Mayank
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बंगाल, असम के चुनाव परिणाम ध्रुवीकरण की राजनीति का अंत और शुरुआत दोनों है। टीएमसी के पक्ष में मुस्लिम मतदाता एकजुट खड़े दिखे, ऐसे में हिन्दू मतदाता का बड़ा तबका भी दूसरी तरफ एकजुट हो गया। परिणाम सबके सामने है। केवल मुस्लिम मतदाताओं को रिझाकर और हिन्दू वोट को दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अगड़ों में बांटकर अब सत्ता हासिल नहीं की जा सकती। वैसे ये सबक बीते दिनों बिहार ने भी सिखाया था। जाहिर है सेक्युलरिज्म के नाम पर दूसरी सबसे बड़ी आबादी का तुष्टिकरण होगा तो पहली सबसे बड़ी आबादी टूटने के बजाए प्रतिक्रियास्वरूप, चुनाव में ही सही एकजुटता का प्रदर्शन करेगी। सच्चे सेक्युलर वैल्यू के साथ आज देश की कोई पार्टी खड़ी नहीं है। हद से ज्यादा तुष्टिकरण एक तरफ है तो दूसरी तरफ खुल कर अब कहा जाने लगा है कि उनका वोट मिलता नहीं, चाहिए भी नहीं।



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