अरविंद मीणा

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अरविंद मीणा

अरविंद मीणा

@iamarvindmeena

सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नही।

Katılım Ocak 2010
23 Takip Edilen56 Takipçiler
अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@PSBPunch @RBI @FinMinIndia मैं आज बैंक गया और बोला कि मेरा अकाउंट ज्वाइंट कर दो। बैंक वाले बोले किसके साथ? मैने बोला जिसके खाते में सबसे ज्यादा पैसे हो उसके साथ। उन्होंने मुझे भगा दिया। #FakeBankStory
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PSB Punch
PSB Punch@PSBPunch·
आज एक बैंक कर्मचारी को देखा, वह बिल्कुल सामान्य इंसान की तरह चल रहा था, बात कर रहा था और तो और... अपनी नाक से सांस भी ले रहा था. जहाँ तक मैंने सुना था और रील्स में देखा है, बैंक वाले ऐसा व्यवहार नहीं करते। ​मेरी प्रार्थना है कि @RBI और @FinMinIndia आगे आएँ और इस 50k फॉलोअर्स वाले प्रभावशाली व्यक्ति (Influencer) को जवाब दें। यह कैसे संभव है? #FakeBankStory @DFS_India
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Penguin India
Penguin India@PenguinIndia·
AMA! with Jaideep Prabhu, Cambridge professor and bestselling author, on r/Indianbooks to discuss Leanspark—his new book on how India is turning scarcity into an innovation superpower across AI, EVs, space, fintech & more. reddit.com/r/Indianbooks/…
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@RebornManish लास्ट वाली लाइन में कत्ल कर दिया गया है। आई रिपीट कत्ल कर दिया गया है
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
डैथ बाय ए बिलियन स्पिन्स ... लंकाशायर की मिल में गांधी की ये तस्वीर है। इंग्लैंड का वो औद्योगिक हब, जहां की फैक्ट्रीज उन्होंने बंद करवा दी। और जब यहां जाने की इच्छा व्यक्त की, अधिकारी थर्रा गए। लंकाशायर गांधी के खून का प्यासा था। वे जानते थे, यह शख्स वहां लिंच कर दिया जाएगा। ●● पंद्रह साल से गांधी ने विदेशी कपड़ों को आंदोलन का औजार बनाया हुआ था। इसे बुराई, गुलामी का प्रतीक बनाते, इन्हे पहनना एक किस्म का बुरा कर्म, और देशद्रोह बता दिया। वो माहौल हो गया कि लोग अपने सूट, शर्ट, कोट, धोतियां, पतलून लेकर आते- और चौराहे पर विशाल होलियों में झोंक देते। कपड़ो की दुकान पर कांग्रेसी खड़े होते। कपड़ा न खरीदने की मनुहार करते। वे सो जाते दरवाजे पर, आपको खरीदना ही है, तो हमारी छाती पर लात रखकर जाओ। धरना नहीं, प्रदर्शन नहीं, रैली, नारे, अटैक नहीं - आओ अपने कपड़े जला दो। तो पहने क्या?? खादी पहनो न, अपने हाथ से कातकर। ●● गांधी इसके ब्रांड एम्बेसडर बन गए। इंटरव्यू देते- तो चरखा कातते। मुलाकातियों से मिलते- तो चरखा कातते। रैली के मंच पर- चरखा कातते। स्वागत करते, तो सूत की माला पहनाते। उनकी तस्वीरें चाहे जिस भी वजह से छपे, वो चरखे के साथ होती। तो चरखा, राष्ट्रदेव बन गया, सूत कातना उसकी पूजा। हर गांधीवादी सुबह उठता, चरखा कातता, उसकी का कपड़ा पहनता।खादी, एक नया चीवर हो गई थी। जैसे बुद्ध के शिष्य दूर से अपने चीवर से पहचाने जाते, हर देशभक्त खादी से पहचाना जाता। ये भला कैसा पागलपन था गांधी का?? ●● गांधी को समझने के लिए गांधी की तरह सोचना होगा। जो इतिहास जानते थे, और अर्थशास्त्र भी। जानते थे कि अंग्रेज भारत में दिग्विजय करने नहीं आए थे। उपनिवेशवाद, एक मूलतः व्यापार है। गवर्नेंस उसका साधन। तो देश को गवर्न करने में जितना खर्च हो, उससे ज्यादा रेवेन्यू उसके टैक्स और वहां पर व्यापार से आना चाहिए। मुनाफा हो.. और मुनाफा न हो, तो क्या हो?? अफगानिस्तान छोड़ दिया-घाटे का सौदा। सिखों को हराया, तो पंजाब का सूबा रखा, लेकिन कश्मीर डोगराओं को बेच दिया। कभी तिब्बत की ओर बड़े अभियान न किये, लेकिन सुगौली की संधि में नेपाल से तराई के उपजाऊ इलाके ले लिए। अब भारत में उनकी कमाई के बड़े स्रोत क्या थे? कपड़े का बाजार, नमक का टैक्स, शराब की दुकानें? समझिये कि देश से 100 रूपये कमाते हैं, और चलाने में 80 रू खर्च होते हैं, तो आपको केवल 30 रू की चोट करनी है। बिजनेस घाटे में आ जाएगा। धंधा चलाते रहने में घर के पैसे डूबेंगे। ●● भारत ब्रिटिश वस्त्रों का 40+ प्रतिशत बाजार था। ये 1920-21 में 102 करोड़ का था, 1922 में यह 57 करोड़ पर गिर गया। नमक पर कर, भारत सरकार के राजस्व का 8 प्रतिशत था, 1931 आते आते वह 1.5 प्रतिशत पर आ गया। देश भर में अवैध नमक बिक रहा था। लोग खादी पहन रहे थे। शराब की दुकानें घेरी जा रही थीं। जेलें भरी हुई थीं। सरकार का इकबाल गिर रहा था। अब प्रति हजार जनता पर अधिक अफसर, अधिक पुलिसमैन, अधिक थाने रखने थे। खर्च बढ़ा, मुनाफा घटा। ●● लगातार घाटे से लंकाशायर की मिलें बंद हो रही थीं। 24 घण्टे चलने वाली मिलों में पहले काम के दिन घटे, फिर सप्ताह में 3 दिन, फिर तालाबंदी। मजदूर बेहाल थे, हड़ताल, दंगे, अव्यवस्था हो रही थी। ब्रिटिश अखबार इसका दोषी मि. गांधी को बता रहे थे। ब्रिटिश मजदूर उनके खून के प्यासे थे। और सरकार सहमी हुई थी। गांधी को बातचीत के लिए लंदन बुलाया। बकरी के दूध की चाय पिलाई। विंस्टन चर्चिल इस अधनंगे फकीर को बकिंघम की सीढ़ियां चढ़ते देख, दांत किटकिटा रहे थे। और तब गांधी ने कहा- "मैं लंकाशायर के मिल मजदूरों से मिलना चाहता हूं" ●● पूरी सुरक्षा में उन्हें ले जाया गया। रूथ बोर्डमैन और डोरोथी डोनेलन ने दशकों बाद याद करते हुए लिखा - यह छोटा सा आदमी आया। मैंने अपनी माँ की ओर देखकर कहा- माँ, मि. गांधी कौन हैं?’ माँ ने कहा- वहां, वो आदमी हैं। मैंने कहा- ‘वे कोई महत्वपूर्ण आदमी नहीं लगते, वे तो एक गरीब छोटे से आदमी हैं, उनके पास कपड़े भी नहीं हैं।उनके पैरों के बीच एक सफेद तरह का कपड़ा था। वह बड़ा सा नैपी जैसा लग रहा था। और फिर कंधों पर वो चीज...?? वह उन्हें लपेटे हुए थी। उनके पैरों में कुछ नहीं था, सिर्फ एक जोड़ी चप्पलें!! मैं तो डर गई। मैंने कहा- ‘माँ, उनके पैरों में जूते भी नहीं हैं!’” ●● मजदूरों ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को देखा। लेकिन उसे लिंच नहीं किया। उसके पास बैठे, गिले शिकवे किये। अपनी दिक्कतें बताई। बायकॉट रोकने का अनुरोध किया। गांधी ने सुना। दुख जताया। और बताया कि वे उन सबसे बहुत प्रेम करते हैं। लेकिन उन्हें समझना होगा, कि आप गरीब हैं, पर भारत के लोग बहुत ही ज्यादा गरीब हैं। हम किसी निरीह को छाती पर पैर रख, महंगा सामान खरीदने पर कैसे मजबूर कर सकते हैं। मन का मलाल धुल गया। मजदूरों की पत्नियों ने उन्हें घेर लिया। उनके साथ हंसे, बोले, खाने पीने की चीजें ऑफर कीं। हंसकर, दुआएं देकर विदा किया। ब्रिटिश अखबारों में एक दशक से बनाया गया विलेन, वहां से संत बनकर निकला। ●● लेकिन ब्रिटेन को राहत नहीं दी गई। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पाउंड की कीमत स्थिर रखने में ब्रिटिश वैसे ही अपना खजाना खाली कर रहे थे। उस पर 1929 की मंदी, इधर भारत, जो क्राउन ज्वेल था - सबसे बड़ा बाजार और रेवेन्यू सोर्स था- अनप्रॉफिटेबल हो रहा था। 1935 के सुधार आए। प्रॉविंसेस इंडियन्स को सौंप दिये गए। पर गांधी को पूर्ण स्वराज चाहिए था। दूसरा विश्वयुद्ध आया। ब्रिटेन भारत से, कांग्रेस से सहयोग चाहता था। गांधी ने क्विट इंडिया छेड़ दिया। वे लोग यूरोप में हिटलर, ईस्ट में जापान से अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रहे थे। और पूरे विश्वयुद्ध के दौरान, भारत में गांधी के लोग गदर मचाये हुए थे। क्राउन ज्वेल.. अब क्राउन लाइबिलिटी बन गया था। ●● ऑल ड्यू टू ए बिलियन स्पिन्स, मेड बाय गांधी कुछ लोगों को लगता है कि आजादी चरखे से नहीं आई। पर आजादी तो पिस्तौल से भी नहीं आई। वह आई एक सिस्टेमिक प्रतिरोध से, चरखे के घूर्णन से, मुटठी भर नमक से.. लगातार आर्थिक चोट से। लाखों लोगों के अपने अपने तरीके से योगदान से। मै मानता हूं कि किसी का हर माह 3 तोले सोने के बराबर महंगी पेंशन लेना भी, ब्रिटिश साम्राज्यवाद की मारी गई, भयंकर आर्थिक चोट में शामिल है।
Manish Singh tweet media
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@Ashok_Kashmir मुझे शर्म आती है कि इस 2 कौड़ी के आदमी को मैने कभी किसी मूवी के लिए पसंद किया था
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Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک
मुझे भी ऐसा लगा फिर पता चला हैलो बोलने नहीं भीख मांगने आई थीं। ईस्टर्न यूरोप, खासतौर पर रोमानिया की कुछ ऐसी लड़कियाँ हर यूरोपीय स्टेशन के आसपास मिल जाती हैं। दोस्त ने बताया कि कोपेनहेगन के सेंट्रल स्टेशन के बाहर तो और भी गड़बड़ हो सकती है। गल्तफ़ैमी नई पालने का भाई यूरो भोत मंहगा हो गया है 😂
Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک tweet media
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Indian Tech & Infra
Indian Tech & Infra@IndianTechGuide·
🚨 "There is a saying in China, 9, 9, 6. You know what it means? 9 am to 9 pm, 6 days a week. And that is 72 hours work-week, " said Narayana Murthy.
Indian Tech & Infra tweet media
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@PunsterX Itni baar sorry to 'veer' ne bhi nahi bola hoga. I am sure she is gujju. Their mentality is सब चालसे , पन अमेरिका में सब नथी चालसे
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PunsterX
PunsterX@PunsterX·
This is absolutely shocking! Why are Indians being harassed in USA just because they "forgot to pay saarr"?? This is the 3rd case in recent times.
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बघीरा 😺
बघीरा 😺@LegalAdvisour·
आज सोशल मीडिया पर महिंदर कौर वायरल है महिंदर कौर पंजाब की किसान महिला है जिन्होंने बीजेपी सांसद कंगना रनौत को दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगने पर मजबूर कर दिया कंगना ने दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में शामिल महिला किसानों को 100 100 रुपए में आंदोलन में शामिल होने वाली महिलाएं बताया था उसी आंदोलन में शामिल महिंदर कौर ने कंगना के ऊपर मानहानि का दावा ठोक दिया जिस पर भठिंडा कोर्ट में पेश होकर कंगना को दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी लेकिन महिंदर कौर ने साफ कह दिया माफ नहीं करुंगी कंगना को उसके किए की सजा दिला कर रहूंगी महिंदर कौर के लिए क्या कहना चाहेंगे आप?
बघीरा 😺 tweet mediaबघीरा 😺 tweet media
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@RoshanKrRaii मै आज अभी 1000 रूपये की शर्त लगाता हु ये ही जीतेगी। जनता को ऐसे ज़मूरे पसन्द आते है
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Roshan Rai
Roshan Rai@RoshanKrRaii·
I will come daily and give ‘ Darshan ’ to you people - BJP Candidate Maithili Thakur Notice how she is eating Makhana in the traditional Mithila Pag that is considered sacred by the people of Mithilanchal. Perfect candidate for BJP.
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@INCIndia लेकिन इस से मेरे क्या फरक पड़ता है, मै तो शादी ब्याह में टेंट लगाता हूं, विसर्जन में जोर से डीजे बजाता हूँ, बीस पच्चीस हजार कमा लेता हूं। मैं खुश हूं, लमो, लमो
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Congress
Congress@INCIndia·
नरेंद्र मोदी के दोस्त ट्रंप ने 'H-1B वीजा' की फीस बढ़ा दी है। पहले H-1B वीजा की फीस 6 लाख रुपए थी, जो अब बढ़कर 88 लाख रुपए हो गई है। • ट्रंप के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान भारत को होगा • भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरी के मौके कम होंगे • अमेरिका से भारत आने वाले पैसे में भी भारी कमी आएगी • भारत के IT प्रोफेशनल्स की नौकरियां खतरें में होंगी ये खतरा इसलिए भी बड़ा होगा, क्योंकि देश की बड़ी IT कंपनियां पहले से ही छंटनी कर रही हैं। साफ है- नरेंद्र मोदी की नाकाम विदेश नीति का खामियाजा आज देश भुगत रहा है।
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Muthukrishnan Dhandapani
Muthukrishnan Dhandapani@dmuthuk·
Irrespective of Trump’s occasional positive and negative statements about India, I keep repeating MAGA doesn't want India to grow. They are already regretting China's growth. US very well understands IT is backbone of our economy. MAGA, primarily white Americans hate Indians doing well in US. They'll send back as many Indians as possible from USA. Not everyone in Indian IT is irreplaceable. Already AI is eliminating low end and entry level jobs. Big Tech is also seriously thinking about bringing high end jobs back to US and also outsource them to many other countries as they can't get a single country similar to ours for complete outsourcing. The day is not far off IT industry in India would become unviable as Trump may tariff IT services also heavily. It may take couple of years for these developments to play out. Suffering of IT industry means suffering of entire urban India and white collar economy. Be cautious with your money. For example, it may not be a right time to 'invest' in real estate. Real estate stands on two pillars - legal money from IT professionals in India and NRIs. The other pillar is parking of black money by corrupt politicians, bureaucrats and businessmen. If the first pillar gets affected, second too would be impacted. Demand would slow down. Money flow in economy would come down. You need good money flow in the economy for corruption too. I'm more pessimistic about Indian economy and markets for next 3 to 5 years. I would be happy to be proven wrong. But this is how I see it now.
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@KiranKS यहां तो परिवार के एक आदमी की गलती होने पे पूरा घर बुलडोजर से तोड़ देते है भाई। और मजे की बात ये है कि 2 साल बाद वो आदमी के खिलाफ कोई सबूत भी नहीं मिलता तब भी उन एन आर आई को कोई फर्क नहीं पड़ता तो यहां क्यों पड़े
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Kiran Kumar S
Kiran Kumar S@KiranKS·
You have no idea what the families of H-1B visas are enduring. Someone just got engaged. Someone has a 7 month pregnant wife on H4. Someone has a student loan of $100,000. Someone came to India to handle her mother's surgery. Someone just bought a home on mortgage. Someone is aiming for Green Card and at a last stage. Stop writing things like - It would stop brain drain. Trump is the best reformer for India since PV Narasimha Rao. US is killing its own tech industry. Make India great now. This is wonderful for Indian IT workers at GCCs. I have seen many writing insensitive posts. Don't. I am personally not affected. No one in my family is. But I know for sure after working in the IT industry for 3 decades, that India cannot absorb 4-5 lakh H-1Bs at high salary tomorrow. Impossible. Be practical and sensitive. Wait and watch. Maybe things might get better with court, deal, lobby at work. Hope.
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@thevirdas Who care. I repeat who cares. Jab yahan log suffer karte hai to un logo ko koi farq nahi padta to yahan ke log unke baare me q soche
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Nayini Anurag Reddy
Nayini Anurag Reddy@NAR_Handle·
Dear, @DrSJaishankar @MEAIndia Tonight, thousands of Indians on H1B/H4 visas are stranded here in India. They came for stamping, to meet parents, to attend a wedding. Now, a rule say, if they don’t return to US by Sept 20 midnight, their dreams die unless companies pay $100,000. They are in panic, stuck in India. Years of sacrifice, loans worth lakhs, all at risk. Govt of India must issue an urgent advisory & stand by them in this hour of distress. And to all affected, Please hold on. Life is bigger than any visa or deadline. Stay calm, stay strong. This storm too will pass. #h1bvisa
Nayini Anurag Reddy tweet media
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@RebornManish सिर्फ कुछ लाख लोगों को शायद फरक पड़ता है वोट चोरी से बाकी करोड़ों करोड़ लोग वैसे ही है जैसे थे
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
सुप्रीम कोर्ट मार्गदर्शक मंडल बना हुआ है। भाजपा के प्रवक्ता, जज बनकर न्याय के आसन पर बैठ रहे हैं। और रिटायर होने वाले, चेम्बर से सीधे निकलकर भाजपा के चुनावी कैंडिडेट, लोकसभा सांसद, और राज्यसभा सदस्य बनकर मौज कर रहे हैं। सिटींग चीफ जस्टिस की पीएम के साथ घर में बैठकर भोजन भजन की गवाह जनता क्यो पूछती है, राहुल सुप्रीम कोर्ट क्यो नही जाते? ●● क्यो ही जाना चाहिए। जहां केस की पेशी 3-3 माह में लगती है, और पेशी के दिन जज। छुट्टी पर चला जाता है। न्यायपालिका के सर्वोच्च बुर्ज पर पार्टी का झंडा गड़ा है, और जज साहबान सलामी दी रहे हैं। विविपेट की पर्ची मिलान जैसे साधारण मसले पर चुनाव आयोग के अतिरेकपूर्ण, अपारदर्शी और ढीठ रवैये पर चुप्पी साध लेने वाले कोर्ट से पे भरोसा किसलिए? भरोसा कमाया जाता है दोस्त वह किसी पद का नाम नही होता। ●● सुप्रीम कोर्ट, जब लोकतन्त्र का पहरेदार नही रहा। तो चोरी की शिकायत, सीधे मालिक से करनी पड़ेगी। वह मालिक आम जनता है। राहुल जनता की अदालत में हैं। वे सही जगह में है। सब सबूत, ब्लेक एंड व्हाइट में पब्लिक डोमेन में देने के बाद, यदि जनता को इस चोरी से, कोई आपत्ति नही, तो फिर कोर्ट में किसके लिए जाना चाहिए?? ●● फिर भी यदि कोर्ट को इस मामले में दिलचस्पी है, उसे अपनी कोई भूमिका दिखती है, तो सुओ मोटो संज्ञान ले ले। किसने रोका है?? कुत्तों के मसले पर सूओ मोटो संज्ञान लेने वाले कोर्ट को वोट चोरी के मसले पर, किसी की याचिका की जरूरत क्यो है?
Manish Singh tweet media
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taran adarsh
taran adarsh@taran_adarsh·
ISHAAN KHATTER - VISHAL JETHWA - JANHVI KAPOOR: 'HOMEBOUND' TRAILER OUT NOW – 26 SEPT 2025 RELEASE... #DharmaProductions has unveiled the trailer of its upcoming film #Homebound, slated for a theatrical release on 26 Sept 2025. #Homebound – which earned acclaim at the prestigious #TIFF and #Cannes – is directed by #NeerajGhaywan. Starring #IshaanKhatter, #VishalJethwa, and #JanhviKapoor, the film is produced by #KaranJohar, #AdarPoonawalla, #ApoorvaMehta, and #SomenMishra. A #DharmaProductions worldwide release.
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THE SKIN DOCTOR
THE SKIN DOCTOR@theskindoctor13·
The great Dombivli Palava flyover. Took 6 years and ₹250 crores to build. This is its state within two months of inauguration. There can’t be a better example of blatant corruption, incompetence, or daylight robbery. Everyone involved deserves to be behind bars, but then…
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@khurpenchh कैसा है? पता है क्या मैं तेरे को अच्छा आदमी समझता था और मेरे जैसे हजारों लोग तेरे को विश्वास के काबिल समझते थे, पर तू निकला क्या? वही पैसों पे बिकने वाला। जैसे लल्लनटॉप वाला सौरभ द्विवेदी बिक गया, दिलीप मंडल बिक गया वैसे ही तू भी चंद रुपयों के लिए बिक गया।
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Kunal Shukla
Kunal Shukla@kunal492001·
हर आरटीआई दस्तावेज प्राप्त करने के लिए नहीं लगाया जाता है,कुछ आरटीआई व्यवस्था सुधारने और नकेल कसने के लिए भी लगाए जाते हैं।ऐसे आरटीआई का जवाब नहीं मिलता पर आरटीआई की दहशत से व्यवस्था जरूर सुधर जाती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिवालय में मैंने आरटीआई लगा कर जानकारी माँगी है “मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पति मनीष गुप्ता जिस नियम और आदेश के तहत कैबिनेट और शासकीय मीटिंग अटैंट कर रहे हैं उसकी सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध करायें” “Provide a certified copy of the rules and orders under which Chief Minister Rekha Gupta's husband Manish Gupta is attending cabinet and government meetings” #RTI
Kunal Shukla tweet media
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अरविंद मीणा
अरविंद मीणा@iamarvindmeena·
@PranavaBhardwaj यही बारीक फर्क सिर्फ पढ़े लिखे और बुद्धिमान लोगों की पकड़ में आता है वरना सौरभ द्विवेदी जैसे दलाल बहुत सारे है। इसके जैसा एक और है न्यूट्रल यूट्यूबर नीतीश राजपूत। वो भी दलाली करता है
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प्रणव
प्रणव@PranavaBhardwaj·
This is not an isolated incident. This is their pattern. Go to their page and search. You will see bad images of opposition leaders on their thumbnails while reporting floods there, but when it will be a BJP state, they will try to put it as a civic issue. I pointed out another one 2 days before.
प्रणव tweet media
प्रणव@PranavaBhardwaj

Look at yourself @saurabhtop @TheLallantop Fall is real and fast.

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