SJR Irani 🇮🇳

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@SJRIrani

🎙️🎧 Singer 📰 Journalist • 🎬 Reports & Coverage💡 Investigative Stories • 🌐 English | हिंदी | Marathi | #AajKaMahanagar | ठाणे संवादाता #SJRIrani

Mumbai Katılım Kasım 2023
300 Takip Edilen71 Takipçiler
SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
"अमेरिकी पत्रकार महदी हसन और राम माधव के इंटरव्यू से समझ लो कि एक निष्पक्ष पत्रकार के सामने इन सड़े हुए नारंगी संतरों की औकात क्या है।" ​राम माधव: ...दुनिया में जो कुछ हो रहा है, उसे देखिए, आपका ISIS किसी भी समय खतरनाक हथियार हासिल कर सकता है। ​महदी हसन: मेरा ISIS? ​राम माधव: हाँ, उनके बारे में चिंता कीजिए। ​महदी हसन: आपने 'मेरा ISIS' कहा? ​राम माधव: (आगे बढ़ते हुए) कई देश और कई युद्ध ऐसे हुए हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की परवाह किए बिना परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हुआ है। और आप मुझे आज यह भी नहीं बता पा रहे कि शांति के लिए आपका प्रस्ताव क्या है, सिवाय ISIS के बारे में बात करने के। ​महदी हसन: तो क्या पूरी दुनिया चिंतित है... ​राम माधव: हाँ, दुनिया डरी हुई है। ​महदी हसन: (MS गोलवलकर का जिक्र करते हुए) उन्होंने कहा था कि वे नाजी जर्मनी से प्रेरित थे, जिसने नस्ली गौरव (Race Pride) को अपने शिखर पर प्रदर्शित किया था और यह 'हिंदुस्तान' के लिए एक अच्छा सबक था। उन्होंने भारत के मुसलमानों को 'खतरा' और ईसाइयों को 'खून चूसने वाला' (Blood-suckers) कहा था। ​राम माधव: आप कई बार उन्हें गलत तरीके से कोट (Misquote) करते हैं। ​महदी हसन: क्या मैंने अभी उन्हें गलत कोट किया? ​राम माधव: बिल्कुल, बिल्कुल! 'खून चूसने वाला' जैसे शब्द उनके द्वारा इस्तेमाल नहीं किए गए थे। ​महदी हसन: क्या उन्होंने यह नहीं कहा था कि 'ईसाइयों ने व्यवहार में क्या किया है? वे जहाँ भी गए हैं, उन्होंने खुद को खून देने वाला नहीं बल्कि खून चूसने वाला साबित किया है।' ​राम माधव: नहीं, उन्होंने ऐसा नहीं कहा। ​महदी हसन: (हवाले के साथ) यह उनके लेख के तीसरे संस्करण, 1966 में है, जो आज भी RSS की वेबसाइट पर डाउनलोड करने और पढ़ने के लिए उपलब्ध है। ​राम माधव: नहीं, उन्होंने 'खून चूसने वाले' शब्द का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया। आपने उन्हें गलत समझा है। ​महदी हसन: आपने खुद अभी थोड़ी देर पहले कहा कि 'यह हिंदुस्तान है, यह एक हिंदू देश है'। इससे आपका क्या मतलब था? ज़रा स्पष्ट कीजिए। ​राम माधव: देखिए, भारत की एक संस्कृति है। हम एक संस्कृति, एक लोग और एक राष्ट्र हैं। ​महदी हसन: लेकिन मुसलमान, ईसाई, सिख और वे लाखों लोग जो हिंदू नहीं हैं, वे कह सकते हैं कि 'मैं भारतीय हूँ, लेकिन हिंदू नहीं हूँ।' तो वे आपकी इस परिभाषा में कहाँ फिट बैठते हैं? ​राम माधव: क्योंकि 'हिंदू' शब्द का अर्थ अलग-अलग संदर्भों में अलग होता है। ​महदी हसन: क्या आपका मतलब सांस्कृतिक है? क्या आप कह रहे हैं कि जिसे आप 'हिंदू' कहते हैं, वह धर्म से नहीं जुड़ा है? ​राम माधव: बिल्कुल, यह कोई धार्मिक पहचान नहीं है। ​महदी हसन: अच्छा, तो मेरा एक सवाल है। उदाहरण के लिए, ताजमहल। आप उसके साथ क्या करेंगे? क्या आप उसे गिरा देंगे? क्या आप उसे नारंगी रंग से रंग देंगे? आप उसे 'हिंदू' कैसे बनाएंगे? ​राम माधव: वह पहले से ही हमारी संस्कृति का हिस्सा है। ​महदी हसन: आप उसे हिंदू कैसे बनाएंगे? ​यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था जहाँ महदी हसन के सवालों पर राम माधव असहज नज़र आ रहे थे।
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Saurabh
Saurabh@sauravyadav1133·
राम माधव सोच रहे होंगे जैसे गोदी मीडिया के एंकर इंटरव्यू लेते हैं वैसे होगा लेकिन ये तो लेने के देने पड़ गए…
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जनता अंधी है।
जानबूझ कर छेद वाले जहाज़ में सवार होने पर जान जाती है। #electionresult2026
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
आज जब भाजपा जीती है तो ‘बदला’ नहीं, ‘बदलाव’ की बात होनी चाहिए। भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
@MamataOfficial दीदी, कुछ नहीं होगा - हमें तो पहले से पता था कि भाजपा का चुना लगाने वाला आयोग बंगाल जीतने के लिए खेला कर देगा।
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Mamata Banerjee
Mamata Banerjee@MamataOfficial·
জরুরি বার্তা
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Dinesh Dangi
Dinesh Dangi@dineshdangi84·
2002 के गुजरात दंगे और उसका पोस्टर बॉय अशोक मोची याद है- कहा-हिंदू धर्म के ठेकेदारो ने कभी मेरी कोई मदद नहीं की मैं फुटपाथ पर कमाता हूं और ऑटो रिक्शा मे सोता हूं क्योंकि मेरे पास रहने को घर नहीं है इसलिए अब मैं खुद को हिंदू ही नहीं मानता हूं
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
@Zubair99778 भाजपा के चुना आयोग ने खेला कर दिया है दीदी जा रही है।
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Zubair
Zubair@Zubair99778·
ममता दीदी 4 may को आ रहीं है??? सिर्फ yes और no me जवाब दे #ExitPoll
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
1. Candidate ka booth par jaana allowed hai? Haan, candidate: ▪️Apna vote dene ke liye polling station ja sakta hai ▪️Booth ka inspection/visit kar sakta hai (rules follow karte hue) 2. Lekin kya candidate booth ke andar baith sakta hai? ❌ Nahi, candidate poora din polling booth ke andar nahi baith sakta. Uske liye: Candidate apne polling agents appoint karta hai Sirf ye agents hi booth ke andar continuously present reh sakte hain 3. Restrictions kya hote hain? ▪️Candidate agar booth par jata hai to: ▪️Voters ko influence nahi kar sakta Campaigning ya sloganbaazi nahi kar sakta ▪️Security aur election officers ke rules follow karne padte hain
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Pushpraj Yadav
Pushpraj Yadav@pushprajyadav97·
TMC उम्मीदवार को केंद्रिय सुरक्षा कर्मी बूथ में जाने नहीं दिया… अंदर सिर्फ़ भाजपा वाले ही जा सकते हैं क्या शाह….??? पश्चिम बंगाल में ज़मीनी स्तर पर बीजेपी की हार का सबूत…
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
अबे चमन चूतिये, पूरा देश जानता है कि तू किसकी भड़वागिरी करने में माहिर है। तू रहा सरकारी पालतू कुत्ता, जिसकी फेंकी हुई हड्डी तू खा रहा है, उसके आगे दुम हिलाना तो लाज़मी है। तुझे पत्रकारिता का मतलब भी पता है? दिन-रात भाजपा के कोठे पर बैठकर चापलूसी करता रहता है और अब भाजपा की दी हुई कार में बैठकर एक अय्याश, सुपारीबाज़, फर्जी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के पक्ष में बकचोदी कर रहा है। पत्रकारिता की आड़ में दलाली करना तुम घटिया और नीच लोगों का पेशा बन चुका है। वास्तव में तुम लोग ही देश के सबसे बड़े गद्दार हो।
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Aman Chopra
Aman Chopra@AmanChopra_·
We need more officers like Ajay Pal Sharma 🫡
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SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
मुझे लगता है कि इस तरह के फर्जी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की मणिपुर को सख्त जरूरत है। साहेब, जो दबंगई ये बंगाल में दिखा रहे हैं, वही दबंगई मणिपुर में दिखाएं। यह आदमी सिर्फ गंदा नहीं, बल्कि घिनौना और गटरछाप है, जो छोटे-छोटे अश्लील कपड़े पहनी हुई डांसर्स के साथ नाचता है। यह खुद तो कायदे के बाहर जाकर घिनौने काम करता है और बंगाल के एक प्रत्याशी व बंगाली लोगों को कायदे में रहने की धमकी देता है। ​यह @IPS_Association का अधिकारी है या कोई गुंडा? वीडियो में इसकी भाषा और आवाज इतनी स्पष्ट आने का मतलब है कि इसके कॉलर में माइक लगा हुआ है और सामने से वीडियो बनाया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि यह अपने मालिकों से मेडल प्राप्त करने के लिए 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' से अब 'रील स्पेशलिस्ट' बन चुका है।
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Mahua Moitra
Mahua Moitra@MahuaMoitra·
Mera Fair & Lovely babua @DripsAjaypal - Hum toh woh log hai joh kaidey se apke Chhota Fanta aur Bada Fanta ka bhi ilaaj kar lete hai!! Herogiri thoda samhaal ke kijiye.
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
चुनावी गिरगिट: भाजपा का ध्रुवीकरण और 'दुआ' के बीच का विरोधाभास ​भारतीय राजनीति में अवसरवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के परिदृश्य में जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। एक तरफ मंचों से "घुसपैठिया", "मछली खाने वाले" और "खास समुदाय" जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर बहुसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश की जाती है, तो दूसरी तरफ उसी समुदाय के साथ हाथ उठाकर 'दुआ' मांगते नेताओं की तस्वीरें इस राजनीति के दोहरे चरित्र को उजागर करती हैं। ​1. ध्रुवीकरण: सत्ता की पहली सीढ़ी? ​भाजपा की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा अक्सर धार्मिक पहचान के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान जब भाषणों में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाता है, तो उसका उद्देश्य स्पष्ट होता है—बहुसंख्यक वोटों को असुरक्षा के नाम पर एकजुट करना। जब बड़े नेता मंच से 'घुसपैठियों' को बाहर निकालने की बात करते हैं, तो वह सीधा प्रहार उस भरोसे पर होता है जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में अल्पसंख्यकों का अपनी सरकार पर होना चाहिए। ​2. चुनावी मजबूरी और 'दुआ' का दिखावा ​जैसे ही चुनाव का चरण बदलता है या समीकरण बदलते हैं, वही कट्टर तेवर 'समावेशी' दिखने की कोशिश में बदल जाते हैं। बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है, वहाँ भाजपा के नेताओं का मुस्लिम टोपी पहनना या दुआ में हाथ उठाना उनके वैचारिक स्टैंड पर सवाल उठाता है। ​क्या यह हृदय परिवर्तन है? शायद नहीं। ​क्या यह वोट बैंक की मजबूरी है? निश्चित रूप से। ​इसे राजनीति का 'दोगला चरित्र' कहना गलत नहीं होगा क्योंकि जो समुदाय आपके लिए चुनावी रैलियों में 'खतरा' है, वही मतदान केंद्र पर आपके लिए 'मसीहा' कैसे बन जाता है? ​3. राजनीति का गिरता स्तर ​जब कोई पार्टी अपनी मूल विचारधारा से समझौता केवल कुछ सीटों के लिए करती है, तो वह अपने कैडर और जनता दोनों को भ्रमित करती है। एक तरफ कार्यकर्ताओं को यह सिखाया जाता है कि अमुक समुदाय देश के लिए चुनौती है, और दूसरी तरफ उन्हीं के सामने हाथ फैलाना यह दर्शाता है कि सत्ता की भूख किसी भी विचारधारा से बड़ी है। ​4. क्या जनता इसे समझ रही है? ​आज का मतदाता सोशल मीडिया के युग में जागरूक है। वह कल के 'नफरती भाषण' और आज की 'दुआ' वाली तस्वीर के बीच के अंतर को साफ देख सकता है। इसे "पॉलिटिकल पाखंड" की श्रेणी में रखा जा सकता है, जहाँ नैतिकता का स्थान केवल चुनावी जीत (Win-at-all-costs) ने ले लिया है। ​निष्कर्ष ​पश्चिम बंगाल की धरती पर दुआ मांगते इन नेताओं की तस्वीरें समावेशी भारत की नहीं, बल्कि एक खंडित राजनीति की परिचायक हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में 'नफरत' और 'मोहब्बत' दोनों ही केवल चुनावी उत्पाद (Products) बनकर रह गए हैं, जिनका उपयोग जरूरत के हिसाब से किया जाता है। यदि पार्टी वास्तव में सबका साथ चाहती है, तो उसे अपनी शब्दावली और नीयत में निरंतरता लानी होगी, न कि केवल मतदान की तारीखों के बीच। 👉 #SJRIrani
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Rakesh Chauhan
Rakesh Chauhan@RakeshC000·
ये चुनाव भी बड़ा अजीब है, वोट के लिए क्या क्या करवाएगा... देश को ऐसी ही तस्वीर की जरूरत है,
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Anchor Akanksha
Anchor Akanksha@journo_akanksha·
वो कहते हैं न कि जितना सच को दबाओगे, सच उतना ही तेजी से दहाड़ेगा। आज कुछ ऐसा ही हुआ जब मैं फील्ड पर गई तो ये जनाब मुझसे कहते हैं कि "आकांक्षा जी, 2 मिनट इधर आइए.... इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से मैं भी हूं" मेरा सवाल यही है कि क्या अब सच दिखाना भी मुश्किल हो गया है?
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SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
भाजपा व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की टॉपर माननीय @gupta_rekha ​एक बार भगवान के पास भगत सिंह और रेखा गुप्ता का आमना-सामना हो गया। ​भगत सिंह (हैरानी से): "मैडम, मैंने सुना है आपने दिल्ली में बताया कि मैंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ बम फेंका था?" ​रेखा गुप्ता (पूरे कॉन्फिडेंस में): "हाँ, और क्या? मैंने व्हाट्सएप पर फोटो देखी है, आप असेंबली में बम हाथ में लेकर खड़े थे और सामने वाली सीट पर सोनिया गांधी बैठी थीं!" ​भगत सिंह (सिर पीटते हुए): "देवी जी, 1929 में सोनिया गांधी का तो छोड़ो, उनके खानदान का भी पता नहीं था। मैंने अंग्रेजों के खिलाफ धमाका किया था!" ​रेखा गुप्ता: "अरे शहीद जी, आप पुराने जमाने के आदमी हो, आपको क्या पता? हमने तो गलकोटिया यूनिवर्सिटी में ये भी पढ़ा है कि सिकंदर ने पोरस को 'फ्रेंड रिक्वेस्ट' भेजी थी और आपने बम फेंकने के बाद असेंबली से 'फेसबुक लाइव' किया था!" ​भगत सिंह: "भाई! मुझे वापस धरती पर भेज दो... मुझे फिर से फांसी मंजूर है, पर ऐसी मुख्यमंत्री के साथ इतिहास की बहस नहीं!" इतिहास गवाह है... अंग्रेज तो चले गए, पर पीछे अपनी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी भाजपा के लिए छोड़ गए, जिसकी वाइस चांसलर आज के कुछ नेता बन बैठे हैं!
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Tejashwii Yadav
Tejashwii Yadav@TejashwiYdvRJD·
लगता हैं😂 गलगोटिया यूनिवर्सिटी के इतिहास की छात्रा रही हैं 🤣
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Dr. Sheetal yadav
Dr. Sheetal yadav@Sheetal2242·
दुनियां के 100 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में सारे 100 शहर भारत के ही हैं। अब समय आ गया है कि भारत में बड़ी मात्रा में पौधारोपण किया जाय।
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SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
यति नरसिंहानंद सरस्वती के दावों का खंडन ​यति नरसिंहानंद सरस्वती का यह दावा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का अफजल गुरु से कोई संबंध था, पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। इसके समर्थन में कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ​मुख्य बिंदु और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण: ▪️​दावे की सत्यता: यह कहना कि डॉ. कलाम अफजल गुरु या उसके परिवार से मिले थे, एक तथ्यहीन दावा है। विश्वसनीय स्रोतों में ऐसी किसी भी मुलाकात का कोई रिकॉर्ड नहीं है। ▪️बयान की प्रकृति: इस प्रकार के बयान केवल राजनीतिक या धार्मिक उकसावे के उद्देश्य से दिए जाते हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता। ▪️​संवैधानिक प्रक्रिया: अफजल गुरु 2001 के संसद हमले का दोषी था, जिसे 2013 में फांसी दी गई। डॉ. कलाम के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अफजल गुरु की दया याचिका (Mercy Petition) उनके पास आई थी, जो उस समय लंबित रही थी। उनका संबंध केवल इस संवैधानिक प्रक्रिया तक सीमित था; इसमें कोई व्यक्तिगत संबंध या निजी मुलाकात शामिल नहीं थी। ▪️​विवादास्पद पृष्ठभूमि: यति नरसिंहानंद द्वारा डॉ. कलाम पर लगाए गए गंभीर आरोप बिना किसी सबूत के हैं, जो अक्सर विद्वेषपूर्ण भावना से प्रेरित प्रतीत होते हैं। ​कानूनी प्रावधान ​भारत के कानून के अंतर्गत इस प्रकार के भड़काऊ बयानों पर निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है: 1) ​BNS की धारा 196: विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता और वैमनस्य को बढ़ावा देना। 2) ​BNS की धारा 353: लोक उपद्रव करने के इरादे से भड़काऊ बयान देना या अफवाह फैलाना। 3) ​BNS की धारा 152: देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य करना। ​राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग को सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाले ऐसे तत्वों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि समाज और राष्ट्र का वातावरण सुरक्षित रहे। @rashtrapatibhvn @myogiadityanath @myogioffice @SCJudgments @barandbench @scobserver @dgpup @Uppolice
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Narendra Pratap
Narendra Pratap@hindipatrakar·
"APJ अब्दुल कलाम पहला राष्ट्रपति था जो आतंकी अफजल गुरू के परिवार से मिला.. वो तीनों सेनाओं का अध्यक्ष होकर जेहाद कर सकता है और हमारा छोटा सा सिपाही भी धर्म के लिए कुछ नही कर सकता" -यति नरसिंहानंद सरस्वती पुलिसवालों को मोटिवेशनल स्पीच देते हुए.
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
#USA: After I posted a comment on Truth Social about the attack on Trump, his troll army retaliated by getting my account banned. My statement was so impactful that it must have shaken Trump himself. Their fear is my victory. #SJRIrani #ABN24India #DonaldTrump
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SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
@news24tvchannel कोरोना काल के चलते सब ने देख लिया की चड्डी गैंग ने किसी आपदा से लड़ने का साहस दिखाया था? इस ढोंगी बाबा के अंदर कहीं से भी मर्दानगी नजर नहीं आती। हो ना हो यह जरूर छक्का है?
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News24
News24@news24tvchannel·
"4 बच्चे पैदा करें और उनमें से एक RSS को समर्पित कर दें" ◆ नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा #DhirendraShastri | Dhirendra Shastri | #RSS | RSS
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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
अनुराग ठाकुर: देश में कोई कुछ भी खा सकता है, किसी को रोक नहीं है। सत्ता और वोट के लिए जिस राज्य में ये (BJP-भ्रष्ट झूठे पापी ) के नेता जाएंगे, उनका गू खाएंगे, यह तो कन्फर्म हो गया।
mister India@hammehaiindia62

इस भाई साहब के बातों में दम ही नहीं पूरा दम है #बंगाल_चुनाव @sayani06

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SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
देश में नफरत तब जन्म लेती है जब पत्रकार और पुलिस सरकारी दलाल बन जाते हैं। नासिक पुलिस और मीडिया ने 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से जो 'ज्ञान' प्राप्त किया था, उस घिनौने झूठ का अब पूरी तरह पर्दाफाश हो चुका है। सत्यमेव जयते ⚖️ नासिक स्थित टीसीएस (TCS) कंपनी में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर पिछले दिनों जो विवाद खड़ा किया गया था, वह पूरी तरह निराधार साबित हुआ है। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैसे सोशल मीडिया की अफवाहें और मीडिया का एक वर्ग मिलकर किसी निर्दोष की छवि बिगाड़ सकता है। ​अफवाहों पर आधारित जांच: जांच में यह तथ्य सामने आया कि नासिक पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई और बयानबाजी उन सूचनाओं के आधार पर की थी, जो व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही थीं। जिसे पुलिस 'पुख्ता जानकारी' समझ रही थी, वह वास्तव में 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' का भ्रामक प्रचार था। ​मीडिया ट्रायल की सच्चाई: मीडिया के एक हिस्से ने बिना किसी जमीनी हकीकत को जाने, नीदा खान और अन्य कर्मचारियों को दोषी की तरह पेश किया। यह 'घिनौना झूठ' हफ्तों तक खबरों की सुर्खियों में बना रहा, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की स्थिति पैदा हो गई थी। ​सत्य की विजय: अंततः, पुलिस की गहन जांच में धर्मांतरण का कोई भी प्रमाण नहीं मिला। पुलिस ने स्वीकार किया कि पूरा मामला केवल गलतफहमी और सोशल मीडिया के दबाव के कारण उपजा था। अब इस केस को 'झूठा' (B-Summary) मानकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ​निष्कर्ष: यह मामला पत्रकारिता के गिरते स्तर और पुलिस प्रशासन पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का एक चिंताजनक उदाहरण है। अंततः सत्य की जीत हुई और एक प्रायोजित झूठ का अंत हुआ। #abn24india #sjrirani #हर_झूठ_होगा_बेनकाब #HarJhoothHogaBenakaab #tcs #nasikpolice #fabricatedcase #hindu #muslims #corporatejihad #fake #nerrative #godimedia #modimedia #maharashtra #dgpmaharashtra
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SJR Irani 🇮🇳
SJR Irani 🇮🇳@SJRIrani·
“Victory or Martyrdom - this is the ideology of us Iranians!” ⚔️ Live Like Ali | 🩸 Die Like Hussain Someone like @realDonaldTrump, whose blood is filled with lies, deceit, betrayal, and cunning - who is afraid of his threats? #SJRIrani
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