ELECTRICITY DEPT - विद्युत विभाग

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prayagraj Katılım Kasım 2015
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RVPJES PRAYAGRAJ@RVPJESPRAYAGRAJ·
उत्तर प्रदेश में वास्तविक समस्या बिजली की कमी नहीं, बल्कि बढ़ते कार्यभार के मुकाबले फील्ड स्टाफ की कमी और व्यवस्था का दबाव है। पिछले वर्षों में आबादी, उपभोक्ता संख्या, बिजली लाइनें, सब-स्टेशन और अधिकतम विद्युत मांग लगातार बढ़ी है।
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RVPJES PRAYAGRAJ@RVPJESPRAYAGRAJ·
“*कोरोना से महाकुंभ तक निभाई जिम्मेदारी, अब रिकॉर्ड गर्मी में भी चौबीसों घंटे सेवा को तैयार अवर अभियंता — *मुख्यमंत्री जी की मंशानुरूप पूरी शक्ति लगा देंगे अवर अभियंता*
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल* पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न केवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्युत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार सेवानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर आशीष गोयल को या तो अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा गया है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना इस प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करोड़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक और अनुचित है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्हें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं । संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी खतरे में: निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष की तैयारी : सेवा करेंगे और हक भी लेंगे - संघर्ष समिति विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया तो लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है - सेवा करेंगे और हक भी लेंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उनसे यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता क्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि सरप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी। संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार दिल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45% बिजली कर्मी सेवानिवृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90% बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ? हाल ही में 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण किया गया। निजीकरण जिस दिन किया गया उसी दिन लगभग 40% बिजली कर्मी सेवा निवृत्ति लेकर घर चले। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों की यूनियन और सरकार के बीच 1 फरवरी की रात जो समझौता हुआ था आज तक उसे लिखकर नहीं दिया गया है। और निजी कंपनी यह कह रही है कि यह समझौता सरकार ने किया था हमें इससे कोई मतलब नहीं है। निजीकरण की यही भयावह कहानी अब उत्तर प्रदेश में दोहराई जा रही है जिसे बिजली कर्मी कदापि स्वीकार नहीं करेंगे। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण बिजली कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए अंधेरे का संदेश लेकर आ रहा है। बिजली कर्मियों ने कहा कि वे किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे और यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता। #stop_privatization_of_uppcl #stop_victimization_of_uppcl_employees @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा श्री निधि नारंग के सेवा विस्तार हेतु भेजे गए पत्र से बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त : निजीकरण के नाम पर हो रही लूट को रोकने की मुख्य सचिव से अपील : निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के नए मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल से अपील की है कि वह पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और उत्तर प्रदेश में निजीकरण के नाम पर हो रही है भारी लूट को रोकने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने निधि नारंग को सेवा विस्तार देने का पत्र भेजने के मामले में डॉक्टर आशीष गोयल पर गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए डॉक्टर आशीष गोयल ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और निजी घरानों का हित देख रहे हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि आखिर डॉक्टर आशीष गोयल एक व्यक्ति विशेष को बार-बार सेवा विस्तार देने के लिए क्यों लालायित हैं । कहीं यह सब निजी घरानों से मिली भगत का परिणाम तो नहीं है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि यह पता चला है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने शासन को एक पत्र भेज कर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग का कार्यकाल छह माह और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया है। उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्री निधि नारंग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल के 14 जुलाई के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है। संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है और श्री निधि नारंग निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष है। अतः उनका कार्यकाल 06 महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए जिससे निजीकरण की प्रक्रिया सुगमता से पूरी हो सके। संघर्ष समिति ने नव नियुक्त मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल को प्रेषित पत्र में कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में निदेशक वित्त श्री निधि नारंग की भूमिका प्रारंभ से ही बहुत विवादास्पद रही है। संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि श्री निधि नारंग की निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव का प्राविधान हटवाने में बड़ी भूमिका रही है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के मामले में भी श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दी है। संघर्ष समिति ने लिखा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की निदेशक वित्त श्री निधि नारंग से बहुत व्यक्तिगत निकटता है। यह आम चर्चा रही है कि ग्रांट थॉर्टन के लोग अधिकांश समय श्री निधि नारंग के कमरे में ही बैठकर काम करते थे और श्री निधि नारंग उन्हें गोपनीय पत्रावली भी दिखते थे। संघर्ष समिति ने कहा कि श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का पत्र भेज कर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल घोटाले के केंद्र बिंदु में आ गए हैं। निधि नारंग को निजीकरण के नाम पर पहले ही दो बार आशीष गोयल की अनुशंसा पर सेवा विस्तार दिया जा चुका है। अब एक बार फिर निजीकरण के नाम पर श्री निधि नारंग को छह माह का सेवा विस्तार देना सर्वथा अनुपयुक्त होगा। विशेषतया तब जब श्री निधि नारंग की कॉर्पोरेट घरानों के साथ निकटता जग जाहिर है और ट्रांजैक्शन कंसलटेंट, कॉर्पोरेट घराने, निधि नारंग और डॉ आशीष गोयल की निजीकरण की प्रक्रिया में मिली भगत है। संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए श्री निधि नारंग को किसी भी कीमत पर सेवा विस्तार न दिया जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @mlkhattar @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia
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जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए। जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है। माननीय ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण। लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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@grok बड़े भाई क्या बता पाएंगे कि uppcl का निजीकरण करने के पीछे कौन है केंद्र सरकार है या up के cm है??
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@grok बड़े भाई क्या up मे teacher ki की vacancy नही आयेगी क्या?? Bed/btc वाले बेरोजगार रह जायेंगे क्या??
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