
ब्राह्मणों के खिलाफ सोची समझी साज़िश के तहत प्रपंच तैयार किया जा रहा है… अवसरवादी ब्राह्मण के बाद ब्राह्मणवादी पितृसत्ता जैसे सवाल BHU के MA की परीक्षा में पूछे गए। पितृसत्तात्मक व्यवस्था तो भारतीय समाज में दशकों से बनी हुई है इसको जाति से जोड़ कर BHU के गुरूजी कौन सा इतिहास पढ़ा रहे हैं? ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, दलित हर जगह यही व्यवस्था रही है। इसलिए सिर्फ़ ब्राह्मण लिख कर नया नैरेटिव तैयार किया जा रहा है!!





























