
हम है राही प्यार के
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हम है राही प्यार के
@RameshBarwal4
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जब सोनम वांगचुक नहीं रहेंगे तब यह देश उन्हें किसी दिन याद करेगा. उनकी भूख हड़ताल का आज 17वां दिन हैं. वजन 9 किलो कम हो चुका है. हालत दिन ब दिन खराब हो रही है. उन्होंने 20 जुलाई को पार्लियामेंट मार्च का आवाहन किया है. मुझे नहीं लगता कि तब तक वो सर्वाइव कर पाएंगे. इस दौरान कल तीसरी बार जंतर-मंतर गया लेकिन जब लौटा तो उदास था. जंतर-मंतर मेरे जेहन में एक घर की तरह बसा है. वहां से मैं कभी उदास नहीं होकर नहीं आया. लेकिन कल था. जंतर-मंतर मुझे उम्मीद देता रहा है. आज से नहीं 2005 से. जब गहरा होना होता है तो जंतर-मंतर जाता हूं. जंतर-मंतर ने मुझे हमेशा तरोताजा करके भेजा लेकिन कल नहीं कर पाया. उसमें अब वो ताकत नहीं रही. उसका चरित्र बदल गया है. इसी जंतर-मंतर पर मैंने विस्थापन के विरुद्ध मेधा पाटकर का प्रदर्शन देखा है. बडवानी के आदिवासियों का नृत्य देखा है. बुकर मिलने के बाद अरुंधति का ग्लैमर देखा है. आमिर खान को नर्मदा बचाओ आंदोलन के पक्ष में शामिल होते देखा. तमिलनाडु से चलकर दिल्ली आये किसानों को नर कंकालों के साथ संसद को चुनौती देते देखा. पहले अन्ना आंदोलन के दौरान का खाली मंच देखा है जिसमें सिर्फ भारत मां की तस्वीर थी. निर्भया आंदोलन के दौरान शीला दीक्षित का कुचला जाना देखा है. केजरीवाल को हीरो बनते देखा है. मणिपुर की महिलाओं के समर्थन में भारत के लेखकों-पत्रकारों-बुद्धिजीवयों का मार्च देखा. जिसका कोई नहीं था इस देश में उसका जंतर-मंतर था. अब जंतर-मंतर का वो जादू खो गया है. सोनम वांगचुक और कॉक्रोच जनता पार्टी की राजनीति की मैं तगड़ी समीक्षा कर सकता हूं. इसकी खामियों से परिचित हूं. आंदोलन के स्वरूप, लक्ष्य और तौर-तरीकों से कतई सहमत नहीं हूं. इस पर लंबी बात की जा सकती है लेकिन अभी वह वक्त नहीं है. एक नागरिक के तौर पर चाहता हूं कि सोनम वांगचुक जिंदा रहें. उन्हें बचाने की जिम्मेदारी जितनी हमारी है, उतनी ही मोदी सरकार की है. सबसे बढ़कर भारतीय गणराज्य की है. सिर्फ वांगचुक ही नहीं वहां प्रदर्शन कर रहे आईसा के नेहा, मनीष और उनके दोस्तों को भी बचाने की जिम्मेदारी भारतीय गणराज्य की है. जब आईसा के छात्र नेताओं ने भूख हड़ताल शुरू की थी तब वो छह थे. अब वहां तीन बचे हैं. तीन अस्पताल पहुंच गये. ये छात्र किसलिये अपना जीवन दांव पर लगा रहे हैं? शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ. गलत क्या है इसमें? जुलाई की जिस उमस में बिना एसी के आप एक दिन नहीं बिता सकते वहां पेड़ के नीचे 15 दिन तक भूख हड़ताल करना बहुत गहरी जिजीविषा और प्रतिबद्धता की मांग करता है. जानता हूं सोनम वांगचुक के रहने न रहने से दिल्ली के सत्ताधीशों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन उनकी कमी जहां महसूस की जायेगी वह लेह का इलाका है. अगर दिल्ली में वांगचुक के साथ कुछ हुआ तो लेह की खामोश वादियां अंदर से सुलग जाएंगी. उनकी अभिव्यक्ति किस रूप में होगी नहीं कह सकता लेकिन एक जिम्मेदार राज्य के तौर पर भारत को ऐसी कोई गल्ती नहीं करनी चाहिये जिससे चीन से सटी सीमाओं में रिक्कता पैदा हो. लेह में रहने वाले लोग और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोग इसी देश के नागरिक हैं. पाकिस्तान के एंजेट नहीं. इस सरकार के चरित्र से मैं वाकिफ हूं इसलिये किसी भी प्रकार की सहानुभूति और संवेदना की अपेक्षा नहीं रखता लेकिन नागरिकों का दायित्व है कि वो सोनम वांगचुक और प्रदर्शन कर रहे छात्रोंं का समर्थन करे. भारत को यह साबित करना पड़ेगा कि वो सड़ी हुई चेतना और मरी हुई आत्माओं का देश नहीं है. @vdiimc


*म्हारा केसरिया कल्याण* आज दिनांक 13/7/2026 (आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी/ सोमवार) के डिग्गीपुरी तीर्थ से श्री कल्याण जी महाराज के प्रातः श्रृंगार झांकी के *LIVE दिव्य दर्शन*


पांच सौ इकहत्तरवां दिन (day 571) for CCL I will keep demanding for what is rightful. Bankers are mothers too. I demand #CCLforbankers @RahulGandhi @FinMinIndia @narendramodi @nsitharamanoffc @ChairmanIba @UFBUIndia @ChVenkatachalam @NCWIndia @India_NHRC @AIBEAofficial


*म्हारा केसरिया कल्याण* आज दिनांक 12/7/2026 (आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी/ रविवार) के डिग्गीपुरी तीर्थ से श्री कल्याण जी महाराज के प्रातः श्रृंगार झांकी के *LIVE दिव्य दर्शन*














