Aditya Singh

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Aditya Singh

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@likeadisingh

Observer

Katılım Şubat 2016
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
The one hurdle i see is two party system in US and multi party sytem in India. Modi is anti Hindu and anti National.
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Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal@ArvindKejriwal·
Modi is a coward and a psycopath
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SANJAY HEGDE
SANJAY HEGDE@sanjayuvacha·
Like most people, I like religion & spirituality the way I like my drink. Moderate and diluted with just enough to give me a buzz but not too strong to make me puke and get a hangover.
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
मोदी के लिए ये दुनिया चिड़ियाघर है ।
Aditya Raj Kaul@AdityaRajKaul

#BREAKING: India announces five-nation visit of Prime Minister @narendramodi to UAE, Netherlands, Sweden, Norway, and Italy from May 15 to 20.

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
कोई भ्रष्टाचारी दूसरे पार्टी का बीजेपी के साथ समझौता करता है और वो हिंदुत्व का चेहरा बन जाता है । हिमंत विश्व शर्मा , सम्राट चौधरी , कल्याण बनर्जी । अंधभक्त भाजपा के समर्थक के लिए इज्जतदार शब्द है जबकि चुतिया सबसे उचित शब्द है इनके लिए ।
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
Imp Ques : In this mafia rule of ED-CBI , why hasn’t Prashant Kishore been touched?
Sanjay Raut@rautsanjay61

कल्याण बनर्जी हे तृणमूल कॉंग्रेसचे महत्वाचे नेते आणि खासदार आहेत ,प.बंगाल मधील पराभवानंतर त्यांनी अत्यंत महत्वाचा मुद्दा उपस्थित केला आहे ते म्हणतात: “IPAC ने तृणमूल काँग्रेसच्या संघटनेवर कब्जा केला आणि तृणमूल ला पूर्णपणे बरबाद केले. IPAC ने संभाव्य उमेदवारांमध्ये भांडण लावले. प्रत्येक विधानसभेत अनेकांना सांगितले होते की ‘तुमचा फीडबॅक सर्वोत्तम आहे, तुम्हालाच तिकिट मिळेल’. ज्यांना तिकिट मिळाले नाही ते नाराज होऊन भाजपाला मदत करू लागले. प्रशांत किशोर हे संधीसाधु आहेत. त्यांनी देशभरातील राजकीय पक्षांना कमकुवत केले आहे.त्यांच्यापासून सावध राहिले पाहिजे ,, यावर पत्रकार आवेश तिवारी म्हणतात:: आज देशातील जवळपास सर्व प्रादेशिक पक्षांमध्ये एक नवीन ‘पॉवर सेंटर’ तयार झाले आहे — निवडणूक व्यवस्थापन कंपन्या, सर्वे एजन्सी आणि राजकीय सल्लागारांचे नेटवर्क. हळूहळू हे लोक संघटनेपेक्षा मोठे झाले आणि खऱ्या ग्रामीण कार्यकर्ते बाजूला पडत चालले आहेत. कल्याण बनर्जींनी IPAC बद्दल जे सांगितले ते फक्त बंगालची कहाणी नाही. बिहारपासून इतर राज्यांमध्येही अनेक पक्षांच्या आत कार्यकर्त्यांची हीच व्यथा आहे. प्रत्येक मतदारसंघात अनेकांना खोटा विश्वास दिला जातो की ‘तुम्हालाच तिकिट मिळेल’. पण शेवटी दुसऱ्याला तिकिट मिळते, पक्षात अविश्वास वाढतो, कार्यकर्ते तुटतात आणि निवडणूक फक्त ‘डेटा, पॅकेज आणि मॅनेजमेंट’ चा खेळ बनते. सर्वात मोठी समस्या ही आहे की आता राजकारणात कार्यकर्त्यांऐवजी ‘प्रोजेक्ट’ पाहिले जात आहेत. गावोगावी संघर्ष करणाऱ्या कार्यकर्त्यांशी संपर्क साधणे, त्यांच्या समस्या ऐकणे, संघटनेला वेळ देणे — हे सगळे कठीण काम आहे. त्यापेक्षा एअरकंडिशन खोलीत बसून सर्वे रिपोर्ट तयार करणे आणि कोट्यवधींचे निवडणूक कंत्राट चालवणे खूप सोपे आहे.(अजीत पवार यांच्या पक्षात यावरून वाद निर्माण झाला) राजकीय पक्षांनी समजून घ्यायला हवे की कोणतीही अॅप, सर्वे किंवा एजन्सी जनता आणि कार्यकर्त्यांमधील खऱ्या विश्वासाची जागा घेऊ शकत नाही. निवडणुका फक्त डेटावर नव्हे, तर विश्वास, संवाद आणि संघटनेच्या आत्म्यावर जिंकल्या जातात.

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
Awesh Tiwari@awesh29

कल्याण बनर्जी कहते हैं "IPAC ने तृणमूल कांग्रेस संगठन को हाईजैक किया और उसको बर्बाद कर दिया। IPAC संगठन के अंदर संभावित उम्मीदवारों के बीच लड़ाई लगवाया। इसने हर विधानसभा में कई लोगों को कह रखा था कि तुम्हारा ही फीडबैक सबसे अच्छा है तुम्हीं को टिकट मिलेगा।जिसको टिकट नहीं मिला वह नाराज़ हो कर भाजपा का मदद किया। प्रशांत किशोर अवसरवादी है। देश भर के राजनीतिक दलों को पंगु बना दिया है” सच है कि आज देश की लगभग हर क्षेत्रीय पार्टी में एक नया “पावर सेंटर” पैदा हो गया है — चुनावी मैनेजमेंट कंपनियाँ, सर्वे एजेंसियाँ और राजनीतिक सलाहकारों का नेटवर्क।धीरे-धीरे ये लोग संगठन से बड़े हो गए, और ज़मीनी कार्यकर्ता किनारे लगते चले गए। कल्याण बनर्जी ने IPACK को लेकर जो बात कही, वह सिर्फ बंगाल की कहानी नहीं है। बिहार से लेकर दूसरे राज्यों तक कई दलों के भीतर कार्यकर्ताओं की यही पीड़ा है। हर विधानसभा में कई लोगों को यह भरोसा दिया जाता है कि आपका फीडबैक सबसे अच्छा है, टिकट आपको ही मिलेगा। फिर टिकट किसी और को मिलता है, संगठन के भीतर अविश्वास बढ़ता है, कार्यकर्ता टूटते हैं, और चुनाव सिर्फ “डेटा, पैकेज और मैनेजमेंट” का खेल बनकर रह जाता है। सबसे बड़ा संकट यह है कि अब राजनीति में कार्यकर्ता नहीं, प्रोजेक्ट देखे जा रहे हैं।गाँव-गाँव संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलना, उनकी बात सुनना, संगठन को समय देना — यह सब कठिन काम है। उससे आसान है एयरकंडीशन कमरे में बैठकर सर्वे रिपोर्ट बनाना और करोड़ों का चुनावी ठेका चलाना। राजनीतिक दलों को समझना होगा कि कोई भी ऐप, सर्वे या एजेंसी जनता और कार्यकर्ता के बीच के भरोसे की जगह नहीं ले सकती। चुनाव सिर्फ डेटा से नहीं, भरोसे, संवाद और संगठन की आत्मा से जीते जाते हैं। DRBSR

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
किसी भी पार्टी को अगर लंबे समय तक भाजपा को हराना है तो वो पुराने तरीके से संगठन बना के विचारधारा के आधार पर , कार्यकर्ता के नियत और उसके बैकग्राउंड को जान के ही बनाया जा सकता है , ये एजेंसी को ठेका देके से चीज़े आसान हो जाती है excel sheet पर मगर उस संगठन का कोई आधार नहीं होता ।
Gopal Italia@Gopal_Italia

Bilseri ने भी चाणक्य बनने के चक्कर में Ditto यही गंदी हरकत करी थी। किसी एक विधानसभा में Bilseri के LPoC ZPoC नाम के पालतू गुर्गे दस पंद्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग से बुलाकर उनको कहते थे की “आप का सर्वे बहुत अच्छा आ रहा है, थोड़ा महेनत कर लो तो टिकिट हो सकता है, बाक़ी सर्वे तो बढ़िया है।” जो आदमी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर विधानसभा चुनाव लड़ने योग्य नहीं थे उनको भी नक़ली सर्वे शीट का pdf बनाकर दिखाया जाता था और कहा जाता था की, “ये देखो आप का सर्वे तो बहुत अच्छा है। आप को काफ़ी लोग जानते है। फलाना ढिमकाना सर्वे सर्वे सर्वे” - ऐसा कहकर एक ही विधानसभा में दस लोगो को बिना कारण लालच दिया जाता था। उस नक़ली pdf में जिस व्यक्ति को सर्वे के नाम पर ठगना होता था उस व्यक्ति ना कैटी और फील्ड दोनों सर्वे बहुत अच्छा दिखाया आता था। उस pdf में लोग उसको पर्टिक्युलर व्यक्ति को नाम से जानते है, उसका समाज उसको वो दे रहा है यह सब एक्सेल शीट से बनाया जाता था। मेरे पास ऐसी कई विधानसभा का pdf अभी भी है जिसमे 45% वोट दिखाया गया था लेकिन वास्तव में पाँच-सात हज़ार वोट ही मिली। झुठे सर्वे दिखाकर दस-पंद्रह लोगो को मन ही मन केंडिडेट बनाने के बाद अंत में जब एक व्यक्ति को टिकट मिला तो दस लोग यह सोचने लगे की मेरा सर्वे इतना अच्छा था फिर भी मुझे टिकट क्यो नहीं दिया? फिर पैसे के बदले टिकट का आरोप लगाकर उन्ही में से कुछ लोग निर्दलीय खड़ा रहे, कुछ भाजपा-कांग्रेस को गये और जिस सीट पर अच्छा माहौल था वो अंत में ख़राब हो गया। एजेन्सी अगर इस तरीक़े का फ़्रॉड करे तो समझे, लेकिन ख़ुद के इन-हाउस चाणक्य इतनी गंदी हरकत करे तो? Bilseri जी ने एक एक चीज में जो गंद फैलाई थी, उसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
@Gopal_Italia कार्यकर्ता और जिला के नेता , राज्य लेवल के नेता में कभी जुड़ाव ही नहीं हो पाता है , सब कार्यकर्ता उस सेंट्रल टीम के आगे पीछे में लगे होते है की टिकट मिलेगा पद मिलेगा , और जिला अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष पंगु बने रहते है । ऐसा संगठन सिर्फ कागज पर ही बनता है ।
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Gopal Italia
Gopal Italia@Gopal_Italia·
Bilseri ने भी चाणक्य बनने के चक्कर में Ditto यही गंदी हरकत करी थी। किसी एक विधानसभा में Bilseri के LPoC ZPoC नाम के पालतू गुर्गे दस पंद्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग से बुलाकर उनको कहते थे की “आप का सर्वे बहुत अच्छा आ रहा है, थोड़ा महेनत कर लो तो टिकिट हो सकता है, बाक़ी सर्वे तो बढ़िया है।” जो आदमी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर विधानसभा चुनाव लड़ने योग्य नहीं थे उनको भी नक़ली सर्वे शीट का pdf बनाकर दिखाया जाता था और कहा जाता था की, “ये देखो आप का सर्वे तो बहुत अच्छा है। आप को काफ़ी लोग जानते है। फलाना ढिमकाना सर्वे सर्वे सर्वे” - ऐसा कहकर एक ही विधानसभा में दस लोगो को बिना कारण लालच दिया जाता था। उस नक़ली pdf में जिस व्यक्ति को सर्वे के नाम पर ठगना होता था उस व्यक्ति ना कैटी और फील्ड दोनों सर्वे बहुत अच्छा दिखाया आता था। उस pdf में लोग उसको पर्टिक्युलर व्यक्ति को नाम से जानते है, उसका समाज उसको वो दे रहा है यह सब एक्सेल शीट से बनाया जाता था। मेरे पास ऐसी कई विधानसभा का pdf अभी भी है जिसमे 45% वोट दिखाया गया था लेकिन वास्तव में पाँच-सात हज़ार वोट ही मिली। झुठे सर्वे दिखाकर दस-पंद्रह लोगो को मन ही मन केंडिडेट बनाने के बाद अंत में जब एक व्यक्ति को टिकट मिला तो दस लोग यह सोचने लगे की मेरा सर्वे इतना अच्छा था फिर भी मुझे टिकट क्यो नहीं दिया? फिर पैसे के बदले टिकट का आरोप लगाकर उन्ही में से कुछ लोग निर्दलीय खड़ा रहे, कुछ भाजपा-कांग्रेस को गये और जिस सीट पर अच्छा माहौल था वो अंत में ख़राब हो गया। एजेन्सी अगर इस तरीक़े का फ़्रॉड करे तो समझे, लेकिन ख़ुद के इन-हाउस चाणक्य इतनी गंदी हरकत करे तो? Bilseri जी ने एक एक चीज में जो गंद फैलाई थी, उसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।
Awesh Tiwari@awesh29

कल्याण बनर्जी कहते हैं "IPAC ने तृणमूल कांग्रेस संगठन को हाईजैक किया और उसको बर्बाद कर दिया। IPAC संगठन के अंदर संभावित उम्मीदवारों के बीच लड़ाई लगवाया। इसने हर विधानसभा में कई लोगों को कह रखा था कि तुम्हारा ही फीडबैक सबसे अच्छा है तुम्हीं को टिकट मिलेगा।जिसको टिकट नहीं मिला वह नाराज़ हो कर भाजपा का मदद किया। प्रशांत किशोर अवसरवादी है। देश भर के राजनीतिक दलों को पंगु बना दिया है” सच है कि आज देश की लगभग हर क्षेत्रीय पार्टी में एक नया “पावर सेंटर” पैदा हो गया है — चुनावी मैनेजमेंट कंपनियाँ, सर्वे एजेंसियाँ और राजनीतिक सलाहकारों का नेटवर्क।धीरे-धीरे ये लोग संगठन से बड़े हो गए, और ज़मीनी कार्यकर्ता किनारे लगते चले गए। कल्याण बनर्जी ने IPACK को लेकर जो बात कही, वह सिर्फ बंगाल की कहानी नहीं है। बिहार से लेकर दूसरे राज्यों तक कई दलों के भीतर कार्यकर्ताओं की यही पीड़ा है। हर विधानसभा में कई लोगों को यह भरोसा दिया जाता है कि आपका फीडबैक सबसे अच्छा है, टिकट आपको ही मिलेगा। फिर टिकट किसी और को मिलता है, संगठन के भीतर अविश्वास बढ़ता है, कार्यकर्ता टूटते हैं, और चुनाव सिर्फ “डेटा, पैकेज और मैनेजमेंट” का खेल बनकर रह जाता है। सबसे बड़ा संकट यह है कि अब राजनीति में कार्यकर्ता नहीं, प्रोजेक्ट देखे जा रहे हैं।गाँव-गाँव संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलना, उनकी बात सुनना, संगठन को समय देना — यह सब कठिन काम है। उससे आसान है एयरकंडीशन कमरे में बैठकर सर्वे रिपोर्ट बनाना और करोड़ों का चुनावी ठेका चलाना। राजनीतिक दलों को समझना होगा कि कोई भी ऐप, सर्वे या एजेंसी जनता और कार्यकर्ता के बीच के भरोसे की जगह नहीं ले सकती। चुनाव सिर्फ डेटा से नहीं, भरोसे, संवाद और संगठन की आत्मा से जीते जाते हैं। DRBSR

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
और इससे जो जनता और कार्यकर्ता का पार्टी से भरोसा टूटता है वो फिर इतनी आसानी से नहीं बनता है । ग़लत लोगों को ग़लत आधार पर उम्मीदवार बनाने से आम जनता में ये संदेश जाता है की ये भी पार्टी किसी से अलग नहीं है ।
Gopal Italia@Gopal_Italia

Bilseri ने भी चाणक्य बनने के चक्कर में Ditto यही गंदी हरकत करी थी। किसी एक विधानसभा में Bilseri के LPoC ZPoC नाम के पालतू गुर्गे दस पंद्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग से बुलाकर उनको कहते थे की “आप का सर्वे बहुत अच्छा आ रहा है, थोड़ा महेनत कर लो तो टिकिट हो सकता है, बाक़ी सर्वे तो बढ़िया है।” जो आदमी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर विधानसभा चुनाव लड़ने योग्य नहीं थे उनको भी नक़ली सर्वे शीट का pdf बनाकर दिखाया जाता था और कहा जाता था की, “ये देखो आप का सर्वे तो बहुत अच्छा है। आप को काफ़ी लोग जानते है। फलाना ढिमकाना सर्वे सर्वे सर्वे” - ऐसा कहकर एक ही विधानसभा में दस लोगो को बिना कारण लालच दिया जाता था। उस नक़ली pdf में जिस व्यक्ति को सर्वे के नाम पर ठगना होता था उस व्यक्ति ना कैटी और फील्ड दोनों सर्वे बहुत अच्छा दिखाया आता था। उस pdf में लोग उसको पर्टिक्युलर व्यक्ति को नाम से जानते है, उसका समाज उसको वो दे रहा है यह सब एक्सेल शीट से बनाया जाता था। मेरे पास ऐसी कई विधानसभा का pdf अभी भी है जिसमे 45% वोट दिखाया गया था लेकिन वास्तव में पाँच-सात हज़ार वोट ही मिली। झुठे सर्वे दिखाकर दस-पंद्रह लोगो को मन ही मन केंडिडेट बनाने के बाद अंत में जब एक व्यक्ति को टिकट मिला तो दस लोग यह सोचने लगे की मेरा सर्वे इतना अच्छा था फिर भी मुझे टिकट क्यो नहीं दिया? फिर पैसे के बदले टिकट का आरोप लगाकर उन्ही में से कुछ लोग निर्दलीय खड़ा रहे, कुछ भाजपा-कांग्रेस को गये और जिस सीट पर अच्छा माहौल था वो अंत में ख़राब हो गया। एजेन्सी अगर इस तरीक़े का फ़्रॉड करे तो समझे, लेकिन ख़ुद के इन-हाउस चाणक्य इतनी गंदी हरकत करे तो? Bilseri जी ने एक एक चीज में जो गंद फैलाई थी, उसकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
Israel took control of US by Honey Trap. Israel took control of India by Honey Trap.
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
@Komal_Indian @ArvindKejriwal पंजबियों ने ही बोला था स्वाति मालीवाल , राघव चड्ढा , संदीप पाठक को राज्यसभा भेजने । अपने गलती पर भी ध्यान दीजिए । ऐसा भाषण बैकफ़ायर करेगा । @Komal_Indian
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Komal
Komal@Komal_Indian·
.@ArvindKejriwal in full form 🙌 ये लोग जो गए हैं, वो चोरी करके गए हैं. 6 राज्यसभा सीट किसीके पिताजी की नहीं थी 🥸.. ये 6 सीट पंजाबियों की थी.. बीजेपी ने जो डाका डाला है, उसका बदला आप अगले साल फरवरी में देना 🔥🔥🔥🔥
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Aditya Singh retweetledi
Vijay Prashad
Vijay Prashad@vijayprashad·
Saheb, Bibi, aur Ghulam.
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
@SandeepPathak04 अहंकारी था बिना किसी किंतु परंतु के कह सकता हूँ , पार्टी का एकतरफा बॉस बनना चाहता था वो भी सच है , बहुत ही बुरा पोलिटिकल कैंपेनर था उससे भी बुरा संगठन मैनेज करने का तरीका था इसका - ये केजरीवाल के अलावा सब को दिखा रहा था पर केजरीवाल सिर्फ़ पाठक का ही सुनता था।
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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
@PrashantKishor ने सही ही कहा था की guess paper वाली पार्टी है । सोशल मीडिया में क्या चल रहा है इस हिसाब से पार्टी में फैसला लेते है और नेता बनाते है और एक चीज़ तो मैं समझ गया केजरीवाल को टेक्नोलॉजी , डेटा और सोशल मीडिया के नाम पर कोई बेवक़ूफ़ बना सकता है। @ArvindKejriwal
Mukul Anand@mukul_acme

@attorneybharti @ArvindKejriwal .@SandeepPathak04 problem AK ki hai... jo bhi IIT/Harward ya kisi famous university ka hota usko ye log jyada ijjat dete hain!!! We have no HR and it failed to evolve as a strong organization. Lots of introspection and correction is needed.

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Aditya Singh
Aditya Singh@likeadisingh·
@ArvindKejriwal को संदीप पाठक ने समझाया की सिर्फ भगत सिंह और अंबेडकर का फोटो आगे लाइये, साथ में गांधी का लगा देते तो क्या दिक्कत थी भाई, आजादी के क्रांतिकारी का भी डेटा दिखा के कोई बेवक़ूफ़ बना देता है इन्हें । पाठक ने बोला गुजरात से किसी को राज्यसभा मत भेजो - नहीं भेजा ।
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Kapil
Kapil@kapsology·
Why does CIA wants to stabilize India?
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