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रामफळगौडः
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रामफळगौडः
@ramaphala1
आपणी बोल्ली आपणी पिछाण। #संस्कृतम् #हरियाणवी। #मुद्गल #गौड़। #SaveHaryanvi
Katılım Temmuz 2022
342 Takip Edilen349 Takipçiler

It is actually a thing there
I was shocked too when I first got to know about it but they really consider fish cooked without onion-garlic as Satvik
Ik it is difficult for us to comprehend
v. Jatin@JatinTweets_
How can someone be this dumb ?? 😭
English

@saurabhsaffron @kojAnAti @Sanatan3011 भगवद्गीतायां कुत्रचित् प्रतिपादितमस्ति किम् यत् मत्स्यभक्षणं सात्त्विकाहारस्य श्रेण्यां परिगण्यते खलु? मया तु एतादृशं किमपि न पठितपूर्वम्। रामराम।
हिन्दी

@kojAnAti @Sanatan3011 As per bhagavad gita (since that's common fad in sentence forming), fish is sattvic, mutton is rajasic.
One can check BG to verify.
English

@avtansa @AndFragment In #Haryanvi along with 'कळावा', it is also called 'नाळ'.
Rakhi is called 'पौंहची/पूँहची' (also a type of jewelery) from 'पोंहचा/पूँह्चा' which means wrist.

@AndFragment In Delhi, Agra and surrounding areas, it is popularly known as Kalava. It is also known as Mauli मौली beyond that.
English
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•झळ (मिर्च के स्वाद को व आँख, नाक आदि पर इसके उड़ते प्रभाव को भी कहते हैँ)
•झळझळाट
•ततैँय्या (मिर्चों में सबसे तीखी मिर्च का स्वाद व प्रकार)
•मुँहजळनी
•तीक्खा, तीक्खी
•चिरमराट
•धाँस, धसक (सूखी पिसी मिर्च की गंध से या मिर्च के छौँक की गंध से उठने वाली खाँसी-छीँक)
•मिरच (मिर्च के स्वाद को मिर्च का ही विशेषण)
[हरयाणवी में मिर्च की प्रचलित शब्दावली]
हिन्दी
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@drsureshpant मेरै सिर पै बंटा टोकणी,
मेरै हाथ मैं "नेज्जू" डोल,
मैं पतळी सी कामणी
हिन्दी
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@tattvamasi01 @drsureshpant एक बहुत पुरानी जकड़ी है, जिसमें एक ब्राह्मण की नेज्जू कोई चुरा लेता है। नेज्जू बड़ी कठिनाई से बनवाई थी। उसके द्वारा चोर को नाना प्रकार के शाप देने का मनोरंजक प्रकरण है। अन्त में वह यह भी कहता है जो नेज्जू वापस लौटा देगा उसका एहसान मानूँगा।
लिखकर घालता हूँ।
हिन्दी

@drsureshpant हरयाणवी में ‘नेज्जु’ या ‘नेज्जू’। विशेषतः कुएँ से पानी खीँचने वाली रस्सी को नेज्जु कहते हैं।
उदा॰—
“नेज्जु-डोल अर बण्ट्टा लेके पण्यिहारण गयी।”
(रज्जु-डोल (रस्सी-बालटी) और बण्टा (धातु का मटका) लेकर पनिहारिन गई।)
एक भाषाविद थे—पिंड छुटा—जो कभी न मानते रज्जु का नेज्जु हुआ होगा।
हिन्दी

लेजू "रज्जु" से है। संस्कृत- रज्जु, मागधी प्राकृत- लेज्जु, हिंदी- लेजुर, लेजु। ब्रज में कुँवे से पानी खींचने वाली रस्सी भी लेजू है।
रहीम के एक बरवै में लेजू का मनोरम प्रयोग देखा जा सकता है:
"घरौ भरौ धरि सीस पै, बिरही देखि लजाइ।
कूक कंठ तें बाँधि के, लेजू लै ज्यों जाइ॥"
आपकी बोली में कोई उदाहरण?

हिन्दी

@patangaha @Neetha_Murali एतदपभ्रंशस्य वैशिष्ट्यमस्ति। सिद्धहेमशब्दानुशासनानुसारम् व्याख्या अत्र दृष्टव्या 👇
x.com/i/status/20451…
रामफळगौडः@ramaphala1
@Neetha_Murali स्यमोरस्योत्।। ४-३३१।। अपभ्रंशे अकारस्य स्यमोः परयोः उकारो भवति। दहमुहु भवण-भयंकरू तोसिअसंकरू णिग्गड रह-वरि चडिअउ। चअमुहु छंमुहु झाइ वि एक्काहिं लाइ विणावइ दइवे घड़ि अउ।। (दशमुखः भुवन भयंकरः तोषित शंकरः, निर्गत रथवरे आरूढः चतुर्मुखं षणमुखंध्यात्वा एकस्मिन् लगित्वा इवदैवेन घटितः)
MR

@Neetha_Murali तस्यां ‘दहमुहु, भयंकरू, संकरू, णिग्गउ, चडिअउ और घडिअउ’ शब्देषु प्रथमा-विभक्तेः एकवचने पुल्लिङ्गे 'उ' प्रत्ययस्य आदेशप्राप्तिः कृता अस्ति। एवमेव ‘चहुमुहु और छंमुहु’ पदेषु द्वितीया विभक्तेः एकवचने पुल्लिङ्गे 'उ' प्रत्ययस्य आदेशप्राप्तेः सद्भावः प्रदर्शितः अस्ति।
NE

@Neetha_Murali अपभ्रंशे अकारान्तशब्देषु प्रथमाविभक्तेः द्वितीयाविभक्तेश्चैकवचने 'सि' तथा 'अम्' प्रत्यययोः स्थाने 'उ' प्रत्ययस्य आदेशप्राप्तिः विकल्पेन भवति। इदं विधानम् अकारान्तपुल्लिङ्ग-अकारान्तनपुंसकलिङ्गयुक्तानां सर्वेषां शब्दानां कृते ज्ञातव्यम्। उदाहरणाय वृत्तौ या गाथा उद्धृता अस्ति +
NE
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स्वयं को हिन्दू मानने वाले लोगों के द्वारा धर्मद्रोही अम्बेडकर को नमन करने और बधाई देने की मूर्खता के आलोक में जगद्गुरु निग्रहाचार्य के दो वर्ष प्राचीन वक्तव्य का एक अंश पुनः प्रकाशित ! अम्बेडकर, पेरियार, फुले आदि का समर्थक कोई भी व्यक्ति हिन्दू नहीं !
#निग्रहाचार्य #Nigrahacharya #अंबेडकर_जयंती
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@tattvamasi01 @arumitash123 @dwigartaa @HimanshuJa37052 @Kulpreetyadav देहाती लड़की 1936 मेँ बनी पहली हरियाणवी फ़िल्म है। यह जानकारी शोधकर्ता रोशन वर्मा जी द्वारा बताई गई है।
सुनिए इस फ़िल्म का एक सबद "गळी तो चार्यूँ बंद पड़्यी, हरी सैं मिलण कैसे जाँय हे"
youtu.be/GneJNRFOvYo?si…

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राममन्दिर (?) अयोध्या में शास्त्रीय अग्नि की प्रतिष्ठा के स्थान पर कृत्रिम ज्योति की स्थापना अखण्ड ज्योति के नाम से की गयी। अनामम्लेच्छ की आसुरी ज्योति के विषय में जानने हेतु म्लेच्छराज S1, EP2 देखें।
क्यों अनामम्लेच्छ की ज्योति बेची नहीं जा सकती ?
म्लेच्छराज ― अनुभाग ०२ | स्वामी निग्रहाचार्य श्रीभागवतानंद गुरु | Mlechchha Raaj ― Episode 02 | Documentary | Dark Secrets | Swami Nigrahacharya Shri Bhagavatananda Guru
youtu.be/_XU37CAvPHQ

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@patangaha @Jigyasu_chhoro @RamaniAnirudh बार, वार - विलम्ब
बारसुध, वारी - विलम्बेन
क्याँतैं वारी आई? - किमर्थं विलम्बेनागता?
बारसुध हुयाँ आया।
कुबार - असमय, विलम्ब
(बटेऊ कुबार हुयाँ आया नै।)
(चाल्लण मैं कुबार कर दी, शीळै-शीळै चाल्लो हे।)
#Haryanvi
हिन्दी

नमस्ते @Jigyasu_chhoro जी,
"बार" शब्द(पहली बार, दूसरी बार) भारतीय है अथवा विदेशी? और यदि भारतीय है तो "दोबारा" (second time) शब्द विदेशी कैसे हुआ? कृपया समय मिलने पर यह समझाइए।
धन्यवाद!!
हिन्दी















