Aditya Singh
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Bilseri ने भी चाणक्य बनने के चक्कर में Ditto यही गंदी हरकत करी थी। किसी एक विधानसभा में Bilseri के LPoC ZPoC नाम के पालतू गुर्गे दस पंद्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग से बुलाकर उनको कहते थे की “आप का सर्वे बहुत अच्छा आ रहा है, थोड़ा महेनत कर लो तो टिकिट हो सकता है, बाक़ी सर्वे तो बढ़िया है।” जो आदमी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर विधानसभा चुनाव लड़ने योग्य नहीं थे उनको भी नक़ली सर्वे शीट का pdf बनाकर दिखाया जाता था और कहा जाता था की, “ये देखो आप का सर्वे तो बहुत अच्छा है। आप को काफ़ी लोग जानते है। फलाना ढिमकाना सर्वे सर्वे सर्वे” - ऐसा कहकर एक ही विधानसभा में दस लोगो को बिना कारण लालच दिया जाता था। उस नक़ली pdf में जिस व्यक्ति को सर्वे के नाम पर ठगना होता था उस व्यक्ति ना कैटी और फील्ड दोनों सर्वे बहुत अच्छा दिखाया आता था। उस pdf में लोग उसको पर्टिक्युलर व्यक्ति को नाम से जानते है, उसका समाज उसको वो दे रहा है यह सब एक्सेल शीट से बनाया जाता था। मेरे पास ऐसी कई विधानसभा का pdf अभी भी है जिसमे 45% वोट दिखाया गया था लेकिन वास्तव में पाँच-सात हज़ार वोट ही मिली। झुठे सर्वे दिखाकर दस-पंद्रह लोगो को मन ही मन केंडिडेट बनाने के बाद अंत में जब एक व्यक्ति को टिकट मिला तो दस लोग यह सोचने लगे की मेरा सर्वे इतना अच्छा था फिर भी मुझे टिकट क्यो नहीं दिया? फिर पैसे के बदले टिकट का आरोप लगाकर उन्ही में से कुछ लोग निर्दलीय खड़ा रहे, कुछ भाजपा-कांग्रेस को गये और जिस सीट पर अच्छा माहौल था वो अंत में ख़राब हो गया। एजेन्सी अगर इस तरीक़े का फ़्रॉड करे तो समझे, लेकिन ख़ुद के इन-हाउस चाणक्य इतनी गंदी हरकत करे तो? Bilseri जी ने एक एक चीज में जो गंद फैलाई थी, उसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।


कल्याण बनर्जी कहते हैं "IPAC ने तृणमूल कांग्रेस संगठन को हाईजैक किया और उसको बर्बाद कर दिया। IPAC संगठन के अंदर संभावित उम्मीदवारों के बीच लड़ाई लगवाया। इसने हर विधानसभा में कई लोगों को कह रखा था कि तुम्हारा ही फीडबैक सबसे अच्छा है तुम्हीं को टिकट मिलेगा।जिसको टिकट नहीं मिला वह नाराज़ हो कर भाजपा का मदद किया। प्रशांत किशोर अवसरवादी है। देश भर के राजनीतिक दलों को पंगु बना दिया है” सच है कि आज देश की लगभग हर क्षेत्रीय पार्टी में एक नया “पावर सेंटर” पैदा हो गया है — चुनावी मैनेजमेंट कंपनियाँ, सर्वे एजेंसियाँ और राजनीतिक सलाहकारों का नेटवर्क।धीरे-धीरे ये लोग संगठन से बड़े हो गए, और ज़मीनी कार्यकर्ता किनारे लगते चले गए। कल्याण बनर्जी ने IPACK को लेकर जो बात कही, वह सिर्फ बंगाल की कहानी नहीं है। बिहार से लेकर दूसरे राज्यों तक कई दलों के भीतर कार्यकर्ताओं की यही पीड़ा है। हर विधानसभा में कई लोगों को यह भरोसा दिया जाता है कि आपका फीडबैक सबसे अच्छा है, टिकट आपको ही मिलेगा। फिर टिकट किसी और को मिलता है, संगठन के भीतर अविश्वास बढ़ता है, कार्यकर्ता टूटते हैं, और चुनाव सिर्फ “डेटा, पैकेज और मैनेजमेंट” का खेल बनकर रह जाता है। सबसे बड़ा संकट यह है कि अब राजनीति में कार्यकर्ता नहीं, प्रोजेक्ट देखे जा रहे हैं।गाँव-गाँव संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलना, उनकी बात सुनना, संगठन को समय देना — यह सब कठिन काम है। उससे आसान है एयरकंडीशन कमरे में बैठकर सर्वे रिपोर्ट बनाना और करोड़ों का चुनावी ठेका चलाना। राजनीतिक दलों को समझना होगा कि कोई भी ऐप, सर्वे या एजेंसी जनता और कार्यकर्ता के बीच के भरोसे की जगह नहीं ले सकती। चुनाव सिर्फ डेटा से नहीं, भरोसे, संवाद और संगठन की आत्मा से जीते जाते हैं। DRBSR

Bilseri ने भी चाणक्य बनने के चक्कर में Ditto यही गंदी हरकत करी थी। किसी एक विधानसभा में Bilseri के LPoC ZPoC नाम के पालतू गुर्गे दस पंद्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग से बुलाकर उनको कहते थे की “आप का सर्वे बहुत अच्छा आ रहा है, थोड़ा महेनत कर लो तो टिकिट हो सकता है, बाक़ी सर्वे तो बढ़िया है।” जो आदमी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर विधानसभा चुनाव लड़ने योग्य नहीं थे उनको भी नक़ली सर्वे शीट का pdf बनाकर दिखाया जाता था और कहा जाता था की, “ये देखो आप का सर्वे तो बहुत अच्छा है। आप को काफ़ी लोग जानते है। फलाना ढिमकाना सर्वे सर्वे सर्वे” - ऐसा कहकर एक ही विधानसभा में दस लोगो को बिना कारण लालच दिया जाता था। उस नक़ली pdf में जिस व्यक्ति को सर्वे के नाम पर ठगना होता था उस व्यक्ति ना कैटी और फील्ड दोनों सर्वे बहुत अच्छा दिखाया आता था। उस pdf में लोग उसको पर्टिक्युलर व्यक्ति को नाम से जानते है, उसका समाज उसको वो दे रहा है यह सब एक्सेल शीट से बनाया जाता था। मेरे पास ऐसी कई विधानसभा का pdf अभी भी है जिसमे 45% वोट दिखाया गया था लेकिन वास्तव में पाँच-सात हज़ार वोट ही मिली। झुठे सर्वे दिखाकर दस-पंद्रह लोगो को मन ही मन केंडिडेट बनाने के बाद अंत में जब एक व्यक्ति को टिकट मिला तो दस लोग यह सोचने लगे की मेरा सर्वे इतना अच्छा था फिर भी मुझे टिकट क्यो नहीं दिया? फिर पैसे के बदले टिकट का आरोप लगाकर उन्ही में से कुछ लोग निर्दलीय खड़ा रहे, कुछ भाजपा-कांग्रेस को गये और जिस सीट पर अच्छा माहौल था वो अंत में ख़राब हो गया। एजेन्सी अगर इस तरीक़े का फ़्रॉड करे तो समझे, लेकिन ख़ुद के इन-हाउस चाणक्य इतनी गंदी हरकत करे तो? Bilseri जी ने एक एक चीज में जो गंद फैलाई थी, उसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।




@attorneybharti @ArvindKejriwal .@SandeepPathak04 problem AK ki hai... jo bhi IIT/Harward ya kisi famous university ka hota usko ye log jyada ijjat dete hain!!! We have no HR and it failed to evolve as a strong organization. Lots of introspection and correction is needed.


@ArvindKejriwal should make decisions wisely. Imagine if @Gopal_Italia had been sent to the Rajyasabha, he would have exposed the BJP’s Gujarat model and by now would have become a national face for AAP in Gujarat. But @SandeepPathak04 ‘s personal ego kill this. @Saurabh_MLAgk









