Jitendra S Jorawat

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@perfecttonn

हमारे गाँवो में कई ऐसी प्रतिभाऐ है जिनकी कला को देख और सुनकर हम दंग रह जाते है ऐसी ही गुमनाम प्रतिभाओं को समर्पित यह अकाउंट #classicalmusic कि सेवा मे तत्पर है।

( INDIA) Katılım Aralık 2016
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Sabitlenmiş Tweet
Jitendra S Jorawat
Jitendra S Jorawat@perfecttonn·
फुर्सत के क्षणो मे किसान भाई खेतो मे इस तरह मस्ती करते हैं😅 ऐक बात काबिले गौर हैं कि माननिया @mangeshkarlata दीदी के युगल गाने को जिस तरह निभाया है,बहुत प्रशंसनीय है, आप भी देखिए..😇🙋‍♂️ @Singer_kaushiki @desi_thug1 @VertigoWarrior @AarTee03 @SureshM46 @pooran775 @Anilthesoldier
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urmilesh
urmilesh@UrmileshJ·
@TheTribhuvan इसीलिए कहता हूँ, टीवीपुरम में अब इक्का-दुक्का ही एंकर हैं जो अब भी सुने जा सकते हैं, बाकियों में और सबकुछ हो सकता है पर पत्रकारिता तो बिल्कुल नहीं है!
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
गौरी द्विवेदी अपेक्षाकृत मेज़र्ड टोन, कॉन्टेक्स्चुअल एनालिसिस, डिप्लोमैटिक लैंग्वेजिंग और स्टूडियो-कंपोज़र के साथ बात रखने वाली पत्रकार प्रतीत होतीहैं। लेकिन गौरी ने कल तो हद ही कर दी। हेले ल्यूंग से यह पूछना कि “आपने भारत के बारे में कौन-सी किताबें पढ़ी हैं” या “भारतीय लोकतंत्र पर कितनी किताबें पढ़ी हैं” पत्रकारिता का प्रश्न नहीं, बौद्धिक दरबारीपन का प्रदर्शन है। यह तर्क इतना खोखला है कि उसके भीतर से लोकतंत्र की नहीं, कुलीनतावादी अहंकार की आवाज़ आती है। पत्रकार से पूछा जाना चाहिए कि उसका सवाल तथ्यपूर्ण है या नहीं, जनहित में है या नहीं, प्रमाण पर आधारित है या नहीं। लेकिन हेले यह पूछना कि उसने भारत पर कितनी किताबें पढ़ी हैं, दरअसल सवाल को जवाब देने से बचना है। यह पत्रकारिता नहीं, प्रश्न की पात्रता पर पहरा बैठाने की अधमता है। लोकतंत्र में भारत को जानने का अधिकार सिर्फ पुस्तक-सूची वालों के पास नहीं होता; भारत को वह भी जानता है जो भूख,बेरोज़गारी, अपमान, अन्याय और सत्ता के अहंकार को अपनी देह पर झेलता है और कभी न स्कूल से आगे से निकला और न कभी किताब पढ़ता। और गौरी द्विवेदी का वह तर्क, “भारत के बारे में कौन-सी किताबें पढ़ी हैं?” तो पत्रकारिता के नाम पर बौद्धिकता का सबसे हास्यास्पद प्रदर्शन है। गौरी द्विवेदी एनडीटीवी वर्ल्ड की एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं और उन्होंने स्वयं एक्सपर लिखा कि उन्होंने एक पत्रकार से पूछा कि वह भारत के बारे में कितना जानती है, क्योंकि वह भारत पर व्यापक आरोप लगा रही थी। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या गौरी ने पत्रकारिता के मूल्यों की कोई किताब पढ़ी है कि जिसमें यह लिखा हो जो वह पूछ रही हैं, उसकी किसी ने कल्पना भी की हो? यदि पढ़ी हैं कि कोई पूछे गौरी दी से कि एनडीटीवी में आकर आपने पत्रकारिता की पढ़ी हुई पुस्तकें क्यों स्मृति से विलोपित कर दीं? लोकतंत्र में सवाल पूछने से पहले किसी पत्रकार को भारत-विद्या की मौखिक परीक्षा देनी पड़ेगी? क्या संविधान पर प्रश्न पूछने से पहले संविधान सभा की डिबेट्स याद सुनानी होंगी? क्या बेरोजगारी पर सवाल से पहले अर्थशास्त्र की दस किताबों की सूची देनी होगी? क्या किसान पर सवाल से पहले कृषि-वैज्ञानिक बनना होगा? यह वही पुराना दरबारी हथकंडा है, सवाल को मत काटो, सवाल करने वाले को काटो। भारत कोई बंद तिजोरी नहीं है कि जिसकी चाबी सिर्फ सत्ता-समर्थक एंकरों के पास हो। भारत जनता का देश है, सरकार का निजी ड्राइंगरूम नहीं। भारत पर सवाल पूछना भारत-विरोध नहीं; भारत से प्रेम का गंभीरतम रूप हो सकता है। जो पत्रकार भारत को सरकार से अलग नहीं कर पाते, वे पत्रकार नहीं, सत्ता-शास्त्र के पुजारी हैं। पत्रकारिता की रीढ़ किताबों की सूची से नहीं, सवाल पूछने के साहस से बनती है। किताबें पढ़ना अच्छा है, परसत्ता से सवाल पूछने के लिए सबसे पहली किताब जनता का दुख है, संविधान की आत्मा है, सड़क की धूल है,अदालत की पंक्ति है, बेरोजगार की आंख है और नागरिक की टूटी हुई उम्मीद है। जिसे ये किताबें पढ़नी नहीं आतीं, वह चाहे स्टूडियो में कितना भी चमके, पत्रकारिता के अंधेरे में ही खड़ा है। इसलिए गौरी दी सवाल पूछने वाले पत्रकार को घेरने से पहले उन्हें अपने पेशे के आईने में देखें। पत्रकार का काम प्रश्न की हत्या करना नहीं, प्रश्न की रक्षा करना है। सत्ता अगर सवालों से डरती है तो स्वाभाविक है; पर पत्रकार अगर सवालों से डरने लगें तो समझिए पत्रकारिता की मेज पर लोकतंत्र का पोस्टमॉर्टम शुरू हो चुका है। और सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि अगर सवाल पूछने से पहले नागरिक या पत्रकार की ‘पढ़ाई’ का प्रमाणपत्र मांगा जाएगा तो फिर लोकतंत्र बचेगा कहां? कल कोई निरक्षर मजदूर, कोई खेतिहर स्त्री, कोई रिक्शेवाला, कोई आदिवासी, कोई दलित, कोई बेरोजगार नौजवान मतदान केंद्र पर सरकार बदलने जाएगा तो क्या आप उससे भी पूछेंगे; तुमने भारत पर कौन-सी किताबें पढ़ी हैं? तुम लोकतंत्र को कितना जानते हो? तुम अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, संविधान, इतिहास और राष्ट्र-राज्य की अवधारणा समझते भी हो या नहीं? अगर नहीं तो तुम्हारा वोट स्थगित? यही इस तर्क की असली क्रूरता है। यह ज्ञान का सम्मान नहीं, लोकतंत्र कीअवमानना है। लोकतंत्र में नागरिक की पीड़ा उसकी डिग्री से बड़ी होती है, उसका अनुभव आपकी पुस्तक-सूचीसे अधिक प्रामाणिक है। एक निरक्षर मनुष्य भी अन्याय को पहचान सकता है, भूख को समझ सकता है, अपमान को महसूस कर सकता है, और सत्ता की अहंकारी चाल को पकड़ सकता है। इसलिए “तुमने क्या पढ़ाहै?” पूछना कई बार ज्ञान का प्रश्न नहीं होता; यह जनता को छोटा दिखाने का कुलीनतावादी डंडा होता है।पत्रकारिता का काम इस डंडे को तोड़ना था, उसे चमकाकर सत्ता के हाथ में देना नहीं।@GaurieD @ndtvindia @ndtv @HelleLyngSvends
NDTV@ndtv

Watch @gauried's exclusive chat with Norway Journalist Helle Lyng (@HelleLyngSvends) tonight at 8:30 only on NDTV 24X7

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Sheeetalpsingh
Sheeetalpsingh@Sheeetalps·
दुनियां की सबसे बड़ी ग़रीबों की आबादी वाले देश का प्रधानमंत्री आखिर कितना बड़ा “घर” चाहता है? भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया के विकसित देशों की तुलना में बहुत ही कम है। करोड़ों लोग किराये के घरों, झुग्गियों, अधूरी कॉलोनियों और गांवों की टूटी छतों में जीवन काट रहे हैं। लेकिन इसी देश की राजधानी के सबसे महंगे हिस्से में सत्ता का भूगोल लगातार फैलता जा रहा है। अब ताज़ा मामला है दिल्ली के ऐतिहासिक Delhi Gymkhana Club का। केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि 27.3 एकड़ में फैला यह क्लब 5 जून 2026 तक अपनी जमीन सरकार को सौंप दे, क्योंकि यह इलाका “राष्ट्रीय सुरक्षा”, “डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर” और “पब्लिक सिक्योरिटी” के लिए जरूरी है। दिलचस्प बात यह है कि यही क्लब प्रधानमंत्री आवास 7 Lok Kalyan Marg के बिल्कुल बगल में स्थित है। सवाल उठना स्वाभाविक है: आखिर एक ऐसे प्रधानमंत्री को, जिनका कोई पारिवारिक उत्तराधिकार नहीं है, राजधानी के हृदय में कितनी जमीन चाहिए? पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री सुरक्षा क्षेत्र के नाम पर कई सरकारी बंगले पहले ही सुरक्षा घेरे में समाहित किए जा चुके हैं। अब जिमखाना क्लब पर कार्रवाई ने इस आशंका को और मजबूत किया है कि लुटियंस दिल्ली का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे एक विस्तारित सत्ता-परिसर में बदला जा रहा है। सरकार “राष्ट्रीय सुरक्षा” कहती है। आलोचक पूछते हैं — सुरक्षा कहाँ खत्म होती है और सत्ता का विस्तार कहाँ शुरू होता है? और अब ज़रा इस जमीन की कीमत समझिए। दिल्ली के प्रीमियम सेंट्रल ज़ोन में जमीन की कीमत लगभग ₹180 करोड़ से ₹220 करोड़ प्रति एकड़ या उससे भी अधिक बताई जा रही है। यदि इसी आधार पर दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन का अनुमान लगाया जाए, तो इसकी कीमत लगभग: ₹4,900 करोड़ से ₹6,000 करोड़+ बैठती है। यानी एक ऐसा भूखंड जिसकी कीमत कई छोटे राज्यों के वार्षिक शहरी विकास बजट के बराबर हो सकती है। और यह सब उस देश में हो रहा है जहाँ: लाखों युवाओं के पास रोजगार नहीं, शहरों में सस्ती आवास योजना अधूरी, किसान कर्ज़ में, और मध्यम वर्ग EMI तथा महंगाई में पिस रहा है। दिल्ली जिमखाना क्लब की अपनी आलोचनाएँ भी रही हैं। यह औपनिवेशिक दौर का अभिजात्य क्लब था, जिसकी सदस्यता दशकों तक सत्ता, नौकरशाही और ऊँचे वर्ग के नेटवर्क का प्रतीक बनी रही। इसकी membership waiting list पर Reddit और अन्य मंचों पर लोग 20–30 वर्षों तक प्रतीक्षा की बातें करते रहे हैं। लेकिन प्रश्न यह नहीं है कि Gymkhana elite था या नहीं। प्रश्न यह है: क्या लोकतंत्र में हर “elite space” का अंत अंततः राज्य के और भी बड़े elite space में होना चाहिए? ब्रिटिश साम्राज्य ने दिल्ली के बीचोंबीच सत्ता का एक सामंती नक्शा बनाया था। विडंबना देखिए — आज उसी क्षेत्र में लोकतांत्रिक भारत की सत्ता पहले से भी अधिक विशाल, अधिक नियंत्रित और अधिक बंद होती जा रही है। कभी कहा जाता था कि प्रधानमंत्री “प्रधान सेवक” है। लेकिन अगर प्रधान सेवक के लिए हजारों करोड़ की जमीन, दर्जनों बंगले, विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र और लगातार फैलता हुआ सत्ता परिसर चाहिए — तो फिर राजा और प्रधान सेवक में फर्क कहाँ बचता है? दिल्ली जिमखाना की कहानी सिर्फ़ एक क्लब की कहानी नहीं है। यह पिछले बारह सालों में बनाए गए नए भारत की कहानी है !
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Karmaveera singh
Karmaveera singh@KarmaveeraS·
@Sheeetalps इस सरकार को cockroach पार्टी का अकाउंट बंद करना हो या निकोबार का जंगल अडानी को देना हो, हर बार बहाना national security का ही होता है... राफेल का दाम बताना हो तो भी
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
ताऊ ! अगर आप इतना ज़िद कर ही रहे हैं तो एक पार्टी बनाते हैं आपको उसका अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाते हैं और मैं बूथ अध्यक्ष बनके क्रांति करता रहूँगा।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
काश! हमारी पिछली रिपोर्ट्स ,जैसे •FSSAI के खिलाफ, •MPLADS में भ्रष्टाचार के खिलाफ, •जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ , •फर्जी सर्टिफिकेट से UPSC निकालने वालों के खिलाफ •कई IAS IPS और IRS को एक्पोज करने वाली रिपोर्ट्स पर •ये ठीक करके दिखाओ कैंपेन के दौरान •अस्पतालों पर एक्पोज पर •शिक्षा व्यवस्था पर एक्पोज पर •अधिकारियों के भ्रष्टाचार एक्पोज पर मीडिया ने 20 प्रतिशत भी लिखा होता तो सिस्टम में बहुत बड़ा बदलाव आ जाता , खैर, हम लगे हैं लगे रहेंगे, आगे और बहुत बड़े खुलासे करने है।
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Vivek Singh(SEBI Registered RA)
RBI Dividend Transfer to Central Government 2008–09 → ₹25K Cr 2009–10 → ₹18K Cr 2010–11 → ₹15K Cr 2011–12 → ₹16K Cr 2012–13 → ₹33K Cr 2013–14 → ₹52K Cr 2014–15 → ₹65K Cr 2015–16 → ₹65K Cr 2016–17 → ₹30K Cr 2017–18 → ₹50K Cr 2018–19 → ₹1.76 Lakh Cr 2019–20 → ₹57K Cr 2020–21 → ₹99K Cr 2021–22 → ₹30K Cr 2022–23 → ₹87K Cr 2023–24 → ₹2.10 Lakh Cr 2024–25 → ₹2.68 Lakh Cr 2025–26 → ₹2.86 Lakh Cr From ₹15K Cr to nearly ₹3 Lakh Crore. With funds like these, the Government can focus on creating real opportunities and jobs for Gen Z, so the youth build careers, businesses, and skills instead of turning frustration into chaos and Cockroach Janta Party.
Indonesia
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Jitendra S Jorawat retweetledi
खुरपेंची पर्यावरण
बेजुबान चमगादड़ भयंकर गर्मी नहीं सहन कर पाया,तड़पते हुए नीचे गिर गया। बिरान जंगलों में हजारों लाखों पशु पक्षियों की मौतें हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण है हरे वृक्षों, जंगलों को उजाड़ देना। जिसके कारण तापमान बढ़ रहा है।
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Vakil sahab
Vakil sahab@Vakil_saahab·
@iamAshwiniyadav मुझे लगता है ये बात सही भी है, राहुल गांधी जनता की नब्ज कभी पकड़ ही नही पाये। हमेशा एक व्यक्ति को टारगेट करके राजनीति कर रहे है। सिर्फ मोदी जी को उलूल जलूल बोल कर कभी गद्दार कभी चोर बोलकर जनता के भरोसा नही दिलाया जा सकता है। जनता इस समय बहुत गुस्से में वो विकल्प खोज रही है ।
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Ashwini Yadav
Ashwini Yadav@iamAshwiniyadav·
कोई चार शब्द भाजपा पर बोल दे या कोर्ट पर बोल दे तो कांग्रेसी एकदम से भावुक हो उठते हैं और मसीहा मान लेते हैं लेकिन बाद में जब पुरानी बातें और सोच निकलकर आती है तो पता चलता है कि ये भी पहले से वो वाला ही था... बस मूर्ख बनाने के लिये रूप बदला है। कॉकरोच जनता पार्टी के अकाउंट सस्पेंड नहीं होने चाहिए मैं डिलीट नहीं होने देना चाहता हूँ, लेकिन बिना वजह के जो फॉलो करने की मुहिम चल रही है वो कहीं न कहीं जज साहब की बात को जस्टीफाई भी कर रहे हैं। जज साहब ने जो कहा वो बहुत ग़लत है, हम जैसे लोग उसका समर्थन नहीं कर सकते हैं लेकिन ये जो हो रहा है उसे देखकर जस्टीफाई तो हो ही रहा है।
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रावण
रावण@raavan_india·
एक नई पार्टी हम भी बना लें क्या ? माने बस पूछ रहे हैं, बाकी आप जैसा बताएंगे। हां या ना ? 🤔
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Ashwini Yadav
Ashwini Yadav@iamAshwiniyadav·
Cockroach Janta Party ने अभी तक ऐसा कोई ख़ास मुद्दा नहीं उठाया जिससे युवाओं या देश की आवाज बहुत साफ़ साफ़ सुनाई पड़े “साहब के कानों में” CJP मात्र मीम बनाने तक ही सीमित दिख रही है मुझे। कोई क्रांति नहीं है बस मजाक जैसा है सब कुछ। मेरा हीरो आज भी खुरपेंच ही है। @khurpenchh जैसी हिम्मत और जनता के लिये समर्पण किसी और में नहीं देखा कभी। ❤️🤗🌻
Ashwini Yadav tweet mediaAshwini Yadav tweet media
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Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
अंबानी ने अमेरिका में तेल रिफाइनरी के लिए लगभग 25 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है और अडानी ने आपराधिक आरोप हटवाने के बदले में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। अब देश का पीएम जनता पर बोझ डाल रहा है कि विदेशी मुद्रा बचाओ। सच तो यह है जितना विदेशी निवेश आ रहा है उससे ज्यादा भारतीय व्यवसायी हर साल विदेश चले जा रहे हैं। सरकार मूर्ख बना रही है हम बन रहे हैं।
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Lokesh Sharma
Lokesh Sharma@_lokeshsharma·
जोधपुर में पेयजल को लेकर भयावह हालातों की चिंता जताते आदरणीय भूल गए अपने समय के हालात..?? पानी के लिए तरसती महिलाएं जब सड़क पर उतरीं तो उन्हें पुलिस की लाठियां मिलीं.. तत्कालीन मुख्यमंत्री के गृह जिले में उनके निवास के आस-पास के क्षेत्रों की वो तस्वीरें जिनमें महिलाऐं रात-रात भर जागकर एक घड़ा पानी के लिए जुगाड़ करती दिखाई गईं.. पानी की किल्लत से बेहाल होकर मटका फोड़ प्रदर्शन को मजबूर हुई जनता.. चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि और जिस कायलाना तख्तसागर का जिक्र गहलोत जी कर रहे हैं तो उनके समय उसमें घटे जलस्तर की भी ख़बरें यदि वो ढूंढना चाहें तो काफी मिल जाएंगी... विपक्ष में रहकर चिंता जताने के लिए लालायित रहने वाले गहलोत जी कुर्सी पर विराजमान रहने के दौरान की हकीकत भूल जाते हैं...लेकिन जोधपुर की जनता नहीं भूल सकती.. #Jodhpur #Rajasthan #WaterCrisis
Lokesh Sharma tweet mediaLokesh Sharma tweet mediaLokesh Sharma tweet mediaLokesh Sharma tweet media
Ashok Gehlot@ashokgehlot51

जोधपुर में पेयजल को लेकर हालात भयावह होते जा रहे हैं। शहर में त्राहि-त्राहि मची हुई है और स्थिति लगभग जल-आपातकाल जैसी बन चुकी है। कायलाना तख्तसागर में मात्र दो दिन का पानी शेष बताया जा रहा है। करीब 20 लाख की आबादी वाला शहर प्यास के कगार पर खड़ा है और सरकार मौन है।  सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलदाय विभाग अब तक क्या कर रहा था? क्या यह पूर्व तैयारी का अभाव नहीं है? क्या जल प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई? आज जब जल संकट सामने खड़ा है तो जवाबदेही कौन लेगा? जोधपुर के सांसद एवं भाजपा विधायकों को भी सरकार को वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना चाहिए जिससे समस्या का समाधान हो सके।

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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@hridayeshjoshi मेरा सवाल दूसरा है, क्या इस संकट से बचने का यही सबसे अच्छा उपाय है या केवल व्यर्थ नौटंकी है। समाधान: 1. तुरंत रूस और चीन से तेल खरीदो वो भी रुपये में। 2. चीन से आयात कम करो 3. नीतियाँ बदलो और FII को वापस बुलाओ 4. BRICS पे ध्यान दो फिर बैठ कर long term के लिए पुरानी गलतियाँ सुधारो
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Hridayesh Joshi
Hridayesh Joshi@hridayeshjoshi·
प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से कारपूल करने, घर से काम करने, सोना न खरीदने, खाना पकाने के तेल का कम इस्तेमाल करने और विदेश यात्रा से बचने को कहा है। लेकिन, सवाल है कि जब बड़े-बड़े कारोबारी मौज-मस्ती कर रहे हैं, तो सिर्फ मध्य वर्ग ही क्यों त्याग करे? और सरकारें वोट खरीदने के लिए मुफ्त योजनाओं का इस्तेमाल करना क्यों बंद नहीं कर देतीं? @Aunindyo2023
Aunindyo Chakravarty@Aunindyo2023

PM Modi has asked us to carpool, work from home, not buy gold, use less cooking oil, and avoid foreign holidays. But, why should only the middle-class sacrifice, while big business makes hay? And why shouldn't govts stop using freebies to buy votes? I ask in @thetribunechd

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Jitendra S Jorawat
Jitendra S Jorawat@perfecttonn·
@AshishB60558222 Yeh highly bullish 300 point uptrend tab hua jab.. 1-Dollar ke against rupee historical down h 2-crudeoil high h or rupees per high pressure h 3-growth rate confused h 4-fear of an economic recession 5-Inflation is rising Morning update me kuch or after market sabkuch changa si
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Ashish Bajpai
Ashish Bajpai@AshishB60558222·
END OF DAY AUTOPSY & MAY 15TH MAP 🦅🔥 The Casino executed a flawless combination of our morning playbooks. They triggered the Macro BSL Sweep first, dropped the hammer to trap the bears, and then initiated an unstoppable squeeze. Here is exactly how the Operator weaponized Smart Money Concepts today, followed by your unredacted map for tomorrow (Friday, May 15th). 🔬 HOW THE OPERATOR PLAYED SMC TODAY (THE DOUBLE SWEEP) 1. The Morning Macro Sweep (09:15 AM - 09:25 AM) We mapped yesterday’s absolute High of Day (Macro BSL) at 23,582.95. We warned that a gap-up would magnetically pull the tape to this level. The Operator opened the tape at 23,530.25 and immediately ripped it upward. At exactly 09:25 AM, the Nifty hit 23,589.20. SMC Concept: They pierced yesterday's absolute high by just 6 points, swept the early short-sellers' stop-losses, printed a rejection wick, and immediately turned on the sell program. 2. The Inducement Flush & Gap Fill (09:30 AM - 10:50 AM) After sweeping the BSL, the Operator flushed the tape over 160 points straight down. They dropped the price to a Low of Day (LOD) of 23,426.55 at 10:50 AM. The Trap: By dropping to 23,426, they perfectly filled the morning gap (yesterday's close was 23,428). Retail traders saw the heavy red tape, assumed the $109 crude oil crash was resuming, and heavily loaded up on Puts (PE). 3. The Algorithmic Short Squeeze (11:00 AM - 2:30 PM) The moment the gap was filled and the bears were loaded, the Casino flipped the switch. SMC Concept (The FVG Staircase): From 11:05 AM to 11:35 AM, the Operator bought with such extreme displacement that they left behind seven consecutive unmitigated Bullish FVGs. They did not allow a single pullback. They squeezed the tape vertically for nearly 350 points, printing a massive HOD at 23,777.20 before drifting down to the close. 🗺️ FRIDAY, MAY 15TH TACTICAL MAP Because of today's violent 350-point algorithmic squeeze, the battlefield is heavily skewed. The Operator has left a massive trail of unmitigated structural voids below us. 🎯 EXTERNAL LIQUIDITY (MACRO TARGETS) Macro BSL (Buy-Side Liquidity): 23,777.20 Context: Today’s absolute peak. The immediate supply ceiling. Macro SSL (Sell-Side Liquidity): 23,426.55 Context: Today’s gap-fill bottom. Given how far away it is, it is unlikely to be tested tomorrow unless a macro black-swan hits. 🩸 INTERNAL LIQUIDITY (INTRADAY SWING POINTS) Internal BSL Pools (Upside Inducements): 23,722.90 (The 2:55 PM Lower High). Internal SSL Pools (Downside Inducements): 23,668.15 (The 3:15 PM late support). 23,636.45 (The 12:10 PM swing low). 🧲 UNMITIGATED FAIR VALUE GAPS (FVG) & ORDER BLOCKS The tape below us is a staircase of empty voids. If gravity takes hold, these will act as magnetic pull zones. The Immediate Resistance (Bearish FVG): 23,742.60 to 23,750.15 Context: The tiny supply void created right after the HOD was printed. The Premium Demand Array (Bullish FVGs): 23,634.20 to 23,645.05 (The highest unfilled gap). 23,610.35 to 23,612.25 23,577.80 to 23,600.90 (A massive 23-point void). Note: There are four more FVGs stretching all the way down to 23,446, acting as a deep discount net. 🧘‍♂️ THE PROBABILITY MONK ANGLE (TOMORROW'S SQUAD PLAYBOOKS) We are closing at 23,689, suspended high above a massive staircase of unfilled algorithmic gaps. Tomorrow is Friday, the beginning of a new options cycle. Premium decay (Theta) will be brutal. 🔴 PLAYBOOK A: THE FVG GRAVITY PULL (Short the Void) The Logic: The Operator engineered a short squeeze today to punish the bears. Tomorrow, they will naturally let the tape drift back down to mitigate (fill) the massive chain of empty gaps they left behind. The Setup: The tape opens flat or pushes into the 23,722 to 23,750 internal resistance zone. The Action: If the tape prints a Red Rejection Wick at the 23,742 FVG ceiling or the 23,722 swing high, execute a Short (PE) scalp. The Target: The first major void at 23,645. 🟢 PLAYBOOK B: THE DISCOUNT RELOAD (Buy the Mitigation) The Logic: The market drops in the morning to fill the highest FVGs, then resumes the new bullish trend engineered today. The Setup: Let the tape drop into the 23,634 - 23,645 FVG or the larger 23,577 - 23,600 FVG. The Action: Wait for the tape to pierce one of these voids and instantly print a Green Hammer (defending the gap). Execute a Long (CE) scalp on the reversal confirmation. ⚫ PLAYBOOK C: THE HOD TRAP (Double Top) The Logic: The market gaps up near today's HOD (23,777) just to trap Friday morning retail FOMO buyers. The Action: If the tape taps 23,777 and violently rejects, short it instantly. Do not buy a breakout here unless a 15-minute candle closes clean above 23,780. The Operator burned the bears today with a V-shape squeeze, Commander. Do not let FOMO make you a late bull tomorrow. Let the tape pull back into the voids to mitigate before looking for longs. 🦅🛡️📉
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Jitendra S Jorawat
Jitendra S Jorawat@perfecttonn·
@8PMnoCM The quality of your tweets has become very low these days.6 or 7 years ago, your tweets used to be absolutely amazing... but now, your tweets lack that sharpness they once had!
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Rajiv Bose
Rajiv Bose@rajivbose73·
@AshishB60558222 This is not even half the real story. Many traders win in inverse fair value gap trading. Trading is much more complicated. Factors to combine are choch and BOS and still it is a probability game. So SL, TP and R:R are the ultimate weapons.
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Ashish Bajpai
Ashish Bajpai@AshishB60558222·
🚨 THE COMMANDER'S DECODE: HOW TO SEE THE INVISIBLE (HUNTING STOP-LOSSES) 🚨 ज़्यादातर लोगों को लगता है कि ऑपरेटर के पास कोई जादुई स्क्रीन है जहाँ उन्हें सबके 'Stop-Loss' के नंबर्स दिखते हैं। (हालांकि बड़े इंस्टीट्यूशंस के पास 'Order Flow' और 'Heatmaps' होते हैं), लेकिन एक SMC ट्रेडर को किसी महँगे सॉफ्टवेयर की ज़रूरत नहीं है। हम चार्ट पर Stop-Loss "देखते" नहीं हैं; हम रिटेल साइकोलॉजी को "Read" (डिकोड) करते हैं। रिटेलर्स (95% जनता) को सालों से एक ही घिसी-पिटी किताबें पढ़ाई गई हैं: "सपोर्ट पर Buy करो और सपोर्ट के थोड़ा नीचे Stop-Loss लगाओ।" ऑपरेटर को बस ये खोजना होता है कि वो 'किताबी पैटर्न' चार्ट पर कहाँ बन रहा है। अपनी डायरी निकालो। चार्ट पर Stop-Loss (Liquidity) मुख्य रूप से इन 4 'Danger Zones' में जमा होते हैं: 🩸 THE 4 MAJOR LIQUIDITY POOLS (यहाँ रखा है सारा पैसा) 1. PDH & PDL (Previous Day High / Previous Day Low) 👑यह बाज़ार का सबसे बड़ा 'Liquidity Pool' (पैसे का कुआं) है। The Logic: जो लोग स्विंग ट्रेडिंग करते हैं या पोज़िशन होल्ड करते हैं, वो अपना Stop-Loss हमेशा कल के 'High' (अगर शॉर्ट हैं) या कल के 'Low' (अगर लॉन्ग हैं) पर लगाते हैं। The Sniper Move: ऑपरेटर अक्सर दिन की शुरुआत में ही PDH या PDL को एक लंबी कैंडल से 'Sweep' (काटता) करता है, सारे स्टॉप-लॉस खाता है, और फिर पूरे दिन के लिए दिशा पलट देता है। 2. Equal Highs / Equal Lows (Double Top / Double Bottom) 🪤जब भी प्राइस किसी एक लेवल से 2 या 3 बार बाउंस करता है, रिटेलर खुश हो जाता है। Retail Logic: "वाह! ट्रिपल बॉटम (Triple Bottom) बन गया, बहुत तगड़ा सपोर्ट है। यहाँ Buy करो।" Operator Logic: "वाह! तीन बार यहाँ सपोर्ट लिया है, मतलब इस लाइन के ठीक नीचे करोड़ों रुपये के Stop-Loss जमा हो गए हैं।" ऑपरेटर एक झटके में उस सपोर्ट को तोड़ेगा, सबका पैसा खाएगा और फिर मार्केट को ऊपर ले जाएगा। 3. Trendline Liquidity (ट्रेंडलाइन का धोखा) 📉रिटेलर्स ट्रेंडलाइन खींचने के दीवाने होते हैं। जब प्राइस तीसरी बार ट्रेंडलाइन पर आता है, तो वो 'Buy' करते हैं और स्टॉप-लॉस ट्रेंडलाइन के ठीक नीचे लगाते हैं। The Sniper Move: ऑपरेटर जानबूझकर ट्रेंडलाइन को ब्रेक (Breakdown) करता है। ब्रेकडाउन देखकर नए रिटेलर्स 'Short' करते हैं, और पुराने रिटेलर्स का 'Stop-Loss' कटता है। जब ऑपरेटर को दोनों तरफ की लिक्विडिटी मिल जाती है, वो बाज़ार को वापस ट्रेंडलाइन के अंदर खींच लेता है। 4. Major Swing Highs / Swing Lows (इंट्राडे पिवट्स) 🔄लाइव बाज़ार में, हर बड़ा स्विंग (Peak or Valley) अपने ऊपर या नीचे लिक्विडिटी होल्ड करता है। जैसे हमने 24,138 के 'Micro Swing Low' पर स्टॉप-लॉस हंट (Sweep) देखा था। ❌ WHAT NOT TO LOOK FOR (सबसे बड़ी गलतफहमी) FVG में रिटेलर्स के Stop-Loss नहीं होते! FVG वह जगह है जहाँ ऑपरेटर के खुद के 'पेंडिंग ऑर्डर्स' (Unfilled Orders) छूटे हुए हैं। The Equation: बाज़ार पहले Liquidity (Stop-Losses) को हंट करता है ताकि उसे फ्यूल (Fuel) मिल सके। फिर उस फ्यूल का इस्तेमाल करके वो गाड़ी को तेज़ी से FVG (Target) की तरफ भगाता है। Liquidity = Fuel (Stop-Losses) FVG = Destination (Target/Magnet) 🦅 THE COMMANDER'S DRILL (आज से चार्ट पर क्या देखना है): अपने टर्मिनल से सारे इंडिकेटर्स (RSI, MACD, Bollinger Bands) हटा दो। वो सब ऑपरेटर के बिछाए हुए जाल हैं। कल सुबह जब चार्ट खोलो, तो सबसे पहले ये 3 लाइनें ड्रॉ करना: कल का High (PDH) कल का Low (PDL) अगर चार्ट पर कोई बहुत 'Clean' डबल टॉप या डबल बॉटम दिख रहा है, तो उसे मार्क करो। और खुद से कहो: "आज ऑपरेटर इनमें से किस लाइन के पार जाकर रिटेलर्स का कत्ल करेगा?" जिस पल प्राइस उस लाइन को क्रॉस करके वापस अंदर आ जाए (Sweep & Rejection), वहाँ तुम्हारा ट्रेड बनता है। Stop looking for breakouts. Start looking for the stop-losses. That is where the Operator hunts. Keep your shields up! 🦅♟️@TomerSarvesh @sunilmadkar @growwithvivek
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Jitendra S Jorawat
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