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देश दुनिया की ताजी खबरें प्रस्तुत करेगा संदेश न्यूज हिंदी में। झूठ से हटके। सच के नजदीक। समाचार और विचार का चैनल होगा संदेश।

Katılım Eylül 2024
103 Takip Edilen47 Takipçiler
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sandeshhindinews@watchsandesh·
श्रवण सर जी, आप राहुल की कुर्सी पर बैठिए। कल्पना कीजिए आपने राहुल की जिम्मेदारियां ओढ़ ली हैं। इसके बाद बताइए कि राहुल (आप) क्या कर रहे हैं! दरअसल राहुल जीभ हैं, जो 32 दांतों के बीच रहती है🤗 सादर
श्रवण गर्ग@ShravanGarg

कांग्रेस को अगर सिद्धारमैया जैसे नेताओं की सनक के भरोसे ही ज़िंदा रहना है तो जनता साल भर बाद राहुल से सवाल नहीं पूछेगी कि मोदी अब भी सरकार में क्यों बने हुए हैं ? कर्नाटक को लेकर वही नाटक चल रहा है जिसका मंचन गहलोत के नेतृत्व में हो चुका है और राजस्थान में सत्ता गंवानी पड़ी थी।

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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
केजरीवाल की कुर्सी दिखाकर आम आदमी पार्टी के लोग लिख रहे हैं आम कुर्सी बीजेपी की रेखा गुप्ता की कुर्सी दिखाकर लिख रहे हैं खास कुर्सी। मगर जो जनता की साधारण कुर्सी है लकड़ी वाली जिस पर शीला दीक्षित बैठती थीं और लगभग सारे पत्रकारों ने आम आदमी पार्टी और बीजेपी के सारे नेताओं ने देखा है उसके बारे में कोई नहीं लिख रहा। फोटो नहीं डाल रहा। तीन मुख्यमंत्री तीन कुर्सी!
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vivek jain
vivek jain@Drvivekjain14·
महानतम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक ,आधुनिक भारत के निर्माता ,देश में अंधविश्वास खत्म कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण जागृत करने वाले ,उच्च कोटि के साहित्यकर ,इतिहासकार ,a polymath personality,चाचा नेहरू की पुर्ण्य तिथि पर कोटि कोटि नमन ।@narendramodi @RahulGandhi @Pawankhera @_SandeepDikshit @watchsandesh @skjain_05 @AskThePremKumar
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sandeshhindinews@watchsandesh·
कांग्रेस वटवृक्ष है
Ajay Shukla अजय शुक्ल اجے شکلا@AjayShuklaIN

जब 1947 में पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने, तो भारत की साक्षरता दर महज़ 12 प्रतिशत थी। देश में केवल 27 विश्वविद्यालय थे। हालाँकि, 1964 तक, विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 90 से ज़्यादा हो गई थी। एक ऐसे देश में जहाँ लोग अभी भी अपने गाँवों तक बैलगाड़ी से सफ़र करते थे, वैज्ञानिक संस्थान स्थापित किए जा रहे थे ताकि एक गरीब किसान का बेटा भी इंजीनियर या डॉक्टर बनने का सपना देख सके। 1961 में, युवाओं में नेतृत्व और अनुशासन के गुण पैदा करने के लिए नेशनल कैडेट कोर (NCC) का काफ़ी विस्तार किया गया। 1969 में, इंदिरा गांधी सरकार ने नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) शुरू की, जिसने लाखों छात्रों को सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जोड़ा। नेहरू युवा केंद्र योजना 1972 में शुरू की गई थी; 1987 तक, पूरे देश में 500 से ज़्यादा नेहरू युवा केंद्र स्थापित हो चुके थे, जो ग्रामीण युवाओं को खेल, सामाजिक नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी में प्रशिक्षण दे रहे थे। आज के विपरीत, उस समय ध्यान केवल "ट्रोल आर्मी" बनाने पर नहीं था। इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान—विशेष रूप से 1971 के बाद—ग्रामीण बैंकिंग और रोज़गार सृजन योजनाओं में काफ़ी विस्तार देखने को मिला। 1975 में, एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) की नींव रखी गई, जिसने लाखों ग्रामीण युवाओं को स्वरोज़गार के अवसरों से जोड़ा। 1980 के दशक में, TRYSEM योजना के तहत, लगभग दो मिलियन ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण मिला। उस समय, सरकार युवाओं को सक्रिय रूप से प्रशिक्षण देती थी, न कि केवल भाषण देती थी—जैसा कि आज आम है—यह वादे करते हुए कि "20 मिलियन नौकरियाँ आने वाली हैं।" जब 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो उनकी उम्र महज़ 40 साल थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी संगठन के भीतर युवा चेहरों को बढ़ावा देने की ज़ोरदार वकालत की। 1985 में, वोट देने की उम्र 21 से घटाकर 18 कर दी गई—एक ऐसा फ़ैसला जिसने लाखों युवाओं के लिए राजनीति में सीधे तौर पर हिस्सा लेने का रास्ता खोल दिया। नई शिक्षा नीति 1986 में लागू की गई थी। कंप्यूटर और दूरसंचार क्षेत्रों को खोला गया, और MTNL तथा C-DOT जैसे संस्थानों ने लाखों तकनीकी नौकरियों के लिए रास्ता बनाया। 1988 में, *जवाहर रोज़गार योजना* शुरू की गई, जिसने लाखों ग्रामीण युवाओं को रोज़गार दिया। प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री का कार्यकाल केवल 19 महीने का था; फिर भी, उनका नारा—"जय जवान, जय किसान"—महज़ एक नारा नहीं था। 1965 के युद्ध के बाद, सशस्त्र बलों में शामिल होने का ज़बरदस्त उत्साह देश के युवाओं में फैल गया। उस दौर में, सेना और कृषि—दोनों को ही राष्ट्र-निर्माण का अभिन्न अंग माना जाता था। आज के विपरीत, उस समय के बेरोज़गार युवा केवल Twitter Spaces पर बैठकर ऐतिहासिक लड़ाइयाँ नहीं लड़ते थे। 1951 में, नेहरू सरकार ने दिल्ली में पहले एशियाई खेलों की मेज़बानी की, जिसमें 11 देशों के लगभग 489 एथलीटों ने भाग लिया। 1982 में, इंदिरा गांधी सरकार ने दिल्ली में एशियाई खेलों का आयोजन किया, जिसमें 33 देशों के 4,500 से अधिक एथलीटों ने हिस्सा लिया। काफ़ी हद तक इन एशियाई खेलों के परिणामस्वरूप ही, दिल्ली में रंगीन टेलीविज़न प्रसारण की शुरुआत हुई, और खेल के बुनियादी ढाँचे में ज़बरदस्त विकास हुआ। 2010 के राष्ट्रमंडल खेल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान आयोजित किए गए थे, जिसमें भारत ने 101 पदक जीते—जिनमें 38 स्वर्ण पदक शामिल थे। 1990 में बीजिंग में आयोजित एशियाई खेलों में पहली बार कबड्डी को शामिल किया गया, जहाँ भारत ने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद, भारत ने 1994, 1998, 2002, 2006 और 2010 में लगातार स्वर्ण पदक जीते। कांग्रेस के दौर में, ग्रामीण खेलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली, क्योंकि उस समय खेल मंत्रालय लगातार अपने बजटीय आवंटन में वृद्धि कर रहा था। 2004 और 2014 के बीच, खेल बजट में काफ़ी वृद्धि देखी गई, जो लगभग ₹1,219 करोड़ से बढ़कर ₹1,978 करोड़ हो गया। UPA सरकार के कार्यकाल (2004–2014) के दौरान, औसत GDP विकास दर लगभग 8 प्रतिशत रही। मनमोहन सिंह प्रशासन के तहत, 2005 में MGNREGA लागू किया गया, जिसने सालाना लगभग 50 मिलियन ग्रामीण परिवारों को रोज़गार प्रदान किया। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 में लागू किया गया था। इसके बाद 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम आया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन 2005 में शुरू किया गया था; 2008 तक, इस पहल के तहत 150,000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की जा चुकी थी। UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग क्षेत्र और राज्य लोक सेवा आयोग जैसे संस्थानों ने हर साल लाखों रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचनाएँ जारी कीं। 2000 और 2013 के बीच, रेलवे भर्ती बोर्डों को करोड़ों आवेदन प्राप्त हुए, क्योंकि लोगों को सचमुच यह उम्मीद थी कि रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे। केवल 2011 में ही, रेलवे भर्ती अभियान को लगभग 18 मिलियन आवेदन प्राप्त हुए। उन दिनों, परीक्षाएँ पूरी ईमानदारी के साथ आयोजित की जाती थीं; "पेपर लीक उद्योग," जिसने वर्तमान में व्यवस्था को अपनी गिरफ्त में ले रखा है, उस समय अस्तित्व में नहीं था। दूसरी ओर, 2014 से 2026 तक की अवधि पर विचार करें। रोज़गार के अवसर पैदा करने का वादा किया गया था। #Nehru #education #indian #university @_nehruvian @TheNehruBlog @jnmfsm @RahulGandhi @priyankagandhi @kharge @INCIndia @IYC @nsui @MahilaCongress

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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
नए आदमी मे एक अपरिष्कृत उत्साह होता है। जब कोई व्यक्ति पहली बार किसी पद पर आता है - नेता बनता है, अधिकारी बनता है, या किसी कम्पनी/संस्थान की जिम्मेदारी संभालता है.. उसके पास आइडियाज होते है। ●● कुछ अनगढ, कच्चे, अपरिष्कृत, गुस्ताख, हास्यास्पद हो सकते है। कुछ ब्रिलिएण्ट और युगांतरकारी भी हो सकते है। पर वे सब बड़े फ्रेश होते है। इसका आधार, दुनिया की वह समझ होती है, जो अब तक के जीवन मे आपने बनाई है। और उसी पर बेस्ड, कुछ नया करके दुनिया बदलना चाहते है। नई जगह मे रम जाने के बाद, आप उस दुनिया से कट जाते है। आपको सबकुछ टेबल के दूसरी तरफ से देखना है। और उस तरफ की अपनी मजबूरियां है, सीमाये है, और फलसफे है। नए रहस्योद्घटन होते है, जो आपके बहुत से आइडिया शुरू करने के पहले खत्म कर देते है। ●● लेकिन आपका आदर्शवाद उन्ही समस्याओं के बीच से कुछ समाधान निकलवा देता है। इसजिए अक्सर नवागंतुक के प्रथम कुछ साल उर्जावान होते है। यह बात नेहरू के लिए सच है। 1947 के उर्जावान नेहरू, 1960 तक ढल चुके है। आगे का दौर डिजास्टर है। यह इंदिरा के लिए सच है, जिनकी तमाम उपलब्धियां 1972-73 पर जाकर खत्म हो जाती है। इसके बाद सिर्फ और सिर्फ डिजास्टर है। खुद मनमोहन जैसे अर्थशास्त्री 2011 के बाद अंडरअचीवर बन गए। राज्यो मे देखें तो ज्योति बसु ने पहले 5-7 साल ही कुछ हासिल किया। इसके बाद बस, पद से चिपके रहे। ●● सत्ता मौज नही होती। वह जीवनी शक्ति चूस लेती है। आपको एक वक्त के बाद खोखला कर देती है। पर मेरीयह बात उस शख्स के लिए है, जो पद को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हों। (वरना तो मोहम्मद शाह रंगीला, 30 साल राज करके भी जवान बना रह सकता है) ऐसे मे पहले 10 साल मे आपने जो कर लिया, कर लिया। इसके बाद आप तभी परफार्म कर सकते है, यदि आपने नए आइडिया वाले चेले बनाऐ हों, उन्हे लीडरशिप और डिसीजन मेकिग पॉवर देनी शुरू कर दी हो। और खुद बाबा बनकर, दोनो हाथ उठाये, बस आशीर्वाद दे रहे हो। ऐसे मे उनकी उपलब्धियां होती है, जो भले ही आपके नाम पर चढती रहती है। यह बात अपने अनुभव से बोल रहा हूं। ●● पर यह बेहद कठिन काम है। इसके लिए इगो को किनारे कर, सत्ता मे होते हुए भी दूसरे की बौद्धिक सत्ता स्वीकारनी पडती है। इसे करने की काबिलियत को पैमाना बनाऐं, तो प्रधानमंत्री मोदी .. दुनिया की लाइन खडे़ आखरी शख्स होंगे। उनमे बेशुमार उर्जा जरूर बची होगी, क्योकि 12 साल उन्होने सत्ता बेफिकरी से चलाई। सिर्फ चुनाव की टेंशन ली, जिसकी जिम्मेदारी भी अब ज्ञानेश कुमार सम्हाल चुके है। ऐसे मे उन्हे तो थकान महसूस नही होगी। पर उनकी सत्ता का जुआ कंधे पर धरे, भारतीय अर्थव्यवस्था का हर सेक्टर थक चुका है। ●● सबके साथ-सबके विकास, मेक इन इंडिया, 40 रूपये का डॉलर, चीन को लाल आंख, किसान की आय दोगुनी वगैरह आदर्शवादी स्वप्न तो वे 2018 आते आते त्याग चुके थे। अब उनके किस जुमले को उनके अपने समर्थक और दल के लोग भी सीरीयस नही लेते। अपनी आइपीएल टीम को जिताने के लिए वे भले ही मेहनत कर लेते है, लेकिन मोदी जी के प्लान, उनकी जिंदगियां बदल देगे, किसी को यकीन नही। ऐसे मे उनके मन के बड़े बड़े प्लान, और देश के लिए और भी कुछ करने की इच्छा, भयावह खबर है। ●● जो उन्होने 12 साल किया, एक सदी के लिए काफी है। भारत की जनता की करबद्ध सदिच्छा है कि 2027 मे वह राष्ट्रपति बनकर अगला 5 साल और सुरक्षित कर लें। और भारत किसी नई लीडरशिप सौंप दें। चाहे वह फिलवक्त जितना भी बदनाम और खराब होने की वजह से आपकी पाटी का दुलारा क्यो न हो। क्येाकि नए आदमी मे एक अपरिष्कृत उत्साह होता है। जब कोई व्यक्ति पहली बार किसी पद पर आता है - नेता बनता है, अधिकारी बनता है, या किसी कम्पनी/संस्थान की जिम्मेदारी संभालता है, उसके पास कुछ तो आइडियाज होते है..
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vivek jain
vivek jain@Drvivekjain14·
मुझे लगता है कि जाती जनगणना भी एक खाना पूर्ति है ,परिणाम व निष्कर्ष नागपुर में पहले ही तैयार हैं ।ना जाती ,धर्म ,आय पूछ रहे हैं ,बस एक सवाल घर में कितने लोग हैं । संभावित परिणाम -मुसलमानों की आबादी बढ़ गई है ।लगभग सारा देश ग़रीबी रेखा से ऊपर आ गया है ,शिक्षित हो गया है ।बाक़ी चुनावों के अनुसार ।@AnumaVidisha @LambaAlka @watchsandesh @AskThePremKumar @skjain_05 @AmitYji127 #censes
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sandeshhindinews@watchsandesh·
@RebornManish लाल किला, ताजमहल... सब कतार में हैं!
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
सन 1480 की बात है। एसक्विलाइन हिल की ढलान पर एक लड़का चल रहा था। अचानक पैर किसी दरार में धंसा और वह एक गार में गिर गया। ●● अंधेरे में उस अजीब गुफा को देखा। किसी महल का कमरा लगता था। दीवारें और छतें रंग-बिरंगी फ्रेस्को पेंटिंग्स (भित्तिचित्र) से भरी हुई थीं। उस समय कोई नही जानता था कि यह नीरो का डोमस अरिया (स्वर्णमहल) है। खबर फैली, और रस्सियों के सहारे कई लोग घुसे। इसमे महान पेंटर रफाएल और माइकल एंजलो भी थे। कहते है कि वेटिकन के सिस्टीन चैपल में बनी महान फ्रेस्को पेंटिंग्स की प्रेरणा.. माइकल एंजलो को वहीं से मिली। ●● इस घटना के डेढ़ हजार साल पहले, एक शाम नीरो बांसुरी बजा रहा था। बाहर रोम धू धू करके जल रहा था। 14 में से 10 डिस्ट्रिक्ट तबाह हो गए। लाभ यह हुआ, कि इससे रोम के बीच शहर में खूब सारी जगह खाली हुई। नीरो को नए महल के लिए बस उतना ही स्थान चाहिए था। शुभ मुहूर्त देखकर, उसने उसने "डोमस अरिया" का शिलान्यास किया। ●● यह प्रोजेक्ट, पैलेटाइन से एसक्विलाइन पहाड़ी तक फैला हुआ था। इसमें 120 फीट ऊंची नीरो की विशाल कांस्य प्रतिमा थी। एक मील लंबा तिपहला पोर्च था। समुद्र जैसी कृत्रिम झील थी, उसमे बड़ी बड़ी बोट थी। झील के किनारे और बड़े भवन थे, जिसमे नीरो का नया सेकेट्रियट होता। साथ मे 300 एकड़ का बाग, खेत, बाग, जंगल, जानवर। सोने, जवाहरात, मोती से सजी दीवारें। छत पर घूमने वाला गोल डाइनिंग रूम, फूल और इत्र बरसाने वाली छतें। और हां, दीवारों पर स्वर्ण जटित महंगी फ्रेस्को पेंटिंग्स। ●● नीरो का गरीबखाना इतिहास में दर्ज है। खुद तो पर 4 साल बाद ही आत्महत्या कर गया। महल के बड़े हिस्से अधूरे रहे, एक हिस्सा गिराकर कोलोसियम बना दिया गया। लेकिन इस महल को रोमन माइथोलोजी में जगह मिल गई। तानाशाह अक्सर महान निर्माण करते हैं। बड़ा, विशालकाय, लोगों को डरा देने वाला। यही नीरो ने किया, मुसोलिनी ने किया, यही हिटलर ने। इसमे से कुछ भवन, समय के साथ मास्टरपीस बन जाते है। वे माइकलएंजेलो जैसे कलाकारों को कालजई कृति बनाने की प्रेरणा देते हैं। ●● भारत मे भी नई राजधानी बनी है। राजा के लिए सेवा का नया तीर्थ बना है। जिसे पहले 7 घुड़दौड़ मार्ग का बंगला कहते थे। यहां पहले ही 5 से 10 नम्बर के सारे बंगले, 7 नम्बर में विलीन हो चुके हैं। कई कई एकड़ के बंगले हैं, लेकिन अब यह गरीबखाना छोटा पड़ रहा है। उसे देश के बढ़े हुए सम्मान के अनुरूप विस्तार चाहिए। और ज्यादा जमीन चाहिए। तो पैलेस से लगी हुई एक लम्बी चौड़ी प्रॉपर्टी है- जिमखाना क्लब। ●● एकाएक सोशल मीडिया पर आग लगी है। लोग बाग बता रहे हैं, कि यह अंग्रेज अफसरों की अय्याशी का अड्डा था। हमारी गुलामी का दाग है, इसका हटना जरूरी है। ठीक भी है। आधुनिक युग मे नीरो की तरह, पुरातन तरीको से जगह खाली नही करना ठीक नही। आग सोशल मीडिया पर ही लगाना उचित है। जिससे इतना प्रोत्साहन पैदा हो, कि सारे देशभक्त खुद हथौड़े डंडे लेकर जाए, और 1992 की तरह ढांचा गिराकर जगह खाली करवा दे। "महल वहीं बनाएंगे" ●● देश के कोने कोने से जो लोग, इस पुनीत काम मे, जत्था बनाकर जायें, तो याद दिला देना चाहता हूँ। वहीं आसपास और भी गुलामी की निशानियां मौजूद हैं। एक ठो इंडिया गेट है वहां। इस पर अंग्रेजो के लिए, विदेशो में जान देने वाले, 2200 गुलामो के नाम खुदे हैं। करेले पर नीम चढ़ा यह- कि इसमे 70% मुसलमान नाम हैं। दूसरी तरफ वाइसराय का पैलेस भी है।आजकल उसमें हमारे राष्ट्रपति रहते जरुर है, लेकिन है तो औपनिवेशिक काल की निशानी। बीच मे नार्थ और साउथ ब्लॉक भी हैं दोस्तो। अंग्रेज सरकार और उसके सेवक राज करते थे यहां से। लार्ड हार्डिंग ने बनवाया था। गुलामी के धब्बे है ये सब। याद दिला रहा हूँ कि जब आप लोग जाएं, तो इकट्ठे ही देख लें। बार बार टिकट कटाकर कारसेवा करने क्यो ही जाएंगे? ●● लेकिन फिर जो महल बने, वह मास्टरपीस होना चाहिए। जयपुर जोधपुर छोड़िये, वर्साय और पीटरहॉफ पानी मांगने लगे। व्हाइट हाउस शर्म से मुंह झुका ले। और ऐसा सुसज्जित हो, कि 1500 साल बाद कोई माइकल एंजलो उसके खण्डहर देखे, तो प्रेरित होकर- सेंट पीटर्स कैथड्रल और सिस्टीन चैपल जैसा मास्टरपीस बना दे। आखिर हमारे बादशाह का नाम, और उसके अमृतकाल की कम से कम- एक उपलब्धि तो यादगार होनी ही चाहिए।
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vivek jain
vivek jain@Drvivekjain14·
मोदी जी को ज्ञानेश गुप्ता की रहनुमाई में ,अंध भक्तों पर पूर्ण विश्वास है चाहे मोदी जी की मार से तेल निकल जाये,लेकिन आयगा तो मोदी ही ।इसे कहते हैं ,जान जाये पर भक्ति न जाए ।@watchsandesh @AskThePremKumar @skjain_05 @AnumaVidisha @LambaAlka
Lutyens Media@LutyensMediaIN

देश में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल की कीमतों में 2.61 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। 10 दिनों में करीब 7.50 रु प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

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vivek jain
vivek jain@Drvivekjain14·
आज ,रविवार ,दिनाक ,24.5.26 ,सायं 5 PM से 6 PM के बीच चक्करों (VERTIGO)की आम समस्या के बारें में महत्वपूर्ण जानकारी सुप्रसिद्ध ENT रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण गोयल (MS)से लें ,समस्याओं का निशुल्क समाधान करें ।#healthplanet #healthlink #HealthTips #sunday #SundayMotivation @health_com_ @MensHealthMag @WomensHealthMag @DailyHealthTips @MoHFW_INDIA @bbchealth @watchsandesh @AskThePremKumar @skjain_05 #vertigo
vivek jain@Drvivekjain14

देशभर में क्यों बढ़ रहे हैं वर्टिगो (Vertigo) के मामले? क्या है इसका असल... youtube.com/live/8PC0urnAZ… via @YouTube

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A.K. Stalin
A.K. Stalin@iamAKstalin·
न कोई फूल, न कोई खुशबू, ना कोई रौनक, उस पर कांटों की ज़हालत नहीं देखी जाती..! हमने खोली थी इसी बाग में अपनी आंखें हमसे इस बात की हालत नहीं देखी जाती ।।
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sandeshhindinews@watchsandesh·
@awesh29 दुःखद। राजेश अवस्थी विनम्र, सजग, शांत, कर्मठ और ईमानदार व्यक्ति थे। यह समाचार दिल दहलाने वाला है। मुझे अफसोस है कि मेरे सहकर्मी रहे व्यक्ति के दुखद अंत का समाचार आपसे मिल रहा है। विनम्र श्रद्धांजलि।
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Awesh Tiwari
Awesh Tiwari@awesh29·
मोदी सरकार की गोद में बैठे दैनिक जागरण और उनके मालिकान का ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की हनक और पत्रकारों को गोजर, कॉकरोच, केंचुआ समझने का नतीजा सामने हैं। मेरठ के पत्रकार राजेश अवस्थी ने छंटनी के बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह उनका ही शव है। खुद को विश्वक नंबर एक अखबार कहने वाला दैनिक जागरण शायद एक कॉलम की खबर भी न छापेगा। मुझे खुद पर धिक्कार है कि मैंने ऐसे निर्लज्ज अखबार के साथ कभी काम किया है। यह एक नंबर के भ्रष्ट और संवेदनहीन लोगों का ठिकाना है।
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vivek jain
vivek jain@Drvivekjain14·
कॉकरोच आंदोलन एक बहुत ही भ्रमित करने वाली घटना है ,लेकिन एक संदेश स्पष्ट है कि युवा गुस्से में है ,जहाँ उसे उम्मीद मिलेगी जुड़े गा ।राहुल गांधी जी ने काफ़ी हद तक युवाओं को जागृत किया है ।कांग्रेस का काम है ,कॉकरोचों को अपने साथ जोड़े ,ना कि मुंह मोड़े ।विनोद जाखड़ नें बिल्कुल सही किया,यही समय की माँग है ।@VinodJakharIN @UdayBhanuIYC @Pawankhera @LambaAlka @AskThePremKumar @watchsandesh @skjain_05
VINOD JAKHAR@VinodJakharIN

NEET पेपर लीक लाखों युवाओं के सपनों की हत्या है… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा और NTA जैसी भ्रष्ट संस्था पर तत्काल प्रतिबंध लगाना होगा। जब तक लाखों छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, हमारा संघर्ष रुकने वाला नहीं है। हम हर छात्र की आवाज़ बनकर पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे। 📍विरोध मार्च,सीकर #NEETPaperLeak #JusticeForNeetStudents #SackDharmendraPradhan

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sandeshhindinews@watchsandesh·
@AshishSinghKiJi दिबांग के पास भाषा है लेकिन साथ में भाषा का दुरूपयोग भी! इस बार डायवर्जन के लिए कॉक्रोच आया है! क्या नागपुर का नया परजीवी मॉडल है #CJP सवाल तो बनता है लेकिन उत्तर के लिए कुछ दिन इंतजार कीजिए!
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Ashish Singh
Ashish Singh@AshishSinghKiJi·
Tereko itna serious koi te nhin!
Dibang@dibang

अब #CockroachJantaParty की जगह क्यों आया @CockroachIsBack? क्यों है कॉकरोच जनता पार्टी की इतनी पकड़? राहुल गाँधी कुछ-का-कुछ क्यों बोल जाते हैं? उनकी समस्या क्या है? सत्ता पक्ष की बदजुबानी की वजह क्या है? 2014 के बाद GDP growth में हमारा कौन सा स्थान है? Per capita GDP growth में हम कहाँ? Per capita growth in US dollar में हमारी position क्या है? FDI को लेकर सरकार ने 2015 के बाद कौन सा बड़ा बदलाव आया? उसका क्या असर हुआ? लगातार 7 सात साल से क्यों गिर रहा है रूपया? कुल मिलकर पिछले दस साल में कितने पेपर लीक हुए? कौन ज़िम्मेदार? किस पर पड़ी सबसे ज्यादा मार? आपकी राय ज़रूर बताएं होगी बात

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sandeshhindinews@watchsandesh·
सत्यमेव जयते। अंत में सत्य की ही विजय होगी।
Ajay Shukla अजय शुक्ल اجے شکلا@AjayShuklaIN

एक और सम्मान का तमगा...! अगर गद्दारों को "गद्दार" कहना जुर्म है, तो मैंने यह जुर्म किया है! हमारे महान, गोबर दिमाग अंधभक्तों के "पप्पा" @narendramodi ने अपने एक पालतू मीडिया हाउस के मालिक @Kartiksharmamp के ज़रिए @RahulGandhi के खिलाफ एजेंडा चलाने का दबाव बनाया गया, जिससे इंकार के चलते 2021 में इंडिया न्यूज समूह के प्रधान संपादक की नौकरी छीन ली गई। कार्तिकेय शर्मा को इनाम में हरियाणा में अवैध तरीके से @ajaymaken जी को हराकर राज्यसभा सौंप दी गई। - 2022 में, समूह संपादक की एक और नौकरी छीन ली गई। - 2023 में, मुझे एक और बड़े मीडिया संस्थान में परामर्श संपादक की नौकरी मिली—वह भी छीन ली गई। - 2023 में, मेरी पत्नी की नौकरी भी छीन ली गई। - उसी साल—2023 में—सरकार द्वारा नियमों के तहत आवंटित सरकारी आवास भी मुझसे बिना मेरी बात सुने ही ज़ब्त कर लिया गया, जिसके लिए पत्नी 2034 तक अनुमन्य थी। - 2024 में, स्मृति ईरानी ने मेरे ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई। - 2025 में—भारत के इतिहास में पहली बार—सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन जजों की एक बेंच ने पहली किसी एक पत्रकार-संपादक के खिलाफ *स्वतः संज्ञान* (suo motu cognizance) लिया और मुझे आपराधिक मानहानि का दोषी ठहरा दिया। - 2026 में, मेरे परिवार को परेशान करने की नीयत से, मेरे, मेरी पत्नी और हमारी दो बेटियों के बैंक खाते—केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर—एक साइबर क्राइम की शिकायत के आधार पर, तीन महीने से अस्थायी तौर पर फ्रीज़ कर दिए गए हैं। - 2026 में ही, मेरी बेटी को दुनिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला, लेकिन उसका पासपोर्ट और ज़रूरी दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए। - मई 2026 में—एक बार फिर, भारत के इतिहास में पहली बार—प्रवर्तन निदेशालय (#ED) (मोदी और शाह की पालतू एजेंसी) की एक टीम एक पत्रकार (जो किराए के मकान में रहता है) के घर पहुँची और उसे एक नोटिस थमाते हुए पूछा: "बताइए कि इन सब मुश्किलों से गुज़रने के बाद आप अपने ख़र्चे कैसे चला रहे हैं? अपनी आय और व्यय (आमदनी और ख़र्च) से जुड़ा सारा ब्योरा लेकर हमारे सामने पेश हों।" निश्चित रूप से मुश्किलें हैं, लेकिन मुझे इस बात का एहसास होने पर असीम आनंद मिला है कि तानाशाह, आखिरकार, मुझ जैसे सच बोलने वाले पत्रकार से इतना ज़्यादा डरा हुआ है... इसने मेरे इस विश्वास को और मज़बूत कर दिया है कि मैं सचमुच पत्रकारिता के पवित्र कर्तव्य का पालन कर रहा हूँ। अब हम जीतेंगे या शहीद बन जाएँगे मगर हार नहीं मानेंगे! जय हिंद! सत्यम शिवम सुंदरम...! @priyankagandhi @kharge @kcvenugopalmp @Jairam_Ramesh @Pawankhera @SupriyaShrinate @vidyarthee @INCIndia @DrAMSinghvi @DrJaihind @pbhushan1 @VineetPunia @PCITweets @UN @TusharG @INCHistory @HistoryCell #SeedhaSawaal #NTA #NEETExam #OSM #cbseresults #PMModiinItaly

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sandeshhindinews
sandeshhindinews@watchsandesh·
बेहतरीन लिखा है आपने
Manish Singh@RebornManish

राजीव का अखण्ड भारत!!! अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव- सात देश। मगर एक वीजा, एक मुद्रा, बाधाहीन व्यापार लोगो का आना जाना मुक्त कार्य, व्यापार, सेवाएं मुक्त अपने अपने स्टेट की अपनी सरकारें हो, जैसे तमिलनाडु और बंगाल में हैं। पर एक दूसरे की सहयोगी हो। यही सार्क का विजन था। किसी महादेश के और क्या लक्षण होते हैं। ●● सार्क का गठन EU की तर्ज पर हुआ। वक्त के साथ एक एक कदम बढ़ाते यूरोपियन देश, एक साझा यूरोप बना चुके है। उनकी एक मुद्रा, यूरो है। मुक्त व्यापार है। सीमाओं पर बड़ी ऊंची इलेक्ट्रिक फेन्स नही, और न गश्त करते जवान। हाइवे पर जहां देश बदलते है, वहां टोल नाकों की तरह नाके है बस। ग्रामीण इलाकों में तो कोई सीमा ही नही। आप एक देश के गांव मे सब्जी उगाइये। चार किमी दूर, दूसरे देश के कस्बे में बेच आइये। ●● एक पास लीजिये, यू-रेल पास कहते है, पूरा यूरोप घूमिए। एक वीजा, शेन्ज़ेन 27 देशो में मान्य हैं। फ्रांस से वीजा लीजिये, इटली, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड घूमते हुए, जर्मनी से वापसी कीजिये। न कांटेदार फेन्स, न नफरत और पैर पटकते, मुंह चमकाते सैनिक.. सीमाएं फांदते आपको लगेगा नही, कि ये देश एक दूसरे के खिलाफ, मानवता का सबसे भीषण युध्द लड़ चुके हैं। ●● 1985 में सार्क बना था। राजीव ढाका पहुंचे थे। और सार्क का डिटेल विजन दिया था। सबसे बड़े देश के पीएम होने के नाते राजीव का बड़प्पन ही सार्क की नींव था। बड़े की भूमिका को उन्होंने निभाया भी। पड़ोसी देशों को फेवरेबल डील दी, इन्वेस्टमेंट दिया, ग्रांट दी। सार्क का मुखिया नेपाल को बनाया। सबको प्यार, इज्जत दी। उनकी पकड़, और हिंदुस्तान का वकार बढ़ता गया। हर देश संकट में नई दिल्ली की ओर देखता। मालदीव में सेना भेजकर उन्होंने गयूम की सरकार को तख्तापलट से बचाया। तो श्रीलंका में शांति सेना भेजी, जिस वजह से उनकी जान भी गयी। ●● राजीव के बाद सार्क धीमी गति से आगे बढ़ा। कारगिल, एटम बम, ऑपरेशन पराक्रम, बंगलादेश से सीमा विवाद आदि से सार्क बेदम हो गया। लेकिन मनमोहन के समय सार्क को फिर गति मिली। फ्री ट्रेड के कई एग्रीमेन्ट हुए। SAFTA फ्री ट्रेड जोन बना। SAF गेम्स होते थे। ●● मगर अंततः सार्क का मलीदा निकल गया है। दरअसल,परिवार जब बड़ा होता है, सबको स्पेस की जरूरत होती है। संयुक्त परिवार की सफलता का राज म्यूचुयल रिस्पेक्ट है। परिवार का सबसे बड़ा बन्दा, हेकड़ी और अहंकार दिखाने लगे, परिवार की हर बैठक में औरो को चाकर समझे। छोटों की संपत्ति, भूमि, बहू बेटियों पर निगाह रखे, जलील करे, सुपीरियरिटी झाड़े.. तो परिवार भी संयुक्त रह नही सकता। ●● सार्क, जो अखण्ड भारत का संयुक्त परिवार था, पाकिस्तान भारत के झगड़ों, और अब मोदी सरकार के अहंकार का शिकार होकर वहां नही पहुंच सका, जहां यूरोपियन यूनियन जा चुका। आज मिलकर यूरोपियन स्पेस एजेंसी बना चुके हैं। डॉलर से ज्यादा कीमत उनकी संयुक्त मुद्रा की है। ●● यह सब इसलिए कि सब एक दूसरे की इज्जत करते हैं। जर्मनी फ़्रांस इसके युधिष्ठिर भीम हैं, बाकी बराबर के भाई। एक सँयुक्त परिवार। यूरोपियन पार्लियामेंट भी है। ब्रिटेन भी मेम्बर था, पर अपने राष्ट्रवादी नेताओ के चक्कर मे एग्जिट कर गया। उसके बाद से ब्रिटेन के हालात गम्भीर हैं। राष्ट्रवादियों की हालत सांप छछूंदर है। ब्रिटेन जिसे इस संघ का सबसे ज्यादा लाभ था, अपने अहंकार का फल भुगत रहा है। और हम भी.. ●● सार्क का मुख्यालय आज भी काठमांडू में है। पर काठमांडू हमें आंख दिखा रहा है। बाग्लादेशी तो सब घुसपैठिये हैं। मालदीव ने आपका मिलिट्री अड्डा उड़खवा दिया। भूटान, इंडिया को बाईपास कर चीन से सीधे डील कर रहा है। श्रीलंका चीनी अड्डा हो गया है। और पाकिस्तान से तो खैर, रोज सुबह शाम POK लेने की कसमें खाते जी रहे हैं।।रोज रात हमे पीओके में प्लाट के सपने आते हैं। हम पहाड़ियों, रन और रेगिस्तानों की बंजर भूमि के लिए बेटे कुर्बान करते रहे है। दरअसल हम दिल से कबायली है, जो कटने मरने को गौरव समझते हैं। ●● अब तो पाकिस्तान भी पलट कर बयान देने की जहमत नही उठाता। दोनो तरफ के टीवी एंकर और छुटभैये ही लड़ लेते हैं। दरअसल, मुसलमानो के प्रति अथाह नफरत, और छोटे देशो के प्रति हमारे घमंडी, बदतमीज डिप्लोमेसी ने, सार्क की हत्या करर दी है। उसकी लाश, हमारे आंगन में पड़ी है। ●● मगर ठीक से सार्क देशों का नक्शा देखिए। सार्क वही अखण्ड भारत, वह नाभि की कस्तूरी है, जिसे खोजने के लिए आप मशीन का गलत बटन दबा रहे हैं। भारत के लोगों, याद रखना। भारत अखण्ड अगर कभी बना.. तो दंगाई और गुंडा साइकोलॉजी से नही, मोहब्बत से, सलाहियत से , बड़प्पन से बनेगा। राजीव की राह पर चलकर बनेगा। 🙏❤️

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