Devendra Pratap

525 posts

Devendra Pratap

Devendra Pratap

@davendra87

Katılım Aralık 2015
39 Takip Edilen55 Takipçiler
Devendra Pratap
Devendra Pratap@davendra87·
@UPRVPAS @myogiadityanath @UPPCLLKO @narendramodi @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt अत्यंत निराशजनक है अपनी नाकामियों का ठीकरा मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल पर फोड़ कर निलंबन करना न्यायोचित नहीं है मुख्य अभियंता पंकज अग्रवाल के निलंबन को शीघ्र ही हटा कर अपनी नाकामियों पर विचार करें और उन्हें दूर कर विभाग को सुव्यवस्थित रूप से काम करने की आवश्यकता है।
हिन्दी
0
0
0
6
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है। ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा @myogiadityanath @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
18
114
108
2.8K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा। माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
34
191
176
3.3K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
विद्युत अभियंताओं के उत्पीड़न के विरोध में आज आंदोलन के पहले दिन काली पट्टी बांध कर प्रदेश भर में अभियन्ताओं ने किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन: लोकतांत्रिक तरीके से किए गये आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को समाप्त कराने की मांग:                 उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्देशानुसार लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन के दौरान ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्यवाहियों को निरस्त कराने के लिए आज आंदोलन के पहले दिन प्रदेश भर के अभियन्ताओं ने काली पट्टी बांध कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभियंता संघ के महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि उत्पीड़न के कार्रवाइयों के विरोध में प्रारंभ हुई आंदोलन के आज पहले दिन प्रदेश में जनपदों एवं परियोजनाओं पर काली पट्टी बांधकर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आगे बताया कि 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री जी के समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभी तक मार्च 2023 के आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त नहीं लिया गया है जिसके कारण कई अभियंताओं के पदोन्नति व वेतन वृद्धि रोक कर अभियन्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है इसके साथ-साथ लगभग 1 वर्ष से बिजली के निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के दौरान भी ऊर्जा प्रबंधन ने तानाशाही रवैया बनाते हुए उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं को चिन्हित कर अकारण चार्ज शीट देकर अभियन्ताओं की प्रोन्नति तक रोकने की तैयारी हैं तथा परामर्श पत्र के नाम पर अभियन्ताओं के स्थायीकरण आदेश तक रोक दिए गए हैं, अभियन्ताओं को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया है उपरोक्त कार्रवाइयों से पूरे प्रदेश के अभियंताओं में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।                 अभियंता संघ के अध्यक्ष इं. संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियन्ताओं के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए अभी तक न तो कोई वार्ता की गयी है और न ही कोई सार्थक कार्यवाही की गयी है जो प्रबंधन की हठधर्मिता रवैया को दर्शाता है।प्रबंधन के तानाशाही रवैये को देखते हुए संघ के पास आंदोलन के अतिरिक्त कोई विकल्प शेष नहीं है। ऊर्जा प्रबंधन से पुनः अनुरोध किया गया है कि जल्द वार्ता के माध्यम से समस्त उत्पीड़न की कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए जिससे ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जा सके।                       अभियंता संघ ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन किया है कि उपरोक्त प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की समस्त कार्यवाहियों को वार्ता के माध्यम से समाप्त कराने की कृपा करें जिससे प्रदेश के विद्युत अभियंता आंदोलन की राह छोड़ उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने व “बिजली बिल राहत योजना 2025"  को सफल बनाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
12
83
93
1.4K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में दिनांक 20 नवंबर 2025 से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन प्रारंभ। माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उत्पीड़न की समस्त कार्रवाइयों को निरस्त कराने की कृपा करें। @UPPCLLKO @chairmanuppcl
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
7
107
104
1.9K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। @narendramodi @myogiadityanath @UPPCLLKO
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
21
105
82
686
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें। संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी। पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है। बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
87
290
247
3.6K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आगरा में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का लिया गया संकल्प : विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक के समाचार के बाद निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का आह्वान निजीकरण के विरोध में आज आगरा में विद्युत अभियंताओं के चिन्तन मंथन शिविर के दौरान जब यह समाचार मिला कि आज ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने हेतु विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मीटिंग की है तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा और अभियंताओं ने एक स्वर से संकल्प लिया कि निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया जायेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबन्धन की होगी। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में आगरा में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ईस्टर्न इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन प्रशान्त चतुर्वेदी ने झारखण्ड में रांची और जमशेदपुर के फ्रेंचाइजीकरण के विरोध में किए गए संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये। आगरा में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने पर कि आज ऊर्जा मंत्री ने जल निगम के संगम फील्ड हॉस्टल में विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन से मीटिंग की है, तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
68
286
240
3.4K
Devendra Pratap retweetledi
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है। डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए जारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता है कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है। संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की निजी घरानों के साथ मिली भगत है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है । डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर हैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पावर उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है। संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी। संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र में बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। आज मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @chairmanuppcl @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
हिन्दी
59
231
184
2.8K