RJD Siwan retweetledi

भाजपा से असहमति सिर्फ राजनीतिक नहीं है, बल्कि एक गहरी वैचारिक असहमति भी है। यह असहमति केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उस भाषा और तरीके तक भी जाती है, जिसका इस्तेमाल उनके शीर्ष नेतृत्व द्वारा भी किया जाता है। यही वजह है कि जब जाँच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग की बात आती है, तो नागरिक समाज और विपक्ष अक्सर मिलकर उसका विरोध करते हैं क्योंकि वे संस्थाओं की निष्पक्षता और कानून के राज को संविधान का मूल तत्त्व मानते हैं।
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लेकिन यहाँ एक बुनियादी सावधानी जरूरी है। अगर भाजपा का विरोध करते-करते हम खुद उसी तरह की तीखी या विभाजनकारी भाषा अपनाने लगें, या सत्ता में होने पर एजेंसियों का इस्तेमाल भी वैसी ही राजनीतिक मंशा से करने लगें, तो हमारे विरोध की नैतिक ताकत कमज़ोर हो जाती है। तब फर्क केवल चेहरों का रह जाता है, तरीकों का नहीं। क्या यह उचित है?
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अतः असली चुनौती सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि इस देश की राजनीतिक संस्कृति को बेहतर बनाना है, जहाँ भाषा में संयम हो और संस्थाओं के इस्तेमाल में ईमानदारी और पारदर्शिता बरती जाए। तभी कोई भी प्रतिपक्ष खुद को एक विश्वसनीय और नैतिक विकल्प के रूप में पेश कर सकता है।
जय हिन्द
हिन्दी





























