Rahul Bharti

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@rahul5568

आजाद समाज पार्टी(अयोध्या मण्डल अध्यक्ष)

Uttar Pradesh, India Katılım Ocak 2015
129 Takip Edilen221 Takipçiler
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
ग्रामीण मानकों के अनुसार स्थापित गैस एजेंसियों वाले क्षेत्रों के नगरीय/कस्बाई क्षेत्रों में परिवर्तित हो जाने के बावजूद पुरानी व्यवस्था लागू रहने से उपभोक्ताओं को हो रही समस्याओं के संबंध में माननीय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री @HardeepSPuri जी को पत्र लिखा। @mygovindia @PetroleumMin
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
राज सिंह का यह बयान ‘अगर सीबीआई नहीं आती, तो मेरा एनकाउंटर हो जाता’ मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की एनकाउंटर नीति की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। जब किसी व्यक्ति का बिना जांच के एनकाउंटर कर दिया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र की विश्वसनीयता का है। आज उत्तर प्रदेश में कानून नहीं, बल्कि “पहले गोली, बाद में जांच” की मानसिकता को बढ़ावा दिया गया है। बुलडोजर और एनकाउंटर को न्याय का विकल्प बनाकर संविधान और न्यायपालिका दोनों को कमजोर किया गया है। इसीलिए उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर पिछले 8 वर्षों में हुए सभी एनकाउंटरों और बुलडोजर की कार्रवाइयों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘विशेष आयोग’ का गठन किया जाएगा। #ASP_K_Mission2027
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
माननीय न्यायालय द्वारा बार-बार अपने आदेशों और व्याख्याओं के माध्यम से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। यह बेहद चिंताजनक और दुर्भावनापूर्ण है। दिनांक 11 मई को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में “सार्वजनिक दृष्टि” की शर्त लगाकर जातिसूचक गाली को अपराध की परिभाषा से बाहर किया गया। वहीं, कुछ महीनों पूर्व दिसंबर 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह कहा कि फोन पर 'जातिसूचक' गाली-गलौज किए जाने पर SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते, जो कि न्याय की मूल भावना के खिलाफ है। मेरा सवाल है माननीय न्यायालय से- क्या अब दलितों का अपमान “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय होगा? क्या चारदीवारी के भीतर या फोन पर किया गया जातीय अपमान अपराध नहीं माना जाएगा? ऐसे फैसले यह संकेत देते हैं कि न्यायिक व्याख्या के जरिए इस सशक्त कानून के प्रभाव को सीमित किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में और अधिक कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए ऐसे फैसलों पर सवाल उठाना भी उतना ही आवश्यक है।हम इस संबंध में शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
पेपर लीक की गंभीर और अक्षम्य घटना के कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई 2026 को आयोजित NEET (UG) 2026 परीक्षा को रद्द करने का निर्णय न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खुले रूप से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह याद दिलाना आवश्यक है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। वर्ष 2024 में भी NEET परीक्षा के दौरान पेपर लीक की घटना हुई थी। ऐसी दोहराव वाली घटनाएँ परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सफल परीक्षा आयोजित करना भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए अपने-आप में एक बड़ी परीक्षा है।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
प्रतीक यादव जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दें।
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Dr. Mohammad Aqib
Dr. Mohammad Aqib@DrMAqib·
नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता को जबतक ऑनलाइन झटपट कनेक्शन प्रक्रिया में संशोधन करके स्मार्ट मीटर या जनरल मीटर का ऑप्शन नहीं देंगे तब तक सुधार की संभावना नहीं है।
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर मेरे द्वारा 27 मार्च को सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाई गई थी। इसके उपरांत, लोकसभा में मेरे द्वारा पूछे गए प्रश्न पर 2 अप्रैल को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री @mlkhattar जी ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड लागू नहीं किया जा सकता है तथा प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, बल्कि स्वैच्छिक हैं। इस संबंध में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके बावजूद, केंद्र के निर्देशों को दरकिनार करते हुए उत्तर प्रदेश में सम्मानित जनता को गुमराह कर, भय का माहौल बनाकर तथा पुलिस की मौजूदगी में जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। जब जनता इस अन्यायपूर्ण कृत्य का विरोध करती है, तो उस पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। मेरा सवाल है कि मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, प्रदेश की सम्मानित जनता इसे किसी डील की मजबूरी क्यों करार दे रही है? इससे सरकार की विश्वसनीयता और इकबाल पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यदि सम्मानित जनता पर लगाए गए ये फर्जी मुकदमे शीघ्र वापस नहीं लिए जाते हैं, तो भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूरे प्रदेश में व्यापक जन आंदोलन करने को मजबूर होगी।

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Rahul Bharti
Rahul Bharti@rahul5568·
जनपद अयोध्या में लगातार शिकायतों के बाद भी बिजली विभाग जबरन स्मार्ट मीटर लगा रहें है... विभाग के अधिकारी खुलेआम कह रहे हैं हमें कोई सरकारी आदेश नहीं आया कि हम स्मार्ट प्री पेड मीटर न लगाएं... जिसको जहां शिकायत करना हो करे मीटर प्री पेड ही लगेगा..उच्च अधिकार जवाब दें..@UPPCLLKO
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
दिल्ली के उत्तम नगर में दलित युवक तरुण कुमार की हत्या बेहद दुखद, दंडनीय और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे। हम @DelhiGovDigital से मांग करते हैं कि इस मामले के सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। साथ ही परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा भी दिया जाए। @gupta_rekha @DelhiPolice
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
अहमदाबाद में खेले गए टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत पूरे देश के लिए गर्व और खुशी का पल है। इस जीत के साथ भारत ने टी20 विश्व कप का लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर अपनी ताकत और टीम भावना का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कुल मिलाकर यह भारत की तीसरी टी20 विश्व कप जीत है। भारतीय खिलाड़ियों ने साहस, अनुशासन और अद्भुत टीम भावना का प्रदर्शन करते हुए दिखा दिया कि जब देश के लिए खेलने का जज़्बा होता है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। आज की यह जीत करोड़ों भारतीयों की भावनाओं, उम्मीदों और विश्वास की जीत है। भारत की इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे देश को गर्व है। पूरी भारतीय टीम, कोचिंग स्टाफ और सभी क्रिकेट प्रेमियों को इस गौरवशाली जीत की बहुत-बहुत बधाई एवं मंगलकामनाएँ। #T20WorldCup2026 #TeamIndia #BackToBackChampions #HistoricWin #BleedBlue
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Ravindra Bhati Gurjar
Ravindra Bhati Gurjar@Ravinder_ASPK·
हम संविधान को मानने वाले हैं ऐसे तुच्छ मानसिकता के लोगों पर कार्रवाई करे सरकार नहीं तो ऐसे लोगों की बुद्धि ठीक कर दी जाएगी
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
देश में बेटियों की शिक्षा और सम्मान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन आधिकारिक आंकड़े अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक हैं। Ministry of Education के UDISE+ 2024-25 के अनुसार पूरे भारत में 50,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है, जबकि लगभग 70,000 स्कूलों में शौचालय या तो अनुपलब्ध हैं या कार्यशील नहीं हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां लगभग 7,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं है और लगभग 11–12 हजार स्कूलों में शौचालय कार्यशील नहीं हैं। स्थिति केवल यहीं तक सीमित नहीं है। अन्य राज्यों के आंकड़े भी बेहद गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करते हैं- छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है। जम्मू-कश्मीर में 1,321 सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं है। उत्तराखंड में 141 विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है। राजस्थान में 14,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है। मध्य प्रदेश में 14,072 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, जिनमें लगभग 10,000 स्कूल पूरी तरह शौचालय विहीन हैं। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि लाखों बेटियों की गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर प्रश्न हैं। जब विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कैसे रुकेगी? मूत्र संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कैसे कम होगा? और “बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे ज़मीन पर कैसे सफल होंगे? हम @mygovindia और संबंधित राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि मिशन मोड में सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग एवं कार्यशील शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। बेटियों की शिक्षा पर केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और सम्मानजनक बुनियादी व्यवस्था आवश्यक है। यही सच्चे अर्थों में विकास और समानता की पहचान है।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
डॉ० संतूजी रामजी लाड जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
राजधानी लखनऊ के कल्याणपुर क्षेत्र में अधूरे संसाधन के साथ लाइन ठीक कर रहे संविदा लाइनमैन परशुराम रावत की करंट लगने से दर्दनाक मौत केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक है। उच्च वोल्टेज लाइन की मरम्मत के दौरान शटडाउन के बावजूद करंट आ जाना यह संकेत है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं। माननीय ऊर्जा मंत्री @aksharmaBharat जी, यह अकेला मामला नहीं है। पिछले दो सप्ताह में राजधानी लखनऊ के विभिन्न उपकेंद्रों पर 6 संविदा कर्मी हादसों का शिकार हुए। यह लगातार घटनाएँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संविदा लाइनमैनों के असुरक्षित हालात को दर्शाती हैं। हम @UPPCLLKO से मांग करते हैं कि-इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।मृतक के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा और स्थायी रोजगार दिया जाए तथा हालिया हादसों में घायल अन्य संविदा लाइनमैनों को समुचित इलाज, उचित मुआवजा और पूर्ण विभागीय सहायता प्रदान की जाए।।सभी उपकेंद्रों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित किए जाएं।संविदा लाइनमैनों कर्मियों के स्थायीकरण और पूर्ण सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की ठोस नीति बनाई जाए। @UPGovt @CMOfficeUP @myogiadityanath
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
उत्तर प्रदेश में पटरी दुकानदारों और नगर निगम के प्रवर्तन दल के बीच उत्पन्न हालात चिंताजनक हैं। हिंसा और अभद्रता किसी भी पक्ष से स्वीकार्य नहीं है। प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध-दोनों संवैधानिक मर्यादाओं में होने चाहिए। देश में रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापारियों की आजीविका की सुरक्षा के लिए पथ विक्रेताओं (आजीविका का संरक्षण एवं पथ विक्रय का विनियमन) अधिनियम, 2014 लागू है। साथ ही “प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना” के तहत 10,000 रुपए से 50,000 रुपए तक का कार्यशील पूंजी ऋण दिया जाता है। माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, स्वनिधि योजना में जितनी राशि मिलती है, उसमें किसी शॉपिंग मॉल में दुकान लेना संभव नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि नगर निकाय वैकल्पिक वेंडिंग जोन, किफायती दुकानें और संरक्षित बाजार स्थल उपलब्ध कराएँ, ताकि गरीब पटरी दुकानदार सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय कर सकें। कानून और गरीब की रोजी-रोटी, दोनों की समान रूप से रक्षा होना ही सुशासन की सच्ची पहचान है। @UPGovt @CMOfficeUP
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
ईरान के सर्वोच्च नेता और भारत के मित्र आयतुल्ला अली ख़ामेनेई जी के निधन की खबर एक युग के अंत का संकेत है। भारत–ईरान संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक यह रिश्ता अहम रहा है। पाकिस्तान के साथ तनाव के दौर में भी ईरान ने भारत के साथ सहयोग और संतुलन का रास्ता चुना। पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध चिंताजनक है। दुनिया कब तक तथाकथित “वैश्विक तानाशाहों” की दखलंदाज़ी झेलेगी? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका हर असहमति का जवाब प्रतिबंध और युद्ध से देगा? अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन है, जो किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का निर्देश देता है। किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को उनके अपने देश की सीमा के भीतर बिना किसी युद्ध की घोषणा या कानूनी प्रक्रिया के निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है। यह कदम वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक है। अब प्रधानमंत्री @narendramodi जी को स्पष्ट करना चाहिए-भारत युद्ध की राजनीति के साथ खड़ा है या बुद्ध की करुणा और स्वतंत्र कूटनीति के साथ? भारत की आवाज़ शांति, न्याय और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्ष में बुलंद होनी चाहिए। ऐसे योद्धा की शहादत को हम नमन करते हुए शांति, सद्भाव और मानवता के संदेश में बदलें। अलविदा, भारत के वफ़ादार दोस्त। युद्ध समाधान नहीं, विनाश है।
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Rahul Bharti@rahul5568·
सुप्रीम कोर्ट के फैसला अत्यंत शर्मनाक है..NCRT में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का चेप्टर बहुत ही आवश्यक है.पता नहीं क्यों नेता मौन है इस विषय पर..लेकिन ये भारत की वर्तमान की सच्चाई है.. "justice delaid is justice denied..अगर 8–10 तारीख में फैसला होने लगे तो अपराध खत्म हो सकता है ।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
जिला जौनपुर की “संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” महारैली का ऐतिहासिक रूप से सफल आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बहुजन आंदोलन अब हर रैली के साथ नई ऊँचाइयों को छू रहा है। जौनपुर की महारैली को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में दिन-रात जुटे सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को हृदय से आभार, साथ ही, इस महारैली को अपना अपार प्यार और समर्थन देकर इतिहास रचने वाली सम्मानित जागरूक और संघर्षशील मेरे परिवार का दिल से स्वागत। #ASP_K_Mission2027
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
दो दिन पूर्व लखनऊ के गोसाईगंज में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुआ यह भीषण हादसा कोई साधारण दुर्घटना नहीं है-यह प्रशासनिक विफलता, परिवहन विभाग की लापरवाही और कानून की खुलेआम अवहेलना का परिणाम है। तेज रफ्तार स्लीपर कोच डबल डेकर बस (एचआर-55-एफ-1323) का अनियंत्रित होकर पलट जाना और 7 लोगों की मौत व 20 से अधिक यात्रियों का घायल होना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। मैं सभी मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जिस बस का पिछले पाँच वर्षों में 73 बार चालान हुआ, जिसमें से 43 चालान केवल उत्तर प्रदेश में हुए और 27 चालान लखनऊ आरटीओ क्षेत्र में हुए, उसका पंजीकरण आखिर क्यों निलंबित नहीं किया गया? प्रदेश में पाँच या उससे अधिक बार चालान होने पर वाहन का पंजीकरण और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने के स्पष्ट निर्देश हैं। जब लखनऊ आरटीओ 10 हजार से अधिक वाहनों पर कार्रवाई कर चुका है, तो इस बस को क्यों संरक्षण मिला? 17 लाख 62 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना, जिसमें बिहार के सुपौल में 2,29,500 रुपये का एकमुश्त जुर्माना भी शामिल है, यह साबित करता है कि यह बस नियमों की खुली अवहेलना करती रही। जांच में यह भी सामने आया है कि चालक ने टोल प्लाजा पार करते ही बस मालिक से फोन पर विवाद किया और “पलट देंगे” जैसी धमकी दी। कुछ ही देर बाद बस पलट गई। यदि यह तथ्य सत्य है तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य है। दुर्घटना के बाद चालक और कंडक्टर का मौके से फरार होना भी संदेह को और गहरा करता है। यह हादसा बताता है कि सेफ रूट के नाम पर आरटीओ जांच से बचने की प्रवृत्ति, बार-बार चालान के बावजूद कड़ी कार्रवाई का अभाव, और राज्यों के बीच समन्वय की कमी किस तरह आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है। @UPGovt से हमारी मांगें :- 1. बस मालिक, चालक और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो। 2. दोषी पाए जाने पर गैर इरादतन हत्या सहित कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई हो। 3. मृतकों के परिजनों को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।गंभीर घायलों का समुचित निःशुल्क इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। 4. जिन अधिकारियों ने पाँच से अधिक चालान के बावजूद पंजीकरण निलंबित नहीं किया, उनकी जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाए। 5. सभी राज्यों के परिवहन विभागों के बीच डेटा समन्वय को मजबूत कर दोहराए जाने वाले उल्लंघनों पर स्वतः निलंबन की व्यवस्था लागू की जाए। यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो शायद आज सात परिवार उजड़ने से बच जाते। यह केवल सड़क हादसा नहीं, यह प्रशासनिक उदासीनता की कीमत है जो आम जनता ने अपनी जान देकर चुकाई है। @CMOfficeUP @myogiadityanath @MORTHIndia @nitin_gadkari @UPSRTCHQ @uptransportdept @dayashankar4bjp
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