
Radioactive☢️
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Radioactive☢️
@ImRadioactive0
•𝐊𝐫𝐢𝐬𝐡𝐧𝐚𝐡𝐨𝐥𝐢𝐜🪈❤️ || Immature Writer✍🏻 || No Hate to any1,Criticism is not personal.|| Nation First💗🤌🏻 ||FB 💯






असम के चाय के बगीचे से… एक व्यक्ति जिसका बचपन दरिद्रता में बीता, पर उसने पुरुषार्थ चुना। चाय की केतली, रेलवे प्लेटफॉर्म की खुरदरी जमीन और आते-जाते यात्रियों की सेवा के भाव से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री तक। यह यात्रा भारत के हर घर में बनती चाय के स्वाद की विविधता की ही तरह, प्रधानमंत्री को वैविध्य के साथ स्वीकार्य बनाती है। पश्चिम का मोदी, पूरब का बेटा बन कर, इन महिलाओं के लोकगीत सुनते हुए, कम से कम दस पोस्टों में उनके विचारों को रखते हुए, वीडियो में उनसे आत्मीय वार्तालाप करते हुए, केवल औपचारिकता नहीं निभा रहे, वह उनके परिजन हो चुके हैं। बेटा कैसा है, कहाँ पढ़ रहा है, स्पोर्ट्स खेलता है क्या? ऐसे प्रश्न कोई टीम तैयार नहीं करती, वह अपनेपन से उपजता है। लोकगीतों को वीडियो के माध्यम से हम तक पहुँचाना, कोई ब्रांडिंग नहीं है, बल्कि यह बताना है कि चाहे चाय बागान हो या धान के खेत, पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्खिन तक, भारत कार्य करते समय अपनी संस्कृतियों के प्रवाह में नए पुष्प अर्पित करता रहता है। और प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए महिलाओं ने असम की संस्कृति को स्वयं पर ओढ़ लिया है। लाल और धवल… लाल बलिदान का रंग है, अहोम साम्राज्य की वीरता, लचित बुरफुकान के दुस्साहस और जगतजननी माँ कामख्या का प्रतीक… उस पाँच मिनट के वीडियो में संगीत है, गीत है, सामयकिता है, संस्कृति है, संस्कार है। हम बैठे-बैठे प्रधानमंत्री के माध्यम से यह देख पाते हैं कि भगवान कृष्ण के राज्य और सोमनाथ के शिव से असम की शक्ति तक, भारत का हिन्दू एक है। कौन प्रधानमंत्री पूरब की ओर देखने भी जाता था? शेरवानी में पश्चिमी गुलाब खोंसे घूमने वाले, शौकीन पीएम की छवि याद कीजिए जिसमें अभिजात्यता के काँटे होते थे, आज पीएम मोदी ने कुर्ते की बटन के छिद्र में चाय की पत्ती लगाई है। इसीलिए, यह छवि बहुत कुछ कहती है! नमन है @narendramodi जी आपको!






























