




Manish Jagan Agrawal(मनीष जगन अग्रवाल)
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@manishjagan
राष्ट्रीय अध्यक्ष-समाजवादी पार्टी व्यापार सभा एवं प्रभारी गोवा राज्य Always with Only @yadavakhilesh Ji|Views Are Personal|RP's Are Not Endorsement







प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने देश की जनता से एक वर्ष तक सोना ना खरीदने का आह्वान किया है..क्या प्रधानमंत्री जी बताएंगे कि इस 1 वर्ष तक व्यापारियों के जीवन यापन खर्च पानी बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च कौन देगा..? क्या इसकी जिम्मेदारी बीजेपी की सरकारें उठाएंगी..? आपकी गलत नीतियों से पहले ही व्यापार..कामगार एवं व्यापारी वर्ग बर्बाद हो चुका है..बाजार में मंदी है और आय..रोजी रोटी के साधन धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं और ये आखिरी प्रहार आपने फिर से कर दिया है.. आपको ज्ञात होना चाहिए कि एक व्यापारी का व्यापार दूसरे अन्य व्यापारों और व्यापार की पूरी चैन से जुड़ा होता है..कहीं भी खटपट होगी तो पूरी व्यवस्था बिगड़ जाएगी..न सिर्फ दुकानदार प्रभावित होंगे बल्कि ग्राहक..खरीददार ..कारीगर..विक्रेता एवं इस व्यापार से जुड़े अन्य बारदाने के व्यापारी एवं कारीगर सभी प्रभावित होंगे..ये कोई छोटी बात नहीं है.. आपने तो एक पल में कह दिया..लेकिन क्या इसके दुष्परिणाम और आगा पीछा सोचा..? 2014 में आपको पिछली सरकार से एक भरी पूरी अर्थव्यवस्था सत्ता संभालने के दौरान मिली थी..लेकिन धीरे-धीरे आपने उस अर्थव्यवस्था का नोटबंदी एवं जीएसटी तथा लॉकडाउन जैसे अनियोजित..नासमझ निर्णयों से कबाड़ा कर दिया..खोखला कर दिया और अब पूरे देश की अर्थव्यवस्था ढहने की कगार पर है और इसके जिम्मेदार महोदय आप हैं.... हम समाजवादी व्यापार सभा के लोग व्यापारी बंधुओं से अपील करते हैं कि बीजेपी नामक इस संकट को अपने जीवन से हटाए बिना..बीजेपी से छुटकारा पाए बिना व्यापारी वर्ग का उद्धार नहीं होने वाला..अतः बीजेपी को सत्ता से हटाना ही हम सब का एकमात्र अंतिम लक्ष्य होना चाहिए..तभी व्यापार बचेगा..परिवार बचेगा..सम्मान बचेगा और भविष्य बचेगा.... बीजेपी हम सबको हिंदू मुसलमान और जातियों के नाम पर लड़ा रही है और सत्ता की मलाई खा रही है..बीजेपी के समस्त नेता भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त हैं..देश प्रदेश को बर्बाद कर रहे हैं.. बेईमानी से चुनाव जीतकर जनता के अधिकार छीन रहे हैं..अतः व्यापारी वर्ग जो समाज का एक प्रमुख वर्ग है इससे अपील है कि बीजेपी को हटाइए..अपना भविष्य..देश..संविधान..लोकतंत्र बचाइए.. मनीष जगन अग्रवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष - समाजवादी पार्टी व्यापार सभा



Read till the end: SpiceJet cancelled my Delhi to Srinagar flight (PNR: H8FKMY) today. It was at 11:15 am, and they informed me only at 9:20 am. I was taking my 60+ old parents to Kashmir for their anniversary. They travelled all the way from Rohtak, reached the airport on time, only to be told there’s no flight today. Their entire plan for the next 5 days is ruined. When I tried to rebook for today, fares were already higher. And the moment I clicked “pay,” the price jumped another 40%. So, I booked for tomorrow, but it cost way more than the SpiceJet tickets I paid for. SpiceJet says they’ll refund the cancelled flight but what about the extra money I had to pay? What about hotels refusing refunds for the lost day? What about the taxi costs and the stress my old parents had to go through? Just for my own curiosity, I tried cancelling the Indigo flight I booked for tomorrow. Guess what? They wanted more than ₹5,000 per ticket as cancellation fee, just 10 minutes after booking. All this in the name of “base fare” and “fuel surcharge.” Base fare they’ll recover anyway by selling the seat at a higher price to someone else. And fuel surcharge? Is fuel price fluctuating every single minute? Airlines and apps happily charge “convenience fees,” but when they ruin your plans, there’s no inconvenience fee for passengers. No cancellation fees for passengers. Just a cold “write mail to us.” You may get a voucher from their airline. The staff at the counter have no power, yet they’re the ones who face all the anger. The real decision-makers sit on annual packages worth crores, but don’t lift a finger when it comes to fixing anything real. FYI: At European airports, airlines are required to give a full refund and pay up to £600 to passengers when they cancel a flight. Even if it’s an Indian airline operating there, the same rule applies. These airlines pay compensation there, even for a flight delay. But what about Indian Janta? We’re not flying for free, we pay taxes on every single ticket we buy. GST, User development fees, airport charges and even for our security. Anyway, DGCA rules say 24 hours’ notice is required before cancelling. Why was this ignored? Staff claimed “technical fault” in the plane, but I doubt it. I want SpiceJet to share how many seats were actually booked for this flight. Was the flight only 30-40% full and cancelled for that reason? I didn’t see many passengers stranded there. These airlines keep sinking and government keeps negotiating. Aviation minister, where are you? Ministers fight for cabinet seats, they take one, enjoy the power and go, but ordinary people keep suffering because of government’s policies. At least one minister has to set an example. I want answers. And I want real compensation, not just vouchers or empty apologies. @RamMNK @DGCAIndia @flyspicejet

लिख कर ले लो, कोई और पार्टी BJP को हरा नहीं सकती। सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही BJP और नरेंद्र मोदी को हरा सकती है - और हम हराएंगे।


Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss. They need to understand this clearly - the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy. Put petty politics aside. This is not about one party or another. This is about 🇮🇳.




मध्य प्रदेश..गुजरात..उत्तराखंड..छत्तीसगढ़..गोवा..हरियाणा..जैसे राज्य जहां 2 पार्टी सिस्टम है यानी सीधी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच में है ऐसे कई राज्यों में पिछले दासियों पंद्रहों सालों से कांग्रेस कहीं सत्ता में नहीं है..ढलान के बजाय धड़ाम हो चुकी है.... दरअसल बीजेपी को चुनौती ही क्षेत्रीय दलों से मिली है..सपा ने ही 2024 में बीजेपी का बहुमत का रथ यूपी में रोका था अन्यथा कांग्रेस तो बीजेपी को बहुमत तश्तरी में सजाकर दे चुकी थी.... अपने कांग्रेसी बॉसेज को समझाइये कि INDIA गठबंधन का मान रखें और गठबंधन को कैसे सम्मान और समुचित हिस्सेदारी देते हैं ये बीजेपी से सीखे कांग्रेस.. @AadeshRawal भाई

देश के क्षेत्रीय दल ढलान पर हैं। अजीत दादा का निधन हो गया। शरद पवार अस्वस्थ है। इनेलो टूट गई। मायावती घर बैठी हैं। नीतीश कुमार रिटायरमेंट की तरफ़ है।नवीन पटनायक के पास कोई उत्तराधिकारी नहीं है।आज दीदी भी हार गई।लेफ्ट की कहीं सरकार नहीं बची।टीआरएस भी टूट गई।

ममता बनर्जी के बारे में कुछ तथ्यः क़रीब 29 साल पहले, 1997 में ममता बनर्जी ने मुकुल राॅय के साथ मिल कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बनाई। मुकुल बाद में भारतीय जनता पार्टी में चले गए। 1999 में ममता अपनी टीएमसी के साथ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार में शामिल हो गईं और रेल मंत्री बन गईं। 2001 की शुरुआत में जब आॅपरेशन वेस्ट एंड के ज़रिए रक्षा सौदों में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ तो ममता एनडीए की सरकार से अलग हो गईं। अगस्त 2001 में बीबीसी के एक इंटरव्यू में जब ममता से पूछा गया कि क्या उन की पार्टी के एनडीए में लौटने की कोई संभावना है तो उन्होंने जवाब दियाः हां, टीएमसी के घोषणापत्र के मुताबिक भाजपा हमारी ‘स्वाभाविक सहयोगी’ है। 2003 में ममता फिर एनडीए की सरकार में शामिल हो गई, मगर कई महीने बिना विभाग की मंत्री रहीं। 2003 में ममता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य के तत्कालीन संपादक तरुण विजय की कम्युनिस्ट आतंकवाद पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन समारोह में शिरकत की। तरुण विजय ने ‘बंगाल की दुर्गा’ कह कर उन का स्वागत किया। भाजपा के राज्यसभा सांसद बलबीर पुंज ने सदन में बोलते हुए ममता के लिए कहा कि ‘हमारी प्यारी ममता दी साक्षात दुर्गा हैं।’ पुंज का अभी पंद्रह दिन पहले निधन हुआ है। आरएसएस ने भी ममता को ‘बंगाल की दुर्गा’ बताया और वामपंथियों के ख़िलाफ़ उन की लड़ाई के पक्ष में ‘ठोस समर्थन’ जताया। ममता ने अपने एक भाषण में आरएसएस के मोहन भागवत, शेषाद्रि चारी और मदन दास देवी का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बहुत ज़्यादा नेताओं को तो नहीं जानती हूं, मगर उन में से कुछ से व्यक्तिगत तौर पर मिली हूं। आप लोग सच्चे देशभक्त हैं। मुझे मालूम है कि आप अपने देश से सच्चा प्यार करते हैं।’ 2012 में आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य ने ममता बनर्जी की सादगीपूर्ण जीवनशैली की तारीफ़ करते हुए लेख लिखा। कहा कि ‘ममता उन बिरले राजनीतिकों में हैं, जिन्होंने राजनीति का इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए नहीं किया। काश कि देश को ऐसे ज़्यादा-से-ज़्यादा राजनीतिक मिलें।’ 2019 में ममता ने एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ बहुत-से आंदोलन किए। मगर जब सीएए पर संसद में मतदान हुआ तो टीएमसी के आठ सांसद रहस्यमयी तरीके से ग़ैरहाज़िर रहे और इस वज़ह से विधेयक पारित हो गया। ममता ने इन सांसदों को माफ़ी बख़्श दी। उन के खि़लाफऋ कोई कार्रवाई नहीं की। 27 जनवरी 2020 को जब भाजपा सरकार के तत्कालीन वित राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने भाषण में ‘गोली मारो सालों को’ के नारे लगवाए तो टीएमसी के नेता शेख आलम ने सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर मुर्शिदाबाद में गोलियां चला दीं। 2017 में भाजपा में चले गए मुकुल राॅय 2021 के विधानसभा चुनावों के पहले टीएमसी में वापस आ गए और ममता ने उन्हें खुशी-खुशी शामिल कर लिया। चुनावों के दौरान मुकुल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बीजेपी इज इक्वल टु टीएमसी। जुलाई 2022 में टीएमसी ने उपराष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा का साथ देने से इनकार कर दिया। बाद में टीएमसी के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। एब्सटेन किया। जगदीप धनखड़ जीत गए। ममता ने उन धनखड़ की मदद की, जिन्होंने बंगाल का राज्यपाल रहते हुए उन का जीना हराम कर रखा था। अभी सितंबर 2022 में ममता ने आरएसएस की दिल खोल कर प्रशंसा की। कहा कि संघ में बहुत-से बड़े अच्छे लोग हैं। संघ अच्छा संगठन है। @MamataOfficial @AITMC_Official @BJP4India @narendramodi @AmitShah @INCIndia @RahulGandhi @kharge @priyankagandhi


