Prabhat Kumar Shukla

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@pks_rn

Teacher

Farrukhabad-Fatehgarh, India Katılım Kasım 2013
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umang misra
umang misra@umangmisra·
एक तरफ दुनिया के 100 गर्म शहरों में 95 भारत के हैं दूसरी ओर विकास के नाम पर ग्रेट निकोबार के लाखों पेड़ काटने की तैयारी है। जो सवाल करे उसे विकास विरोधी बता दो, पर्यावरण की रक्षा के लिए जो एजेंसियां हैं वहां यस मैन बैठा दो। कटे पेड़ों के बदले में कहां पेड़ लगते हैं, उसमें कितने बचते हैं कोई नहीं जानता। एक समय सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात होती थी, पर्यावरण के लिए घातक प्रोजेक्ट पर आपत्ति दर्ज कराते थे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सरकारी निकाय, फिर अमृतकाल आ गया। अब हर शाख पर एक सुर में गायन करने वाले बैठे हैं। इंसान की चिंता नहीं इन्हें पेड़ की क्या करेंगे!
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Adv. Vijay Singh
Adv. Vijay Singh@VijaySingh_law·
चीन रेगिस्तान में जंगल उगा रहा है… और मोदी सरकार ज़िंदा जंगलों पर बुलडोज़र चला रही है। अंडमान निकोबार में विकास नहीं, जंगलों की खुलेआम हत्या हो रही है। राहुल गांधी जी चेतावनी दे रहे हैं, पर सरकार को पेड़ नहीं, ज़मीन की कीमत दिख रही है। ये विकास नहीं, देश के भविष्य की नीलामी है।
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Congress
Congress@INCIndia·
अडानी के लिए प्रकृति को तबाह करते मोदी
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ANIL
ANIL@AnilYadavmedia1·
इथेनॉल के चक्कर में प्यासे मरोगे,
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MR
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Adv. Vijay Singh
Adv. Vijay Singh@VijaySingh_law·
एक पेड़ माँ के नाम, एक करोड़ पेड़ अडानी के नाम। क्या देश अब कुछ चुनिंदा नामों की जागीर बन चुका है?
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Ashfaq Joiya
Ashfaq Joiya@ashpak_Hussain7·
रिपोर्टर : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर क्या कहेंगे? राहुल गांधी : मैं यहाँ ग्रेट निकोबार में हो रही जंगलों की कटाई पर बात करने आया हूँ, आपके भटकाने वाले सवालों पर नहीं। पहली बार किसी ने एजेंडा पत्रकारिता को वहीं रोक दिया जहाँ उसकी औकात थी 🔥
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Dr. Sheetal yadav
Dr. Sheetal yadav@Sheetal2242·
एक तरफ जहां चीन 1978 में चालू हुई "ग्रेट ग्रीन वाल" योजना के तहत, 100 अरब पेड़ लगाने के लक्ष्य में से 66 अरब पेड़ लगाकर अबतक डेनमार्क देश के क्षेत्रफल जितना रेगिस्तान को हराभरा बना चुका है। तो वहीं भारत राहुल गांधी के अनुसार— लगातार निकोबार द्वीप पर लगातार पेड़ काटकर जंगल को रेगिस्तान बना रहा है। ISFR और ABP न्यूज के अनुसार— भारत में सालाना 3.3 करोड़ पेड़ काटे जाने का अनुमान है।
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Congress
Congress@INCIndia·
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट 👇 ⦿ हजारों एकड़ जंगल तबाह होंगे ⦿ आदिवासियों का घर उजड़ेगा ⦿ दुर्लभ जीव-जंतु खत्म हो जाएंगे
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Congress
Congress@INCIndia·
नरेंद्र मोदी 👇 • दोस्त अडानी का विकास कर रहे • ग्रेट निकोबार का विनाश कर रहे
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Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित ₹92,000 करोड़ की परियोजना को “विकास” के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इसकी असल कीमत प्रकृति, आदिवासी समुदायों और आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी। इस योजना के तहत लाखों नहीं बल्कि लगभग 1 करोड़ पेड़ों की कटाई की जा रही है, दुनिया के महत्वपूर्ण लेदरबैक कछुओं के अंडे देने वाले स्थल गैलाथिया बे को नष्ट किया जा रहा है, और शॉम्पेन व निकोबारी जनजातियों को उनके ही पारंपरिक निवास से विस्थापित किया जा रहा है। यह सब एक ऐसे द्वीप पर हो रहा है जो 2004 की सुनामी में प्रभावित हो चुका है और जहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। पर्यावरणीय कानूनों और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी करते हुए इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे साफ है कि यह “विकास” नहीं बल्कि एक गंभीर पारिस्थितिक और सांस्कृतिक त्रासदी है।
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vinita
vinita@vinita_jain26·
अमृत काल में डेवलपमेंट के नाम पर जल जंगल जमीन सबके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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Congress
Congress@INCIndia·
आदिवासियों की पहचान है ग्रेट निकोबार जिसे अडानी के लिए मोदी उजाड़ रहे हैं
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Mayur Waghela I.N.D.I.A 🇮🇳
राष्ट्र सेठ को... अंडोमान निकोबार द्वीप पसंद आया। सेठ जी ने इस द्वीप के लिए अपने आदमी को इशारा किया और ये अत्यंत संवेदनशील द्वीप एक चुटकी में सेठ साहब की जेब मे आ गिरा । और सबसे बड़ा कमाल देखिए वर्षों-वर्ष तक बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स अटकाने वाली नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी एक झटके में रास्ता साफ कर दिया। यकीन करना मुश्किल है कि NGT जैसे संस्थान इतने नाज़ुक पर्यावरण वाले क्षेत्र में ऐसी अनुमति दे सकते हैँ। अब इस द्वीप पर “मेगाप्रोजेक्ट” शुरू हो चुका हैँ। कागज़ों में यह नीति आयोग के साथ साझेदारी हैँ… लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक मुखौटा है ताकि लगे कि यह भारत सरकार का प्रोजेक्ट हैँ। बाकी पूरी दुनिया जानती है कि माल कूटने का काम सिर्फ सेठ जी ही करेंगे। 166 वर्ग किलोमीटर में फैलने वाला यह प्रोजेक्टट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, दो विशाल तटीय शहर, और 450 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट खड़ा करेगा। लेकिन इसकी कीमत क्या होगी? घने वर्षावन कटेंगे। तटीय पारिस्थितिकी तंत्र उजड़ेगा। लाखोँ सालोँ से संरक्षित हैरिटेज बर्बाद। पर्यावरणविद खुलकर विरोध कर रहे हैं पर उनकी आवाज़ कौन सुन रहा है? शोम्पेन और निकोबारी जैसी बेहद संवेदनशील जनजातियाँ जिनका अस्तित्व ही इस प्रकृति से जुड़ा हैँ, आज अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर खतरे में हैँ। याद रखिए यह कोई सामान्य जमीन नहीं हैँ।यह भारत के सबसे संरक्षित क्षेत्रों में से एक हैँ 96 वाइल्डलाइफ सेंचुरी, 9 नेशनल पार्क, 1 बायोस्फियर रिजर्व। यूनेस्को के “मैन एंड बायोस्फियर प्रोग्राम” में शामिल यह क्षेत्र कोरल रीफ्स, मैंग्रोव्स और सैकड़ों दुर्लभ जीवों का घर हैँ। लगभग 100 मरीन प्रोटेक्टेड एरिया यहाँ मौजूद हैँ। कानून भी कम नहीं हैँ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972, एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986, कोस्टल रेगुलेशन जोन। लेकिन जब इरादे ही काले हों… तो कानून कमजोर पड़ जाते हैँ। 90 हजार करोड़ का यह प्रोजेक्ट 20 लाख पेड़ों की बलि मांग रहा हैँ। सोचिए 20 लाख पेड़! जैव विविधता खत्म होगी, प्राकृतिक संपदा उजड़ेगी, और जो समुद्री तट आज निर्मल हैं वे कल गंदगी और कंक्रीट में बदल जाएंगे। और वहाँ के मूल आदिवासी ? या तो “नक्सलवादी” घोषित कर दिए जाएंगे…या “घुसपैठिये” बताकर डिटेंशन सेंटरों में डाल दिए जाएंगे। यानी साफ हैँ देश और दुनिया का सबसे संरक्षित द्वीप क्षेत्र चंद धनपशुवों के लालच और हवस की भेंट चढ़ने जा रहा हैँ। यह कोई नई कहानी नहीं हैँ। “कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स” के नाम पर वन और पर्यावरण की बर्बादी का खेल पहले से जारी है। अब अगला शिकार अंडमान-निकोबार हैँ।दो बेच रहे हैँ… दो खरीद रहे हैँ… और पूरा देश देख रहा हैँ कि कैसे संसाधनों को दो-तीन धनपशुओं के हवाले किया जा रहा हैँ।संवैधानिक संस्थाएँ? सिस्टम? कोर्ट? सब “मैनेज” हैँ। क्योंकि सच यह हैँ दुनिया का सबसे गिरा हुआ देश भी चंद सिक्कों के लिए अपनी अमूल्य धरोहर नहीं बेचता। लेकिन यहाँ अब खेल खुला हैँ। चुनौती भी खुली हैँ जो उखाड़ना है, उखाड़ लो। और अगर यही चलता रहा तो अगले 20 साल… यही खेल चलता रहेगा...!!😐 @RahulGandhi @Dr_MonikaSingh_ @garrywalia_ @sakshijoshii @Rashmi22302711 @AnumaVidisha @RuchiraC @maulinshah9 @Iam_MKharaud @Kumarjyoti49291 @GoIShadow @sudhirchaudhary @AMISHDEVGAN @anjanaomkashya @RubikaLiyaquat @chitraaum @RajatSharmaLive @AwasthiGyyan @PMNehru @RaGa4India @Raga3689 @Pawankhera @SupriyaShrinate
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Neha Singh Rathore
Neha Singh Rathore@nehafolksinger·
क्या अडानी सेठ का मुनाफ़ा इतना ज़रूरी है कि उसके लिए एक करोड़ पेड़ काट दिए जाएँ? क्या ये देश प्रधानमंत्री जी के दोस्तों की बपौती है? “एक पेड़ माँ के नाम” क्या सिर्फ़ एक स्कैम था?
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RAMASHRAY YADAV
RAMASHRAY YADAV@ramashrayy1981·
@khurpenchh हा हा हा, आबादी बढ़ने पर सांसद, विधायक बढ़ाएं जाएंगे, उसके लिए माननीय रोड जाम करते हुए हो हल्ला मचाएंगे।रोड अस्पताल, स्कूल, नौकरी बढ़ाने की क्या जरूरत। इन्हें ऐसे ही रहना है।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
मैं उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जी को चैलेंज देता हूँ कि आप आम आदमी बनकर प्रदेश के किसी भी बड़े अस्पताल में बिना सोर्स सिफारिश के पेशेंट को एडमिट करके दिखा दीजिए, मैं आपके पूरे दिन का डीज़ल और खाने पीने का खर्चा उठाने के लिए तैयार हूं।
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Prabhat Kumar Shukla
@UPSRTCHQ @CMOfficeUP महोदय सादर अवगत कराना है कि औरैया बस डिपो की बस(संख्या UP79T4811) में चालक परिचालक (राहुल) बिना बुकिंग के पार्सल रास्ते में बस बार बार रोक रोककर रखते हुए चलते हैं जिससे सवारियों को गंतव्य तक पहुंचने में विलम्ब होता है। कृपया उचित कार्यवाही करें।
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Prabhat Kumar Shukla
@UPPCLLKO @dvvnlhq @aksharmaBharat @CMOfficeUP महोदय सादर अवगत कराना है कि फर्रुखाबाद में लकूला फीडर के अंतर्गत गंगानगर कॉलोनी में पिछले 3 घंटे से विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है। कृपया समस्या का समाधान शीघ्र करें। धन्यवाद।
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Prabhat Kumar Shukla
बदायूं से फर्रुखाबाद के लिए कोई बस नहीं है।
Prabhat Kumar Shukla@pks_rn

@UPSRTCHQ @Armfkb @BDNUPSRTC @dayashankar4bjp महोदय सादर अवगत कराना है कि आज प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक फर्रुखाबाद बस अड्डे पर कोई बस उपलब्ध नहीं है। कृपया बस संचालन की उचित व्यवस्था करें साथ ही साथ लापरवाही करने वालों के लिए कार्यवाही भी करें। धन्यवाद

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