Manish Singh@RebornManish
राजीव का अखण्ड भारत!!!
अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव- सात देश। मगर एक वीजा, एक मुद्रा, बाधाहीन व्यापार
लोगो का आना जाना मुक्त
कार्य, व्यापार, सेवाएं मुक्त
अपने अपने स्टेट की अपनी सरकारें हो, जैसे तमिलनाडु और बंगाल में हैं। पर एक दूसरे की सहयोगी हो। यही सार्क का विजन था।
किसी महादेश के और क्या लक्षण होते हैं।
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सार्क का गठन EU की तर्ज पर हुआ। वक्त के साथ एक एक कदम बढ़ाते यूरोपियन देश, एक साझा यूरोप बना चुके है।
उनकी एक मुद्रा, यूरो है। मुक्त व्यापार है। सीमाओं पर बड़ी ऊंची इलेक्ट्रिक फेन्स नही, और न गश्त करते जवान। हाइवे पर जहां देश बदलते है, वहां टोल नाकों की तरह नाके है बस।
ग्रामीण इलाकों में तो कोई सीमा ही नही। आप एक देश के गांव मे सब्जी उगाइये। चार किमी दूर, दूसरे देश के कस्बे में बेच आइये।
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एक पास लीजिये, यू-रेल पास कहते है, पूरा यूरोप घूमिए। एक वीजा, शेन्ज़ेन 27 देशो में मान्य हैं।
फ्रांस से वीजा लीजिये, इटली, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड घूमते हुए, जर्मनी से वापसी कीजिये। न कांटेदार फेन्स, न नफरत और पैर पटकते, मुंह चमकाते सैनिक..
सीमाएं फांदते आपको लगेगा नही, कि ये देश एक दूसरे के खिलाफ, मानवता का सबसे भीषण युध्द लड़ चुके हैं।
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1985 में सार्क बना था। राजीव ढाका पहुंचे थे। और सार्क का डिटेल विजन दिया था।
सबसे बड़े देश के पीएम होने के नाते राजीव का बड़प्पन ही सार्क की नींव था। बड़े की भूमिका को उन्होंने निभाया भी।
पड़ोसी देशों को फेवरेबल डील दी, इन्वेस्टमेंट दिया, ग्रांट दी। सार्क का मुखिया नेपाल को बनाया। सबको प्यार, इज्जत दी।
उनकी पकड़, और हिंदुस्तान का वकार बढ़ता गया। हर देश संकट में नई दिल्ली की ओर देखता। मालदीव में सेना भेजकर उन्होंने गयूम की सरकार को तख्तापलट से बचाया।
तो श्रीलंका में शांति सेना भेजी,
जिस वजह से उनकी जान भी गयी।
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राजीव के बाद सार्क धीमी गति से आगे बढ़ा। कारगिल, एटम बम, ऑपरेशन पराक्रम, बंगलादेश से सीमा विवाद आदि से सार्क बेदम हो गया।
लेकिन मनमोहन के समय सार्क को फिर गति मिली। फ्री ट्रेड के कई एग्रीमेन्ट हुए। SAFTA फ्री ट्रेड जोन बना। SAF गेम्स होते थे।
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मगर अंततः सार्क का मलीदा निकल गया है।
दरअसल,परिवार जब बड़ा होता है, सबको स्पेस की जरूरत होती है। संयुक्त परिवार की सफलता का राज म्यूचुयल रिस्पेक्ट है।
परिवार का सबसे बड़ा बन्दा, हेकड़ी और अहंकार दिखाने लगे, परिवार की हर बैठक में औरो को चाकर समझे। छोटों की संपत्ति, भूमि, बहू बेटियों पर निगाह रखे,
जलील करे, सुपीरियरिटी झाड़े..
तो परिवार भी संयुक्त रह नही सकता।
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सार्क, जो अखण्ड भारत का संयुक्त परिवार था, पाकिस्तान भारत के झगड़ों, और अब मोदी सरकार के अहंकार का शिकार होकर वहां नही पहुंच सका,
जहां यूरोपियन यूनियन जा चुका।
आज मिलकर यूरोपियन स्पेस एजेंसी बना चुके हैं। डॉलर से ज्यादा कीमत उनकी संयुक्त मुद्रा की है।
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यह सब इसलिए कि सब एक दूसरे की इज्जत करते हैं। जर्मनी फ़्रांस इसके युधिष्ठिर भीम हैं, बाकी बराबर के भाई।
एक सँयुक्त परिवार।
यूरोपियन पार्लियामेंट भी है।
ब्रिटेन भी मेम्बर था, पर अपने राष्ट्रवादी नेताओ के चक्कर मे एग्जिट कर गया। उसके बाद से ब्रिटेन के हालात गम्भीर हैं। राष्ट्रवादियों की हालत सांप छछूंदर है। ब्रिटेन जिसे इस संघ का सबसे ज्यादा लाभ था, अपने अहंकार का फल भुगत रहा है।
और हम भी..
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सार्क का मुख्यालय आज भी काठमांडू में है।
पर काठमांडू हमें आंख दिखा रहा है। बाग्लादेशी तो सब घुसपैठिये हैं। मालदीव ने आपका मिलिट्री अड्डा उड़खवा दिया। भूटान, इंडिया को बाईपास कर चीन से सीधे डील कर रहा है। श्रीलंका चीनी अड्डा हो गया है।
और पाकिस्तान से तो खैर, रोज सुबह शाम POK लेने की कसमें खाते जी रहे हैं।।रोज रात हमे पीओके में प्लाट के सपने आते हैं।
हम पहाड़ियों, रन और रेगिस्तानों की बंजर भूमि के लिए बेटे कुर्बान करते रहे है। दरअसल हम दिल से कबायली है, जो कटने मरने को गौरव समझते हैं।
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अब तो पाकिस्तान भी पलट कर बयान देने की जहमत नही उठाता। दोनो तरफ के टीवी एंकर और छुटभैये ही लड़ लेते हैं।
दरअसल, मुसलमानो के प्रति अथाह नफरत, और छोटे देशो के प्रति हमारे घमंडी, बदतमीज डिप्लोमेसी ने, सार्क की हत्या करर दी है।
उसकी लाश, हमारे आंगन में पड़ी है।
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मगर ठीक से सार्क देशों का नक्शा देखिए।
सार्क वही अखण्ड भारत, वह नाभि की कस्तूरी है, जिसे खोजने के लिए आप मशीन का गलत बटन दबा रहे हैं।
भारत के लोगों, याद रखना। भारत अखण्ड अगर कभी बना.. तो दंगाई और गुंडा साइकोलॉजी से नही, मोहब्बत से, सलाहियत से ,
बड़प्पन से बनेगा।
राजीव की राह पर चलकर बनेगा।
🙏❤️