
दोस्तों का दोस्त
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दोस्तों का दोस्त
@02dec87
we wre working for this mankind, open your heart for this world ,make it for all..



देखिये ऐसे होती है जनता के पैसों की बर्बादी, छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा डायल 112 के लिए 40 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 400 बोलेरो खड़े-खड़े कबाड़ हो रही है। डायल 112 बहुत अच्छी पहल थी और इसका रिजल्ट भी बहुत अच्छा है, एक साल में भाजपा सरकार ने इसके संचलान के लिए एजेंसी तक नियुक्त नहीं कर पाई है। ये गाड़ियाँ 15 महीनों में एक भी बार नहीं चली हैं और पड़े-पड़े कंडम हो रही हैं। रिपोटर्र ने बहुत अच्छी बात बोली है कि अगर डायल 112 के गाड़ी चलाने में कुछ समस्या आ रही है तो इसको महतारी एक्सप्रेस, एम्बुलेंस या फिर जिन थानों मे पेट्रोलिंग वाहन की कमी है वहाँ दिया जा सकता है। @vishnudsai @ChhattisgarhCMO @GovernorCG @vijaysharmacg @ArunSao3 @bhupeshbaghel @DrCharandas @INCChhattisgarh @TS_SinghDeo @DeepakBaijINC @ShrivasGouri @JayManikpuri2 @Deveshtiwari_ @AJAYDHRUV1995 @GandaKeshu @JitenNirnejak @GrShriwas @vishnukant_7 @HarrySahu288496 @RaghunathChand6 @Gurubhai750 @Ayaan9979217220 @HemantK70536084 @hemantk59584543 @MannuKumarPal @Abhi45694982187 @Bramh_Rakshas @GulshanSa3 @jatiyadav11 @AakashT86167805 @anoopmahobia @rpsinghraipur @rakesh1sarwan @SahuSheshram @Amitsahu4 @mitesh_sarwa @Ashishnetam750 @Indianpeople89 @lafadahaibaba @NoNameNoFace_7 @Roshank_kanwar @DrRakeshGuptaCG @tokhansahu_bjp @mukesh_keshi @AmitJogi @maheshmaitryINC @SAchhoti @pradeeprajak21 @hemantk_kumar @Rohan4Bastar



एक युवक पिछले एक साल से मकान के नामांतरण के लिए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के हाउसिंग बोर्ड कार्यालय का चक्कर काट रहा था, कार्यालय के कर्मचारियों नें उसकी फाइल गुमा दी एक साल तक युवक परेशान होते रहा और बार-बार गुहार लगाने के बावजूद अधिकारी बहाने बनाते रहे। परेशान होकर युवक बादाम लेकर ऑफिस पहुंचा और महिला अधिकारी के टेबल पर बादाम फेंकते हुए कहा कि बादाम खाइये और अपनी याददाश्त बढ़ाइये। इससे आपको मेरी फाइल ढूंढने में आसानी होगी। मुझे पता है इसके बाद भी विभाग और विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को थोड़ी भी शर्म नहीं आएगी। न जाने कितने आदमी लाचार और बेबस होकर इन सरकारी विभागों कार्यालयों की चक्कर काटते रहते हैं। @vishnudsai @ChhattisgarhCMO @BilaspurDist







बड़ी मछलियों को बचाकर छोटे कर्मचारियों को कैसे फंसाया जाता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण देखिये। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) में हुए फीस घोटाले के केस बिल्कुल यही हुआ है। फीस गबन के मामले में यूनिवर्सिटी बड़े अधिकारियों बचाकर एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सुनील कुमार प्रसाद को बलि का बकरा बनाया गया है और उस समय के तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव अंकित अरोरा बचाया जा रहा है। जांच के दौरान सुनील कुमार प्रसाद ने लिखित बयान में दावा किया कि वह शोधार्थियों से ली गई राशि तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव अंकित अरोरा को सौंप देता था। उसने कहा कि इसके बदले उसी दिन या अगले दिन रसीदें मिल जाती थीं। हालांकि वह अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। बता दें कि छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) भिलाई में पीएचडी शोधार्थियों से सब्मिशन के नाम पर 30-30 हजार रुपए लिए जाते थे लेकिन उन्हें जो रसीद दी जाती थी वो फर्जी होती थी। इसका खुलासा छात्रों की शिकायत के बाद हुआ था। नए कुलपति के पास जब छात्र शिकायत लेकर पहुंचे तो धीरे-धीरे कई छात्र सामने आए। इसको लेकर विश्वविद्यालय ने नेवई थाने में शिकायत की थी। प्रारंभिक जांच में 9 लाख 44 हजार 500 रुपए के गबन की पुष्टि हुई है, हालांकि गबन की राशि 50 लाख तक जा सकती है। क्या एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी का यूनिवर्सिटी के बड़े अधिकारियों के सहमति के बिना ऐसा गबन कर पाना संभव है? अगर उस कर्मचारी द्वारा ये गबन और फर्जीवाड़ा कर रहा था तो तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव अंकित अरोरा और यूनिवर्सिटी प्रशासन क्यों बेखबर रहा? फीस गबन करने वाले इस कर्मचारी पर उसे समय क्यों करवाई नहीं की गई? यह संगठित रूप से किया गया घोटाला है, जिसमें यूनिवर्सिटी के कई बड़े अधिकारी शामिल थे। सुनील कुमार प्रसाद तो बस मोहरा मात्र है। बता दें कि तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव अंकित अरोरा और दीप्ती वर्मा की नियुक्ति भी शासन की अनुमति के बिना नियम विरुद्ध की गई थी। पूर्व कुलसचिव डा. के. के. वर्मा की बेटी दीप्ति वर्मा अंकित अरोरा और दामाद की मूल पोस्टिंग इंजीनियरिंग कॉलेज लखनपुर अंबिकापुर में है जिन्हें बिना शासन की अनुमति के सीधे तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई में संलग्न कर दिया गया। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) पूर्व कुलपति के एम. के. वर्मा भी पूर्व कुलसचिव डा. के. के. वर्मा के रिस्तेदार हैं। मतलब सोचिये एक परिवार और रिस्तेदार मिलकर स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) को चला रहे थे। छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) के पूर्व कुलपति डॉ एम. के. वर्मा,पूर्व कुलसचिव डॉ. के. के. वर्मा तथा डॉ दीप्ति वर्मा को भ्रष्टाचार के मामले में 10 अक्टूबर 25 को दोषी करार करते हुए राज्य सरकार को तीनों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की अनुशंसा की है। @GovernorCG @vishnudsai @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO






DSP कल्पना वर्मा को एकतरफा दोष देना सही नही है। ताली एक हाथ से नही बजती, दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए। ये मामला 2021 में शुरु हुआ था।




हेलमेट नहीं लगाने के विषय में जनता को ज्ञान देते छत्तीसगढ़ के महान यातायात विद्वान गजेंद्र यादव जी। अब कुछ जलन खोर लोग बोलेंगे कि ये छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री हैं। अगर हेलमेट न लगाने के लिए रात 10 बजे से सुबह 7 बजे बीच आपका चालान काटा जाए तो पुलिस को मंत्री जी का वीडियो दिखाएँ। @vishnudsai @vijaysharmacg @OPChoudhary_Ind @bhupeshbaghel @TS_SinghDeo @DeepakBaijINC @DrCharandas @INCChhattisgarh @khurpenchh



छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) में पीएचडी शोधार्थियों के लाखों रुपये की जमा फीस को गबन करने का मामले सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से शोधार्थियों की फीस फर्जी रसीद के जरिए वसूली गई, लेकिन विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं की गई। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया है। जांच में यह पाया गया कि शोधार्थियों ने अपनी फीस का भुगतान तो किया, जिसके बदले उन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक दिखने वाली रसीदें भी दी गईं, लेकिन वह राशि कभी विश्वविद्यालय के मुख्य बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई। फर्जी रसीदों के माध्यम से पैसा बीच में ही गायब कर दिया गया। शोधार्थियों द्वारा दिखाई गई रसीदों का खातों और रजिस्टर से मिलान किया गया, तो फर्जीवाड़ा सामने आया। अब देखना ये है कि छात्रों से फीस लेकर उसे गबन करने वाले आरोपियों के खिलाफ सरकार क्या एक्शन लेती है? @GovernorCG @vishnudsai @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO

छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ( CSVTU ) में पीएचडी शोधार्थियों के लाखों रुपये की जमा फीस को गबन करने का मामले सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से शोधार्थियों की फीस फर्जी रसीद के जरिए वसूली गई, लेकिन विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं की गई। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया है। जांच में यह पाया गया कि शोधार्थियों ने अपनी फीस का भुगतान तो किया, जिसके बदले उन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक दिखने वाली रसीदें भी दी गईं, लेकिन वह राशि कभी विश्वविद्यालय के मुख्य बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई। फर्जी रसीदों के माध्यम से पैसा बीच में ही गायब कर दिया गया। शोधार्थियों द्वारा दिखाई गई रसीदों का खातों और रजिस्टर से मिलान किया गया, तो फर्जीवाड़ा सामने आया। अब देखना ये है कि छात्रों से फीस लेकर उसे गबन करने वाले आरोपियों के खिलाफ सरकार क्या एक्शन लेती है? @GovernorCG @vishnudsai @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO



जानकारी के मुताबिक रायपुर के हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं के घर से पुलिस को 37 लाख नगद, कई जमीनों के कागजात, अवैध हथियार, कारतूस, 70 तोला सोना और कई लग्जरी गाड़ियां जब्त किया है। मिली जानकारी के मुताबिक, तोमर बंधुओं ने अवैध धंघों और वसूली के बूते इतनी काली कमाई जमा कर रखी है, उसके बूते इतना विशाल कोठीनुमा मकान बनाया है कि, सर्चिग में जुटे दर्जनों पुलिसकर्मियों को पूरे मकान की तलाशी में 14 घंटे लग गए। मंगलवार की रात से शुरू हुआ तलाशी अभियान बुधवार की सुबह खत्म हुआ। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तोमर बंधुओं के घर से हथियार, प्रॉपर्टी से संबंधित बेशुमार दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनके अलावा भी कई अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद हुई हैं। बता दें कि, एक साल पहले रायपुर के हाइपर क्लब गोलीकांड के बाद पुलिस ने आरोपियों का सिर आधा मुंडवा कर जुलूस निकाला था। इस घटना में रोहित तोमर, विकास अग्रवाल, सारंग मांधान और अमित तनेजा गिरफ्तार हुए थे। जुलूस निकालने के दौरान उनके कपड़े भी फटे हुए थे। #ChhattisgarhNews #ChhattisgarhUpdate #RaipurNews





यहाँ अलग परिवारवाद चल रहा है। मामला छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU), भिलाई का है जहाँ पिछले दो वर्षों से नियमित कुलसचिव की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वर्तमान में अस्थायी कुलसचिव के रूप में पदस्थ अंकित अरोरा, मूल रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज लखनपुर, अंबिकापुर में सहायक प्राध्यापक हैं। हालांकि उन्हें सीधे विश्वविद्यालय में संलग्न कर कुलसचिव का प्रभार दिया गया। विश्वविद्यालय से जुड़े वरिष्ठ लोगों का कहना है कि यह पूरा मामला परिवारवाद और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। जांच और दस्तावेज बताते हैं कि अंकित अरोरा को बिना शासन की अनुमति के विश्वविद्यालय में संलग्न किया गया। यही नहीं, उन्हें ऐसे पद का प्रभार दिया गया, जिसके लिए विश्वविद्यालय के यूटीडी में पदस्थ प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर को ही नियुक्त किया जाना चाहिए। छात्र संगठनों और स्थानीय लोगों की शिकायत पर शासन ने इस पूरे मामले की जांच एक समिति से कराई। मार्च 2024 में जारी शासनादेश में अंकित अरोरा और दीप्ति वर्मा को मूल संस्थान में वापस भेजने के निर्देश दिए गए। लेकिन आज तक इन निर्देशों का पालन आज तक नहीं हुआ है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने भी पूर्व कुलपति डॉ. एम. के. वर्मा, पूर्व कुलसचिव डॉ. के. के. वर्मा और दीप्ति वर्मा को कॉलेज संबद्धता मामले में दोषी पाया है। आयोग ने शासन को कठोर कार्रवाई की अनुशंसा की है। #Chhattisgarh @GovernorCG @vishnudsai @ArunSao3 @ChhattisgarhCMO @bhupeshbaghel @TS_SinghDeo @INCChhattisgarh @DeepakBaijINC @DrCharandas


























