिलीप मंडल @Profdilipmandal कह रहे हैं कि दलितों के साथ जातिगत आधार पर छुआछूत असल में मुसलमान करते थे। एकमात्र घटना बाबा साहब के साथ मुसलमानों ने की।

हिन्दी
92
168
553
48.6K
Sushant Sinha
Sushant Sinha@SushantBSinha·
राहुल गांधी जी की बातों में तर्क उतनी ही मात्रा में होता है जितना रसगुल्ले में नमक। फिर भी कुछ लॉजिकल प्रश्न हैं जो भारत अमेरिका डील को लेकर पूछे जाने चाहिए 👇🏾
हिन्दी
1.5K
734
2.9K
129.5K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@jpsin1 इतनी लम्बी पोस्ट लिखने का मतलब है आप भी अपनी बीवी से परेशान हैं
हिन्दी
0
0
0
14
🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳
पत्नी ने अपमान किया मारने की धमकी.. तो पति खुद को चप्पल मारने लगा... 1.जब पत्नी के शब्दों ने पति को इस हद तक तोड़ दिया कि वह खुद को ही मारने लगा… 2.रेलवे स्टेशन पर तमाशा नहीं,एक टूटे हुए इंसान की चीख है ये… 3.ये गुस्सा नहीं,अपमान से टूटा हुआ आत्मसम्मान है 4.मर्द रोता नहीं कहा जाता है,लेकिन आज ये मर्द खुद को सज़ा दे रहा है 5.जब रिश्ता बोझ बन जाए और इंसान खुद से हार जाए 6.बीच स्टेशन,भीड़ के सामने,एक पति पूरी तरह टूट चुका है रेलवे स्टेशन पर पति-पत्नी का झगड़ा,लेकिन ये सिर्फ झगड़ा नहीं है,पति की आंखों में थकान,चेहरे पर बेबसी और शब्दों में टूटा हुआ आत्म सम्मान साफ दिख रहा है, पत्नी के अपमान से इतना आहत कि पति चप्पल उतारकर खुद को मारने लगता है और कहता है, अब मुझसे नहीं होगा,मार लो मुझे… ये वीडियो बताता है कि रिश्तों में लगातार तिरस्कार और मानसिक दबाव किसी इंसान को किस हद तक तोड़ सकता है,घरेलू हिंसा सिर्फ मार-पीट नहीं होती, मानसिक अपमान भी उतना ही खतरनाक होता है.. मर्द हो या औरत,सम्मान के बिना कोई भी रिश्ता जिंदा नहीं रह सकता आज कल लड़कियों को शान्ति नहीं चाहिए वो इस हद तक परेशान कर रही हैं कि लड़के सिर्फ मानसिक तनाव झेल रहे, इस तरह से परेशान होने के बाद वह खुद ही छोड़ने को राजी हो जाते हैं जो कुछ लड़कियों का उद्देश्य भी होता है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे पुरुषों को लगातार दबाया जा रहा है क्योंकि पुरुषों के लिए कोई भी कानून नहीं है पुरुष हमेशा असहाय महसूस करता है जब अपमान होता है साभार
हिन्दी
10
64
171
6.3K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@Profdilipmandal राजनीति में हो तो गाली सुनोगे ,राजनीति ही धूर्त झूठ फरेब नफरत धार्मिकता कट्टरवाद क्षेत्रवाद आतंकवाद करवाती है सब राजनीतिज्ञ लोग ही करते हैं,मंडल साहब भी बहुत बड़े राजनीतिज्ञ है।
हिन्दी
0
0
0
78
Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
25 साल हो गए, तब से ही नरेंद्र मोदी को तेली-तेलिया कह कर गाली दी जा है, तो कोई कहता है कि उनका मुंह देखने से दिन खराब हो जाता है, तब से ही उनको जूते मारो चार का आह्वान किया जा रहा है और नारों में उनकी कब्र खोदी जा रही है, 25 साल से कोई उनको अनपढ़ बोल रहा है, तो कोई उनकी मां को निशाना बना रहा है, मणिशंकर अय्यर और प्रियंका ने मोदी को मंचों और माइक से कटु वचन कहे, ... पर राजर्षि मोदी इन सबसे बेपरवाह होकर सिर्फ राष्ट्र निर्माण यज्ञ में लगे हैं. वे महादेव शिव के भक्त हैं. करुणा के सागर तथागत गौतम बुद्ध उनकी प्रेरणा हैं. मोदी अपमान और गालियों का सारा हलाहल अर्थात जहर अपने कंठ में ग्रहण कर रहे हैं. कोई कटुता नहीं, कोई विषाद नहीं. उनको गालियां देने वाले कई लोग आज उनके प्रशंसक हैं. कभी अफसरों की खुराफात तो कभी जड़मति प्रोफेसरों की मूर्खता और कभी कोर्ट द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर राजकाज में नाक घुसड़ने से विवाद होता है. विवाद कई बार विपक्ष भी अपने स्वार्थ में शुरू करता है. कई विवाद तो मीडिया खड़े करता है. लेकिन गालियां हमेशा मोदी जी के हिस्से आती हैं. रायता हमेशा कोई और फैलाता है, लेकिन समेटते मोदी जी हैं. लेकिन ये न भूलिए कि मोदी सबके हैं, समावेशी हैं. वे सबका ध्यान रखेंगे, किसी का अहित नहीं होगा. निश्चिंत रहें. राष्ट्र ने बार बार उन पर भरोसा किया है. मोदी जी ने आज तक कभी निराश नहीं किया. इसलिए 25 साल से वे अपराजित हैं. निरंतर अजेय. यही उनकी सेवा का पुरस्कार है. इतिहास ने उनको विकसित भारत बनाने का महान कार्यभार सौंपा है बाकी सब शोरगुल है.
हिन्दी
280
261
980
83.3K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@Profdilipmandal आप की दिन भर पोस्ट सिर्फ मुस्लिमों के खिलाफ आती रहती है । इसके इलावा भी देश में लाखों मुद्दे हैं जनता अब समझ रही है लोगों को बेवकूफ बनाना छोड़ दो चंद पैसों के लिए जमीर न बेचो
हिन्दी
0
0
0
64
Dilip Mandal
Dilip Mandal@Profdilipmandal·
क्या मुसलमानों की भारतीय धर्मों में घर-वापसी की बड़ी लहर आने वाली है? बड़ी संख्या में मुसलमान बद्रीनाथ-केदारनाथ-हरिद्वार आदि के मंदिरों में जाने को उत्सुक हैं. मना करने पर पूरे सोशल मीडिया में दुख का माहौल है. मुसलमानों के सेक्युलर साथी भी रो रहे हैं कि हाय देखो, बेचारे मुसलमानों को मंदिर नहीं जाने दे रहे हैं! जमीयत और बड़े बड़े उलेमा आदि कह रहे हैं कि मुसलमानों को मंदिर जाने देना चाहिए. रोकने को वे जुल्म और अत्याचार बता रहे हैं. हजारों की संख्या में फेसबुक और इंस्टा तथा एक्स पर पोस्ट दिख रहे हैं कि मंदिर जाने से रोके जाने से उनको तकलीफ है. मुसलमान तो डांडिया और गरबा आदि में जाने को भी बहुत उत्सुक रहते ही हैं. आखिर वे लोग हैं तो भारतीय ही. इसी धर्म परंपराओं के. किसी समय में तलवार के डर या जजिया से बचने या पद या काम या जमीन के लालच में धर्म बदल लिया था. पर डीएनए तो वही पुराना है. परदादा के परदादादा और परनानी की परनानी तक मंदिर ही तो गए हैं. अब भी खून तो वही है. कई हिंदू संस्कार वे अब भी मानते हैं, कई इलाकों में तो सिंदुर भी लगाते हैं. संगीत भी सुनते और बजाते हैं, जबकि इस्लाम में मना है. दरगाह वगैरह की पूजा इस्लामिक नहीं है. ये भारत में ही चलता है. ये सब भारतीय असर है. वैसे भी निरंतर सुधारोन्मुखी भारतीय धर्मों में, जहां औरतों और तमाम मान्यताओं का सम्मान है, लौट आना श्रेयकर होगा. इससे उनका शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और महिलाओं के काम पर जाने से परिवारों का आर्थिक स्तर भी सुधरेगा. मुसलमान बन कर उनको मिला क्या? आज वे भारत के सबसे दरिद्र और सबसे निरक्षर धार्मिक समूह हैं. रंगनाथ मिश्रा कमीशन और कपिल सिब्बल का तो यही रोना है कि हाय, मुसलमान दलितों से भी पीछे रह गए. ये मिला, मुसलमान बन कर. छह सौ साल का शासन भी किसी काम नहीं आया. मुसलमानों में इस बारे में चिंतन चल रहा होगा. अब उनका डीएनए फिर से वापस लौटने के लिए उछाल मार रहा है. स्वागत करना चाहिए. क्या हिंदू ये उदारता दिखाएंगे? धर्म गुरुओं को इस प्रश्न पर विचार करना चाहिए. मेरी निजी राय है कि लौटने देना चाहिए. अपने ही लोग थे.
हिन्दी
179
316
1.1K
73.4K
विनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్
गत कुछ वर्षों में देश में बढ़ती धर्मांतरण, लव जिहाद, थूक जिहाद, मूत जिहाद और इसी प्रकार की अन्य घटनाओं से आहत हिंदू समाज को अपने धर्म स्थलों की पवित्रता, सुचिता व सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु कुछ कड़े कदम लेने ही थे। अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर में एक जिहादी द्वारा सरेआम नमाज पढ़ने का कुत्सित प्रयास, अमृतसर के श्री हरि मंदिर साहिब के पवित्र सरोवर में कुल्ले कर उसे अपवित्र करने तथा कावड़ जैसी पवित्र धार्मिक यात्राओं के दौरान अपनी पहचान और भेष छुपा कर विधर्मी लोगों द्वारा हिंदुओं से छल कपट करते हुए रंगे हाथों पकड़े भी गए। इन सब घटनाओं ने संपूर्ण हिंदू समाज को बेहद आहत किया। इस बारे में श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा वहां गैर हिंदुओं के प्रवेश निषेध संबंधी निर्णय का सर्वत्र स्वागत किया ही जाना चाहिए। क्योंकि हिंदू मंदिर या तीर्थ कोई पर्यटन स्थल नहीं अपितु आस्था विश्वास व धर्म के महान केंद्र होते हैं। वहां अनास्थावान लोगों का प्रवेश वर्जित होना ही चाहिए। इससे जिहादियों का देव भूमि को दैत्य भूमि बनाने का दिवास्वप्न भी चकनाचूर हो सकेगा।
हिन्दी
32
126
381
11.4K
Times Now Navbharat
Times Now Navbharat@TNNavbharat·
'अगड़ी जाति में पैदा होना क्या गुनाह..' UGC के प्रावधान में ऐसा क्या है जिससे सामान्य वर्ग हुआ नाराज? जानिए @SushantBSinha की 'न्यूज़ की पाठशाला' में देखिए, UGC के नए नियमों पर मचा कोहराम..कंप्लीट चैप्टर #NewsKiPathshala | #UGCRegulations | General Category | UGC Regulations | #PMModi | BJP | #Congress
हिन्दी
166
1.4K
2.4K
43.4K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@anamikamber आप जैसे घटिया लोगों को आवाज़ से दिक्कत नहीं अज़ान से दिक्कत है दिमाग में जो नफरती कीड़ा काटता रहता है न एक दिन दिमाग फट जाएगा तुम्हारा अगर आवाज़ से दिक्कत होती तो हर आवाज़ का विरोध करती सिर्फ अज़ान का नहीं जबकि अज़ान सिर्फ 3 मिनट में खत्म हो जाती है
हिन्दी
6
0
6
566
Anamika Jain Amber
Anamika Jain Amber@anamikamber·
निवेदन-अजान के समय माइक की आवाज़ थोड़ी कम कर दी जाए। जवाब- चुप्पी फिर सीधा 50 फ़ुट का खंभा, 13 स्पीकर और हनुमान चालीसा चालू। मुद्दा अज़ान या चालीसा का नहीं, अहंकार और अनसुनी का है।अगर बात सुन ली जाती,तो शायद आवाज़ें टकराती नहीं। अब भाषा ही यही समझ आएगी तो यही बोलनी पड़ेगी
हिन्दी
92
407
1.7K
27.2K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@dranuj_k आप की पोस्ट में यूपी सरकार से एक भी सवाल नहीं यही अंधभक्ति है
हिन्दी
0
0
0
15
Dr Anuj Kumar
Dr Anuj Kumar@dranuj_k·
ये भारत है, यहाँ जान यूँ ही सस्ती है। हमारे यहाँ ऐसा ही होता है, हमें ऐसे ही मरने की आदत है। कभी भीड़ में फँसकर कुचल जाने से, कभी सड़क चलते गड्ढों में गिर जाने से, कभी सड़क किनारे जमा पानी में करंट आने से, कभी मेले में भगदड़ मच जाने से, कभी बेसमेंट में पानी भर जाने से, कभी फ्लाईओवर गिरने से, कभी पुल टूट जाने से, कभी ट्रेन के टकराने से, कभी दवाओं की कमी से। पर हमें बोलना नहीं है। क्योंकि अगर हम बंगाल में मरे तो हम भक्त हैं, और महाराष्ट्र में मरे तो चमचे हैं। अगर उत्तर प्रदेश में मरे तो कांग्रेसी हैं, और बैंगलोर में मरे तो भाजपाई हैं। क्योंकि अगर हम सड़क किनारे नमाज़ पढ़ने से लगे जाम में फँस कर मरे तो मुस्लिम विरोधी हैं, और रामनवमी के जुलूस में फँसकर मरे तो हिंदू विरोधी हैं। दरअसल हम इनमें से कोई नहीं हैं — हम सभी कबीले में बँटे मूर्ख लोग हैं, जो बस अपनी-अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं… #NoidaAccident
हिन्दी
28
146
496
10.8K
Khantravels Shamsher
Khantravels Shamsher@KhanMahul·
@amrohapolice @VoxShadabKhan भीड़ हत्या कब बंद होगी ?, एक्सीडेंट कहीं भी किसी से भी हो सकता है मामूली टक्कर से भी लोग हत्या कर देते हैं इंसानियत मर चुकी है कानून का खौफ खत्म हो चुका है ।
हिन्दी
0
0
2
27
Amroha Police
Amroha Police@amrohapolice·
दिनांक 11.01.2026 को दो पक्षो के मध्य सड़क दुर्घटना को लेकर हुए विवाद में घायल राशिद हुसैन की उपचार के दौरान मृत्यु हुई। पंचायतनामा व पोस्टमार्टम की कार्यवाही पूर्ण कर शव परिजनों को सुपुर्द किया गया है। तहरीर के आधार पर थाना डिडौली में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है । शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु दबिश दी जा रही है। कानून व्यवस्था सामान्य है।
हिन्दी
1
0
1
222