

DHEERU PRASHANT(uppss) bisanda banda
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@DheeruPrashant
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अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है । दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है । संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये । उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है । उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके । अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया । 17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई । दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर “कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा । दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।






शराब पीकर विद्यालय में घुसकर शिक्षकों के साथ मारपीट करने वाले खुद को सत्तापक्ष का सेक्टर प्रभारी बता रहे..न्याय प्रिय सरकार से न्याय की प्रतीक्षा में.अन्यथा हम संघर्ष करना जानते है #uppolice #yogiadityanath #dmbanda #spbanda #upgoverment




उपजिलाधिकारीपैलानीजनपद बांदाअंकित वर्माद्वारा शिक्षकB LOको पदीयअधिकारों का दुरुपयोगकरकेबिना विभाग कोसूचितकिए रात को ही जेल भेज देना नृशंसघटना हैसरकार को ले डूबने पर उतारूऐसे अधिकारी @DrDCSHARMAUPPSS @myogiadityanath @narendramodi @ECISVEEP @BJP4UP @ceoup @ChiefSecyUP @UPGovt



मैं दूर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी से पूछना चाहता हूँ कि...... सिम मेरा, मोबाइल मेरा, नंबर भी मेरा…! फिर ये कहां का इंसाफ है कि इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगा दिया जाए? बैलेंस खत्म हुआ तो आउटगोइंग बंद हो जाए, ये तो समझ में आता है, क्योंकि एक सेवा मैने ले रखी है। लेकिन इनकमिंग कॉल भी बंद कर देना, क्या ये सही है? कॉल तो सामने वाला कर रहा है, उसका पैसा कट रहा है…!! फिर मेरे नंबर पर “ताला” क्यों❓ क्या अब मोबाइल रखना भी “मासिक टैक्स” देने जैसा हो गया है? रिचार्ज करो तो नंबर जिंदा, नहीं तो पूरी तरह बंद! गांव के मजदूर, छोटे दुकानदार और छात्र.... जिनके लिए मोबाइल सिर्फ जरूरत है, शौक नहीं, उनके लिए यह नियम किसी सजा से कम नहीं है। पहले कहा जाता था, “लाइफटाइम इनकमिंग फ्री” अब हाल ये है कि रिचार्ज नहीं तो पहचान भी खत्म! सोचिए… अगर किसी गरीब के पास पैसे नहीं हैं, तो क्या उसका नंबर बंद कर देना ही समाधान है? क्या उससे उसका संपर्क छीन लेना सही है? मोबाइल आज सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी पहचान और जिंदगी की लाइन बन चुका है। बैंक से लेकर नौकरी तक, सब कुछ इसी नंबर से जुड़ा है। फिर भी अगर इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगाया जा रहा है, तो सवाल उठना लाज़मी है…! क्या यह सिर्फ बिजनेस है…❓ या फिर धीरे-धीरे लोगों को मजबूर करके हर महीने पैसे निकलवाने का तरीका? सोचिए… और बताइए! क्या आप भी इसे सही मानते हैं❓ या यह आम आदमी की मजबूरी का फायदा उठाना है? अगर आप सहमत हैं तो खुलकर आवाज उठाइए, वरना तो जैसा चल रहा है चल ही रहा है। @JM_Scindia @DoPTGoI @narendramodi @AmitShah

