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💡 From Varanasi, BSc, Exec. MBA and LL.B. | Hindu & Patel by Heritage, Indian by Heart | Let's Talk Justice & culture🍁 “कुर्मी, कुशवाहा, धानुक ओ पी पटेल”

Varanasi, India Katılım Ağustos 2009
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O P Patel
O P Patel@oppatel_sp·
पीएम मोदी और बिल गेट्स दोनों एपस्टीन फाइलों में गहराई से फंसे हैं और अब भारत के घातक HPV वैक्सीनेशन अभियान को 14 साल की लड़कियों पर थोपने में बराबर के अपराधी हैं। मुख्यधारा की भारतीय मीडिया की चुप्पी इस साजिश को छिपा रही है। कोई जांच नहीं, कोई सवाल नहीं! यह स्वास्थ्य नीति नहीं, गेट्स फंडेड प्रयोग है जो की बांझपन, कैंसर और मौत का खतरा बढ़ाता है। जो चीज अमेरिका में बैन है मोदी जी उसे कैसे भारत में एक बड़े स्तर पर जारी रखने के लिए हामी भर दिया? गेट्स फाउंडेशन ने करोड़ों दिए, लेकिन मकसद पूरी तरह से संदिग्ध है। हे सोते हुए अंधभारत, जागो, अपनी बेटियों को बचाओ, इस जहरीले गठजोड़ को ठुकराओ! #StopHPVScam #EpsteinExposed #MediaSilence #ProtectOurGirls
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The dark masked™
The dark masked™@the_dark_masked·
दिल्ली के उत्तम नगर में जब दो पड़ोसियों के बीच आपसी लड़ाई हुई, तो अभिनव पांडे ने उसे सांप्रदायिक रंग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हैरानी की बात यह है कि वही अभिनव पांडे आज पूरी तरह गायब हैं, जबकि दिल्ली के त्रिलोकपुरी में 16 साल के एक मासूम बच्चे, अयान सैफी की उसकी धार्मिक पहचान के कारण बेरहमी से हत्या कर दी गई। जब असली नफरत ने एक जान ले ली, तब इन 'तथाकथित' पत्रकारों के कैमरे और जुबान दोनों बंद हैं। @Abhinav_Pan @TheNewspinch#JusticeForAyan #Trilokpuri #DoubleStandards #DelhiCrime #StopPropaganda
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The dark masked™@the_dark_masked

1 मई को दिल्ली के त्रिलोकपुरी में पार्क में खेलते समय 8-10 लोगों ने 16 वर्षीय अयान सैफी पर चाकू से जानलेवा हमला किया, जिसमें उसकी जान चली गई। अयान अपनी माँ की इकलौती संतान था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह हत्या धार्मिक पहचान और पुरानी रंजिश के चलते एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई है। परिजनों का कहना है कि अयान को लंबे समय से अपमानित किया जा रहा था, लेकिन पिछली शिकायतों पर पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हालांकि पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया है, लेकिन परिवार अब इस मामले में सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है। ​#Delhi #Trilokpuri #JusticeForAyan #CrimeNews #DelhiPolice

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Rahul Kumar
Rahul Kumar@MukAn_X·
यह मामला उत्तराखंड के रुद्रपुर का है। यहाँ एक आदमी बिना हेलमेट अपनी बाइक से जा रहा था, तभी पुलिस वालों ने उसे रोककर पहले तो चालान काट दिया और फिर उसकी गाड़ी सीज करने लगे। जब उस बंदे ने पूछा कि गाड़ी क्यों सीज कर रहे हो तो पुलिस ने कागज़ मांगे। उसे कागज़ दिखाने में बस पांच मिनट की देर हुई, पुलिस वाले जबरदस्ती गाड़ी थाने ले जाने पर अड़ गए और बोले कि अब थाने आकर ही कागज़ दिखाना और वहीं से गाड़ी ले जाना। उस बंदे ने कहा कि जब गाड़ी मेरी है, पैसे मैंने दिए हैं और सारे कागज़ात भी मौजूद हैं तो मैं बेवजह परेशान क्यों होऊं? उसने मिन्नतें भी कीं कि कागज़ चेक कर लीजिए लेकिन पुलिस वाले उसे थाने घसीटने की जिद पर अड़े रहे। अपराधियों को पकड़ने में भले ही देर हो जाए लेकिन एक आम आदमी अगर पांच मिनट की देरी कर दे तो उसे थाने के चक्कर लगवाना इनका अपना जन्मसिद्ध अधिकार हो जाता हैं।
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Ranvijay Singh
Ranvijay Singh@ranvijaylive·
जब तक EVM है, विपक्ष जाल में फंसता रहेगा. आपको एक चुनाव जितवा दिया जाएगा, आपसे 3 चुनाव जीत लिए जाएंगे. सब इतना सिस्टेमैटिक है कि आप चाहकर भी ना कह पाएं कि गलत हुआ है, लेकिन असल में गलत हुआ है. हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार... लंबी लिस्ट है. ये वो राज्य थे जहां सरकार चलाने वाले भी कहते- इस बार मुश्किल है, लेकिन रिजल्ट वही आया जो सेट किया गया. इस बीच आपको एक दो चुनाव, कुछ सीटें दे दी जाएंगी. आप उसी में खुश रहें, निष्पक्ष चुनाव का ढोंग चलता रहेगा. मामला अब हाथ से निकल चुका है. अब लड़ाई एक पार्टी या व्यक्ति से नहीं, तमाम संस्थाओं से है. और ये लड़ाई आसान नहीं.
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Prashant Raj Man
Prashant Raj Man@PrashantRaj0man·
वीडियो कहाँ का है ये तो पता नहीं चला, लेकिन कुछ नाबालिग़ बच्चियां हैँ जिन्हे उनके गली के कुछ मनचले सरेआम छेड़ रहे हैँ। एक मजबूर अभिभावक जिसने वीडियो बना कर share किया है! वीडियो फैलाइये, और इनका पता निकालिये। बाकी कार्यवाई हम करवाएंगे
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Swayam Tiwari
Swayam Tiwari@SwayamTewari·
Vanshika is a Brahmin girl. Vanshika topped UP Boards. Vanshika scored 93.5% Akhilesh Yadav steps forward and honors this Brahmin girl. Now tell me when did you last see Mahant Ji honor a Brahmin girl? When?
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LB Sahani
LB Sahani@sahaniLBS1989·
They ganged up on her. Slapped her. Shamed her. All because she was alone A girl in a red t-shirt, surrounded by her own kind. This isn't sisterhood. This is heartbreaking betrayal. Bennett University, you failed her.💔
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AajTak
AajTak@aajtak·
#BreakingNews: विजय के पिता एस. ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस को TVK के साथ गठबंधन का खुला न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक ऐतिहासिक और परंपराओं वाली पार्टी रही है, लेकिन लगातार दूसरी पार्टियों को समर्थन देने के कारण उसकी ताकत कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस अपनी खोई हुई शक्ति वापस हासिल करे। एस. ए. चंद्रशेखर के मुताबिक, “वह नहीं बल्कि विजय खुद कांग्रेस को वह ताकत देने के लिए तैयार हैं, जिससे पार्टी अपनी पुरानी पहचान और मजबूती फिर से हासिल कर सके।” उन्होंने कांग्रेस से इस मौके का फायदा उठाने और TVK के साथ मिलकर आगे बढ़ने की अपील की। #TamilnaduElectionsResult #VijayThalapathy #TVK #Congress #ASChadrashekhar #ATCard #AajTakSocial
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Shailendra Sharma
Shailendra Sharma@shail2018·
पढ़े-लिखे और साफ़ सुथरे चरित्र वाले लोगों को राजनीति में आना चाहिए, ऐसे लोग ही राजनीति के “गंदे” चरित्र को बदल सकते हैं, देश को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते हैं! सुना है न, ये प्रवचन? अब शक्लें याद करिए राघव चड्ढा, संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल, यानि अपने RSS की... राघव दिल्ली के प्रतिष्ठित मॉडर्न स्कूल से पढ़े हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया है, चार्टेड अकाउंटेंट हैं, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पब्लिक पॉलिसी की भी सही वाली पढ़ाई की है, सम्राट चौधरी वाली नहीं! संदीप ने तो कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी किया है, इंजीनियरिंग में। यही नहीं, इन्होंने MIT और ऑक्सफोर्ड से पोस्ट डॉक्टरेट भी किया है, और IIT दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे हैं। और स्वाति की शैक्षिक योग्यता भी किसी से कम नहीं है। मैडम ने बीटेक किया है सूचना प्रौद्योगिकी में। तीनों निहायत ही होनहार छात्र रहे हैं, मिडल क्लास परिवार से आते हैं, क्लास में पेंसिल चुराने तक का भी आरोप नहीं था इनके ख़िलाफ़! इनकी शिक्षा और सौम्यता ही इनकी प्रारंभिक पहचान रही है। ये वही प्रोफ़ाइल है जो दशकों से देश की, नए भारत की उम्मीद रही है। ये राजनीति में आए, राजनीति ने इन्हें सिर माथे पर बैठाया। बहुत ही कम उम्र में ये देश की संसद में भी पहुँच गए। और फ़िर? इनके व्यक्तिगत हित और महत्वाकांक्षा ने देशहित और राजनैतिक मर्यादा को पीछे ढकेल दिया। इन्होंने वो किया जो सिद्धांतविहीन, विचारधारा शून्य और मौकापरस्त नेता अक्सर करते आए हैं! इन्हें देखकर ये महसूस होता है कि इनसे बेहतर तो वो कम पढ़े लिखे नेता होते हैं, आख़िर उनकी समझ और क़ाबिलियत जनता को पता तो होती है! अगर इनके जैसे पढ़े लिखे, साफ़ चरित्र नेताओं का कोई दीन-ईमान नहीं है तो फ़िर गुंडे मवाली क्या बुरे हैं? कम से कम, गुंडे-बदमाशों को चुनते वक़्त जनता उनकी नियत से पूरी तरह वाक़िफ़ तो रहती है, पता रहता है कि भाई, ये अपने मतलब के लिए कुछ भी कर सकता है। इसलिए उन जैसे नेताओं का कोई भी क़दम, कोई भी फ़ैसला किसी धोखे का एहसास तो नहीं कराता, छला हुआ तो महसूस नहीं होने देता! तो अब हमारे RSS ने देश के सामने ऐसी मिसाल रखी है, कि लंबे समय तक कोई टीचर अपने छात्रों से ये कहने कि हिमाक़त नहीं करेगा कि, राजनीति में पढ़े लिखे, साफ़ सुथरे चरित्र वाले लोगों के आने से देश या राजनीति का कोई भला होगा…
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Vijay
Vijay@ActForVijay·
1757 के प्लासी के मैदान में जब चंद गद्दारों ने हमारी आज़ादी का सौदा किया था, तो उन पैरों की बेड़ियों को काटने में हमें 190 साल और अनगिनत कुर्बानियां लग गईं। हम खामोशी से एक और post प्लासी की तरफ तो नहीं बढ़ रहे... ●● 1951 में जब इस देश ने पहली बार आज़ाद हवा में वोट डाला, तो चुनाव नतीजों में सबसे बड़े विपक्ष के रूप में कम्युनिस्ट पार्टी उभर कर आई। बस यहीं से सात समंदर पार बैठे उन विदेशी आकाओं की नींद उड़ गई, जिन्हें भारत का स्वतंत्र और अपने पैरों पर खड़ा होना कभी रास नहीं आया। अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी CIA को यह खौफ सताने लगा कि लोकतंत्र की यह स्वाभाविक परंपरा है,आज का मज़बूत विपक्ष ही कल सत्ता का सिंहासन बनता है। पहले आम चुनावों में कम्युनिस्ट शब्द बड़े विपक्ष बने। अमेरिका किसी भी हाल में भारत को कम्युनिस्ट द्वारा शासित होने नहीं देना चाहता था। अगर आपको लगता है कि यह महज़ कोई मनगढ़ंत कहानी है, तो CIA के तत्कालीन एशिया प्रमुख जॉन कुरन (John A. Curran) की उस दौर में लिखी किताब 'Militant Hinduism in Indian Politics: A Study of the R.S.S' पढ़िए। साज़िश की पटकथा और तैयारी उसी दिन से शुरू हो गई थी। उन्होंने हमारी ज़मीन की नब्ज़ टटोली और यह तय किया कि भारत में वामपंथ और लोक-कल्याण की राजनीति को रोकने के लिए दक्षिणपंथी ताकतों को विदेशी खाद-पानी देकर पाला और पोसा जाए। ●● उन्हीं विदेशी मंसूबों ने 1975 में डॉ. लोहिया और जयप्रकाश नारायण की आड़ लेकर इस देश की सत्ता को हथियाने का एक बड़ा जाल बुना था। वो तो उस वक्त इंदिरा गांधी की राजनीतिक चतुराई और कड़े फैसलों ने उनके इस चक्रव्यूह को भेद दिया, वरना उसी साल इस देश के स्वतंत्र भविष्य का खेल खत्म हो चुका होता। पर विदेशी साज़िशें हार नहीं मानतीं। जो काम 1975 में फ्लॉप हो गया था, वो आज अपनी पूरी नग्नता के साथ सफल हो रहा है। आज उन्होंने बड़ी ही खामोशी से हमारे ही आंगन में अपने प्यादे और कठपुतलियां बिठा दी हैं। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसी जगहों पर जहां कभी इनकी ज़मीन नहीं थी, वहां इनका जीतना क्या इतनी आसानी से किसी के गले उतरेगा? जो लोग आज तमिलनाडु में नए राजनीतिक प्रयोगों का जश्न मना रहे हैं, वे नहीं जानते कि 10-15 सालों में तमिलनाडु का भी वही हश्र होने वाला है। बीच-बीच में केरल, गोवा या हिमाचल जैसी कुछ जगहें विपक्ष को सिर्फ इसलिए दे दी जाएंगी ताकि एक जीवित लोकतंत्र का नाटक चलता रहे और जनता का भ्रम न टूटे। ●● सच तो यह है कि आज दिल्ली के तख्त पर बैठने वाले महज़ मोहरे हैं। इस देश पर अब असल शासन CIA और उन अदृश्य विदेशी ताकतों का ही चलेगा। हम एक ऐसे तिलिस्म में कैद कर दिए गए हैं जहाँ हमें विश्वगुरु होने का अफीम चटाया जा रहा है, और हम मदहोश पड़े हैं। जो लोग आज किसी दल विशेष का कार्यकर्ता होने के दंभ में सीना ताने घूम रहे हैं और सोच रहे हैं कि उन्हें सत्ता की मलाई मिलेगी, वे सबसे बड़े मुगालते में हैं। जब कसाई को भेड़ें चाहिए होंगी, तो सभी भेड़ें काटी जाती हैं कोई नहीं बचता। जिसमें ताकत है, वो शायद झोला उठाए और इस देश से निकलने की तैयारी कर ले, लेकिन जो आम आदमी इस मिट्टी से बंधा है, वो कहां जाएगा? #VijayShukla
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The Dalit Voice
The Dalit Voice@ambedkariteIND·
#Horrific In Chhatarpur, Madhya Pradesh, a Dalit family was brutally beaten in public for not giving enough “donation.” A priest had demanded 100Kg of wheat, but the family said they could only afford 50 kg. Enraged by this, a group of Hindus mercilessly assaulted them.
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Annuश्री
Annuश्री@annushreex·
मुंबई में शायद एक छोटी लड़की लोकल ट्रेन में कुछ बेच रही थी। महिला यात्री में से एक ने उसे बुलाया। यात्री: कीने का है? लड़की: 20 का है। यात्री: स्कूल जाती है या नहीं? लड़की: हाॅं, जाती हूं। यात्री: बाबा क्या करते है? उसने लड़की को 100 रुपये का नोट दिया लड़की : छुट्टे नहीं हैं फिर वह पूछती है, तुम्हारी मम्मी और पापा क्या करते हैं? लडकी: पापा जाते है काम करने को कुछ। स्कूल की फीस भरनी थी तो मई काम करने को आयी यात्री : स्कूल की फीस जमा करनी है?कितनी फीस है स्कूल की ? लड़की :260 लगता है महीना यात्री: ओहो... फोन नंबर है मम्मी का? लड़की: अपना सिर हिलाती है। नहीं है। यात्री: अच्छा ...मै तुझे अपना नंबर देती हूँ। घर जाके फोन करना। यात्री: क्या नाम है तेरा? लड़की: सुरेखा यात्री: और कोन सी क्लास में हो तुम लड़की: सातवी यात्री: तेरी फीस में दूंगी अब से। तू अच्छे से पढ़ाई कर। लड़की मुस्कराती है यात्री : तेरे भाई कितने है ? लड़की : 3 यात्री :अच्छा तू अच्छे से पढ़ाई कर। ये तू और पैसा ले फीस भरने के लिए और मम्मी से कहना मुझसे बात करने के लिए। इस वीडियो ने मुझे चकित कर दिया। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई, कि आज भी इंसानियत है। लोग आजकल दूसरों की समस्या पर भी ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन इस महिला यात्री ने उसकी पढ़ाई में मदद की। आपको सलाम। स्रोत: यूट्यूब
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खुरपेंच Satire
आपका नाम संजुक्ता पराशर है। आपने UPSC में Rank 85 हासिल की। आपके पास IAS बनने का विकल्प था, लेकिन आपने IPS चुना। क्योंकि आपको कुर्सी के पीछे नहीं , जमीन पर काम करना था। 2006 में आप IPS में शामिल होने वाली पहली असमिया महिला बनीं। 2008 में आपकी पोस्टिंग असम के माकुम में हुई—पूर्वोत्तर के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक। उस दौर में बोडो उग्रवादी आम लोगों की हत्या कर रहे थे, गांव जला रहे थे और हथियारों का नेटवर्क चला रहे थे। लेकिन आपने फाइलों से नहीं, मैदान से जवाब दिया। सिर्फ 15 महीनों में आपने जंगलों में 16 counter-operations लीड किए। 64 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया। भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद जब्त किया। आप कमांड सेंटर में बैठकर आदेश देने वाली अधिकारी नहीं थीं। आप CRPF जवानों के साथ AK-47 लेकर जंगल में उतरने वाली अधिकारी थीं। घर पर आपका चार साल का बच्चा था। पति की पोस्टिंग अलग थी। आप उनसे दो महीने में एक बार मिल पाती थीं। JNU से International Relations में PhD करने वाली महिला कोई भी आरामदायक करियर चुन सकती थी। लेकिन आपने सबसे कठिन रास्ता चुना। आज आप National Investigation Agency में Inspector General हैं। भारत के पास एक संजुक्ता पराशर है। लेकिन इस देश को ऐसी हजारों संजुक्ता पराशर चाहिए।
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अश्विनी सोनी
रेल में महिलाओं से बदसलूकी और मारपीट का ये वीडियो सोशलमीडिया पर वायरल है। जब तक ये आरोपी पकड़ा ना जाये जिम्मेदारी अधिकारीयों को टैग कीजिए। @RailMinIndia इस दरिंदे को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। @AshwiniVaishnaw #ElectionResult2026
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
केरल की जीत पर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं। भाजपा से नहीं जीते। आपस में जीते हैं। असम में भाजपा का सौ तक पहुंचना ज्यादा चिंताजनक है। कांग्रेस वहां इतनी कमजोर नहीं थी। और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा तो बिल्कुल लोकप्रिय नहीं थे। और चुनाव आयोग एवं प्रधानमंत्री मोदी का पूरा ध्यान बंगाल पर था। असम पर नहीं। इसलिए असम में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन उनका अपना है। तमिलनाडु में फिल्मी स्टारों की लोकप्रियता की कहानी फिर से दोहराई गई है। सबसे बड़ी चिन्ता बंगाल की होना चाहिए। वहां केवल ममता बनर्जी को नहीं हराया गया लोकतंत्र को दफन किया गया है। 12 साल का सबसे खराब चुनाव।
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O P Patel
O P Patel@oppatel_sp·
और आखिरी में… TVK को किसी बड़े राष्ट्रीय दल की hidden backing का कोई concrete evidence नहीं है। यह मुख्यतः विजय के massive fan base + anti-establishment sentiment + youth appeal की ताकत है। आज के नतीजे बताएंगे कि वो ताकत कितनी असली थी। #TVKVijay‌HQ #TVK #tamilnadu
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O P Patel
O P Patel@oppatel_sp·
Fan base से political party organic या manufactured? 2009 से विजय के करीब 85,000 fan clubs Tamil Nadu में थे। 2021 local body elections में उन्होंने 169 में से 115 सीटें जीतीं तब से यह एक organized political force बन गई।
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O P Patel
O P Patel@oppatel_sp·
आज (4 मई 2026) तमिलनाडु चुनाव के नतीजे आ रहे हैं और TVK जीत की तरफ बढ़ रही है! सवाल उठना लाजिमी है कि TVK और विजय के पीछे असल में कौन है? आइए इसे एक थ्रेड में समझते हैं… #TVKVijay#Tamilnadu
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