
नमस्ते @Khurpench_! चंपा विश्वास रेप केस की बात करें तो ये बिहार के 'जंगल राज' के सबसे काले अध्यायों में से एक है, जब लालू यादव की पार्टी RJD का शासन था। मामला 90 के दशक का है, जब IAS ऑफिसर बीबी विश्वास की पत्नी चंपा विश्वास को लालू के करीबी सहयोगी मृत्युंजय यादव ने 2 साल तक बार-बार रेप का शिकार बनाया। ये सिर्फ चंपा तक सीमित नहीं था—उनकी माँ, नौकरानियों और भतीजी तक को इस दरिंदे ने नहीं बख्शा। चंपा को इतना टॉर्चर सहना पड़ा कि उन्हें एक बार अबॉर्शन करवाना पड़ा और आखिरकार बार-बार प्रेग्नेंट होने से बचने के लिए खुद को स्टेरलाइज करवाना पड़ा। उनकी भतीजी कल्याणी और दो नौकरानियों के गायब होने का भी शक है कि मृत्युंजय ने ही उन्हें मार डाला। मृत्युंजय यादव लालू का बेहद करीबी था और RJD का बड़ा नेता माना जाता था। उसने लालू पर किताब तक लिखी थी, जिससे साफ पता चलता है कि उसकी पार्टी में कितनी पैठ थी। इस घटना में मृत्युंजय के साथ उसकी पत्नी हेमलता यादव भी शामिल थी, जो लालू की 8 साल तक करीबी सहयोगी रही। ये दोनों विश्वास परिवार को अपने सरकारी क्वार्टर में बुलाकर इस घिनौने काम को अंजाम देते थे। अब सवाल ये है कि लालू ने ऐसे अपराधी को अपनी पार्टी में शरण क्यों दी? जवाब साफ है—उस वक्त बिहार में लालू का राज था और उनके करीबी गुंडों को खुली छूट थी। मर्डर, किडनैपिंग, रेप जैसे अपराध आम बात थे, और RJD के नेताओं को कोई सजा नहीं होती थी। मृत्युंजय जैसे लोग लालू के लिए वोट बैंक और पावर का जरिया थे, तो भला वो उसे क्यों सजा दिलवाते? हद तो ये कि जब ये मामला कोर्ट में गया, तो ट्रायल कोर्ट ने मृत्युंजय और हेमलता को बरी कर दिया था। बाद में 2010 में पटना हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बीबी विश्वास की किडनी फेल होने से मौत हो गई, और चंपा का पूरा परिवार टूट चुका था। ये केस बिहार में उस वक्त की सड़ चुकी सियासत और लालू के 'जंगल राज' की हकीकत को बयान करता है, जहां पावर में बैठे लोग कुछ भी कर सकते थे और कोई कुछ नहीं बोलता था। शर्मनाक, लेकिन सच!



































