VIPIN KUMAR

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@VIPINKU33132891

Katılım Ekim 2023
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा। बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat @mlkhattar @UPPCLLKO
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रा०वि०प०प्राविधिक कर्मचारी संघ - पूर्वांचल
@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में“दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है @myogioffice @aksharmaBharat @ANI @RVPPKSUP
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VIPIN KUMAR
VIPIN KUMAR@VIPINKU33132891·
Gajner road prachar karte hue bijli bill rahat yojana ka prachar karte hue
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Deepak Yadav
Deepak Yadav@deepakhslko·
अनुमति के बिना लागू की जा रही वर्टिकल व्यवस्था : नियामक आयोग पहुंचा उपभोक्ता परिषद, प्रस्ताव किया दाखिल youngbharatnews.com/lucknow/upvrup… @Vikeyfauji @saurabhpawar_88 @Rinkulo @HalfVerma @TinkuRajLodhi @GANESHS1506 @Ku02335367Er @AliPrayagi @Sandeep_0957 @SE_UPPCL
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण का टेण्डर होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का संघर्ष समिति ने जारी किया एलर्ट : निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए- विद्युत नियामक आयोग को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी जाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त श्री संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः श्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर देना चाहिए। #stop_privatization_of_uppcl @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @spgoyal @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण में हो रहे भारी भ्रष्टाचार की पोल खोलता दैनिक भास्कर का यह वीडियो, पूरे प्रदेश में यह वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
dainik.bhaskar.com/tE5yDpwCVUb प्रदेश के समस्त उपभोक्ताओं, किसानो, व्यापारियों, कर्मचारियों, छात्रों से अनुरोध है कि दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट को ध्यान से पढ़िए और वीडियो को ध्यान से सुनिए, आपको सब समझ में आ जाएगा कि निजीकरण के नाम पर कितना बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इस रिपोर्ट से सिद्ध होता है कि बिजली का निजीकरण चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचने के उद्देश्य से एक बड़े बिजली घोटाले को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। इसलिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त किया जाए। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं। कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है। माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीबों के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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राविप प्राविधिक कर्मचारी संघ उप्र (UPPCL)
@UPGovt @myogiadityanath माननीय @myogiadityanath जी, कृपया संज्ञान लिया जाये कि @UPPCLLKO मे @MD_PuVVNL@MDDVVNL द्वारा असंविधानिक आदेशों से श्रमिकों का शोषण व वेतन रोक कर @UPGovt की कर्मचारी हित नीति के विरुद्ध @CMOfficeUP कों बदनाम किया जा रहा है एवं @ChairmanUppcl @mduppcl हिटलरशाही शीर्ष पर है!
राविप प्राविधिक कर्मचारी संघ उप्र (UPPCL) tweet mediaराविप प्राविधिक कर्मचारी संघ उप्र (UPPCL) tweet mediaराविप प्राविधिक कर्मचारी संघ उप्र (UPPCL) tweet mediaराविप प्राविधिक कर्मचारी संघ उप्र (UPPCL) tweet media
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
पॉवर कारपोरेशन में स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेन देन के आरोप के बीच संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की मांग की: स्थानांतरण के विरोध में पूर्वांचल डिस्काम पर 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह: प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरण में पैसे के लेनदेन के आरोप की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराएं। स्थानांतरण में लेनदेन और स्थानांतरण के नाम पर उत्पीड़न के विरोध में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर 19 जून से बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 203 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हजारों की तादाद में किए गए नीति विरुद्ध स्थानांतरण आदेशों की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराएं। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन में लगभग 1500 अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया है, इतने ही जूनियर इंजीनियरों को स्थानांतरित किया गया है और कई हजार छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें से अधिकांश स्थानांतरण बिना किसी नीति की किए गए हैं। स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेनदेन की बात भी सामने आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेनदेन को लेकर माननीय ऊर्जा मंत्री और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिजली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद स्थानांतरण के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व में भी पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण को लेकर लगे आरोपों के चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से जो भी स्थानांतरण होते हैं वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी के सामने रखे जाते हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रबंधन द्वारा और खासकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेशों में लेनदेन की बात सामने आने के बाद संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी सारे घटनाक्रम से संज्ञानित कराएगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा निजीकरण हेतु उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में 19 जून से वाराणसी के बिजली कर्मी प्रबंध निदेशक के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। पूर्वांचल की संघर्ष समिति ने प्रबंध निदेशक को कल नोटिस दे दिया था जिसमें लिखा गया है कि यदि उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तमाम स्थानांतरण आदेश निरस्त न किए गए तो 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया जाएगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सारी जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की होगी। संघर्ष समिति ने बताया कि स्थानांतरण के खेल में लेनदेन के आरोप तो लग ही रहे हैं । साथ ही उत्पीड़न की दृष्टि से भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए हैं। यहां तक कि छोटे पदों पर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को भी बड़ी संख्या में सुदूर स्थानांतरित किया गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया है जिससे मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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K.Gautam
K.Gautam@Kg199395·
Corrupted system should be investigation Who give application through proper channel/MD on the behalf of medical ground,no doing anyone transfer means needful person not done transfer.
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ@UPRVPAS

पॉवर कारपोरेशन में स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेन देन के आरोप के बीच संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की मांग की: स्थानांतरण के विरोध में पूर्वांचल डिस्काम पर 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह: प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरण में पैसे के लेनदेन के आरोप की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराएं। स्थानांतरण में लेनदेन और स्थानांतरण के नाम पर उत्पीड़न के विरोध में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर 19 जून से बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 203 वें दिन प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हजारों की तादाद में किए गए नीति विरुद्ध स्थानांतरण आदेशों की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच कराएं। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन में लगभग 1500 अभियंताओं को स्थानांतरित किया गया है, इतने ही जूनियर इंजीनियरों को स्थानांतरित किया गया है और कई हजार छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें से अधिकांश स्थानांतरण बिना किसी नीति की किए गए हैं। स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर लेनदेन की बात भी सामने आ रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि लेनदेन को लेकर माननीय ऊर्जा मंत्री और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का एक ऑडियो वायरल होने के बाद बिजली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस ऑडियो के वायरल होने के बाद स्थानांतरण के मामले में उच्च स्तरीय सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व में भी पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण को लेकर लगे आरोपों के चलते माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद से जो भी स्थानांतरण होते हैं वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की हाई पावर कमेटी के सामने रखे जाते हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रबंधन द्वारा और खासकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण आदेशों में लेनदेन की बात सामने आने के बाद संघर्ष समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी सारे घटनाक्रम से संज्ञानित कराएगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा निजीकरण हेतु उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में 19 जून से वाराणसी के बिजली कर्मी प्रबंध निदेशक के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे। पूर्वांचल की संघर्ष समिति ने प्रबंध निदेशक को कल नोटिस दे दिया था जिसमें लिखा गया है कि यदि उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए तमाम स्थानांतरण आदेश निरस्त न किए गए तो 19 जून से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह किया जाएगा। इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की सारी जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की होगी। संघर्ष समिति ने बताया कि स्थानांतरण के खेल में लेनदेन के आरोप तो लग ही रहे हैं । साथ ही उत्पीड़न की दृष्टि से भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए हैं। यहां तक कि छोटे पदों पर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को भी बड़ी संख्या में सुदूर स्थानांतरित किया गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन में स्थानांतरण एक उद्योग बन गया है जिससे मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes

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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन : निजीकरण के डॉक्यूमेंट को नामंजूर करने की मांग: सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय पर मूक प्रदर्शन किया और निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भी निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए। आज सायं 04 बजे सैकड़ो की संख्या में बिजली कर्मचारी विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने विद्युत नियामक आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। नियामक आयोग के सचिव ने मुख्य द्वार पर आकर संघर्ष समिति का ज्ञापन लिया। ज्ञापन के जरिए संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के नाम दिए गए ज्ञापन में उनसे मांग की है कि वह पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से यह भी मांग की है कि निजीकरण के मामले में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को भी नियामक आयोग के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाय। ज्ञापन में कहा गया है कि विद्युत नियामक आयोग को अवैध ढंग से नियुक्त किए गए, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाडा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर पॉवर कॉरपोरेशन से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए। एक अन्य मुख्य बात यह है कि श्री अरविंद कुमार ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद पर रहते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ 06 अक्टूबर 2020 को एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री माननीय श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री माननीय श्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। इस समझौते में लिखा गया है कि "पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जाएगी । कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।" 06 अक्टूबर 2020 के इस समझौते पर श्री अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं जिसमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की बात है और साफ लिखा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। अतः उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष रहते हुए वे कैसे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त विद्युत नियामक आयोग में दूसरे सदस्य श्री संजय सिंह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के कर्मचारी रह चुके है। ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन की सब्सिडियरी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट पर वे भी अपना अभिमत नहीं दे सकते। विद्युत नियामक आयोग में आज की तारीख में कोई मेंबर लॉ नहीं है। इस तरह विद्युत नियामक आयोग का तकनीकी दृष्टि से कोरम ही पूरा नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के किसी भी डॉक्यूमेंट पर न ही कोई अभिमत देना चाहिए और न ही को कोई मंजूरी नहीं देनी चाहिए। पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग के सामने निजीकरण के दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के समाचार से प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया है। आज समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि वह पॉवर कारपोरेशन के निजीकरण के प्रस्ताव को कोई मंजूरी न दे। @narendramodi @myogiadityanath @aksharmaBharat
उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet mediaउ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ tweet media
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VIPIN KUMAR
VIPIN KUMAR@VIPINKU33132891·
Hal colony supply voltage low how gahi he kripya sambandhit adikari dyan de
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
बिजली के निजीकरण के विरोध में विगत 6 महीने से शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों का समर्थन करने के लिए माननीय सांसद श्री चंद्रशेखर जी का सादर आभार। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @BhimArmyChief @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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उ॰प्र०रा०वि०प०अभियंता संघ
निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटालों पर पर्दा डालने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों का किया जा रहा है दमन: 16 किसान संगठन निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों के साथ आए: 04 जून को प्रदेश के सभी जनपदों में किसानों का विरोध प्रदर्शन: ग्रांट थॉर्टन के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही न होने से बिजली कर्मियों में गुस्सा:           विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के नाम पर विगत 06 माह से हो रहे अनियमितताओं और घोटालों का खुलासा होने के बाद  ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी को चुप्पी तोड़नी चाहिए और निजी कंपनी के साथ मिली भगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि कि सारा घोटाला पावर कारपोरेशन के चेयरमैन की नाक नीचे हो रहा है और घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर कार्यवाही करने के बजाय पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन अभियंताओं और कर्मचारियों का दमन करने में लगे जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।        16 किसान संगठनों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आगामी 04 जून को समस्त जनपदों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ एक मंच पर आए 16 किसान संगठनों  की मुख्य मांग है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए, बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी तथा स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव वापस लिया जाए तथा 300 यूनिट तक किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का उत्पीड़न किया गया तो किसान संगठन उनके साथ  खड़े होंगे और ऐसी किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का जोरदार विरोध किया जाएगा।          संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि विगत 06 माह से निजीकरण के विरोध में चल रहे शांतिपूर्ण ध्यानाकर्षण आंदोलन से बौखलाए प्रबंधन और पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने निजीकरण के उतावलेपन में कर्मचारियों और अभियंताओं पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में बहुत गुस्सा है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों और अभियंताओं का उत्पीड़न की दृष्टि से ट्रांसफर किया जा रहा है, उनका वेतन काटा जा रहा है, उन्हें चेतावनी दी जा रही है, कर्मचारी सेवा विनियमावली में आलोकतांत्रिक संशोधन किया गया है जिससे कार्य का वातावरण में बिगड़ रहा है और ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति फैल रही है।        उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का लगातार निर्देश है कि आंदोलन के दौरान आम उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।उपभोक्ताओं की समस्याओं  को तुरंत अटेंड किया जा रहा है। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने उपभोक्ता सेवा में कोई व्यवधान न होने देने का संकल्प लिया है किन्तु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के नाम पर उन्हें घंटों एक जगह बांधे  रखना, उनके साथ अमर्यादित और अभद्र भाषा का प्रयोग करना, उनका अपमान करना, उन्हें धमकी देना यह सब केवल निजीकरण के लिए किया जा रहा है जिसे बिजली कर्मी स्वीकार नहीं करते। संघर्ष समिति चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार  बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। @narendramodi @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @ChiefSecyUP @UPGovt @UPPCLLKO @yadavakhilesh @RahulGandhi @Mayawati @aajtak @ABPNews @ZeeNews @News18India @ndtv @timesofindia @IndianExpress @TheEconomist @EconomicTimes
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