Arvind kumar

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Arvind kumar

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@arvindlucknow02

socialist , proud indian

Katılım Nisan 2016
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
X (ट्विटर) पर 10 वर्ष पूरे। #MyXAnniversary
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@Tejasvi_Surya अच्छे से पढ़ाई कर अनपढ़। सीट निश्चित है किस राज्य में कितनी रहेगी। परसीमन में सीटों का अंतर नही आता है बल्कि जिस राज्य में जितनी होती है उतनी ही रहती बस उनका क्षेत्र घट बढ़ जाता है आबादी के अनुसार।
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Tejasvi Surya
Tejasvi Surya@Tejasvi_Surya·
अगर परिसीमन में देरी होती है या इसे नहीं किया जाता तो क्या होगा? यदि कुछ नहीं किया गया, तो अगले जनगणना के बाद अनुच्छेद 81, 82 और 330A स्वतः लागू हो जाएंगे, जिससे मौजूदा 543 सीटों का पुनर्वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। केरल का उदाहरण लें, आज 20 सीटें हैं, लेकिन यदि 2027 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर पुनर्वितरण हुआ, तो यह घटकर 14 रह सकती हैं। मोदी सरकार का प्रस्ताव इसके बिल्कुल विपरीत है, यह मौजूदा प्रतिनिधित्व की रक्षा करते हुए सीटों में वृद्धि सुनिश्चित करता है। यह स्पष्ट रूप से नुकसान नहीं, बल्कि लाभ का मामला है। लोकसभा में मेरी टिप्पणियाँ देखें।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@KraantiKumar नाजायज तरीके से धन कमाने वाला व्यक्ति कभी एक अच्छा व्यक्ति नही बन सकता। उसकी कमियां उसे डराती है और उसी डर में कांग्रेस को वोट किया था। इनकी कोई विचार धारा नही है जैसे ही केंद्र सरकार बदलेगी ये तुरंत यू टर्न मार कर उसके साथ हो लेंगे।
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Kranti Kumar
Kranti Kumar@KraantiKumar·
आदरणीय Gen Z का आप लोगों को पता बलरामपुर से लोकसभा सांसद ब्रिज भूषण सिंह को 2008 में BJP ने पार्टी से निकाल दिया. जानते हैं क्यों निकाला था ? Indo-US न्यूक्लियर डील के समय लोकसभा में कांग्रेस ने विश्वासमत हासिल करने के लिए वोटिंग कराई. कांग्रेस ने विश्वासमत हासिल कर लिया. ब्रिज भूषण सिंह समेत बीजेपी 8 MPs पर Cross-Voting का आरोप लगा था. 2009 में अमर सिंह कैसरगंज से ब्रिज भूषण सिंह को SP से टिकट दिया. 2014 में ब्रिज भूषण ने कहा दुबारा ऐसी गलती नही होगी और बीजेपी में चले गए. अस्पताल बनाया, स्कूल और कॉलेज बनाया. तब से कमा खा रहे हैं और समय मिलता है तो दो सीटर हेलीकॉप्टर में घूम घूम कर OBC SC ST आरक्षण की आलोचना करते हैं.
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@JaikyYadav16 इन सारी समस्याओं का एक समाधान है वाशिंग मशीन भाजपा। आप भाजपा के पक्ष में चाहे जो लिखे चाहे किसी को धमकी दे या गाली न एफआईआर होगी न अकाउंट सस्पेंड होगा। ठीक यही आप भी कर रहे है तभी अच्छे से आपका अकाउंट चल रहा है।
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Jaiky Yadav
Jaiky Yadav@JaikyYadav16·
आजकल एक X अकाउंट चलाना एक रॉकेट साइंस के बराबर हो चुका है। आपको FIR से बचना होगा आपको Defame Notice से बचना होगा आपको Monetization Pause से बचना होगा आपको Account Suspension से बचना होगा आपको Account Withheld से बचना होगा आपको Post Ban से बचना होगा आपको Post पर Community Note से बचना होगा जो भी लोग इन सबसे बचकर आज भी अपना अकाउंट चला रहे हैं, वह वाकई में एक वैज्ञानिक का दिमाग और तीरंदाज़ की नज़र रखते हैं।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
Hello @BPCLLPG न तो आपका वितरक जवाबदेह है और न ही आप।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
Hello @BPCLimited आपका वितरक ' इटौंजा भारत गैस ' रिफिल बुक करने पर भी सिलेंडर नही दे रहे है। मैंने दिनांक 28/03/2026 को रिफिल बुक किया था किंतु आज दिनांक 02/04/2026 तक सिलेंडर नही दिया गया है। मेरे द्वारा दिनांक 29/03/2026 को एजेंसी से संपर्क किया गया तो वहाँ से बताया गया कि आपको 30/03/2026 को सिलेंडर डिलीवर कर दिया जाएगा किंतु 30/03/2026 को सिलेंडर डिलीवर नही किया गया और उसके बाद से एजेंसी द्वारा मेरी कॉल भी नही उठाई जा रही है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
Hello @HardeepSPuri @PetroleumMin कोई जवाबदेही है आप लोगों की या जनता को उसके हाल पर छोड़ रखा है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@SushantBSinha अबे चमन चूतिये मुनाफा तेल कंपनियां नही बल्कि भारत सरकार कमा रही थी। अभी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये कम की जबकि अभी भी 3 रुपये ले रही है। तमाम तरह के टैक्स लगा कर मुनाफा सरकार कमाई है एक सवाल सरकार से नही कर सकते?
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Sushant Sinha
Sushant Sinha@SushantBSinha·
क्या संकट के इस समय में तेल कंपनियाँ “टीम इंडिया” का पार्ट नहीं हैं? पिछले चार पाँच साल से मुनाफा कमा रहीं तेल कंपनियों को युद्ध के एक महीने में नुक़सान क्या हुआ कि उनको आग लग गई है कि नुकसान हो रहा। क्यों भाई, सह लो कुछ दिन नुक़सान। किसी को शेयर मार्केट में नुक़सान हो रहा, किसी का बिज़नेस प्रभावित हुआ है, किसी को नौकरी की दिक्कत हुई तो गाँव जाना पड़ रहा है.. लोग तरह तरह के कष्ट सह रहे इस ग्लोबल क्राइसिस में लेकिन तेल कंपनियों को जरा सा नुकसान हुआ नहीं कि क़ीमत बढ़ाने पर आ गईं। जब मुनाफा हो रहा था तब तेल की क़ीमत घटाने का तो नहीं सोचा था। गजबे है
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
जातिवाद समझते हैं ? मीडिया का ? विश्वकर्मा समाज OBC लड़की टॉप करती है प्रदेश भर में लेकिन फ़ोटो 2nd टॉपर का लगाया जाता है। इस देश के कण-कण में जातिवाद का जहर भरा है चाहे जो भी पद या संस्थान हो। #UPPSC
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
नितिन गडकरी के लिए पेड पोस्ट करने वालो देखो नेताजी की करतूत और शर्म करो कि तुम रुपये के लालच में इतना गिर गए कि ऐसे नेता के लिए पोस्ट करते हो। @JaikyYadav16 @KraantiKumar
Mukesh Mohan@MukeshMohannn

जब मैं थाने में था तब मुझे पता चला कि मेरे अलावा 3 और क्रिएटर्स पर FIR हुई है। जिनमें से एक औरंगाबाद से दूसरा गुजरात से और तीसरा दिल्ली से है। इन तीनों ने नितिन गड़करी के बेटे की गाड़ी में योगिता ठाकरे नाम की बच्ची की जो लाश मिली थी उसपर वीडियो बनाए थे। इन वीडियोज में वही जानकारी थी जो पब्लिक डोमेन में है। औरंगाबाद वाले को बुलाया गया, पूरे दिन पूछताछ की गई और उसका फ़ोन जफ़्त करके भेज दिया गया। गुजरात वाले क्रिएटर के बारे में पुलिस वालों से सुना है कि वो जेल में है। और दिल्ली वाला क्रिएटर अभी पेश नहीं हुआ है। मेरे मामले में, मामला गरमा गया क्योंकि मेरे पीछे पूरा समाज खड़ा है। लेकिन वो लड़के अकेले पड़ गए और सफर कर रहें हैं। विपक्षी दलों से माँग है कि मेरा छोड़ों उन तीनों का सार सँभाल लो। नेताजी ज़ुल्म कर रहे हैं।

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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
अपना रुपया पहली बार सैकड़ा लगाएगा इस खुशी की घड़ी में थैंक यू मोदी जी कब से शुरू करना है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
एक सरकार काम करने वाली एक सरकार सिर्फ हल्ला मचाने वाली #Bangladeshi
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@RatanRanjan_ ये आपने सही कहा कि रशिया पीछे नही हटेगा पर अपना महामानव ट्रम्प के डर से पीछे हट गया था और रशिया से तेल खरीदना बन्द कर दिया।
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Ratan Ranjan
Ratan Ranjan@RatanRanjan_·
फ़िलहाल भारत के पास पर्याप्त ईंधन है अगर भारत में LPG की दिक्कत हुई तो इजराइल और रशिया पीछे नहीं हटेगा मदद के लिए।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@umashankarsingh आपके इस ट्वीट से प्रेरित होकर कुछ और लोग भी है जिन्होंने आपके शब्द ' अलबला' का इश्तेमाल किया है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@PremShuklaBJP कुछ नया लाओ प्रेम पांच साल पहले कह रहे थे 2 मई ममता गई अब कह रहे हो 4 मई ममता गई। पांच साल में एक ढंग का नारा नही तलाश पाए हो और आये हो दीदी से लड़ने। #ElectionIssue
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Prem Shukla -प्रेम शुक्ल
4 मई ममता तो गई!! दमनकारी ममता बनर्जी को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। बंगाल के मतदाताओं, इस बार चूकना नहीं है...
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@ChandanSharmaG क्यों झूठी खबर चला रहे हो । सोनू कनौजिया के भाई मोनू कनौजिया की पत्नी के नाम एजेंसी है। जिसके पास एजेंसी होगी उसके घर पर खाली सिलेंडर नही मिलेंगे तो क्या नदी नाले में फेंक आएगा।
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Chandan Sharma
Chandan Sharma@ChandanSharmaG·
🚨 बिग ब्रेकिंग न्यूज 🔥🔥 LPG गैस का 74 सिलेंडर बरामद कालाबाजारी चल रहा था यह कारनामा समाजवादी पार्टी के नेता सोनू कनौजिया ने किया है ताकि पैसा भी कमाएं और योगी जी को बदनाम भी कर सकें लखनऊ में छापेमारी के दौरान 74 सिलेंडर बरामद हुआ, जिसमें से 63 खाली था और 9 भरा हुआ समझ रहें हैं ना? इसलिए सिलेंडर का रेट बढ़ा है ऐसे ही धांधली चल रहा है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@BHEEM_BAUDH अखिलेश जी के 37 सांसद व 100+ विधायक है जरा बसपा के हाल देख लीजिए। सांसद का नाम पर जीरो व विधायक के नाम पर सिर्फ एक । बसपा के यह हाल क्यों हुए इस पर विचार कीजिये । अखिलेश को उनके हाल पर छोड़िए उन्हें आपकी सलाह की जरूरत नही।
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BHEEM BAUDH
BHEEM BAUDH@BHEEM_BAUDH·
यादवों के नेता अखिलेश यादव का मुख्यमंत्री न बनने के यह 18 बड़े कारण है 1, नाम परिवर्तन की राजनीति: अखिलेश यादव सरकार का सबसे विवादित कदम बीएसपी सरकार द्वारा बहुजन महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों और संस्थानों के नामों को बदलना 2 महापुरुषों का अपमान: ज्योतिबा फुले नगर, महामाया नगर और कांशीराम नगर जैसे जिलों के नाम बदलकर अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर दलित चेतना के प्रतीकों को चोट पहुँचाई। 3 प्रतीकों के प्रति शत्रुता: बाबा साहेब अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के सम्मान में बने स्मारकों और पार्कों को 'फिजूलखर्ची' बताकर उनका राजनीतिक विरोध किया गया। 4, पदोन्नति में आरक्षण का विरोध: संसद में पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) बिल फाड़ने की घटना सपा के दलित विरोधी रुख का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है। 5, प्रशासनिक उपेक्षा: सपा शासन के दौरान दलित अधिकारियों को मुख्यधारा के पदों से हटाकर हाशिए पर रखने के आरोप लगातार लगते रहे। 6,सामाजिक न्याय का ढोंग: 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देने वाली सपा के कार्यकाल में दलितों के खिलाफ अपराधों के आंकड़ों में वृद्धि देखी गई थी। 7, कांशीराम जी की विरासत का अपमान: मान्यवर कांशीराम उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर केवल भाषा विश्वविद्यालय करना उनकी विरासत को सीमित करने जैसा था। 8, योजनाओं को बंद करना: दलित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और विशेष कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की गई या उनके नाम बदल दिए गए। 9 सपा का मूल चरित्र: समाजवादी पार्टी का मूल वोट बैंक अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों के साथ संघर्ष की स्थिति में रहा है, जिसे अखिलेश नियंत्रित करने में विफल रहे। 10 राजनीतिक अवसरवाद: चुनाव आते ही अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना, लेकिन सत्ता में रहते हुए उनके नाम वाले जिलों को मिटाना दोहरे चरित्र को दर्शाता है। 11 इतिहास से छेड़छाड़: महापुरुषों के नाम हटाकर अखिलेश यादव ने आने वाली पीढ़ियों को दलित क्रांति के इतिहास से वंचित करने का प्रयास किया। 12, मानसिकता का परिचय: स्मारकों को 'पत्थरों का ढेर' कहना उनकी उस मानसिकता को उजागर करता है जो दलित गौरव को स्वीकार नहीं कर पाती। 13 क्षेत्रीय अस्मिता का बहाना: नामों को बदलने के पीछे क्षेत्रीय पहचान का तर्क दिया गया, जो दलित महापुरुषों के कद को छोटा करने की एक चाल थी। 14 शक्ति का दुरुपयोग: बहुमत का उपयोग विकास के बजाय उन प्रतीकों को मिटाने में किया गया जो दलित समाज के स्वाभिमान से जुड़े थे। 15, कानून व्यवस्था: सपा के 'गुंडाराज' के दौरान सबसे ज्यादा प्रताड़ना दलित समाज के निर्दोष लोगों ने झेली। 16, शिक्षा संस्थानों पर प्रहार: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के बजट और महत्व को कम करना शिक्षा के प्रति नहीं बल्कि विचारधारा के प्रति द्वेष था। 17 सांस्कृतिक वर्चस्व: सपा ने हमेशा एक विशेष वर्ग के सांस्कृतिक वर्चस्व को बढ़ावा दिया, जिससे दलित संस्कृति और पहचान पीछे छूट गई। 18, विश्वासघात: दलितों ने जब-जब सपा पर भरोसा किया, उन्हें बदले में उनके महापुरुषों के अपमान की राजनीति ही मिली। निष्कर्ष: उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि अखिलेश यादव की राजनीति दलितों के उत्थान की नहीं, बल्कि उनके प्रतीकों और अधिकारों को कुचलने की रही है, जो उन्हें दलित विरोधी साबित करती है। @samajwadiparty @mediacellsp @surya_samajwadi @AnilYadavmedia1 @JyotiDevSpeaks @BhanuNand
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@MediaHarshVT @ECISVEEP इस बात के लिए भी तारीफ होनी चाहिए कि 9 अप्रैल की वोटिंग की गिनती 4 मई को होगी।
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हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की इस बात के लिए प्रोसंसा होनी चाहिए कि, मतदान सिर्फ एक और दो चरणों में करा रहे हैं। हर राज्य में चुनाव एक चरण में ही होना चाहिए। यह @ECISVEEP की तैयारी को भी दिखाता है।
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Arvind kumar
Arvind kumar@arvindlucknow02·
@mukeshdeshka इनको बहुजन मूवमेंट से कोई लगाव नही है मुकेश भाई यह भाजपा के पिट्ठू बन चुके है।
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Mukesh Kumar Verma
Mukesh Kumar Verma@mukeshdeshka·
भीम भाई अगर मेरा खुद का घर लुट चुका है तो पहले में उसको बनाने की कोशिश करूंगा न कि पड़ोसी को बताऊंगा कि उसका घर क्यों लुटा। ठीक उसी तरीके से आप कभी इसपर भी विचार करिए कि BSP 2007 के बाद से लगातार नीचे गिरते हुए गर्त में क्यों पहुंच गई?? 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद 2022 में 1 सीट पर कैसे आ गई???
BHEEM BAUDH@BHEEM_BAUDH

यादवों के नेता अखिलेश यादव का मुख्यमंत्री न बनने के यह 18 बड़े कारण है 1, नाम परिवर्तन की राजनीति: अखिलेश यादव सरकार का सबसे विवादित कदम बीएसपी सरकार द्वारा बहुजन महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों और संस्थानों के नामों को बदलना 2 महापुरुषों का अपमान: ज्योतिबा फुले नगर, महामाया नगर और कांशीराम नगर जैसे जिलों के नाम बदलकर अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर दलित चेतना के प्रतीकों को चोट पहुँचाई। 3 प्रतीकों के प्रति शत्रुता: बाबा साहेब अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के सम्मान में बने स्मारकों और पार्कों को 'फिजूलखर्ची' बताकर उनका राजनीतिक विरोध किया गया। 4, पदोन्नति में आरक्षण का विरोध: संसद में पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) बिल फाड़ने की घटना सपा के दलित विरोधी रुख का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है। 5, प्रशासनिक उपेक्षा: सपा शासन के दौरान दलित अधिकारियों को मुख्यधारा के पदों से हटाकर हाशिए पर रखने के आरोप लगातार लगते रहे। 6,सामाजिक न्याय का ढोंग: 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देने वाली सपा के कार्यकाल में दलितों के खिलाफ अपराधों के आंकड़ों में वृद्धि देखी गई थी। 7, कांशीराम जी की विरासत का अपमान: मान्यवर कांशीराम उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर केवल भाषा विश्वविद्यालय करना उनकी विरासत को सीमित करने जैसा था। 8, योजनाओं को बंद करना: दलित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और विशेष कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की गई या उनके नाम बदल दिए गए। 9 सपा का मूल चरित्र: समाजवादी पार्टी का मूल वोट बैंक अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों के साथ संघर्ष की स्थिति में रहा है, जिसे अखिलेश नियंत्रित करने में विफल रहे। 10 राजनीतिक अवसरवाद: चुनाव आते ही अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना, लेकिन सत्ता में रहते हुए उनके नाम वाले जिलों को मिटाना दोहरे चरित्र को दर्शाता है। 11 इतिहास से छेड़छाड़: महापुरुषों के नाम हटाकर अखिलेश यादव ने आने वाली पीढ़ियों को दलित क्रांति के इतिहास से वंचित करने का प्रयास किया। 12, मानसिकता का परिचय: स्मारकों को 'पत्थरों का ढेर' कहना उनकी उस मानसिकता को उजागर करता है जो दलित गौरव को स्वीकार नहीं कर पाती। 13 क्षेत्रीय अस्मिता का बहाना: नामों को बदलने के पीछे क्षेत्रीय पहचान का तर्क दिया गया, जो दलित महापुरुषों के कद को छोटा करने की एक चाल थी। 14 शक्ति का दुरुपयोग: बहुमत का उपयोग विकास के बजाय उन प्रतीकों को मिटाने में किया गया जो दलित समाज के स्वाभिमान से जुड़े थे। 15, कानून व्यवस्था: सपा के 'गुंडाराज' के दौरान सबसे ज्यादा प्रताड़ना दलित समाज के निर्दोष लोगों ने झेली। 16, शिक्षा संस्थानों पर प्रहार: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के बजट और महत्व को कम करना शिक्षा के प्रति नहीं बल्कि विचारधारा के प्रति द्वेष था। 17 सांस्कृतिक वर्चस्व: सपा ने हमेशा एक विशेष वर्ग के सांस्कृतिक वर्चस्व को बढ़ावा दिया, जिससे दलित संस्कृति और पहचान पीछे छूट गई। 18, विश्वासघात: दलितों ने जब-जब सपा पर भरोसा किया, उन्हें बदले में उनके महापुरुषों के अपमान की राजनीति ही मिली। निष्कर्ष: उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि अखिलेश यादव की राजनीति दलितों के उत्थान की नहीं, बल्कि उनके प्रतीकों और अधिकारों को कुचलने की रही है, जो उन्हें दलित विरोधी साबित करती है। @samajwadiparty @mediacellsp @surya_samajwadi @AnilYadavmedia1 @JyotiDevSpeaks @BhanuNand

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