ERO 46-Kithore

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Kithore, District Meerut Katılım Ağustos 2025
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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा जी द्वारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के संबंध में 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मध्याह्न 12 बजे से लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर, लखनऊ में प्रेसवार्ता की जाएगी। youtube.com/live/0ftaH_D3I…
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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
सामान्य निवास और स्थाई निवास में अंतर है। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण में ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किसी निर्वाचक की मैपिंग न होने पर उसको नोटिस मिलने पर जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में स्थाई निवास प्रमाण पत्र तो है परंतु सामान्य निवास प्रमाण पत्र नहीं है।इसलिए सामान्य निवास प्रमाण पत्र मान्य नहीं है।
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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
फ़ॉर्म 6 भरते समय जन्मतिथि एवं आवासीय पते के साक्ष्य के रूप में आधार कार्ड मान्य है। जन्मतिथि के साक्ष्य के रूप में आधार कार्ड के अलावा भी पाँच अन्य विकल्प उपलब्ध है जिनमें से भी कोई एक दस्तावेज़ साक्ष्य के रूप में मान्य होगा इसी प्रकार आवासीय पते के साक्ष्य के रूप में आधार कार्ड के अलावा छह अन्य विकल्प उपलब्ध है जिनमें से भी कोई एक दस्तावेज़ी साक्ष्य के रूप में मान्य होगा। इन सारे दस्तावेज़ी विकल्पों की लिस्ट फ़ार्म 6 में ही दी गई है। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण यानी SIR में फ़ॉर्म 6 भरते समय नयी बात यह है कि फ़ॉर्म 6 के साथ एक घोषणा पत्र भी देना है जिसमें आवेदक को विगत विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण 2003 की अंतिम मतदाता सूची में स्वयं का अथवा स्वयं के माता पिता दादा दादी नाना नानी में से किसी एक व्यक्ति का नाम खोज कर उसकी सूचना घोषणा पत्र में भरनी है। यदि आप यह कर लेते हैं तो फिर बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ी साक्ष्य के आपका नाम मतदाता सूची में जुड़ जाएगा। यदि फ़ॉर्म 6 भरते समय आवेदक घोषणा पत्र में 2003 की अंतिम मतदाता सूची में से स्वयं का अथवा अपने माता पिता दादा दादी नाना नानी में से किसी एक व्यक्ति का भी नाम नहीं खोज पाता है तो आवेदक को ERO द्वारा एक नोटिस दिया जाएगा। नोटिस का प्रारूप वही होगा जो कि गणना चरण के दौरान गणना फ़ार्म में स्वयं का अथवा अपने माता पिता दादा दादी नाना नानी में से किसी एक व्यक्ति का भी नाम नहीं दर्ज करने वाले मतदाताओं को दिया जा रहा है और नोटिस पर दिए गए दस्तावेजों की सूची में से आवेदक को दस्तावेज़ी साक्ष्य देना होगा। दस्तावेज़ी साक्ष्य देने पर आवेदक का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा।
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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
मतदाता के वोटर ID कार्ड (EPIC) के साथ उसका मोबाइल नंबर जोड़ना बहुत ही आसान है और घर बैठे ही मिनटों में इस काम को किया जा सकता है। वोटर ID कार्ड के साथ मोबाइल नंबर जोड़ने के निम्नलिखित फ़ायदे हैं। १. अगर आप फ़ॉर्म 6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं और फ़ॉर्म 6 भरते समय आपने फ़ॉर्म में अपना मोबाइल नंबर भरा है तो आपका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ते ही (लगभग दस पंद्रह दिन में) अपना e-EPIC (वोटर ID कार्ड) डाउनलोड कर सकते हैं। प्रिंटेड वोटर ID कार्ड डाक विभाग के माध्यम से आपके आवासीय पते पर भेजा जाता है जिसमें कई बार समय लग जाता है। २. जब जब आप ज़रूरत समझें तब तब और जितनी बार चाहे उतनी बार अपना e-EPIC घर बैठे ही डाउनलोड कर सकते हैं। ३. वोटर लिस्ट तथा वोटर ID कार्ड ( EPIC) में आपके विवरण में विद्यमान् त्रुटियों को घर बैठे ही ऑनलाइन फ़ॉर्म 8 भरकर त्रुटियों को ठीक करने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। ४. ECINET mobile ऐप तथा electoralsearch.eci.nic.in website पर voter ID से जुड़ा मोबाइल नंबर डालकर अथवा वोटर आयी कार्ड पर बने QR कोड को स्कैन कर जब चाहें तब कुछ ही सेकेंडों में अपना पोलिंग स्टेशन नंबर और मतदाता सूची में अपना क्रमांक तुरंत ज्ञात कर सकते हैं। वोटर ID कार्ड के साथ मोबाइल नंबर जोड़ने की प्रक्रिया संलग्न चित्रों से स्पष्ट हो जाएगी। यह प्रक्रिया चंद मिनटों में पूरी की जा सकती है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही सैकंडों में मोबाइल नंबर आपके वोटर ID कार्ड से जुड़ जाता है। @ECISVEEP
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CEO Uttar Pradesh@ceoup

5-10 मिनट ही लगते हैं

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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
आज शाम 5 बजे तक उत्तर प्रदेश के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर BLO ड्राफ्ट मतदाता सूची के साथ उपस्थित है।उसके पास पर्याप्त संख्या में फ़ॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र भी उपलब्ध है। सभी उत्तर प्रदेश वासियों से आग्रह है कि आज अपने अपने बूथ पर जाकर उपलब्ध ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जाँच लें और यदि आपका नाम उसमें नहीं है फ़ॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र भरकर BLO को दे दें जिससे अंतिम मतदाता सूची में आपका नाम अवश्य आ जाए। यदि ड्रॉफ्ट मतदाता सूची में आपका नाम है परंतु आपके विवरण में त्रुटियां है तो फ़ॉर्म 8 भरकर BLO को दे दें जिससे वो त्रुटियां ठीक हो जाएं।
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DEO DEOGHAR
DEO DEOGHAR@DeogharPrd·
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने बीएलओ के साथ संवाद कार्यक्रम में देवघर के तपोवन स्थित श्री श्री मोहनानंद +2 विद्यालय में जिले के विभिन्न विधानसभा के बीएलओ से मुलाकात की एवं उनका हौसला बढ़ाया। @ECISVEEP @ceojharkhand @DCDeoghar
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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
आपकी पोस्ट के बिन्दु संख्या 2 के बारे में यह कहना है कि जब आपका नाम नई जगह की वोटर लिस्ट में जुड़ा ही नहीं है तो आपका नाम दोनों जगहों से काटने की बात कहना सही नहीं है। जिस नई जगह आप शिफ़्ट किए हैं उस घर के पते को डालकर आप फ़ॉर्म 6 भर सकते हैं । आपकी जैसी ही स्थिति में और लोग भी हो सकते हैं । उनके द्वारा भी यही प्रक्रिया का पालन किया जाना अपेक्षित है। SIR का प्रारंभिक चरण ही पूरा हुआ है।SIR का रिज़ल्ट तो फ़ाइनल वोटर लिस्ट होगी। यह फ़र्क नहीं पड़ता कि आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आया था की नहीं आया । फ़र्क इस बात का पड़ेगा कि आपका नाम फ़ाइनल वोटर लिस्ट में हैं या नहीं।
Gurdeep Singh Sappal@gurdeepsappal

ये पब्लिक हित का मामला है इसलिए पढ़िए: 1. शिफ्ट हुए वोटर का नाम वोटर लिस्ट से काटने का मामला सिर्फ मेरा नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2.17 करोड़ नागरिकों का मामला है। 2. अगर पुराने पते से नाम काट कर नये पते पर जोड़ा जाता, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन समस्या ये है कि दोनों जगह से नाम काटा गया है। 3. नए पते पर नाम शिफ्ट करने का SIR में कोई प्रावधान नहीं है। 4, अब फॉर्म 6 भर कर नए वोटर के रूप में फिर से जुड़ सकते हैं, लेकिन ऐसा करते ही पुरानी वोटर लिस्ट से रिकॉर्ड अलग हो जाएगा। मेरे अपने मामले में पिछले 35 का रिकॉर्ड मिट जाएगा 5. रिकॉर्ड क्यों ज़रूरी है? इस बार के SIR में चुनाव आयोग ने उन्हें स्वतः असली वोटर और नागरिक माना है, जिनका नाम 2003 की लिस्ट में था। इसलिए रिकॉर्ड ज़रूरी है। 6. चुनाव आयोग से सवाल है कि ये क़रीब 15% वोटरों से जुड़ा मामला है। इसे EPIC नंबर से जोड़ कर आसान बनाया जा सकता है। पहले भी फॉर्म 8 भर कर कोई भी वोटर अपना वोट नए पते पर शिफ्ट कर सकता था। तो फिर SIR में ऐसा न करके सीधे सीधे नाम डिलीट करने का क्या औचित्य है?

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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
If any person wants to check whether his/her name exists in the draft voter list of UP in SIR-2026 published on 6th January, 2026, the process is simple. Please go to the web portal of CEO UP ceouttarpradesh.nic.in A pop up window titled Special Intensive Revision (SIR) -2026 opens up on main page of the portal. In this window, click the tab named “Search your name by EPIC number in draft electoral roll SIR 2026”. In the ensuing screen, type your EPIC number in the box titled EPIC number, type given Captcha and click tab named SEARCH. If your name exists in the draft voter list, the search result will give the details of the district, the Assembly Constituency, the polling station name and your serial number in that part of the voter list. If your name does not exist in the draft electoral roll of any Assembly Constituency in UP, then it will return with “No result Found”. Alternatively, Go to web portal electoralsearch.eci.gov.in and then search your name by typing your EPIC number in the box named EPIC number and click SEARCH after typing the given Captcha. The result will provide the details of your entry in the draft voter list,if your name is present in the draft voter list, otherwise it will display “No result Found”
Sanjeev Gupta@sanjg2k1

A QUICK TECH FIX TO BYPASS THE TEDIOUS MANUAL SEARCH IN SIR DRAFT ROLL–2026 Tired of manually scanning ~1,000 names in the SIR Draft Roll–2026 just to check whether your name exists? Here’s a simple workaround. 🔹 Download the PDF of the SIR–2026 Draft Roll for your Polling Station 🔹 Right-click → Open with the latest version of Google Chrome (Desktop/Laptop only) 🔹 Chrome magically makes the PDF searchable, even though the @SpokespersonECI had rendered it machine non-readable on almost all standard PDF readers, including Adobe. 👉 This means Ctrl + F works in Chrome, sparing you the eye-straining, page-by-page hunt. I am attaching screen recording. Trust me: I spent nearly 15 minutes manually scanning every page of the correct polling booth and still couldn’t find my name. This trick worked instantly. #GyaneshKumar certainly makes life “interesting” for those of us who enjoy pushing technology to its limits 😃 Background (Why this hack is needed): ✅ Since 2023, @ECISVEEP has been issuing Electoral Rolls in machine non-readable PDFs. As a result, searching names using Ctrl+F is disabled on most PDF readers. ✅ Shockingly, even EPIC numbers are not searchable in the SIR Draft Roll PDFs, arguably in violation of directions of the #SupremeCourtofIndia, making verification unnecessarily cumbersome. ✅ Searching by EPIC number or personal details on electoralsearch.eci.gov.in only gives the serial number in the existing Electoral Roll, which may not match the serial number in the SIR Draft Roll–2026, because: Some voters above you may not have submitted enrolment forms, or Their data could not be mapped till now with the 2002–03 SIR database. ✅ Opening the PDF in the latest Chrome (Desktop) solves this problem. ✅ For Indian language rolls (including Hindi), use a Unicode-enabled keyboard such as the Microsoft Indic Language Input Tool or similar. ⚠️ Note: This workaround works on a PC/laptop only. The mobile version of Chrome doesn’t support this yet, maybe a future update will. So, @JPNadda @kharge @MamataOfficial @mkstalin @RahulGandhi @pinarayivijayan may also want to run some quick data analytics using this very trick. Incidentally, there are simple and well-established tools through which such electoral roll PDFs can be made fully machine-readable. This is precisely what @nit_set and his team demonstrated while identifying over 14 lakh duplicate voters in #BiharSIR2025. In an era where data analytics, AI, and OCR tools are routine, it is difficult to comprehend why the Election Commission of India continues to insist on issuing non-searchable electoral rolls, by relying on a narrow interpretation of the Kamal Nath judgment (2018) on Electoral Rolls. Transparency, verifiability, and ease of access are core democratic values, not optional conveniences. Purity of electoral rolls must take precedence over individual privacy. After all, the Electoral Roll only has age and address. A democracy survives on one person–one vote, not on opacity disguised as data protection. Free and fair elections are a constitutional imperative and that requires a publicly verifiable Electoral Rolls. 🙏 @ceoup @CEOWestBengal @CEOChhattisgarh @CeoRajasthan @mangarg2002 @RawalRajdeep @ThePrintIndia @TNelectionsCEO may also want to have a look.

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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
गुरदीप जी धन्यवाद। आपने अपनी पोस्ट में आपके और आपके परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट से कटने का सही कारण भी बताया कि आप ग़ाज़ियाबाद से नोएडा शिफ़्ट कर गए हैं। BLO ने अपना कार्य सही ढंग से किया है जो आपका नाम ग़ाज़ियाबाद ज़िले की वोटर लिस्ट से काट दिया । आपको और आपके परिवार के सदस्यों को नोएडा ज़िले की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने हेतु फ़ॉर्म 6 भरना चाहिए। जिस प्रकार आप फ़ॉर्म 6 भर सकते हैं बिलकुल उसी तरह आपकी जैसी स्थिति में रहने वाले बाक़ी लोग भी फ़ॉर्म 6 भर सकते हैं और उन्हें फ़ार्म 6 भरना चाहिए। @ECISVEEP @gurdeepsappal
Gurdeep Singh Sappal@gurdeepsappal

उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट SIR वोटर लिस्ट प्रकाशित हो गई है। इसमें मेरा और मेरे परिवार का नाम ग़ायब है। जबकि: हमारे नाम 2003 की वोटर में शामिल थे। हमारे नाम पिछले चुनाव की वोटर लिस्ट में भी शामिल थे। हमारे माता-पिता के नाम भी 2003 की वोट लिस्ट में शामिल थे। हमने चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़ भी जमा कर दिए थे। हमारे पास पासपोर्ट, जन्म सर्टिफिकेट, आधार, बैंक खाता, प्रॉपर्टी पेपर, दसवीं के सर्टिफिकेट सभी कुछ है। मैं तो स्वयं भारत के उपराष्ट्रपति के साथ और राज्य सभा सचिवालय में जॉइंट सेक्रेटरी भी था। साथ ही कांग्रेस की सर्वोच्च कमेटी CWC का सदस्य हूँ। यही नहीं SIR और अन्य मुद्दों पर चुनाव आयोग में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी कई बार रहा हूँ। और ये सब BLO भी जानते हैं। लेकिन फिर भी हमारे नाम ड्राफ्ट लिस्ट से कट गए! कारण: हमने अपना घर उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधान सभा से नोएडा विधान सभा शिफ्ट कर लिया था। और हमें बताया गया कि SIR में शिफ्ट हुए वोटरों का नाम बरकरार रखने का कोई प्रावधान नहीं है! मतलब, अगर किसी वोटर ने अपना घर किसी नए इलाके में बदल लिया है, तो उसका नाम काट दिया गया है। मेरे जैसे करोड़ों genuine वोटर हैं। मैं तो शायद फिर भी नया फॉर्म 6 भर कर अपने परिवार नाम जुड़वा लूंगा, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पायेंगे? यही है SIR की सच्चाई!

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CEO Uttar Pradesh@ceoup·
जैसे की विगत Tweet में अवगत कराया गया है कि 18000 व्यक्तियों के शपथ पत्रों ( Affidavits) के स्थान पर अभी तक केवल 3919 शपथ पत्रों की scanned copies ही email के माध्यम से प्राप्त हुई हैं । संभव हैं की email भेजते समय आपका कार्यालय 18000 के स्थान पर त्रुटिवश केवल 3919 शपथ पत्रों की scanned copies को ही विभिन्न attached folders में save कर पाया हो । अनुरोध है कि 18 हज़ार मतदाताओं के शपथ पत्र जिनके संबंध में आपकी पार्टी द्वारा ईमेल के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग को शिकायत की गई थी उन समस्त 18,000 शपथ पत्रों की मूल प्रतियाँ सुविधानुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के कार्यालय में अथवा संबंधित ज़िले के जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में अथवा संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को उपलब्ध कराने का कष्ट करें जिससे जाँच प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ सके। यह भी अनुरोध है कि आपके द्वारा हस्तगत कराए जाने वाले शपथ पत्रों की सूची पर संबंधित कार्यालय से हस्तगत कराए जाने के प्रमाण स्वरूप पावती (Receipt) अवश्य प्राप्त करें जिससे स्पष्ट हो सके कि आपके द्वारा दिए गए कितने शपथ पत्र संबंधित कार्यालय में किस तिथि को प्राप्त हुए। इस संबंध में आवश्यक निर्देश समस्त जिला निर्वाचन अधिकारीगण (DEOs) तथा समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारीगण (EROs ) को दे दिये गये हैं।
Samajwadi Party Media Cell@mediacellsp

2022 का पूरा विधानसभा चुनाव, सभी उपचुनाव भाजपा सत्ता की मिलीभगत, इशारे पर लूटे गए और धृतराष्ट्र की भांति चुनाव आयोग भाजपाई बेइमानी के मूक समर्थन में बेइमानियों में संलिप्त रहा। क्या कार्यवाही हुई उन 18 हजार से अधिक एफिडेविट और जनता द्वारा बयां की गई शिकायतों पर? उल्टा शिकायतकर्ताओं को धमकाने की सूचनाएं भी मिलीं जो कि बेहद शर्मनाक हैं। जनता का भरोसा चुनाव आयोग से पूरी तरह से उठ चुका है और जनता ने मान लिया है कि चुनाव आयोग भाजपा पार्टी का ही एक अंग है एवं चुनावी भाजपाई बेइमानियों का हिस्सा है।

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CEO Uttar Pradesh
CEO Uttar Pradesh@ceoup·
ईमेल (info@samajwadiparty.in ) द्वारा उत्तर प्रदेश के ज़िला चंदौली के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र 383-चकिया के कुल चार मतदाताओं के नाम ग़लत ढंग से काटे जाने की शिकायत अन्य शिकायतों के साथ (37 ईमेल प्राप्त हुए जिनमें 33 ज़िलों के 74 विधानसभा क्षेत्रों के 3919 मतदाताओं के शपथ पत्रों की scanned प्रतियां उपलब्ध हैं।) भारत निर्वाचन आयोग के माध्यम से प्राप्त हुई । 383-चकिया विधानसभा क्षेत्र से संबंधित शिकायत के साथ चारों मतदाताओं के शपथ पत्रों की scanned copies भी प्राप्त हुई । सर्वसाधारण को अवगत कराया जाता है कि उपर्युक्त शिकायत से संबंधित चारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बदस्तूर दर्ज हैं। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी 383-चकिया विधानसभा क्षेत्र ( जो उपजिलाधिकारी चकिया हैं) द्वारा सम्बंधित गाँव में जाकर मौक़े पर की गई जाँच में इन चारों मतदाताओं द्वारा अपना नाम ग़लत ढंग से काटे जाने की कोई शिकायत किए जाने और इस संबंध में कोई शपथ पत्र देने से स्पष्ट इंकार किया गया।
Akhilesh Yadav@yadavakhilesh

हक़ का गणित : 18000-14 = 17986 चुनाव आयोग से लेकर ज़िलाधिकारी तक और सीओ से लेकर लेखपाल तक सब जुगाड़ करने के बाद भी ‘भाजपा-चुनाव आयोग-ज़िलाधिकारी की तिकड़ी’ अभी तक, हमारे द्वारा दिये गये 18000 एफ़िडेविट में से सिर्फ़ 14 शपथपत्रों के बारे में ही, वो भी ‘आधी-अधूरी-निराधार’ सफ़ाई दे पायी है। 18000 हलफ़नामों में से 14 को कम भी कर दें तो भी 17986 का हिसाब बाक़ी है। यही है हक़ का गणित। न चलेगी हक़मारी, न मतमारी इस बार PDA सरकार हमारी

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