pintu

265 posts

pintu

pintu

@system19922

Katılım Kasım 2023
7 Takip Edilen3 Takipçiler
pintu
pintu@system19922·
@UPRVPAS @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt बिजली विभाग को बर्बाद कर रहे IAS babu. बिजली विभाग एक टेक्निकल सेक्टर है इसको टेक्निकल इंजीनियर ही चला सकता है। IAS babu लोगो की बस की बात नहीं ।
हिन्दी
0
0
1
21
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए। पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं। आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
हिन्दी
21
137
141
2.4K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की:15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” का ऐलान : सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन:उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावानी @ChairmanUppcl @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
9
85
89
1.4K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा। बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
हिन्दी
11
63
81
1.3K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद। मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
15
111
105
2.5K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है। ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा @myogiadityanath @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
18
114
108
2.8K
pintu retweetledi
Dr. Neha Das
Dr. Neha Das@neha_laldas·
फ्लो में आकर चंद्रशेखर रावण के मुंह से सच निकल गया: "मेरा 10-12 साल का तजुर्बा है कि सामान्य वर्ग का छात्र अपनी पढ़ाई में व्यस्त है, उसके पास समय ही नहीं भेदभाव करने का" फिर समझ आया कि "उड़ी बाबा, ये तो फंस गए, अब राजनीति कैसे चलेगी?" तो लगे बात घुमाने😂 x.com/mishra_4G/stat…
हिन्दी
218
5.9K
12.8K
190.3K
pintu retweetledi
Mohit Bharat
Mohit Bharat@MohitBharatYBP·
दिल्ली कोर्ट LIVE 🔥 वकीलों ने भी UGC के खिलाफ बगावत कर दी है। #Feb1BharatBand #1_फ़रवरी_भारत_बंद
हिन्दी
75
2.6K
5.2K
34.4K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा। माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
34
191
176
3.3K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आज आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन: लोकतांत्रिक तरीके से किए गये आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को समाप्त कराने की मांग:                 उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्देशानुसार लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन के दौरान ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों को निरस्त कराने के लिए आज आंदोलन के पहले दिन प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभियंता संघ के महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि उत्पीड़न के कार्रवाइयों के विरोध में प्रारंभ हुई आंदोलन के आज पहले दिन प्रदेश में जनपदों एवं परियोजनाओं पर काली पट्टी बांधकर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आगे बताया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री जी के समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभी तक मार्च 2023 के आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त नहीं लिया गया है जिसके कारण कई अभियंताओं के पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोक कर अभियन्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है इसके साथ-साथ लगभग 1 वर्ष से बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के दौरान भी ऊर्जा प्रबंधन ने तानाशाही रवैया बनाते हुए उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं को चिन्हित कर अकारण चार्ज शीट देकर अभियन्ताओं की प्रोन्नति तक रोकने की तैयारी हैं तथा परामर्श पत्र के नाम पर अभियन्ताओं के स्थायीकरण आदेश तक रोक दिए गए हैं, अभियन्ताओं को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया है उपरोक्त कार्रवाइयों से पूरे प्रदेश के अभियंताओं में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।                 अभियंता संघ के अध्यक्ष इं. संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियन्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए अभी तक न तो कोई वार्ता की गयी है और न ही कोई सार्थक कार्यवाही की गयी है जो प्रबंधन की हठधर्मिता रवैया को दर्शाता है।प्रबंधन के तानाशाही रवैये को देखते हुए संघ के पास आंदोलन के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं है। ऊर्जा प्रबंधन से पुनः अनुरोध किया गया है कि जल्द वार्ता के माध्यम से समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके।                       अभियंता संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन किया है कि उपरोक्त प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियों को वार्ता के माध्यम से समाप्त कराने की कृपा करें जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता आंदोलन की राह छोड़ उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने व “बिजली बिल राहत योजना 2025"  को सफल बनाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
12
83
93
1.4K
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है। आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है। संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है। संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है । संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं। निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
51
233
220
3.1K
pintu
pintu@system19922·
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt निजीकरण का फैसला वापस लो नहीं तो आंदोलन के लिए तैयार है बिजली कर्मी निजीकरण मुर्दाबाद सरकारी संपत्ति बेचना बंद करो
हिन्दी
0
1
1
141
pintu retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें। संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी। पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है। बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
87
290
247
3.6K
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आगरा में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का लिया गया संकल्प : विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक के समाचार के बाद निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का आह्वान निजीकरण के विरोध में आज आगरा में विद्युत अभियंताओं के चिन्तन मंथन शिविर के दौरान जब यह समाचार मिला कि आज ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने हेतु विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मीटिंग की है तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा और अभियंताओं ने एक स्वर से संकल्प लिया कि निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया जायेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबन्धन की होगी। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में आगरा में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ईस्टर्न इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन प्रशान्त चतुर्वेदी ने झारखण्ड में रांची और जमशेदपुर के फ्रेंचाइजीकरण के विरोध में किए गए संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये। आगरा में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने पर कि आज ऊर्जा मंत्री ने जल निगम के संगम फील्ड हॉस्टल में विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन से मीटिंग की है, तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
68
286
240
3.4K