harjeet
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GDA की प्रमुख आवासीय योजनाएँ – आपके सपनों के घर की ओर एक कदम
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की “पहले आओ–पहले पाओ” योजना के अंतर्गत NCR क्षेत्र में विभिन्न रेडी-टू-मूव आवासीय योजनाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं —
🔹Koyal Enclave Yojana
🔹Indraprastha Yojana
🔹Madhuban–Bapudham (Pocket-F)
🔹Madhuban–Bapudham (Pocket-C)
ये सभी योजनाएँ किफायती दरों, उत्कृष्ट लोकेशन और सुनियोजित विकास का भरोसा देती हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
✔ किफायती दरों पर रेडी-टू-मूव आवास
✔ 1BHK एवं 2BHK विकल्प उपलब्ध
✔ सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आवासीय परिसर
✔ प्रमुख मार्गों, एक्सप्रेसवे एवं परिवहन सुविधाओं से बेहतर कनेक्टिविटी
✔ सैंपल फ्लैट उपलब्ध
अपने परिवार की आवश्यकता और बजट के अनुसार अपना पसंदीदा घर चुनने का अवसर।
अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु GDA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ या QR कोड स्कैन करें।
#GDA #AffordableHousing #NCRHomes #ReadyToMove #FirstComeFirstServe
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में दिनांक 20 नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन प्रारंभ।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें।
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl

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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@aksharmaBharat
@mlkhattar
@UPPCLLKO

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उपाध्यक्ष महोदय के निर्देश पर, 30.09.2025 को मिली आपत्तियों के समाधान हेतु, श्मशान घाट के निकट के भूखण्ड स्थानांतरित किए गए। लोहिया नगर हिन्दी भवन में लॉटरी ड्रॉ द्वारा 160 आवंटियों को नए स्थान पर भूखण्ड दिए गए। यह पारदर्शी प्रक्रिया आवंटियों के लिए लाभकारी रही।
#GDA #ghaziabad
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उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के नाम पर लगभग एक लाख करोड़ की जनता के पैसों से बनी सरकारी परिसंपत्तियों को मात्रा लगभग 6500 करोड रुपए बेस प्राइस में चुनिंदा पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है।
इसलिए हम कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े सरकारी संपत्तियों की लूट हो रही है, इसे हम सभी उपभोक्ताओं, किसानो, कर्मचारियों और छात्रों को मिलकर रोकना होगा।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि कृपया निजीकरण के दस्तावेज की सीबीआई से जांच कराने की कृपा करें, जिससे निजीकरण के नाम सरकारी संपत्तियों की हो रही लूट जनता के सामने आ सके।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
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@gdagzb @dm_ghaziabad @CMOfficeUP @UPGovt Sir madhuban bapudham ke shamshan ke pass vale bhukhado ka kab transfer hoga
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आज दिनांक 24.09.2025 को प्राधिकरण के सभागार कक्ष में मैसर्स विभोर वैभव इन्फ्राहोम प्रा.लि. (वीवीआईपी) द्वारा निर्मित ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स का आवंटन पात्र आवेदकों को लॉटरी ड्रॉ के माध्यम से किया गया। इस सफल आयोजन से आवेदकों को किफायती और सुविधाजनक आवास का लाभ मिला।
#GDA #खबर

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निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन: आन्दोलन के लगातार 300 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार : प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन : आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने के समाचार से बिजली कर्मियों में उबाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि जोर जबरदस्ती करके निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 300 दिन पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सामूहिक जेल भरो सत्याग्रह प्रारम्भ करने का संकल्प लिया।
राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज शक्ति भवन मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि बिजली कर्मी घाटे के झूठे आंकड़े,दमन और उत्पीड़न के नाम पर किसी भी स्थिति में निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यह विदित हुआ है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी जाएगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ नियमित मुलाकात हो रही है और डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण के मामले में बिचौलिए की भूमिका का निर्वाह कर रही है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच में आ जाने के बाद से निजीकरण के मामले में लेन देन की चर्चा भी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्रिया और आरएफपी डॉक्यूमेंट को गोपनीय रखना बहुत गंभीर बात है और इस तरह सारी प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो संभवत: यह देश के इतिहास में पहली बार होगा की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूमेंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 28 नवंबर से लगातार चल रहे आंदोलन के आज 300 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि वे किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर निजीकरण के विरोध में अपना आन्दोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में हुई विरोध सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, अजय कुमार, बलबीर सिंह यादव, महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद,श्री चन्द ,दीपक चक्रवर्ती, मोहम्मद इलियास , प्रेम नाथ राय, सरजू त्रिवेदी ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
राजधानी लखनऊ के अलावा वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
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@timesofindia
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@EconomicTimes



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@OfficeOfNG @nitin_gadkari जितनी पॉपुलैरिटी आपकी थी E 20 ने सब पर पानी फेर दिया है
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@OfficeOfNG @nitin_gadkari E20 ka effect :
कल journey में जो गाड़ी 15+का माइलेज देती थी वो 12.4 का माइलेज दे रहीं है आखिर कंपनियों को और मंत्रीजी के लड़के को फायदा पहुंचाना है ।मोदी सरकार जिंदाबाद 😭
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@OfficeOfNG @nitin_gadkari E20 ka effect :
कल journey में जो गाड़ी 15+का माइलेज देती थी वो 12.4 का माइलेज दे रहीं है आखिर कंपनियों को और मंत्रीजी के लड़के को फायदा पहुंचाना है ।मोदी सरकार जिंदाबाद 😭
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
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@AkhilMi16438389 @gdagzb @UPGovt @MoHUA_India @CMOfficeUP @dm_ghaziabad Sir madhuban bapudham ke E block me shamshan ke pass ke plots ka change ka kab tak hoga l
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@gdagzb @UPGovt @MoHUA_India @CMOfficeUP @dm_ghaziabad Great This will be one of the important achievements made by GDA for Ghaziabad district
English

उपाध्यक्ष महोदय के निर्देशों के क्रम में रामायण थीम पार्क (कोयल एन्क्लेव) का निरीक्षण किया गया। वर्तमान में Boundary वॉल का कार्य प्रगति पर है। कुल 22700 वर्ग मी क्षेत्र में थीम पार्क विकसित किया जा रहा है।
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#GhaziabadDevelopment #SmartCity #GhaziabadUpdates #themeparks #ख़बर

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'अभियन्ता दिवस’ पर बिजली अभियन्ताओं ने ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया जी को याद किया:बिजली व्यवस्था में लगातार हुए सुधार को देखते हुए पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग: विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं को तैनात किये जाने की मांग:
प्रदेश के बिजली अभियन्ताओं ने अभियंता दिवस के अवसर पर मा. मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार को देखते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की ही तैनाती की जाये। इससे प्रदेश की जनता को निर्बाध सस्ती बिजली मिल सकेगी एवं ऊर्जा निगमों के बढ़ते घाटे पर अंकुश लग सकेगा। अभियन्ताओं ने यह मांग आज ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया के 164वें जन्म दिवस पर अभियन्ता संघ द्वारा हाईडिल फील्ड हॉस्टल में आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में की गयी।
‘अभियन्ता दिवस’ समारोह में ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया एवं अन्य महान अभियन्ताओं के सराहनीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि देश में सबसे पहले 400के0वी0 पारेषण लाइन व उपकेन्द्र की परिकल्पना, निर्माण व संचालन का यशस्वी कार्य, 100 मेगावाट एवं 200 मेगावाट की तापीय इकाईयाँ डिजाइन करने व सफलतापूर्वक संचालित करने वाला अग्रणी उ0प्र0 बिजली बोर्ड ही है। विगत जून माह में 31486 मे0वा0 से अधिक बिजली का सफलतापूर्वक पारेषण व वितरण किया गया है जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। हाल ही में पारेषण निगम को राष्ट्र स्तर पर स्टेट ट्रांसमिशन कम्पनी ऑफ द इयर का अवॉर्ड भी मिला है जो कि बिजली व्यवस्था में हुए गुणात्मक सुधार का उदाहरण है।
विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने आगे बताया कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली के 09 निगम हैं तथा इन सभी निगमों के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आईएएस हैं। कई विकसित देशों में तकनीकी विभागों का नेतृत्व उन्हीं तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने उस क्षेत्र में कार्य किया हो। देश की नवरत्न एवं महानवरत्न कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाब प्रतिद्वंदिता का सबसे बड़ा राज यही है कि इन सब में प्रबंध के शीर्ष पद पर विशेषज्ञ हैं। इससे नीति बनाने और उसके क्रियान्वयन में संतुलन रहता है। अतः ऊर्जा निगमों व अभियन्ताओं की दिशा व दशा सुधारने हेतु प्रदेश सरकार प्रदेश हित में ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की तैनाती किये जाने के सम्बन्ध मेंं कदम उठायें।
पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। विगत 08 वर्षों में एटी एण्ड सी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्ड सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर कारपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है।
विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है। मा0 मुख्यमंत्री जी से अपील की कि प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए अनपरा व ओबरा में प्रस्तावित 800-800 मेगावाट की परियोजना को प्रदेश के ही उत्कृष्ट अभियन्ताओं द्वारा उ0प्र0 राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पूर्ण स्वामित्व में स्थापित की जाये। पारेषण में टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) को बंद कर नई बनने वाली पारेषण की सभी परियोजनाओं, सब स्टेशन और लाईनों को यूपी ट्रांसकों को देने की भी मांग की गई।
लखनऊ में आयोजित अभियंता दिवस समारोह में उपस्थित अभियन्ताओं नें भारत रत्न सर एम0 विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


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@aksharmaBharat @PMOIndia @CMOfficeUP @UPGovt @mygovindia @BJP4India @BJP4UP @RSSorg @AKSharmaOffice @BJYM @BJYM4UP अनपरा और ओबरा भी सरकारी क्षेत्र में उत्पादन निगम को वापिस किया जाए ताकि कम रेट में जनता को बिजली मिल सके
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कई मायने में उत्तर प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र देश में अव्वल…
1. देश में अधिकतम बिजली आपूर्ति (पीक डिमांड): 31486 मेगावाट (जून 2025)
2. पिछले तीन वर्षों से देश में अधिकतम बिजली आपूर्ति (पीक डिमांड): जुलाई 2023 से, और स्वाभाविक रूप से उत्तर प्रदेश की अधिकतम आपूर्ति।
3. देश की सर्वश्रेष्ठ बिजली पारेषण कंपनी: यूपीपीटीसीएल।
4. देश में उच्चतम परिवर्तन क्षमता: 169,074 एमवीए।
5. देश में सबसे लंबी पारेषण लाइन: 55,051 सर्किट किलोमीटर।
6. सौर ऊर्जा के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर प्रोजेक्ट-2 के कार्यान्वयन में नंबर 1: 4778 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट।
7. बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आरडीएसएस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन में देश में नंबर 1: 16000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट।
8. पीएम सूर्य घर योजना के तहत दैनिक अधिष्ठापन के मामले में देश का सबसे तेज़ राज्य: लखनऊ और वाराणसी देश के शीर्ष दस जिलों में।
9. पीएम सूर्य घर योजना के तहत जुलाई 2025 में अधिष्ठापनों में देश में नंबर 1: 27771 सौर संयंत्र।
10. कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) के उत्पादन में देश में नंबर 1: प्रतिदिन 230 टन।
अनेकोनेक और भी उपलब्धिया है और आगे और भी आती रहेगी
हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर हैं…
जय श्री राम !
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@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt @VKSSSUP अनपरा और ओबरा भी उत्पादन निगम को वापिस देना चाहिए
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मध्य प्रदेश में अमरकंटक की तरह उप्र में भी ओबरा और अनपरा में ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर उत्पादन निगम को परियोजनायें देने की मांग : राज्य के उत्पादन निगम को देने से 35-40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती मिलेगी बिजली
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा० @myogiadityanath जी से मांग की है कि ओबरा और अनपरा में लग रही नई बिजली इकाइयों को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर प्रदेश के व्यापक हित में राज्य विद्युत उत्पादन निगम को दिया जाय।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विगत सप्ताह लिए गए कैबिनेट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अमरकंटक बिजली घर में जॉइंट वेंचर समाप्त कर नई बनने वाली इकाई मध्य प्रदेश के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
संघर्ष समिति ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय तकनीकी दृष्टि से सर्वथा उपयुक्त और उचित है। उत्तर प्रदेश में भी जॉइंट वेंचर समाप्त कर राज्य के उत्पादन निगम को ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को सौंपा जाये तो बिजली की उत्पादन लागत 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो जाएगी।
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 28 मार्च 2023 को यह निर्णय लिया था कि अमरकंटक ताप बिजली घर में 660 मेगावाट की नई बिजली इकाई ज्वाइंट वेंचर में एस ई सी एल (कोल इंडिया लिमिटेड) के साथ लगाई जाएगी।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार के आदेश की प्रति जारी करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के बिजली कर्मचारियों की संघर्ष समिति ने इसका विरोध किया था और अंततः ढाई साल के बाद मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने अपने ही निर्णय को संशोधित करते हुए अब यह निर्णय लिया है कि अमरकंटक ताप बिजली घर की नई इकाई ज्वाइंट वेंचर में नहीं लगाई जाएगी और इसे मध्य प्रदेश का विद्युत उत्पादन निगम लगाएगा।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 27 जुलाई 2023 को यह निर्णय लिया था कि 2×800 ओबरा डी और 2×800 अनपरा ई ताप बिजली परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी के साथ लगाया जाएगा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में एक बात समान थी कि राज्य के उत्पादन गृह में पहले से चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर को अनुमति दी गई थी जो विवाद का मुख्य कारण है। राज्य के उत्पादन निगम की चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर में नई परियोजना लगाने का निर्णय पूरे देश में और कहीं नहीं लिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यतः 6 बिंदुओं को आधार मानते हुए जॉइंट वेंचर का अपना दो साल से अधिक पुराना निर्णय संशोधित कर नई इकाई जॉइंट वेंचर की जगह राज्य के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
समिति ने बताया कि छह बिंदुओं में सबसे बड़ा बिंदु यह है कि राज्य का उत्पादन निगम यदि एक्सटेंशन प्रोजेक्ट बनाएगा तो परियोजना की कई कामन फैसेलिटीज को देखते हुए बिजली की उत्पादन लागत ज्वाइंट वेंचर की तुलना में 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट कम हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त एक ही परिसर में उत्पादन निगम और ज्वाइंट वेंचर की परियोजनाएं रहने से कई प्रकार की परिचालकीय दिक्कतें उत्पन्न होने की संभावना व्यक्ति की गई थी। एक ही परिसर में दो स्वामित्व की परियोजनाएं रहने से भविष्य में अनेक प्रकार के कानूनी विवाद खड़े होने की स्थित आ सकती है।
ऑपरेशनल डिफिकल्टीज में सबसे बड़ी समस्या रेलवे से कोल् ट्रांसपोर्टेशन की और ऐश डिस्पोजल की सामने आने वाली है। एक ही रेलवे ट्रैक होने से कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि परियोजना के लिए कोयला अनलोड करने में अनावश्यक विलंब होगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं के लिए कोयला खदान के मुहाने से (coal pit head ) कोयला लिंकेज नहीं मिल पाया है और 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने के कारण ज्वाइंट वेंचर में बिजली की उत्पादन लागत बहुत अधिक बढ़ने की संभावना है।
राख का डिस्पोजल एक बड़ी समस्या होने जा रही है। सामान्यत: एक ही ऐश पौंड होने से बहुत ही दुरूह स्थिति उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की गई है।
संघर्ष समिति ने बताया कि इन मुख्य बातों को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने जॉइंट वेंचर का प्रस्ताव निरस्त कर दिया है और परियोजना राज्य के उत्पादन निगम को दे दी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने जिन बातों की आशंका व्यक्त करते हुए ज्वाइंट वेंचर को निरस्त करने का निर्णय ढाई साल के बाद लिया लगभग वही परिस्थितियां उत्तर प्रदेश में भी ओबरा और अनपरा में है
@narendramodi


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निजीकरण की प्रक्रिया पर संघर्ष समिति ने उठाये सवाल : बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो जनता पर यह भार क्यों डाला जा रहा है:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद भी सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो निजीकरण से क्या लाभ होने जा रहा है ?
संघर्ष समिति ने एक बार पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि तमाम घोटालों से भरे निजीकरण की सारी प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। अतः वे प्रभावी हस्तक्षेप कर निजीकरण को निरस्त करने की कृपा करें।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 2.2 (बी) में लिखा है कि जिस विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है अगर वहां औसत बिजली विक्रय मूल्य और औसत राजस्व वसूली में अधिक अन्तर है तो निजीकरण के बाद सरकार निजी विद्युत कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर बिजली आपूर्ति तब तक सुनिश्चित करेगी जब तक निजी कम्पनी मुनाफे में नहीं आ जाती।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की उक्त धारा के अनुसार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार कितने वर्ष बिजली आपूर्ति कराएगी और इस हेतु सरकार को कितने अरब रुपए की धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्युत वितरण निगमों के घाटे का सबसे बड़ा कारण बहुत महंगी दरों पर निजी विद्युत उत्पादन घरों से बिजली खरीद के करार है। ऐसे बिजली क्रय करार भी हैं जिनसे बिना बिजली खरीदे प्रति वर्ष 6761 करोड रुपए फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार सरकार निजीकरण के बाद निजी घरानों को महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के एवज में सब्सिडाइज्ड बल्क पावर सप्लाई करेगी और इसका खर्चा सरकार उठायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सब्सिडाइज्ड बल्क सप्लाई का प्रतिवर्ष कितना खर्चा आएगा और यह कितने वर्ष तक जारी रखा जाएगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अलावा स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (ई) के अनुसार निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे तथा देनदारियों का सारा उत्तरदायित्व भी सरकार का होगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (एफ) के अनुसार सरकार 05 से 07 वर्ष तक या और अधिक समय तक निजी घरानों को वित्तीय सहायता भी सरकार देगी और यह सहायता तब तक देती रहेगी जब तक निजी कंपनियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाए और मुनाफा न कमाने लगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र ₹1 प्रतिवर्ष की लीज पर दी जाएगी। वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और अन्य स्थानों पर जिनका निजीकरण किया जा रहा है जमीन बेशक कीमती है उसे मात्र 01रुपए की लीज पर दिए दिया जाना कौन सा रिफॉर्म है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यही सब करना है तो सरकारी क्षेत्र के विद्युत वितरण निगमों को लगातार सुधार के बाद कौड़ियों के मोल बेचने की जरूरत क्या है ?
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 272 दिन पूरे हो जाने पर आज भी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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@aksharmaBharat 2 साल पहले निलंबित विद्युत कर्मियों ने आपको रक्षा सूत्र बांधा था।आपने सभी को यह आश्वाशन दिया था कि जल्दी ही आप लोगों के खिलाफ सभी कार्यवाही वापिस कर ली जाएंगी। मंत्री जी आप राम को मानने वाले है जिनके पिता ने वचन को निभाया था आपसे भी आपके वचन को निभाने की उम्मीद है

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@manoj1008 @gdagzb @CMOfficeUP @UPGovt @CommissionerMe3 @dm_ghaziabad जो तारीफ करते हैं उनके ट्वीट को अभी ड्यूटी भी करते हो पर जो कंप्लेंट करते हैं उनकी तरह बिल्कुल ध्यान नहीं मधुबन बापूधाम में E ब्लॉक में श्मशान में जिन लोगों के प्लॉट फंसे हुए हैं उन पर अभी तक कोई डिसीजन नहीं हो पाया मधुबन बापूधाम के लोगों को 2011 से अभी तक प्लॉट नहीं मिल पाया है
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@gdagzb @CMOfficeUP @UPGovt @CommissionerMe3 @dm_ghaziabad Innovative, excellent and successful initiative by GDA .. a fusion of physical & environmental fitness endeavours 🙏
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जी0डी0ए0 द्वारा आयोजित इस ग्रीनथॉन में जोश, उत्साह और पर्यावरण संरक्षण का एक शानदार नजारा देखने को मिला, जिसने शहर को एक नया रूप दिया।
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