Ramesh retweetledi

क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।
शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।
ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत,
और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी "अछूत" हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।
ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।
जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।
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