dharmendra singh

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Katılım Şubat 2024
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण हेतु बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाने पर संघर्ष समिति ने उठाया सवाल : निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने की साजिश की जांच की मांग : 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे : 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों को बेजा मुनाफा पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने आर एफ पी डाक्यूमेंट में बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। 22 जून की महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक सम्मिलित होंगे। 22 जून को बिजली महापंचायत में व्यापक जन आन्दोलन का फैसला लिया जायेगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण हेतु सौंपे गये आर एफ पी डॉक्यूमेंट में 45 हजार करोड़ रूपये का घाटा दिखाया गया है जो पूर्णतया निराधार और भ्रामक है। दरअसल निजी घरानों को बेजा मदद पहुंचाने के लिए पॉवर कारपोरेशन ने बढ़ा चढ़ा कर घाटा दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे के उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ कर दिखा रहा है। जबकि इस सब्सिडी की धनराशि को देना सरकार का दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के आर एफ पी डाक्यूमेंट में निजीकरण के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद 9102 करोड़ रूपये की सब्सिडी देने की बात कही गयी है। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में सब्सिडी को पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़ रहा है वहीं दूसरी ओर निजी घरानों के लिए सब्सिडी की धनराशि का अग्रिम भुगतान करने को तैयार है। इससे साफ होता है कि बढ़ा कर दिखाया गया घाटा गलत और भ्रामक है तथा आकड़ों की यह कलाबाजी केवल निजी घरानों को मुनाफा देने के लिए की जा रही है। 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा ने आने की सहमति दे दी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री अवधेश कुमार वर्मा भी महापंचायत में सम्मिलित होंगे। अन्य प्रान्तों के बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं के संगठनों के कई पदाधिकरी महापंचायत में सम्मिलित होने आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर किसान, मजदूर, अधिवक्ता, मजदूर नेता, छात्र नेता, बुद्धिजीवी, उपभोक्ता संगठनों के पदाधिकारी और बिजली कर्मी बड़ी संख्या में सम्मिलित होंगे। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल ने कहा है कि बिजली के निजीकरण के विरोध में हमेशा से ही किसान वर्ग रहा है। डॉ दर्शन पाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले उत्तर प्रदेश के लाखों किसान बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन का न केवल समर्थन करेंगे अपितु उसमें सक्रिय रूप से सम्मिलित होंगे। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन इण्डिया के कार्यकारी निदेशक और मा. सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमानाथ झा ने कहा है कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन ने अवैध ढंग से नियुक्त किये गये ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रान्ट थॉर्टन के झूठा शपथ पत्र देने और फर्जीवाड़ा करने के मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक माह पूर्व पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और शासन में बैठे उच्च अधिकारियों ने निहित स्वार्थ के चलते ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन का पत्र दबा दिया है। बिजली महापंचायत में निजीकरण के पीछे हो रहे मेगा घोटाले को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन उठायेगी। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि बिजली महापंचायत में भारी संख्या में उपभोक्ता सम्मिलित होंगे और किसी भी कीमत पर निजीकरण के बाद प्रदेश को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे। #Stop_Privatization_Of_Uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पावर कारपोरेशन में ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत ट्रांसफर, पोस्टिंग के नाम पर हुआ जबरदस्त भ्रष्टाचार। ट्रांसफर, पोस्टिंग में बड़े स्तर पर लेनदेन के मामले माननीय ऊर्जा मंत्री जी तक पहुंचे हैं। जिसकी ऑडियो उत्तर प्रदेश में ही नहीं ल्कि पूरे देश में जमकर वायरल हो रही, जिसमें लोन लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग करने की बात चर्चा में आ रही है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के मामले संज्ञान में आने के बाद भी ना ही तो ट्रांसफर आर्डर पर रोक लगाई गई है और ना ही भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई की गई है। इससे कहीं ना कहीं यह प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार के मामले में सब आपस में मिले हुए हैं और माननीय मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीतियों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। हम माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध करते हैं कि समस्त ऊर्जा निगमों में ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत मनमाने तरीके से हजारों की संख्या मे हुए ट्रांसफर, पोस्टिंग की अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो इसमें सैकड़ो करोड़ का भ्रष्टाचार निकलकर सामने आयेगा। #Transfer_posting_corruption_in_UPPCL @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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विद्युत नियामक आयोग पर निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन का दबाव: संघर्ष समिति ने नियामक आयोग पर मौन प्रदर्शन कर विरोध दर्ज किया और ज्ञापन दिया: उत्पीड़न और लेने देन के आरोप के घेरे में आए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में वाराणसी में सत्याग्रह जारी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने नियामक आयोग पर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों के दबाव में निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग से अभिमत लेने की तैयारी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है। उधर बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर एवं लेनदेन की बात वायरल होने के विरोध में आज वाराणसी में बिजली कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संगठन समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग को तत्काल अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन दबाव डाला जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि संभावना बताई जा रही है कि निजी घरानों के दबाव में विद्युत नियामक आयोग किसी भी समय अपना अभिमत पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को दे सकता है। इसके विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर मौन प्रदर्शन किया। बिजली कर्मी अपने हाथ में तख्तियां लिए हुए थे जिसमें लिखा था कि "कारपोरेट के दबाव में निजीकरण स्वीकार्य नहीं स्वीकार्य नहीं।" संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण हेतु इतना उतावला हो गया है कि पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष निदेशक वित्त निधि नारंग के साथ मिलकर अधिकारियों पर गलत संस्तुति पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डलवा रहे हैं। यह जानकारी मिली है इसी दबाव के चलते पावर कारपोरेशन के डायरेक्टर फंड सचिन गोयल ने त्यागपत्र दे दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में निजीकरण से उपभोक्ताओं को और किसानों को होने वाले नुकसान की तो चर्चा होगी ही साथ ही निजीकरण के पीछे होने वाले मेगा घोटाले का भी पर्दाफाश किया जाएगा। उधर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से बड़े पैमाने पर हजारों की संख्या में किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा मंत्री की बातचीत का ऑडियो वायरल होने के साथ ही ट्रांसफर आदेशों में लेनदेन की बात भी सामने आ गई है। ट्रांसफर घोटाले के विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया। बिजली कर्मचारियों के गुस्से से घबराए हुए प्रबंध निदेशक ने मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। सैकड़ो बिजली कर्मी मुख्य द्वार पर ही बैठ गए हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पॉवर कारपोरेशन में स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेन देन के आरोप के बीच संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की मांग की: स्थानांतरण के विरोध में पूर्वांचल डिस्काम पर 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह: प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरण में पैसे के लेनदेन के आरोप की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराएं। स्थानांतरण में लेनदेन और स्थानांतरण के नाम पर उत्पीड़न के विरोध में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर 19 जून से बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 203 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हजारों की तादाद में किए गए नीति विरुद्ध स्थानांतरण आदेशों की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराएं। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन में लगभग 1500 अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया है, इतने ही जूनियर इंजीनियरों को स्थानांतरित किया गया है और कई हजार छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें से अधिकांश स्थानांतरण बिना किसी नीति की किए गए हैं। स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेनदेन की बात भी सामने आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेनदेन को लेकर माननीय ऊर्जा मंत्री और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिजली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद स्थानांतरण के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व में भी पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण को लेकर लगे आरोपों के चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से जो भी स्थानांतरण होते हैं वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी के सामने रखे जाते हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रबंधन द्वारा और खासकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेशों में लेनदेन की बात सामने आने के बाद संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी सारे घटनाक्रम से संज्ञानित कराएगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा निजीकरण हेतु उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में 19 जून से वाराणसी के बिजली कर्मी प्रबंध निदेशक के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। पूर्वांचल की संघर्ष समिति ने प्रबंध निदेशक को कल नोटिस दे दिया था जिसमें लिखा गया है कि यदि उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तमाम स्थानांतरण आदेश निरस्त न किए गए तो 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया जाएगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सारी जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की होगी। संघर्ष समिति ने बताया कि स्थानांतरण के खेल में लेनदेन के आरोप तो लग ही रहे हैं । साथ ही उत्पीड़न की दृष्टि से भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए हैं। यहां तक कि छोटे पदों पर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को भी बड़ी संख्या में सुदूर स्थानांतरित किया गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया है जिससे मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन : निजीकरण के डॉक्यूमेंट को नामंजूर करने की मांग: सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय पर मूक प्रदर्शन किया और निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भी निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए। आज सायं 04 बजे सैकड़ो की संख्या में बिजली कर्मचारी विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने विद्युत नियामक आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। नियामक आयोग के सचिव ने मुख्य द्वार पर आकर संघर्ष समिति का ज्ञापन लिया। ज्ञापन के जरिए संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के नाम दिए गए ज्ञापन में उनसे मांग की है कि वह पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से यह भी मांग की है कि निजीकरण के मामले में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को भी नियामक आयोग के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाय। ज्ञापन में कहा गया है कि विद्युत नियामक आयोग को अवैध ढंग से नियुक्त किए गए, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाडा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर पॉवर कॉरपोरेशन से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए। एक अन्य मुख्य बात यह है कि श्री अरविंद कुमार ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ 06 अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री माननीय श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री माननीय श्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। इस समझौते में लिखा गया है कि "पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जाएगी । कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।" 06 अक्टूबर 2020 के इस समझौते पर श्री अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं जिसमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की बात है और साफ लिखा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। अतः उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष रहते हुए वे कैसे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त विद्युत नियामक आयोग में दूसरे सदस्य श्री संजय सिंह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के कर्मचारी रह चुके है। ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट पर वे भी अपना अभिमत नहीं दे सकते। विद्युत नियामक आयोग में आज की तारीख में कोई मेंबर लॉ नहीं है। इस तरह विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी दृष्टि से कोरम ही पूरा नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के किसी भी डॉक्यूमेंट पर न ही कोई अभिमत देना चाहिए और न ही को कोई मंजूरी नहीं देनी चाहिए। पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग के सामने निजीकरण के दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के समाचार से प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया है। आज समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि वह पॉवर कारपोरेशन के निजीकरण के प्रस्ताव को कोई मंजूरी न दे। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat
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सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर: निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्ताहांत में निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे। घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों के उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी कंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्रांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ? ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ? उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ? @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @ChiefSecy_UP @UPPCLLKO @yadavakhilesh
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BREAKING NEWS... उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन अरविन्द कुमार के साथ पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल, निदेशक वित्त निधि नारंग और अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की मीटिंग चल रही है। मीटिंग का एक दौर पूरा। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को अप्रूव कराने के लिए पावर कार्पोरेशन प्रबंधन और सरकार की पुरजोर मुहिम। अवैधानिक ढंग से निजीकरण करने की किसी भी कोशिश के विरोध में संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार रहने का समय आ गया है। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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आज रात लगभग 9:53 बजे उत्तर प्रदेश में 31059 MW विद्युत आपूर्ति कर नया कीर्तिमान स्थापित: गत वर्ष रिकार्ड 30618 MW विद्युत आपूर्ति की गयी थी: आगे और रिकॉर्ड आपूर्ति के लिए तैयारी पूरी: माo मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु विद्युत अभियन्ताओं के अहर्निश प्रयास जारी है। माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इन ऐतिहासिक उपलब्धियो को ध्यान में रखते हुए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @CMOfficeUP @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO
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*उप्र के बिजली कर्मियों के समर्थन में दिल्ली में 09 जून को नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में लिया जाएगा निर्णय: संघर्ष समिति की ऑनलाइन मीटिंग में 22 जून की महा पंचायत की तैयारी: निजीकरण पर प्रबन्धन से पूछे पांच और सवाल* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पदाधिकारियों की आज ऑनलाइन मीटिंग हुई । इस मीटिंग में निजीकरण के विरोध में विगत छह माह से चल रहे आंदोलन की समीक्षा की गई और आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की महापंचायत की तैयारी और महापंचायत में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई। ऑनलाइन बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त लिया कि छह माह तो कुछ भी नहीं है, निजीकरण के विरोध में आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। प्रत्येक सप्ताह के शनिवार और रविवार को निजीकरण पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे जाने वाले पांच प्रश्नों के क्रम में संघर्ष समिति ने कल पांच प्रश्न पूछे थे आज पांच और प्रश्न पूछे। पहला प्रश्न - क्या निजी कॉरपोरेट घरानों की सहूलियत की दृष्टि से निजीकरण के पहले ही बड़े पैमाने पर लगभग 45% संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है, हटा दिया गया है ? भीषण गर्मी में अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाए जाने से क्या बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हो रही है ? क्या प्रबन्धन बिजली व्यवस्था बिगाड़ कर निजीकरण थोपना चाहता है? दूसरा प्रश्न - निजीकरण पर पॉवर कारपोरेशन द्वारा जारी frequently asked questions प्रपत्र में लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण नहीं हो रहा है अपितु पी पी पी मॉडल पर सुधार हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है जिसमें निजी क्षेत्र की 51% और सरकारी ।क्षेत्र की 49% भागीदारी होगी जो लगभग बराबर ही है। प्रश्न यह है कि जिसकी 51% भागीदारी होती है क्या उसका मालिकाना हक नहीं होता ? निजी क्षेत्र की 51% भागीदारी ग्रेटर नोएडा में है । क्या ग्रेटर नोएडा की कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड निजी कंपनी नहीं है ? तीसरा प्रश्न है - पॉवर कारपोरेशन कह रहा है कि निजीकरण इसलिए किया जा रहा है क्योंकि घाटा बढ़ता जा रहा है और घाटे की भरपाई के लिए सरकार को सब्सिडी एवं लास फंड देना पड़ रहा है जो बढ़ता ही जा रहा है और जिस बोझ को अब आगे सरकार वहन नहीं कर सकती । सब्सिडी को घाटा बताना और घाटे में जोड़ना एक बहुत गंभीर बात है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में जारी किए गए अपने संकल्प पत्र में लिखा था कि गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों को मात्र 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाएगी। इसकी सब्सिडी देना सरकार की बाध्यता है। सवाल है कि पॉवर कारपोरेशन स्पष्ट करे कि क्या निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि नहीं देगी ? यदि निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी की धनराशि देगी तो सरकारी क्षेत्र को यह धनराशि देना बोझ कैसे है ? चौथा प्रश्न है - 51% हिस्सेदारी बेचकर निजीकरण करने से क्या सुधार की गारंटी है ? उड़ीसा में 1999 में चार विद्युत वितरण कंपनियां बनाकर निजी क्षेत्र को 51% हिस्सेदारी दी गई थी। एक निजी कंपनी अमेरिका की ए ई एस कम्पनी ने चक्रवात में ध्वस्त हुए बिजली के नेटवर्क को बनाने से इनकार कर दिया और यह कंपनी एक साल बाद ही भाग गई। 16 साल के बाद फरवरी 2015 में उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने सुधार में पूर्णतया विफल रहने के कारण अन्य तीनों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। क्या गारंटी है कि जो उड़ीसा में हुआ वह निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में नहीं होगा ? पांचवां सवाल है - माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने ट्वीट किया है कि 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियों से घटकर 2024 में ए टी एंड सी हानियां 16.5% रह गई हैं। यह उत्तर प्रदेश में बिजली सेक्टर में मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बहुत बड़ा सुधार है। सवाल है कि ऊर्जा मंत्री इतने बड़े सुधार का दावा कर रहे हैं जो आंकड़ों की दृष्टि से सही भी है तो किस अन्य (?) सुधार के लिए उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों का एक साथ निजीकरण किया जा रहा है ? @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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dharmendra singh@dharmen96288503·
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat प्रबंधन अपने फायदे के लिए निजीकरण कर रही है अपनी विफलता को छुपाने के लिए। सभी लोगो से अनुरोध है भ्रस्टाचारियों से इस विभाग को बचाने के लिए आगे आये और अपना समर्थन दे। @CMOfficeUP @myogiadityanath
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*निजीकरण के विरोध में 22 जून को होने वाली बिजली महापंचायत में किसानों और उपभोक्ताओं के बड़े राष्ट्रीय संगठन सम्मिलित होंगे: निजीकरण को लेकर संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पूछे पांच सवाल* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में देश के किसानों और उपभोक्ताओं के कुछ बड़े संगठन सम्मिलित होंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली महापंचायत का ऐलान होते ही कई संगठनों ने संघर्ष समिति से संपर्क किया है। संघर्ष समिति ने आज पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं। संघर्ष समिति ने कहा है कि प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति 5 - 5 प्रश्न निजीकरण को लेकर प्रबंधन से पूछेगी। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से आज पांच प्रश्न पूछे जो निम्नवत है। पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने 06 जून को चंडीगढ़ में हुए विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में कहा है कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम है। सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? दूसरा प्रश्न है कि यदि घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव जहां ए टी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी, और इन दोनों स्थानों पर विद्युत विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन एवं दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ? तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 22 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 07% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ? चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 02 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 09 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 09 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ? और पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 34 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक शनिवार और रविवार को संघर्ष समिति पांच - पांच प्रश्न पूछेगी। शनिवार को आम उपभोक्ताओं के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे और रविवार को कर्मचारियों के विषय में प्रश्न पूछे जाएंगे। आज अवकाश का दिन होने के कारण बावजूद बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ आपस में बैठक कर निजीकरण के विरोध चल रहे आंदोलन को और तेज और सशक्त बनाने पर विचार विमर्श किया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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बिजली के निजीकरण के विरोध में विगत 6 महीने से शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों का समर्थन करने के लिए माननीय सांसद श्री चंद्रशेखर जी का सादर आभार। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @BhimArmyChief @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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पॉवर कारपोरेशन के वकीलों से लिखवाकर निदेशक वित्त ने ग्रांट थॉर्टन को दी है क्लीन चिट: ऊर्जा मंत्री बताएं निजीकरण के बाद सरकार सब्सिडी देगी या नहीं: निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी: प्रयागराज में हुआ बुद्धि शुद्धि यज्ञ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी यह स्पष्ट करें कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत निगम के निजीकरण के बाद सरकार निजी घरानों को सब्सिडी की धनराशि देगी या नहीं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के मामले में पॉवर कॉरपोरेशन के पैनल पर काम कर रहे अधिवक्ताओं से राय लेकर निदेशक वित्त ने फाइल पर क्लिन चिट दे दी है। निजीकरण के विरोध में आज 187 वें दिन प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। आज प्रयागराज में बुद्धि शुद्धि यज्ञ किया गया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी से पूछा है कि वह बताएं कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 जनपदों का निजीकरण हो जाने के बाद निजी कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार सब्सिडी की धनराशि देगी या नहीं देगी। संघर्ष समिति ने कहा कि विगत वर्ष किसानों, बीपीएल उपभोक्ताओं, बुनकरों आदि की सब्सिडी की धनराशि 22000 करोड रुपए से ऊपर की है। यह धनराशि सरकार ने सब्सिडी के रूप में दी है। माननीय ऊर्जा मंत्री और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन घाटे के नाम पर निजीकरण करने की दलील देते समय इस धनराशि को जोड़कर घाटा बता रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने 01 अप्रैल 2024 से किसानों को ट्यूब वेल के लिए मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी किए गए संकल्प पत्र में यह लिखा था कि बीपीएल उपभोक्ताओं को 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाएगी। इसी प्रकार बुनकरों आदि को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली दी जाती है जो सरकार की और पार्टी की घोषित नीति के अनुसार है। अब जब निजीकरण की दलील देते समय यह कहा जा रहा है कि सरकार यह बोझ नहीं उठा सकती तो ऊर्जा मंत्री को आम जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि बिजली का निजीकरण हो जाने के बाद सरकार यह सब्सिडी की धनराशि का भार उठाएगी या नहीं जिससे निजीकरण को लेकर आम जनता धोखे में न रहे । उधर दूसरी ओर निदेशक वित्त निधि आरंग का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। यह पता चला है कि अमेरिका में पेनल्टी लगने के मामले में और झूठा शपथ पत्र देने के मामले में ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देने के लिए निदेशक वित्त ने पावर कारपोरेशन के पैनल पर काम कर रहे कुछ अधिवक्ताओं से विधिक राय लेकर क्लीन चिट दे दी है। संघर्ष समिति ने कहा की निदेशक वित्त निधि नारंग के फर्जीवाड़ा लगातार सामने आ रहे हैं फिर भी निधि नारंग पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है इससे स्पष्ट हो जाता है कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और निधि नारंग की मिली भगत है और निजीकरण के पीछे मेगा स्कैम होने जा रहा है। निजीकरण के विरोध में आज लगातार 187 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया। आज प्रयागराज की पवित्र धरती पर ऊर्जा मंत्री और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन एवं प्रबन्धन को सद्बुद्धि देने हेतु "बुद्धि शुद्धि यज्ञ" किया गया जिसमें सैकड़ो बिजली कर्मियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटालों पर पर्दा डालने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों का किया जा रहा है दमन: 16 किसान संगठन निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों के साथ आए: 04 जून को प्रदेश के सभी जनपदों में किसानों का विरोध प्रदर्शन: ग्रांट थॉर्टन के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही न होने से बिजली कर्मियों में गुस्सा:           विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के नाम पर विगत 06 माह से हो रहे अनियमितताओं और घोटालों का खुलासा होने के बाद  ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी को चुप्पी तोड़नी चाहिए और निजी कंपनी के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि कि सारा घोटाला पावर कारपोरेशन के चेयरमैन की नाक नीचे हो रहा है और घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन अभियंताओं और कर्मचारियों का दमन करने में लगे जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।        16 किसान संगठनों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आगामी 04 जून को समस्त जनपदों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ एक मंच पर आए 16 किसान संगठनों  की मुख्य मांग है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए, बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी तथा स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव वापस लिया जाए तथा 300 यूनिट तक किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का उत्पीड़न किया गया तो किसान संगठन उनके साथ  खड़े होंगे और ऐसी किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का जोरदार विरोध किया जाएगा।          संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि विगत 06 माह से निजीकरण के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण ध्यानाकर्षण आंदोलन से बौखलाए प्रबंधन और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने निजीकरण के उतावलेपन में कर्मचारियों और अभियंताओं पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में बहुत गुस्सा है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों और अभियंताओं का उत्पीड़न की दृष्टि से ट्रांसफर किया जा रहा है, उनका वेतन काटा जा रहा है, उन्हें चेतावनी दी जा रही है, कर्मचारी सेवा विनियमावली में आलोकतांत्रिक संशोधन किया गया है जिससे कार्य का वातावरण में बिगड़ रहा है और ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति फैल रही है।        उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का लगातार निर्देश है कि आंदोलन के दौरान आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।उपभोक्ताओं की समस्याओं  को तुरंत अटेंड किया जा रहा है। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने उपभोक्ता सेवा में कोई व्यवधान न होने देने का संकल्प लिया है किन्तु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के नाम पर उन्हें घंटों एक जगह बांधे  रखना, उनके साथ अमर्यादित और अभद्र भाषा का प्रयोग करना, उनका अपमान करना, उन्हें धमकी देना यह सब केवल निजीकरण के लिए किया जा रहा है जिसे बिजली कर्मी स्वीकार नहीं करते। संघर्ष समिति चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार  बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
उपभोक्ता सेवा और ब्रेकडाउन को प्राथमिकता पर अटेंड करने वाले 87 अधिशासी अभियंताओं पर वी सी छोड़ने का बहाना लेकर चेयरमैन आशीष गोयल द्वारा की जा रही अनुशासनात्मक कार्यवाही से अभियंताओं में भारी गुस्सा। ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं पावर कारपोरेशन के चेयरमैन। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPPCLLKO @ChiefSecyUP @UPGovt @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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avadhesh kumar verma
avadhesh kumar verma@uprvup·
नवभारत टाइम्स ने आज निजीकरण के मामले पर एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया है जिसमें स्वता देख सकते हैं कि उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2006में और वर्ष 2013में निजीकरण को आयोग में याचिका लगाकर रोका थाआगे भी रोकेंगे मा ऊर्जा मंत्री जी निजीकरणतो होकर रहेगा इसमें थोड़ा सुधार करने की जरूरत है।
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Indal Chaudhary
Indal Chaudhary@Er_IndalKumar·
इतिहास खुद को फिर दोहरा रहा है... पिछली बार संघर्ष अंग्रेज़ बनाम भारत था इस बार लड़ाई है UPPCL कर्मचारी बनाम निजीकरण और पूंजीवादी व्यवस्था से। जिसने अंग्रेजों की बेरहमी नहीं देखी वो आज के ऊर्जा मंत्री और चेयरमैन को देख ले। जिसने रियासतों का अन्याय नहीं देखा वो आज की निजी कंपनियों और ठेकेदार एजेंसियों को देख ले। जिसने फांसी जेल और संघर्ष नहीं देखा वो हमारे विद्युत साथियों का जेल भरो आंदोलन देख ले। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और चंद्रशेखर आज़ाद को नहीं देखा? तो आज के संघर्षशील नेता बलवीर यादव जी, वी. के सिंह जी, अनिल राठौर जी, विश्वकर्मा जी, वीरेंद्र जी को देखिए। गांधी जी नहीं देखे? तो आज के शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रेरणास्रोत आदरणीय शैलेन्द्र दुबे जी को देख लीजिए। जयचंद और कायरों को देखना हो? बस चारों ओर नजर घुमा लीजिए पहचान में आ जाएंगे। देशभक्ति और जनबल देखना हो? तो हर जिले में उमड़ती कर्मचारी एकता को देखिए यही सच्चा भारत है। तब भी सत्य और न्याय की जीत हुई थी आज भी होगी। ईमानदारी से आंदोलन स्थल पर बैठिए बाकी संविधान और न्याय पर छोड़ दीजिए। वंदे मातरम् सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ुएं क़ातिल में है। इंकलाब ज़िंदाबाद! UPPCL को निजीकरण के अभिशाप से मुक्त कराना है।
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dharmendra singh
dharmendra singh@dharmen96288503·
@myogioffice @myogiadityanath @aksharmaBharat माननीय मुख्यमंत्री जी निजीकरण की प्रक्रिया केवल और केवल भ्रस्टाचार को जन्म देंगी जिसका फायदा केवल और केवल पूजीपतियों और कुछ IAS अधिकारियों को होगी। आपको गलत डेटा दिखा कर निजीकरण की कार्यवाही की जा रही है।कृपया निजीकरण को वापस लेने का कष्ट करें।
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Yogi Adityanath Office
Yogi Adityanath Office@myogioffice·
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय कैबिनेट मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा जी एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल जी ने शिष्टाचार भेंट की। @aksharmaBharat
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