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@dushyantlive

• Author @Penguin @Rajkamal • Screen Writer, Lyricist • #DAV • PhD in History • Columnist @NavbharatTimes @AmarUjalaNews

Bombay, India Katılım Ocak 2013
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Dushyant@dushyantlive·
#Daalchini दालचीनी उपन्यास पर प्रसिद्ध लेखक फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज जी की राय
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Dushyant
Dushyant@dushyantlive·
@TheTribhuvan वाह, बहुत सुंदर
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
राहुल सांकृत्यायन के बारे में आज के युवाओं को चौंका देने वाली दस अहम बातें : 1.उनका नाम राहुल नहीं, केदारनाथ पांडेय था। यानी जिस व्यक्ति को हम “महापंडित राहुल सांकृत्यायन” के नाम से जानते हैं, उसने अपने जीवन में सिर्फ विचार नहीं बदले, अपना व्यक्तित्व भी खुद गढ़ा। यह अपने आप में बताता है कि मनुष्य जन्म से नहीं, अपनी बौद्धिक यात्राओं से बनता है। 2.वे 13 साल की उम्र में घर से भाग गए थे। आज के युवाओं के लिए यह चौंकाने वाली बात है कि भारत के सबसे बड़े घुमक्कड़-बुद्धिजीवियों में एक ने किशोरावस्था में ही तय कर लिया था कि सामान्य, सुरक्षित, व्यवस्थित जीवन उनके लिए नहीं है। 3.वे एक ही विचारधारा में बंद नहीं रहे। वैष्णव साधु से आर्यसमाजी, फिर बौद्ध भिक्षु और अंततः नास्तिक समाजवादी और अंततः मार्क्सवादी बने।आज जब लोग एक ट्वीट या एक पहचान में खुद को बंद कर लेते हैं, राहुल सांकृत्यायन का जीवन बताता है कि सच्चा बुद्धिजीवी लगातार अपने विश्वासों की परीक्षा करता है। 4.उन्होंने ईश्वर-दर्शन की चाह में कठोर तप किया और विफल होने पर आत्महत्या तक का प्रयास किया। यह प्रसंग केवल सनसनीखेज नहीं, बल्कि गहरा मानवीय है। इससे पता चलता है कि उनका नास्तिकता की ओर जाना फैशन नहीं था; वह एक बहुत कठिन आत्मानुभव और तर्क की यात्रा का परिणाम था। 5.उन्होंने भारत के बड़े हिस्से और हिमालयी इलाकों की यात्राएँ पैदल कीं। आज की “ट्रैवल” संस्कृति से यह बिल्कुल अलग है। उनके लिए यात्रा पर्यटन नहीं, ज्ञान-साधना थी। वे घूमने नहीं, सीखने निकलते थे। इसी कारण उन्हें हिन्दी यात्रा-साहित्य का जनक कहा जाता है। 6.उन्होंने तिब्बत से हजारों दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियाँ खोजकर भारत लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। पटना म्यूज़ियम के आधिकारिक विवरण के अनुसार, उनसे जुड़ी लगभग 10,000 पांडुलिपियों का दान दर्ज है। सोचिए, एक लेखक केवल किताबें लिख ही नहीं रहा था, वह भारत की खोई हुई बौद्धिक स्मृति वापस ला रहा था। 7.वे बहुभाषी विलक्षण प्रतिभा थे, लेकिन लिखना उन्होंने मुख्यतः हिन्दी में चुना। उनके बारे में लगभग 30 भाषाओं का ज्ञान होने का उल्लेख मिलता है। और फिर भी उन्होंने ज्ञान की प्रतिष्ठा अंगरेज़ी में नहीं, हिन्दी में बनाई। यह आज के युवाओं के लिए बड़ा सबक है कि भाषाहीनता नहीं, आत्मविश्वास का माध्यम भी हो सकती है। 8.वे केवल लेखक नहीं, जेल जाने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे। वे किसान आंदोलनों और औपनिवेशिक सत्ता-विरोधी गतिविधियों से जुड़े, कई बार जेल गए और उनका लेखन सिर्फ पुस्तकालयी बौद्धिकता नहीं था; वह संघर्ष से पैदा हुआ विचार था। 9.उन्होंने रूस में पढ़ाया, एक रूसी महिला एलेना कोज़ेरोव्सकाया से विवाह किया और उनका पुत्र इगोर हुआ। यह बात आज भी बहुतों को नहीं मालूम। एक हिन्दी लेखक, बौद्ध विद्वान, किसान-नेता और अंतरराष्ट्रीय जीवन जीने वाला व्यक्ति—यह संयोजन राहुल सांकृत्यायन को अपने समय से बहुत आगे का मनुष्य बनाता है। 10.वे केवल ‘घुमक्कड़’ नहीं, गंभीर इतिहासकार भी थे और ‘मध्य एशिया का इतिहास’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला। हिन्दी में गंभीर, विश्वस्तरीय इतिहास-लेखन संभव है; यह उन्होंने करके दिखाया। साहित्य अकादेमी की आधिकारिक सूची में 1958 में उनके लिए मध्य एशिया का इतिहास दर्ज है। राहुल सांकृत्यायन से आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा सबक यह निकलता है: ज़िंदगी को सिर्फ करियर मत बनाइए, उसे बौद्धिक साहस, यात्रा, भाषा, तर्क और आत्म-परिवर्तन की खुली प्रयोगशाला बनाइए। वे अतुलनीय कल्पनाशील थे। उन्होंने “बाईसवीं सदी” जैसी पुस्तक बीसवीं सदी में लिखी। “तुम्हारी क्षय” उनकी कमाल पुस्तक है।
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The Wire हिंदी
The Wire हिंदी@thewirehindi·
.@Anjuranjan का कहानी संग्रह 'एक तरेंगन, दो तरेंगन' के स्त्री किरदार अलग से चमकते हैं, उन किरदारों की आभा एक बेहतर बनती हुई दुनिया, एक बेहतर दुनिया के लिए सपने देखने और एक बेहतर दुनिया के लिए उनकी बाहरी-भीतरी जद्दोजहद का इशारा करती है. @dushyantlive✍️thewirehindi.com/324724/book-re…
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The Wire हिंदी
The Wire हिंदी@thewirehindi·
.@manwithaquill और @TabeenahAnjum की किताब पत्रकारीय अनुभवों का रोज़नामचा भर नहीं है, किताब के निरीक्षण बहुत सूक्ष्म हैं. यह भाषा में पत्रकारीय सरलता रखते हुए भी समझ और प्रस्तुति में शोधपूर्ण इतिहास ग्रंथ का एहसास देती है. | @dushyantlive✍️ thewirehindi.com/322543/book-re… | @PanMacIndia
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Dushyant
Dushyant@dushyantlive·
मिलते हैं डिब्रूगढ़ लिट फेस्ट 2026 में..
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Dushyant
Dushyant@dushyantlive·
#दालचीनी अब हिंदी की एक किताब का भी नाम है #किताब_उत्सव_मुंबई @RajkamalBooks
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@yv_post ज़िंदाबाद
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Yashwant  Vyas
Yashwant Vyas@yv_post·
बेगमपुल से दरियागंज के साथ विश्व पुस्तक मेले में ।18 जनवरी रविवार को। पेंगुइन का आमंत्रण।
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Ashutosh Bhardwaj
Ashutosh Bhardwaj@ashubh·
नयी किताब.
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Dushyant@dushyantlive·
@yv_post नमन। सुंदर विदा लेख
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Yashwant  Vyas
Yashwant Vyas@yv_post·
इसमें तुम्हारे पूर्वजों की स्मृति है। अप्रतिम ज्ञानरंजन। विनम्र श्रद्धांजलि। #Gyanranjan #RIP #Pahal
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Dushyant@dushyantlive·
अमर उजाला में 4 जनवरी को बुकर विजेता गीतांजलि श्री से संवाद ( बुकर के बाद आए पहले उपन्यास "सह-सा" के बहाने से) @AmarUjalaNews @yv_post @TheBookerPrizes #BookerPrize @RajkamalBooks
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Dushyant@dushyantlive·
@drpsvohra ये भी झोला छाप है...
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Dushyant@dushyantlive·
मैं इस कुएं में पड़ी भांग पर क्या ही कहूं। देश के कानून मंत्री आपके दोस्त हैं। आप ही कुछ करें..
Dr P S Vohra@drpsvohra

@dushyantlive

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Dushyant@dushyantlive·
@TheTribhuvan कवि, कविता और वाचक तीनों कमाल हैं
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ भाई सौरभ द्विवेदी का, जिन्होंने मेरी कविता “अरावली के आख़िरी दिन” अपने अंदाज़ में पढ़ी है और इसे आज के अरावली के दर्द से जोड़ दिया है। यह कविता दरअसल अरावली का शोकगीत नहीं, हमारे समय के मिथक का पोस्टमार्टम है। हम “विकास” को प्राकृतिक मान लेते हैं, प्रकृति को लॉन में बदल देते हैं और जीवों को शब्दकोश में क़ैद कर देते हैं। और फिर आईफ़ोन के नोटिफिकेशन के बीच एक पहाड़ के मरने की ख़बर को भी स्क्रोल कर देते हैं। @saurabhtop
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Dushyant@dushyantlive·
@RichaChadha जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो
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Dushyant
Dushyant@dushyantlive·
@yv_post ज़िंदाबाद
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Yashwant  Vyas
Yashwant Vyas@yv_post·
मैंने सिर्फ और सिर्फ अंग्रेज़ी किताबें पढ़ी हैं, पहली हिंदी किताब होगी " बेगमपुल से दरियागंज"~ कहा जाने~ माने अंग्रेजी शिक्षाविद कुलभूषण ने। शुक्रिया, देहरादून क्राइम फेस्टिवल। फिल्मकार केतन मेहता की साक्षी, साथ आलोक लाल, रणधीर अरोरा, सुबोध भारतीय और संजीव मिश्र।
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