उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा

2.8K posts

उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा banner
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा

उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा

@UPRVPAS_BANDA

जय अभियंता संघ

Katılım Haziran 2019
30 Takip Edilen8.8K Takipçiler
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की ओर से आज शक्ति भवन में पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल साहब (आईएएस) से मुलाकात कर उनको अपर मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नति की शुभकामनाएं दी। @chairmanuppcl @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
10
11
37
1.2K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के तत्वावधान में साप्ताहिक प्रादेशिक वेबिनार मैं उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा कहा वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह चौपट उपभोक्ता अपना क्षेत्र छोड़कर 15 से 20 किलोमीटर का लगा रहा चक्कर गर्मी आते ही  हो जाएगी क्रिटिकल व्यवस्था सरकार करे हस्तक्षेप।
avadhesh kumar verma tweet media
हिन्दी
1
13
34
669
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
A K Sharma
A K Sharma@aksharmaBharat·
बिजली सेवा से जनसेवा… उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की अच्छी-से-अच्छी सेवा के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं। इस दिशा में अनेक कल्याणकारी योजनाएं हाल में चलाई गई हैं। जिनमें खास हैं: 1. बिजली बिल राहत योजना-2025 2. गांवों/ मजरों / घरों का विद्युतीकरण 3. बिजली बिल में सुधार की व्यवस्था 4. नवीन कनेक्शन एवं अन्य सेवाएं इन योजनाओं और सेवाओं का लाभ सामान्य व्यक्ति तक पहुंचे इस आशय से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा मधुबन, मऊ में लगाया जा रहा है एक- बिजली सेवा शिविर तारीख: 26/11/2025, दिन: बुधवार समय: 12 बजे दिन में स्थल: सदगुरु कबीर विद्यालय, मधुबन, मऊ आप सभी सादर आमंत्रित हैं। @narendramodi @myogiadityanath @AmitShah @JPNadda @Bhupendraupbjp @idharampalsingh @UPPCLLKO @EMofficeUP @PuVVNLHQ #NayeBharatKaNayaUP #GoodGovernance #HumaraUP #VikasExpress
A K Sharma tweet media
हिन्दी
20
42
95
4.6K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
A K Sharma
A K Sharma@aksharmaBharat·
यूपी में बिजली रही सस्ती की सस्ती… उत्तर प्रदेश में लगातार छठवें वर्ष भी नहीं बढ़ेंगी बिजली दरें। उत्तर प्रदेश देश का एक मात्र राज्य है जहां जनता के हित में पिछले छह वर्षों से बिजली की दरों में एक भी पैसा नहीं बढ़ाया गया है। स्थिर बिजली दरों से प्रदेशवासियों को वर्ष 2025–26 में भी बिल में रहेगी बड़ी राहत। इतना ही नहीं ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज को रैशनलाइज़ और कम किया गया। उसी प्रकार हरित ऊर्जा के उपयोग पर बिजली दरें पहले से भी कम की गईं। अब सभी प्रकार के उपभोक्ता ग्रीन एनर्जी टैरिफ का लाभ ले सकते हैं। लाइफ लाइन उपभोक्ता (ग्रामीण एवं शहरी), निर्धारित ग्रामीण मीटर्ड घरेलू उपभोक्ता और किसानों के निजी नलकूप पर मिलने वाली पिछले वर्ष की माफ़ी / राहत /सब्सिडी पूर्ववत चालू रहेगी। प्रदेशवासियों एवं उपभोक्ताओं को नमन सह बधाई। माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय मुख्यमंत्री जी को नमन सह हार्दिक धन्यवाद। @narendramodi @myogiadityanath @AmitShah @JPNadda @Bhupendraupbjp @idharampalsingh @UPPCLLKO @EMofficeUP @PuVVNLHQ @MVVNLHQ @dvvnlhq @KESCoHQ @PVVNLHQ #NayeBharatKaNayaUP #GoodGovernance #HumaraUP #VikasExpress
A K Sharma tweet media
हिन्दी
23
39
128
8.3K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
भारत सरकार की अधिसूचना जारी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा देश में ऊर्जा की सबसे बड़ी संवैधानिक कमेटी सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी में सदस्य नामित कियागया है।
avadhesh kumar verma tweet media
हिन्दी
10
24
73
1.1K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
भारत सरकार की अधिसूचना जारी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा देश में ऊर्जा की सबसे बड़ी संवैधानिक कमेटी सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी में सदस्य नामित कियागया है।
avadhesh kumar verma tweet media
हिन्दी
34
47
184
3.5K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जो छठी साल भी बिजली दलों में कोई भी बढ़ोतरी नहीं होगी और बिजली दरें यथावत रहेगी पावर कॉरपोरेशन एक बार फिर करारी हार हुई है उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत हुई है सभी को बधाई
हिन्दी
32
65
169
2.9K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आज आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन: लोकतांत्रिक तरीके से किए गये आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को समाप्त कराने की मांग:                 उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्देशानुसार लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन के दौरान ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों को निरस्त कराने के लिए आज आंदोलन के पहले दिन प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभियंता संघ के महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि उत्पीड़न के कार्रवाइयों के विरोध में प्रारंभ हुई आंदोलन के आज पहले दिन प्रदेश में जनपदों एवं परियोजनाओं पर काली पट्टी बांधकर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आगे बताया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री जी के समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभी तक मार्च 2023 के आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त नहीं लिया गया है जिसके कारण कई अभियंताओं के पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोक कर अभियन्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है इसके साथ-साथ लगभग 1 वर्ष से बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के दौरान भी ऊर्जा प्रबंधन ने तानाशाही रवैया बनाते हुए उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं को चिन्हित कर अकारण चार्ज शीट देकर अभियन्ताओं की प्रोन्नति तक रोकने की तैयारी हैं तथा परामर्श पत्र के नाम पर अभियन्ताओं के स्थायीकरण आदेश तक रोक दिए गए हैं, अभियन्ताओं को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया है उपरोक्त कार्रवाइयों से पूरे प्रदेश के अभियंताओं में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।                 अभियंता संघ के अध्यक्ष इं. संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियन्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए अभी तक न तो कोई वार्ता की गयी है और न ही कोई सार्थक कार्यवाही की गयी है जो प्रबंधन की हठधर्मिता रवैया को दर्शाता है।प्रबंधन के तानाशाही रवैये को देखते हुए संघ के पास आंदोलन के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं है। ऊर्जा प्रबंधन से पुनः अनुरोध किया गया है कि जल्द वार्ता के माध्यम से समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके।                       अभियंता संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन किया है कि उपरोक्त प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियों को वार्ता के माध्यम से समाप्त कराने की कृपा करें जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता आंदोलन की राह छोड़ उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने व “बिजली बिल राहत योजना 2025"  को सफल बनाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
12
83
93
1.4K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करें अन्यथा केन्द्र सरकार ग्रांट देना बंद कर देगी : ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : निजीकरण थोपने की हर कोशिश का होगा राष्ट्रव्यापी विरोध विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यह विदित हुआ है कि 16 सितम्बर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ऑफ पॉवर की मीटिंग में यह सहमति बनी है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन हेतु राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए और जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केन्द्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बन्द कर दी जाय। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से उद्वेलित सारे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जायेगा जिसका निर्णय आगामी 03 नवम्बर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जायेगा। संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की इसी मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के मसौदे को अन्तिम रूप दिया गया था जिसे 09 अक्टूबर को विद्युत मंत्रालय ने जारी कर दिया है। संघर्ष समिति निजीकरण हेतु लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का प्रबल विरोध करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाय। उन्होंने बताया कि मुम्बई में 04 एवं 05 नवम्बर को हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा "विद्युत वितरण निगमों के सस्टेनेबिलिटी के लिए पी पी पी मॉडल" है जिसका अर्थ निजीकरण ही है। संघर्ष समिति ने बताया कि सात राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण पर राज्यों को तीन विकल्प देने जा रही है, अन्यथा की स्थिति में केंद्र सरकार की ग्रांट बंद कर दी जाएगी। पहला विकल्प है - राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों की 51% हिस्सेदारी बेंच दे और पीपीपी मॉडल पर विद्युत वितरण कंपनियां चलाई जाए। दूसरा विकल्प है - विद्युत वितरण कंपनियों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी जाए और प्रबंधन बिजी कंपनी को सौंप दिया जाए। तीसरा विकल्प है - जो राज्य निजीकरण नहीं करना चाहते तो वह अपनी विद्युत वितरण कंपनियों को सेबी और स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कर लिस्टिंग कर दें। यह पता चला है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में यह सहमति हुई है कि जो राज्य यह तीनों विकल्प न दें उनका केंद्र से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए और आगे कोई आर्थिक मदद न की जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में कॉन्करेंट लिस्ट पर है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में चुनिंदा सात प्रांतों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) की राय लेकर निजीकरण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर कैसे थोपा जा सकता है ? संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति की कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड है उसे ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में किस हैसियत से और क्यों बुलाया जा रहा है ? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिया की भूमिका में आ गई है। उन्होंने बताया कि मुंबई में चार और पांच नवंबर को होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का एकमात्र एजेंडा भी यही है। अब स्पष्ट हो गया है कि इस डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी में 2025 में यही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग की राय है। ऐसा लगता है कि सारे देश में निजीकरण की मुहिम बहुत तेज गति से चलाई जानी है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह शर्तें निजीकरण हेतु राज्य सरकारों पर बेजा दबाव डालना है और एक प्रकार से ब्लैक मेल है जिसके विरोध में देशव्यापी आन्दोलन चलाया जाएगा। उप्र में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 324 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
53
181
164
4.7K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्रारूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध। राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनियर इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है। दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया। आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
57
187
141
1.3K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है। आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है। संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
42
201
206
3.6K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन: उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे। अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए। उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
24
146
160
2.8K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट* मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए। निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई। संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया। संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
60
212
186
3.3K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
ऊर्जा प्रबंधन लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन का दमन करने पर उतारू है, संघर्षरत विद्युत कार्मिकों पर लगातार उत्पीड़न की कार्रवाई कर रहा है उनको प्रताड़ित किया जा रहा है, बिजली के निजीकरण में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं, जब तक बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त नहीं किया जाता और उत्पीड़न की सारी कारवाइयां समाप्त नहीं हो जाती तब तक संघर्ष जारी रहेगा। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए तथा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त कर ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित कराने की कृपा करें। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
4
45
51
1.6K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। @narendramodi @myogiadityanath @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
21
105
82
681
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर सभी संवर्गो के हजारों पदों को समाप्त करने के विरोध में तथा निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 350वें दिन राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन पर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
31
132
107
763
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
रिस्ट्रक्चरिंग कर हजारों पदों को समाप्त करने से राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी - संघर्ष समिति ने दी चेतावनी: बिजली व्यवस्था चौपट कर निजीकरण की पृष्ठभूमि तैयार करने का आरोप। @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @aksharmaBharat
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
8
69
71
1.8K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उत्तर प्रदेश पावर कंप्लेंट-लखनऊ मीडिया(UPPCLMEDIA)
⚡ लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग पर बवाल — बिजली कर्मियों का बड़ा प्रदर्शन आज! ⚡ राजधानी लखनऊ के सभी कार्यालयों के बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता आज दोपहर 1:30 बजे शक्ति भवन पर जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे। कारण? लेसा में फिर से लागू की गई वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग — जिससे हजारों पद समाप्त कर निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। सवाल उठता है — अगर प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने इंजीनियरों को विश्वास में लेकर यह फैसला लिया होता, तो क्या आज बिजली विभाग में इतना असंतोष होता? यह विभाग किसी निजी कंपनी का दफ्तर नहीं — यह इंजीनियरों और संविदा कर्मियों का परिवार है। जो भी योजनाएं लागू होती हैं, जो भी उपलब्धियों का बखान किया जाता है — वह इन्हीं लोगों की मेहनत का परिणाम है। अगर ये दोनों वर्ग न हों, तो योजनाएं लागू कौन करेगा — फाइलें या ठेकेदार? आज सवाल सिर्फ पदों का नहीं, पूरे विभाग की अस्मिता और भविष्य का है। ✊🏼 @विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ✊🏼 @राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र #UPPCL #LESA #विजली_कर्मचारी_एकजुट #निजीकरण_का_विरोध #वर्टिकल_रिस्ट्रक्चरिंग #शक्ति_भवन_आंदोलन
हिन्दी
9
44
97
2.1K
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
उपभोक्ता परिषद ने कहा एक तरफ 42 जनपदों के निजीकरण के लिए पावर कॉरपोरेशन फड़फड़ा रहा है दूसरी तरफ बिजली खरीद पर टूट पड़ा है इसका क्या ओचित्त है केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की इस पर क्या रिपोर्ट है आयोग के सवाल से सभी परेशान पावर कारपोरेशन में मचा हड़कंप।
हिन्दी
3
29
55
784
उ. प्र. राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ बाँदा retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
दीपावाली पर निर्बाध बिजली आपूर्ति कर बिजली कर्मियों ने अपना संकल्प पूरा किया : निजीकरण के लिए उत्पीड़न कर रहा प्रबंधन बिगाड़ रहा है कार्य का वातावरण: निजीकरण का निर्णय वापस न लिया गया तो छठ पूजा के बाद होगा बड़े आंदोलन का निर्णय विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों से उद्वेलित होने के बावजूद उप्र के बिजली कर्मियों ने दीपावली के दिन लगभग 395 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दीपावाली के पर्व पर निर्बाध रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने के अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया है। दीपावली के दिन अधिकतम 18981मेगावॉट बिजली की मांग पूरी की गई और पूरे प्रदेश को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। संघर्ष समिति ने इस हेतु बिजली उत्पादन, पारेषण, और वितरण में लगे बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को बधाई दी है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस न लिया गया तो छठ पूजा के बाद बिजली कर्मी बड़े आंदोलन का कार्यक्रम घोषित करने के लिए मजबूर होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति ने कहा है कि उप्र के बिजली कर्मी सदैव उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हैं और निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत रहते हुए भी उप्र के बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी में 11 जून को 31486 मेगावॉट बिजली आपूर्ति कर देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति का कीर्तिमान स्थापित किया है। उप्र के बिजली कर्मियों ने दीपावली पर पूरे प्रदेश में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर एक बार पुनः उपभोक्ताओं के प्रति सेवा भाव की उत्कृष्ट भावना का परिचय दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि उप्र के बिजली कर्मी मुख्यमंत्री मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बिजली के मामले में उप्र को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रान्त बनाने के लिए कृत संकल्प हैं किन्तु उप्र पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने 25 नवम्बर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की एक तरफा घोषणा कर कार्य का वातावरण बिगाड़ दिया है और निजीकरण के इस उपभोक्ता एवं कर्मचारी विरोधी निर्णय के विरोध में बिजली कर्मी आन्दोलन की राह अपनाने को विवश हो गए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन से क्षुब्ध प्रबंधन ने विगत 11 माह में बिजली कर्मियों का हर प्रकार से हर स्तर पर उत्पीड़न जारी रखा है जिससे कार्य का वातावरण पूरी तरह खराब हो गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत बिजली कर्मियों ने दीपावली पर्व के दौरान 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक आंदोलन प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित कर रखा है। 24 अक्टूबर से पूर्ववत आंदोलन पुनः प्रारंभ होगा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @mlkhattar @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
6
62
88
2.4K