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अत्यंत गंभीर कानूनी शिकायत एवं सार्वजनिक चेतावनी
वक्फ कब्रिस्तान भूमि पर संगठित कब्ज़ा, दिखावटी तोड़फोड़, और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप
सेवा में,
माननीय संबंधित अधिकारीगण,
विषय: अदिच्छिनी गांव, दक्षिण दिल्ली में वक्फ कब्रिस्तान भूमि पर जारी अवैध बहुमंजिला निर्माण, अधूरी ध्वस्तीकरण कार्रवाई, प्रशासनिक मिलीभगत, तथा तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग।
महोदय,
अब यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं रह गया है।
यह एक संगठित भूमि घोटाला प्रतीत हो रहा है, जिसमें भूमाफिया, भ्रष्ट अधिकारी और जिम्मेदार संस्थाओं की चुप्पी मिलकर वक्फ कब्रिस्तान की पूरी जमीन को धीरे-धीरे खत्म कर रही है।
जो “डिमोलिशन” किया गया, वह वास्तविक कार्रवाई कम और सिर्फ खानापूर्ति (Cosmetic Demolition) ज्यादा लग रहा है।
बाहर से देखने पर इमारतें लगभग वैसी की वैसी खड़ी हैं। मूल ढांचा सुरक्षित है। अतिक्रमण जड़ से खत्म नहीं किया गया।
ऐसा प्रतीत होता है कि:
- पहले अवैध निर्माण होने दिया गया,
- फिर शिकायतों के दबाव में हल्की कार्रवाई दिखाई गई,
- और अब पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल:
DM कार्यालय कब पूरी कार्रवाई करेगा?
MCD, DDA और Waqf Board आखिर कब जागेंगे?
या फिर सच यही है कि “सेटिंग” के कारण सब कुछ जानबूझकर रोका जा रहा है?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है और इसी कारण पूरी कार्रवाई नहीं हो रही।
बताया जा रहा है कि इन अवैध फ्लैटों की कीमत लगभग ₹75 लाख से ₹80 लाख प्रति फ्लैट तक रखी जा रही है — जबकि जमीन खुद वक्फ कब्रिस्तान की बताई जा रही है।
यदि यह सत्य है, तो यह केवल अतिक्रमण नहीं बल्कि:
- धार्मिक संपत्ति की लूट,
- सरकारी तंत्र का दुरुपयोग,
- और कानून का खुला मजाक है।
अत्यंत चिंताजनक आरोप:
यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ बिल्डर कह रहे हैं:
“फ्लैट केवल मुसलमानों को दिए जाएंगे, हिंदुओं को नहीं।”
यदि ऐसा है, तो यह:
- संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन,
- धर्म आधारित भेदभाव,
- और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला मामला है।
एक सीधा प्रश्न:
क्या कोई हिंदू श्मशान घाट की जमीन पर अवैध बिल्डिंग बना सकता है?
यदि नहीं, तो कब्रिस्तान की जमीन पर यह सब कैसे हो रहा है?
कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
चाहे श्मशान हो या कब्रिस्तान —
धार्मिक भूमि पर अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन से सवाल:
- अधूरी कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?
- पूरा ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया गया?
- वक्फ बोर्ड अब तक चुप क्यों है?
- क्या अधिकारियों पर राजनीतिक या आर्थिक दबाव है?
यदि जिम्मेदार संस्थाएं अपनी ही जमीन नहीं बचा पा रहीं, तो यह उनकी सीधी प्रशासनिक विफलता है।
हमारी सख्त मांगें:
1. सभी अवैध निर्माणों का पूर्ण ध्वस्तीकरण किया जाए।
2. वक्फ कब्रिस्तान भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
3. बिल्डरों, कब्जाधारियों और संबंधित अधिकारियों पर FIR दर्ज हो।
4. SDM, MCD, DDA और Waqf Board की भूमिका की जांच हो।
5. STF/Vigilance द्वारा स्वतंत्र जांच कराई जाए।
6. धर्म आधारित फ्लैट बिक्री के आरोपों की जांच हो।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से विशेष निवेदन
@gupta_rekha जी,
यदि आपकी सरकार सच में अवैध कब्जों के खिलाफ है, तो इस मामले में केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि जड़ से सफाई होनी चाहिए।
कब्रिस्तान की जमीन को पूरी तरह मुक्त कराया जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
जनता अब सिर्फ नोटिस और दिखावे नहीं, बल्कि वास्तविक न्याय चाहती है।
अंतिम चेतावनी:
यदि इस मामले में अब भी केवल खानापूर्ति की गई, तो यह मुद्दा:
- उच्च न्यायालय
- लोकायुक्त
- केंद्रीय सतर्कता आयोग
- और राष्ट्रीय स्तर पर जनहित मामले के रूप में उठाया जाएगा।
यह सिर्फ जमीन नहीं —
कानून, आस्था, प्रशासनिक ईमानदारी और जनता के विश्वास का मामला है।
अब चुप्पी नहीं चलेगी।
जनता सब देख रही है।
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