मरीज के साथी

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@marijkesathi

एक ही लक्ष्य प्रत्येक बीमार को उचित इलाज मिले ~ @drvnmishraa

India Katılım Nisan 2022
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मीठा खाने का शौक़ आपको मधुमेह का शिकार बना सकता है बार-बार पेशाब, ज्यादा प्यास, वजन बढ़ना और धुंधलापन — ये सब डायबिटीज के संकेत हैं अपनी सेहत को प्राथमिकता दें — मीठे की जगह फल और पौष्टिक आहार चुनें स्वस्थ जीवन #Diabetes #SweetDanger #DiabetesAwareness #MarijkeSathi @DrVNMishraa
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Dr Anuj Kumar@dranuj_k

पूरे उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों के लिए भीषण Heat Wave की चेतावनी जारी की गई है। निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें: 1) नियमित अंतराल पर पानी, छांछ, ओ.आर.एस. का घोल या घर में बने पेय जैसे लस्सी, नीबू पानी, आम का पन्ना इत्यादि का सेवन करें। बाज़ार में बिकने वाले कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें। 2) चेहरे और शरीर पर सनस्क्रीम लगा कर बाहर निकलें। कई सनस्क्रीम उपलब्ध हैं। किसी भी अच्छी कंपनी का जिसका SPF 30 से अधिक है वो प्रभावशाली होता है। ये heat stroke से तो बचाव नहीं करता लेकिन आपकी त्वचा को सुरक्षित रखता है । 3) यथा संभव दोपहर 12 से दोपहर 3 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें। 4) धूप में निकलते समय अपना सिर ढक कर रखें। कपड़े, टोपी अथवा छतरी का उपयोग करें। 5) धूप में निकलने के पहले तरल पदार्थ का सेवन करें। पानी हमेशा साथ रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। 6) सूती, ढीले एवं आरामदायक कपड़े पहनें। सिंथेटिक एवं गहरे रंग के वस्त्र पहनने से बचें। 7) जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें। 8) अत्यधिक गर्मी होने की स्थिति में ठंडे पानी से शरीर को पोछे या कई बार स्नान करें। लेकिन धूप तथा गर्म हवाओं के संपर्क के तुरंत बाद काफ़ी ठंडे पानी के स्नान से बचें । 9) सुपाच्य भोजन करें। 10) वसायुक्त भोजन तथा अल्कोहल, चाय, काफी जैसे पेय पदार्थ का उपयोग कम से कम करें। 11) ये एक मिथक है कि जेब में प्याज़ रखने से लू नहीं लगती या शरीर पर प्याज़ रगड़ने से heat stroke ठीक हो जाता है। इनका कोई medical evidence नहीं है । आयुर्वेद/लोक मान्यताओं में प्याज़ को “cooling food” माना जाता है एवं इसमें पानी, कुछ antioxidants और sulfur compounds होते हैं। इसलिए इसे खाने से शरीर को हल्की ठंडक और hydration में मदद मिल सकती है लेकिन ये लू से बचाव करता है इसका कोई प्रमाण नहीं है । Heat stroke के लक्षण हैं:- चक्कर आना, तेज बुखार, पसीना बंद होना, confusion  या बेहोशी यह एक Emergency है तथा ऐसी परिस्थिति मे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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NHM UP
NHM UP@nhm_up·
🌿सही पोषण न केवल शरीर को ऊर्जा देता है, बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी मदद करता है। आयरन से भरपूर आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और एनीमिया जैसी समस्या से बचाव करें। स्वस्थ खानपान अपनाएं और एक सशक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में भागीदार बनें।💪 Anemia Prevention | Healthy Diet | Iron Intake #HealthyIndia #AnemiaFreeIndia #NHMUP
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NHM UP
NHM UP@nhm_up·
🌸 मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और सही देखभाल अपनाना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वच्छ उत्पादों का उपयोग, हाथों की सफाई और सही दिनचर्या से इस समय को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सकता है। 🌸 Menstrual Hygiene | Period Care | Women Health #MenstrualHygiene #HygieneAwareness #NHMUP
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खांसी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है हर खांसी साधारण नहीं होती—यह टीबी का लक्षण भी हो सकती है।समय पर जांच और इलाज ही बचाव का सही रास्ता है जन-जन का रखें ध्यान, टीबी-मुक्त भारत अभियान को बनाएं सफल #TBMuktBharat #Marijkesathi @DrVNMishraa @AdvSharma_Mohit @ptneerajpathak
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Ministry of Health
Ministry of Health@MoHFW_INDIA·
खांसी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। हर खांसी साधारण नहीं होती—यह टीबी का लक्षण भी हो सकती है।समय पर जांच और इलाज ही बचाव का सही रास्ता है। जन-जन का रखें ध्यान, टीबी-मुक्त भारत अभियान को बनाएं सफल। #TBMuktBharat
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Dr Anuj Kumar
Dr Anuj Kumar@dranuj_k·
Health Sector में पेड प्रमोशन:
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Dr Anuj Kumar@dranuj_k

हार्ट अटैक की बुनियादी जानकारी प्राथमिक लक्षण है सीने में दर्द होना। यह एक pressure, heaviness या tightness जैसे भी महसूस हो सकता है। यह दर्द पेट के ऊपर की तरफ जाता है कभी बायें हाथ या कंधे की तरफ जाता है कई बार जबड़े में या दांत में भी दर्द हो सकता है। सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना। कुछ लोगो को गैस होने की फीलिंग आती है। हार्ट अटैक आने पर क्या करें? सबसे पहले मदद के लिए एम्बुलेंस को कॉल करें या आपके पास अपना साधन है जिससे आप अस्पताल पहुँच सकते हैं तो उसे तैयार करने को कहें। नज़दीक में जो भी व्यक्ति या मित्र है उसे भी तुरंत आने को कहें। जब तक गाड़ी तैयार होगी या एम्बुलेंस आएगा तब तक प्राथमिक तौर पर Aspirin की गोली मरीज़ को दें और चबाने को कहें। Aspirin रक्त की धमनियों में Clotting को रोकती है। मरीज़ को तब तक उचित जगह बैठने या लेटने को कहें जहाँ उन्हें आराम हो। अगर घर में sorbitrate की 5mg की टेबलेट हो तो उसे जीभ के नीचे रखनी है। अगर मरीज़ होश में नहीं है तो कुछ भी पिलाने की कोशिश ना करें। मरीज़ अगर साँस नहीं ले रहा, पल्स नहीं मिल रहा वैसी परिस्तिथि में तुरंत CPR शुरू करें। एम्बुलेंस आते ही या गाड़ी तैयार होते ही अस्पताल के लिए निकल जायें। अगर नज़दीकी अस्पताल का नंबर है तो उन्हें रास्ते से ही सूचित कर दें कि आप ऐसे किसी मरीज़ को ले कर अस्पताल पहुँच रहे हैं ताकि वो भी तैयार रहें। #heart #health #healthcare

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Dr. B L Bairwa MS, FACS
Dr. B L Bairwa MS, FACS@Lap_surgeon·
हमसफ़र!❤️ लेकिन यह सिस्टम की नाकामी है, मरीजों की मजबूरी है। बहुत दुखद है यह देखना।
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सावधान रहे, सुरक्षित रहे ।।
NCIB Headquarters@NCIBHQ

इन चेहरों को गौर से देखिए.... क्योंकि किसी के नाम के आगे “डॉक्टर” लग जाने भर से वो इंसानियत का रखवाला नहीं बन जाता। कानपुर में सामने आया ये मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की उस कड़वी सच्चाई का आईना है जहाँ मजबूरी का खुलेआम सौदा किया जाता है। आरोप है कि ये पति-पत्नी मिलकर किडनी का कारोबार चला रहे थे। गरीब और मजबूर लोगों से महज 6 लाख रुपये में किडनी खरीदते, और फिर उसी को 80 लाख तक में बेच देते। इलाज के नाम पर चल रहा ये धंधा दरअसल इंसान के शरीर को सामान बना देने जैसा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब बिना किसी वैध डॉक्यूमेंटेशन के किया जा रहा था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार का एक MBA छात्र, जो शायद बेहतर भविष्य के सपनों के साथ जी रहा था, अपनी मजबूरी में किडनी देने को तैयार हो गया। लेकिन उसके साथ जो हुआ, वो और भी ज्यादा दर्दनाक है – उसे तय की गई रकम 5 लाख रुपये भी पूरी नहीं दी गई। यानी उसने अपना एक किडनी खो दिया, और बदले में उसे मिला सिर्फ धोखा। यह घटना सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है जहाँ मजबूर लोगों की पीड़ा को व्यापार बना दिया जाता है। हालांकि, इस मामले में यूपी पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह सोचने वाली बात है कि आखिर ऐसे लोग कब तक “इलाज” के नाम पर इंसानियत का सौदा करते रहेंगे।

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The Brain Yogi | Dr Vikaas
The Brain Yogi | Dr Vikaas@thebrainyogi·
तो ये वीडियो ज़रूर देखें… अंत तक देखें। जो हम रोज़ खा रहे हैं, वो सच में कितना पोषण देता है—ये जानना ज़रूरी है। एक छोटी सी जानकारी, पूरी ज़िंदगी बदल सकती है। 👉 अभी देखें | समझें | और हर अपने तक SHARE करें 🙏 #HealthyHabits #HealthTips
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Aditi Pandey
Aditi Pandey@aditi9870·
Don’t ignore❌ your health. Get tested and catch cancer early.🚨
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Dr. B L Bairwa MS, FACS
Dr. B L Bairwa MS, FACS@Lap_surgeon·
Piles 🩸( Haemorrhoids) आजकल बहुत ही सामान्य बीमारी हो गई है। इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूँ।👇 Haemorrhoids जिसे आमतौर पर Piles (मश्शे) के रूप में जाना जाता है, गुदा और निचले मलाशय में सूजी हुई नसें होती हैं। प्रकार: 1. बाहरी piles : गुदा के आस-पास की त्वचा के नीचे स्थित, ये खुजली, बेचैनी, सूजन और रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। 2. आंतरिक piles: मलाशय के अंदर पाए जाने वाले, ये आम तौर पर मल त्याग के दौरान दर्द रहित रक्तस्राव का कारण बनते हैं और आगे की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे दर्द और जलन हो सकती है। कारण: - मल त्याग के दौरान तनाव - लंबे समय तक बैठे रहना, खासकर शौचालय पर - लगातार दस्त या क़ब्ज़ी होना - मोटापा - गर्भावस्था - कम फाइबर वाला आहार और कम पानी पीना - नियमित रूप से भारी वजन उठाना रोकथाम के उपाय: Piles की रोकथाम में मुख्य रूप से मल को नरम बनाए रखना शामिल है ताकि मल त्याग आसान हो। यहाँ कुछ प्रभावी रणनीतियाँ दी गई हैं: 👇 - अत्यधिक तीखा और मसाले युक्त ख़ान-पान कम करे। -फाइबर से भरपूर आहार लें। -अधिक फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज खाने में शामिल करें । - हाइड्रेटेड रहें: दिन भर में खूब पानी पिएँ । - फाइबर सप्लीमेंट्स पर विचार करें । - तनाव से बचें । - मल त्याग की इच्छा पर तुरंत प्रतिक्रिया दें, रोके नहीं। -सक्रिय रहें, नियमित व्यायाम कब्ज को रोकने में मदद करता है। - शौचालय पर समय सीमित करें, अनआवश्यक ज़ोर ना लगाये। #Health #piles
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ashokdanoda
ashokdanoda@ashokdanoda·
🎯 कैंसर इलाज में नया मोड़ ? Histotripsy बिना सर्जरी, बिना कीमो, बिना रेडिएशन सिर्फ साउंड वेव्स से ट्यूमर को तोड़ने की तकनीक ! फोकस्ड अल्ट्रासाउंड वेव्स जो कैंसर सेल्स के अंदर की गैसों को तेज़ी से फैलाती और सिकोड़ती हैं, जिससे वे कुछ ही मिनटों में मैकेनिकल तरीके से खत्म हो जाती हैं, जबकि स्वस्थ टिशू को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। FDA ने 2023 में लिवर ट्यूमर के लिए मंज़ूरी भी दी UK , UAE और हांगकांग में भी शुरुआता हो चुकी है । मरीज कुछ घंटों में घर - साइड इफेक्ट भी कम क्या यह इलाज का भविष्य है या अभी और रिसर्च होना चाहिए ?
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Ministry of Health
Ministry of Health@MoHFW_INDIA·
#TBMuktBharat | लगातार दो हफ़्ते तक खांसी आना और वज़न में कमी होना ये टीबी के संकेत हो सकते हैं। लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें, आज ही जाँच कराएं। टीबी का इलाज संभव है, स्वस्थ भविष्य के लिए आज ही कदम उठाएं। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-11-6666 पर कॉल करें। #EndTB #TBHaregaDeshJeetega
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Dr Anuj Kumar
Dr Anuj Kumar@dranuj_k·
क्या वेंटीलेटर सिर्फ़ पैसा बनाने की मशीन है❓❓❓ अक्सर आपने लोगों को ये कहते हुए सुना होगा की वेंटीलेटर पर जाने वाला वाले मरीज़ ठीक नहीं होते या अस्पताल सिर्फ़ पैसा लूटने के लिए मरीज़ को वेंटीलेटर पर रखते हैं। आइये जाने आज बिलकुल सामान्य भाषा में की वेंटीलेटर है क्या। सामान्य अवस्था में शरीर में साँस लेने और छोड़ने का काम फ़ेफ़रा करता है। लेकिन अगर शरीर की अवस्था ऐसी है कि 1) मरीज़ फेफरे की किसी चोट या बीमारी के कारण ख़ुद से साँस नहीं ले सकता । 2) इसका डर है कि मरीज़ की स्थिति कभी भी ख़राब हो सकती है जिसकी वजह से उसकी साँस लेने की क्षमता प्रभावित हो जाएगी। 3) मरीज़ के मस्तिष्क में ऐसी चोट है कि मरीज़ को पूरी तरह बेहोश रखा जाए ताकि मस्तिष्क पर दवाब ना पड़े तो ऐसे परिस्थिति में मरीज़ को वेंटीलेटर पर रखा जाता है। ⭕️ और इन परिस्थितियों में वेंटीलेटर का मुख्य काम है की जब तक मरीज़ ख़ुद से साँस लेने के लायक़ ना हो जाये तब तक एक कृत्रिम फ़ेफरे की तरह काम करना। ⭕️ 🫁 ✅ वेंटीलेटर फ़ेफरे की जगह मरीज़ को साँस देता है ताकि सुचारू रूप से मरीज़ को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहे। वेंटीलेटर में कई mode होते हैं जो मरीज़ के स्थिति के अनुसार बदले जा सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर मरीज़ का फ़ेफ़रा पूरी तरह ख़राब है तो उसमें mode अलग होगा और अगर फ़ेफ़रा 50% ख़राब है तो उसका mode अलग होगा| इसे आप ऐसे भी समझें की अगर मरीज़ का फ़ेफ़रा पूरी तरह से ख़राब है तो वेंटीलेटर पूरी तरह से फ़ेफरे का काम कर सकता है । और फ़ेफ़रा अगर आधा ही काम कर रहा तो फेफरे का बचा हुआ आधा काम वेंटीलेटर कर सकता है ताकि फ़ेफरे पर कम दवाब पड़े जिससे की वो जल्द ठीक हो जाए। जैसे जैसे मरीज़ के साँस लेने की क्षमता ठीक होती है, वैसे वैसे वेंटिलेटर के mode में बदलाव किया जाता है। और जब मरीज़ ख़ुद से अच्छे तरीक़े से साँस लेने लगता है तो उसे वेंटीलेटर से हटाया जाता है। चूँकि वेंटीलेटर पर रखे जाने वाले मरीज़ की स्थिति काफ़ी गंभीर रहती और और वो बेहोश रहते हैं या उन्हें बेहोश रखा जाता है इसीलिए जानकारी के अभाव में लोगों में यह संशय रहता है कि उन्हें धोखे में रखा जा रहा है। तो हमेशा ध्यान रखें कि अगर मरीज़ की साँस लेने की क्षमता किसी भी बीमारी/चोट से प्रभावित हो सकती है तो उन्हें वेंटीलेटर पर रखने की ज़रूरत पड़ सकती है।
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