Anil Bedwal

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@AnilbedwalAb

फुरसत अगर मिलें तो मुझे पढ़ना जरूर… मैं तेरी उलझनों का मुकम्मल जवाब हूँ…!

Rajasthan, India Katılım Mayıs 2015
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@Realrealaz1A @alokrajRSSB @RPSC1 आपसे निवेदन है कि कृपया कुछ प्रश्न @RPSC1 से भी करो जो भर्तियों के अंक रिजल्ट निकलने के 6-6 महीने बाद तक भी सार्वजनिक नहीं करती। @alokrajRSSB सर ने रिजल्ट में पारदर्शिता तो बढ़ाई है।
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Rakesh kumar
Rakesh kumar@Realrealaz1A·
@AnilbedwalAb @alokrajRSSB @RPSC1 संवाद या खेल?? थर्ड ग्रेड रिजल्ट की कितनी तारीख बताई लेकिन रिजल्ट निकाल पाए क्या? स्टूडेंट दी हुई तारीख से जैसे तैसे कर के wait करते हैं और फिर अगली तारीख दी जाती है तो फिर संवाद का क्या फायदा
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Rakesh kumar
Rakesh kumar@Realrealaz1A·
तारीख पर तारीख? आखिर @alokrajRSSB reet mains results को लेकर इतने झूठ क्यों बोल रहे हैं? कहीं बोर्ड के अंदर omr खेल चल रहा है? हद है गरीब युवाओं के भविष्य के साथ खेल कब खत्म होगा??@alokrajRSSB जी इस बार omr सही रखना फिर मत कहना कि omr जल गई या चूहे खा गए क्योंकि अब बहुत हुआ
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@tribalvoice99 आम नागरिक को पूरे 12 महीने मिलते हैं अपने काम निपटाने के लिए, लेकिन सशस्त्र बलों के जवानों को अक्सर सिर्फ 1-2 महीने की छुट्टियों में पूरे साल के काम समेटने पड़ते हैं। इसलिए संयम, धैर्य और समझदारी दोनों तरफ से जरूरी है।
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The Tribal Voice 🇮🇳
The Tribal Voice 🇮🇳@tribalvoice99·
भारत में मिलिट्री और पैरामिलिट्री वालो को समझना चाहिए की जब वो ऑन ड्यूटी नहीं है तब वो भी नार्मल जनता ही है इनफैक्ट नार्मल जनता के तो कांटेक्ट तक होते है आप मिलिट्री और पैरामिलिट्री वालो के तो सिविलियन्स में कांटेक्ट तक नहीं होते मतलब आप नार्मल जनता से भी ज्यादा वुल्नरबेल है इसलिए कभी भी किसी भी सिचुएशन आप पुलिस से भिड़ने की गलती न करे, जब ऑफ ड्यूटी हो गलती से भी खुद को ऑन ड्यूटी समझने की गलती न करे, अपना देश अमेरिका नहीं है जहाँ सैनिक और देश की सेवा करने वालो की एक्स्ट्रा रेस्पेक्ट होती है। #Learn
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@TheTribhuvan जयपुर में भी ऐसे कई क्लब हैं गोल्फ क्लब, अभी बना हुआ constitutional क्लब में भी आम आदमी को कहा सदस्यता मिलती है, वो तो पुरा जनता के पैसे ही बना है
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
Gymkhana प्रकरण: इतिहास को खाली कराने से बेहतर है उसे जनता के लिए खोलना दिल्ली जिमखाना क्लब का प्रकरण केवल एक क्लब की ज़मीन, एक नोटिस और एक तारीख; 5 जून 2026 का मामला नहीं है। यह उस बड़े सवाल का मामला है कि आजाद भारत अपने औपनिवेशिक अतीत से कैसे पेश आता है: क्या वह उसे बुलडोज़र की तरह हटाता है, संग्रहालय की तरह जमा देता है या लोकतंत्र की रोशनी में खोलकर उसे बदलता है? केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को 27.3 एकड़ परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। वजह बताई गई है कि यह जमीन राजधानी के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में है और रक्षा-संबंधी ढांचे तथा सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। क्लब प्रधानमंत्री आवास और सत्ता-प्रतिष्ठानों के निकट, लुटियंस दिल्ली के सबसे संवेदनशील भूगोल में स्थित है। सरकार की बात को हल्के में नहीं लिया जा सकता। राष्ट्रीय सुरक्षा कोई साधारण बहाना नहीं होनी चाहिए, लेकिन यदि सचमुच सुरक्षा की आवश्यकता है तो उसे साफ, विस्तृत और सार्वजनिक रूप से विश्वसनीय ढंग से रखा जाना चाहिए। लोकतंत्र में “सुरक्षा” शब्द अंतिम तर्क नहीं हो सकता; वह सबसे गंभीर तर्क है, इसलिए सबसे अधिक पारदर्शिता भी उसी में चाहिए। पर इस पूरे प्रकरण में इतिहासकार स्वप्ना लिडल की बात सबसे संतुलित और दूरदर्शी लगती है। उनका कहना है कि सांस्कृतिक संस्थानों का सिकुड़ना दुखद है; उन्हें जड़ नहीं होना चाहिए, विकसित होना चाहिए। यही इस विवाद का असली नैतिक केंद्र है। जिमखाना को बचाने की मांग अगर सिर्फ कुछ पुराने विशेषाधिकारों को बचाने की मांग है तो वह लोकतांत्रिक नहीं है। लेकिन उसे खत्म करने की मांग अगर इतिहास को मिटाने की हड़बड़ी है तो वह भी विवेकपूर्ण नहीं है। दिल्ली जिमखाना क्लब की जड़ें औपनिवेशिक सत्ता में हैं। क्लब ने अपनी आधिकारिक जानकारी में भी माना है कि वह 3 जुलाई 1913 को अपने वर्तमान स्वरूप में आया था और तब उसका नाम “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” था; आज़ादी के बाद “इम्पीरियल” शब्द हट गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल नाम से “इम्पीरियल” हट जाने से संस्थान लोकतांत्रिक हो जाता है? बिल्कुल नहीं। यदि उसकी सदस्यता, पहुंच, सामाजिक संस्कृति और संसाधनों पर कब्जा अब भी एक बंद अभिजात मंडली के हाथ में है, तो वह आजाद भारत में भी साम्राज्य की छाया ही है। इसीलिए जिमखाना की आलोचना जरूरी है। वर्षों से उस पर अभिजात्य, बंद सदस्यता, लंबे वेटिंग पीरियड, परिवार-आधारित सुविधा और सार्वजनिक जमीन पर निजी-से क्लब-संस्कृति के आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार क्लब की सदस्यता को लेकर दशकों लंबे इंतजार और “ग्रीन कार्ड” जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जनता पूछेगी ही कि राजधानी की सबसे कीमती जमीन का उपयोग कितने लोगों के लिए है और किस सामाजिक तर्क से है? लेकिन यही प्रश्न सरकार से भी पूछा जाना चाहिए। यदि समस्या अभिजात्य है तो समाधान लोकतंत्रीकरण होना चाहिए, विस्थापन नहीं। यदि समस्या बंद दरवाजे हैं तो समाधान दरवाजे खोलना होना चाहिए, इमारत गिराना नहीं। यदि समस्या सार्वजनिक जमीन पर निजी विशेषाधिकार है तो उपाय यह होना चाहिए कि उस जगह को खेल, इतिहास, पुस्तकालय, सार्वजनिक व्याख्यान, युवा कार्यक्रम, शहरी विरासत, संगीत, कला और नागरिक संवाद के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाए। सांस्कृतिक संस्थानों का दोष यह नहीं कि वे पुराने हैं; दोष यह है कि वे पुराने होकर भी सीखना बंद कर दें। एक पुराना पेड़ अगर फल और छाया दे रहा है तो उसे काटना मूर्खता है; लेकिन यदि उसने चारों ओर की जमीन घेर ली है और किसी को पास नहीं आने देता तो उसकी छँटाई, देखभाल और सार्वजनिक उपयोग जरूरी है। जिमखाना भी ऐसा ही पेड़ है; औपनिवेशिक बीज से निकला, सत्ता की धूप में पला, अभिजात्य की बाड़ से घिरा; पर अब प्रश्न यह है कि उसे जनता की खुली छाँव बनाया जा सकता है या नहीं। इस विवाद का मानवीय पक्ष भी है। रिपोर्टों में क्लब के लगभग 600 कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी को लेकर चिंता जताई गई है। किसी भी बड़े प्रशासनिक निर्णय में यह सवाल आखिरी पंक्ति में नहीं आना चाहिए। सत्ता और अभिजात्य के संघर्ष में अक्सर सबसे पहले वही लोग कुचले जाते हैं जिनके नाम कहीं नहीं होते—माली, रसोइए, वेटर, सुरक्षा-कर्मी, सफाईकर्मी, पुराने कर्मचारी। जिमखाना का भविष्य तय करते समय उनकी नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास और गरिमा को केंद्र में रखना होगा। #Gymkhana @PTI_News
Press Trust of India@PTI_News

VIDEO | Delhi: “It is pity that cultural institutions are shrinking; they must evolve, not ossify”, says Historian Swapna Liddle on Centre ordering to vacate Gymkhana by June 5. (Full video available on PTI Videos - ptivideos.com)

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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@ColAmitkumar @adgpi आज के समय में दिखावटी लोकतंत्र और अंग्रेजी हुकूमत में कोई अन्तर नहीं बचा।
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Col Amit Kumar 🇮🇳Cockroach Veteran🇮🇳
I won’t challenge it. @adgpi Let sleeping veterans, serving personnel, and silent authorities finally awaken and clean the system. This organisation belongs to me too. My appeal is to every soldier and officer who took the oath of service ask yourselves honestly: is what has been done to both of us right or wrong? There are officers and men who are witnesses to everything. Our reputation has been systematically targeted by certain disgraceful individuals who remain close to authority and continue misleading the higher leadership. A false narrative has been built portraying both husband and wife as “anti-organisation” merely because we raised our voice against injustice. Remember: Her pay was deducted against the law. Complaints were not acted upon despite legal obligations. Violations of women’s rights and our privacy took place. Actions contrary to the POSH Act, 2013 and the Mental Healthcare Act, 2017 were committed. Even DGAFMS, through RTI replies, categorically confirmed the mandatory implementation of the MHCA 2017 within the Army. The misleading legal advice given by concerned JAG officers now stands exposed. Instigation, humiliation, and mental deterioration of personnel are not lawful acts. An officer showing the middle finger at MH Ambala despite video evidence being provided saw no action taken. The conduct of the Col A of 40 Arty Div, including abuse towards a jawan and suppression of CCTV footage dated 05 Aug 2024 and 12 Sep 2024, was also ignored. False implication by Lt Col Naresh Chauhan and the removal of a jawan witness who was about to depose against him from court proceedings raise even more serious questions. All videos and evidence have already been uploaded sequentially on my X handle for everyone to see. The silence from the Chief remained. So where exactly were we wrong? Today, maturity, accountability, and a true sense of belongingness towards the institution appear to be missing. The system may continue running as a “naukari” for many but I stand against this mindset because the organisation deserves better. @BJP4India @narendramodi @rajnathsingh @DefenceMinIndia @PMOIndia @westerncomd_IA @SWComd_IA @IaSouthern @easterncomd @suryacommand @artrac_ia @NorthernComd_IA @dgafms_mod @cbic_india @LtGenHooda @Vedmalik1 @SushilS27538625 @LestWeForgetIN @rwac48 @sanjayuvacha @RahulGandhi @yadavakhilesh @AnumaVidisha @ANI @PTI_News @manaman_chhina @timesofindia @republic @Republic_Bharat @ZeeNews @Cockroachisback @dhruv_rathee @SupriyaShrinate @JPNadda @aajtak @AamAadmiParty @4pmnews_network @ABPNews @AdityaRajKaul @Fahad_Journo @danvir_chauhan @XCorpIndia @grok @anand_maj @LambaAlka
Col Amit Kumar 🇮🇳Cockroach Veteran🇮🇳@ColAmitkumar

Thank you, Chief, for this token of remembrance one that, unfortunately, reflects how injustice and blind loyalty are being rewarded within the system. My parents and my Commanding Officer taught me to respect women, uphold dignity, and choose principles over career whenever life demands such a choice. That is why my intentions were clear from the very first day when these videos and complaints were forwarded to your personal number seeking intervention and justice. Your silence at that stage conveyed a painful message as if we had already been written off. In such circumstances, how can an ordinary officer or veteran still expect justice from the system? You may even take away my full pension; I may choose not to challenge it. But please save the organisation and protect the honest officers and soldiers whose sacrifices and dedication ultimately contributed to the success of senior leadership and enabled many to rise to such high appointments. I once had immense respect and admiration for you. That image was deeply shaken when I came to know that actions affecting me were allegedly approved without even providing me a formal order or an opportunity to be heard. These may appear to be small incidents in the larger scheme of things, but for us they carried deep meaning. They only strengthened our belief that we were standing on the side of truth, while simultaneously sending a disturbing message about the beginning of abuse of power within the system. @manaman_chhina @adgpi

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Amit Yadav 🇮🇳
Amit Yadav 🇮🇳@AmitYaddav·
@arvindchotia जी आप कैसी बेतुक़ी बातें कर रहे हैं! आपको विभिन्न वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की बेसिक जानकारी तो रखनी ही चाहिए अगर आप इस तरह के मुद्दों पर बात रखते हैं तो! आपकों मालूम होना चाहिए कि OBC में जो क्रीमीलेयर लागू है उसकी वजह से 40साल से कम आयु के उस व्यक्ति के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता जो ए श्रेणी की नौकरी में आ गया है, और इनकम आठ लाख से ज़्यादा है! अब बताओं किस IAS की सैलरी 8 लाख से कम रहती है? अगर नहीं पता हो तो हमसे ही पूछ लिया करो!
Arvind Chotia@arvindchotia

और अगर माता या पिता में से एक आईएएस हो तब तो आरक्षण मिलना चाहिए ना? बेचारा एक आईएएस क्या ही कमा पाता होगा?

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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@ColAmitkumar सच्चाई का गला घोंटने का काम, लोकतंत्र में तानाशाही तंत्र
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Col Amit Kumar 🇮🇳Cockroach Veteran🇮🇳
Thank you, Chief, for this token of remembrance one that, unfortunately, reflects how injustice and blind loyalty are being rewarded within the system. My parents and my Commanding Officer taught me to respect women, uphold dignity, and choose principles over career whenever life demands such a choice. That is why my intentions were clear from the very first day when these videos and complaints were forwarded to your personal number seeking intervention and justice. Your silence at that stage conveyed a painful message as if we had already been written off. In such circumstances, how can an ordinary officer or veteran still expect justice from the system? You may even take away my full pension; I may choose not to challenge it. But please save the organisation and protect the honest officers and soldiers whose sacrifices and dedication ultimately contributed to the success of senior leadership and enabled many to rise to such high appointments. I once had immense respect and admiration for you. That image was deeply shaken when I came to know that actions affecting me were allegedly approved without even providing me a formal order or an opportunity to be heard. These may appear to be small incidents in the larger scheme of things, but for us they carried deep meaning. They only strengthened our belief that we were standing on the side of truth, while simultaneously sending a disturbing message about the beginning of abuse of power within the system. @manaman_chhina @adgpi
Man Aman Singh Chhina@manaman_chhina

Retd Army Colonel’s pension cut by 50% by Army. indianexpress.com/article/chandi…

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S.P. JAT
S.P. JAT@obc96331177·
@PremaramSiyag6 सारे राजा रुजे अंग्रेजो की नोकरी करते थे और छतरी लेकर पीछे चलते थे । फर्जी इतिहास है
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प्रेमसिंह सियाग
क्विंटलों की तलवारों संग तलवारबाजी के किस्से कथित राजपुताना में प्रसिद्ध है और एक भी ओलंपिक मैडल नहीं जीतते है।तलवारबाजी के सारे मैडल इटली वाले ले जाते है।तलवार बाजी भी कुश्ती की तरह व्यक्तिगत कौशल का खेल है।कुश्ती को जाटों ने मेहनत से बाप की जागीर बनाया है लेकिन तलवार बाजी तो तुम्हारे बाप दादाओं की जागीर रही है तुम नालायकों ने उसकी लुटिया कैसे डुबो दी?
PS RATHORE@PS_RATHORE777

@PremaramSiyag6 एक जाति विशेष ने गंध फैला रखी है हरियाणा में । कुश्ती को अपने बाप दादा की जागीर समझ बैठे ये खुद की कास्ट के अलावा ये किसी को नहीं चाहते तभी कुश्ती संग up में है ।

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Anil Bedwal retweetledi
Rai Saaheb
Rai Saaheb@rain_views·
धर्मेंद्र प्रधान की बेटी के फॉरेन ट्रिप का 70,000 का छोटा सा फोन बिल सरकारी कंपनी पेट्रोनेट ने भरा। तो उसमें इतना हल्ला क्यों मचाना? मंत्री जी की बेटी अगर विदेश जाएगी तो पिता के साथ संपर्क में तो रहेगी ना?😴😴
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@LaduGodara3 @DrKirodilalBJP लोकतंत्र में यदि जनता की समस्याओं की समय पर सुनवाई नहीं होती, तो लोगों को मजबूर होकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों के लिए सरकार में बैठे जिम्मेदार अधिकारी उत्तरदायी हैं। जनता को हुए नुकसान और असुविधा की भरपाई संबंधित अधिकारियों से ही वसूली जानी चाहिए।
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Laduram Godara
Laduram Godara@LaduGodara3·
हमने मंत्रीजी के शब्दों पर भरोसा व विश्वास किया था, लेकिन अब थाने से हमारे संघर्ष पर नोटिस भेजें जा रहे हैं। जब हम उपचुनाव के समय SI भर्ती रद्द करवाने की मांग को लेकर पानी की टंकी पर संघर्ष कर रहे थे, तब सरकार के मंत्री @DrKirodilalBJP स्वयं आए थे। उन्होंने हमें भरोसा दिया था कि हमारी बात सरकार और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी तथा आंदोलन कर रहे आप दोनों युवाओं पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। हमने उनके शब्दों पर विश्वास किया, आंदोलन समाप्त किया और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखी। लेकिन आज भर्ती रद्द होने के बाद हम युवाओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। आखिर अब उस भरोसे और वचन का क्या अर्थ रह जाता है? हम सरकार और मंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि जब युवाओं ने आप पर विश्वास किया, तो अब सरकार व पुलिस का यह दोहरा रवैया क्यों? क्या युवाओं के संघर्ष की जीत सरकार को स्वीकार नहीं हो रही? हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि हम इन नोटिसों और दबाव की राजनीति से डरने वाले नहीं हैं। 2021 से लेकर आज तक हमने सड़क, आंदोलन और अदालत — हर जगह संघर्ष किया है और आगे भी अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ते रहेंगे। अगर युवाओं के हक की आवाज उठाना अपराध है, तो यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। चाहे नोटिस दें, मुकदमे करें या जेल भेज दें — हम झुकने वाले नहीं हैं। सरकार के मंत्री जवाब दें, बाकि पुलिस से हम डरने वाले नहीं हैं जो कार्रवाई करनी है करें ! “भरोसा देकर मुकर जाना राजनीति हो सकती है, लेकिन संघर्ष करना हमारी पहचान है।” @hanumanbeniwal @RLPINDIAorg
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@LaduGodara3 लोकतंत्र में यदि जनता की समस्याओं की समय पर सुनवाई नहीं होती, तो लोगों को मजबूर होकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों के लिए सरकार में बैठे जिम्मेदार अधिकारी उत्तरदायी हैं। जनता को हुए नुकसान और असुविधा की भरपाई संबंधित अधिकारियों से ही वसूली जानी चाहिए।
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Laduram Godara
Laduram Godara@LaduGodara3·
“”पुलिस के ये नोटिस हमें डरा नहीं सकते, सच की आवाज दबा नहीं सकते”” ! “लाठी, जेल और नोटिस से जो डर जाए वो संघर्ष क्या करेगा, हम किसान के बेटे हैं साहब, अन्याय के खिलाफ टकराएंगे।” SI भर्ती 2021 रद्द हो चुकी है, लेकिन जयपुर के Bajaj Nagar Police Station से लगातार नोटिस और कॉल आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब भर्ती रद्द हो गई, तो अब इतने समय बाद किनके इशारों पर कार्रवाई ? जब राजस्थान में उपचुनाव के दौरान हम लोग पानी की टंकी पर चढ़कर भर्ती रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे, तब हमें तीन दिन तक भूखे प्यासे अनशन पर रहकर संघर्ष करना पड़ा। तीसरे दिन सरकार के मंत्री Kirodi Lal Meena स्वयं आए और आश्वासन दिया कि आंदोलनकारी आप दोनों युवाओं पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। आज जब भर्ती रद्द होकर युवाओं के संघर्ष की जीत हुई है, तब थानों से नोटिस भेजे जा रहे हैं। क्या सरकार के मंत्रियों की बात का कोई महत्व नहीं? या फिर सरकार को युवाओं की यह जीत स्वीकार नहीं हो रही? हमने कोई अपराध नहीं किया। हमने सिर्फ मेहनतकश युवाओं के हक और न्याय की लड़ाई लड़ी है। 2021 से लेकर 2026 तक सड़क से अदालत तक संघर्ष किया, आंदोलन किए, धरने दिए, लेकिन कभी डरे नहीं। हम किसान परिवार से आते हैं, और संघर्ष हमारी पहचान है। हम सरकार और प्रशासन से कहना चाहते हैं — अगर युवाओं की आवाज उठाना अपराध है, तो यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। नोटिस, लाठी या जेल से हम डरने वाले नहीं हैं। मैं प्रदेश के सभी युवाओं से अपील करता हूं कि अन्याय और दोहरे रवैये के खिलाफ एकजुट रहें। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य की है। “जिन्होंने लाठियां खाकर भी आवाज उठाना नहीं छोड़ा, उन्हें नोटिस और जेल की दीवारें कभी डरा नहीं सकती।” “हम वो लोग हैं जो अन्याय के सामने झुकते नहीं, जरूरत पड़े तो सलाखों के पीछे से भी संघर्ष लिखते हैं।” ✊ “जुल्म की वर्दी चाहे जितनी ताकत दिखा ले, सच के लिए लड़ने वाले कभी सिर नहीं झुकाते।” @DrKirodilalBJP @teamdrkirodilal @hanumanbeniwal @RLPINDIAorg @BhajanlalBjp @RajCMO #si_भर्ती_2021
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Anand Bhaav
Anand Bhaav@AnandBhaav·
देश में जो अमीर तबका है वह इस देश की गरीब जनता का हक खा रहा है उसके हिस्से का हवा पानी लग्जरी एलीट क्लास को किसी चीज की पाबंदी नहीं है सारी अपील मध्यमवर्गीय परिवार से ही है तो समय रहते हैं अमीरों को सुधर जाना चाहिए नहीं तो जनता तो सुधार ही देगी।
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@Kunal_Alwar लोकतांत्रिक व्यवस्था में RPSC का रवैया तानाशाही जैसा क्यों ????? कौन जबाब देगा ????
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कुनाल भटनागर
एसआई भर्ती रद्द होने के बाद भी खेल जारी! RPSC और सरकार की मंशा पर सवाल राजस्थान की सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सवाल पेपर लीक या धांधली पर नहीं, बल्कि भर्ती रद्द होने के बाद सरकार और RPSC की नीयत पर उठ रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले और सरकार की अनुशंसा के बाद भर्ती रद्द हुई तो युवाओं को उम्मीद थी कि अब न्यायपूर्ण तरीके से नई परीक्षा होगी और सभी आवेदकों को बराबरी का अवसर मिलेगा। लेकिन RPSC के हालिया प्रेस नोट ने हजारों युवाओं को फिर से सड़क और अदालत के बीच खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा विवाद यही है कि आयोग ने दोबारा परीक्षा में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मौका देने का निर्णय लिया जिन्होंने 2021 में परीक्षा दी थी। जबकि अदालत की टिप्पणियों, सरकार की कमेटी की सिफारिशों और पूरे विवाद की भावना स्पष्ट रूप से “सभी आवेदकों” को अवसर देने की ओर इशारा करती थी। सवाल उठता है कि जब भर्ती ही निरस्त हो चुकी है तो फिर चयन प्रक्रिया का दायरा सीमित करने का अधिकार RPSC को किसने दिया? यही वह बिंदु है जहां सरकार और आयोग दोनों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्योंकि राजस्थान में इससे पहले EO/RO भर्ती रद्द होने पर सभी आवेदकों को दोबारा मौका दिया गया था। तब आयोग ने यह तर्क नहीं दिया कि केवल परीक्षा देने वाले ही पात्र होंगे। फिर SI भर्ती में अलग नियम क्यों? क्या अलग-अलग भर्तियों में न्याय और समानता की परिभाषा भी बदल जाती है? इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू 2021 और 2025 कांस्टेबल बैच के साथ हुए अलग व्यवहार को लेकर है। जानकारी के अनुसार 2021 कांस्टेबल बैच के कई अभ्यर्थियों ने जॉइनिंग से पहले SI भर्ती का फॉर्म भरा था। लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ADG की ओर से आदेश जारी कर उन्हें परीक्षा देने से रोक दिया गया। उस समय विभाग का तर्क था कि ट्रेनिंग के बीच परीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब 2026 में वही पुलिस विभाग 2025 कांस्टेबल बैच को विशेष आदेश निकालकर SI परीक्षा में बैठने की अनुमति देता है। दोनों मामलों में परिस्थितियां लगभग समान थीं — दोनों कांस्टेबल बैच थे, दोनों ने जॉइनिंग से पहले आवेदन किया था, दोनों एक ही विभाग के अधीन थे। फिर एक बैच को रोकना और दूसरे को विशेष छूट देना क्या प्रशासनिक निष्पक्षता कहलाएगा? या यह साफ तौर पर चयनात्मक रवैया और संस्थागत भेदभाव है? सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी असहज है क्योंकि शुरुआत से ही उस पर भर्ती रद्द न करने का आरोप लगता रहा। युवाओं ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, तब जाकर भर्ती निरस्त हुई। लेकिन अब जब दोबारा परीक्षा का रास्ता खुला, तो RPSC ने ऐसा प्रेस नोट जारी कर दिया जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि सरकार और आयोग भर्ती को निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित करने के बजाय उसे सीमित दायरे में समेटना चाहते हैं। राजनीतिक रूप से भी यह मामला @BhajanlalBjp सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल चुका है, जबकि युवा वर्ग के भीतर यह संदेश जा रहा है कि नियम परिस्थिति और सुविधा देखकर बदले जा रहे हैं। अगर EO/RO में सभी को अवसर मिल सकता है, तो SI भर्ती में क्यों नहीं? अगर कोर्ट “आवेदकों” की बात करता है, तो आयोग उसे “परीक्षा देने वालों” तक सीमित कैसे कर सकता है? सरकार और RPSC को समझना होगा कि भर्ती परीक्षाएं केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होतीं, वे लाखों युवाओं के भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ी होती हैं। जब एक ही राज्य में, एक ही आयोग द्वारा, अलग-अलग मामलों में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाते हैं तो सबसे बड़ा नुकसान संस्थाओं की विश्वसनीयता को होता है। अब यह मामला फिर अदालत पहुंच गया है। यदि कोर्ट ने RPSC के इस सीमित दायरे वाले फैसले पर सवाल खड़े कर दिए, तो सरकार को एक बार फिर असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। और तब सबसे बड़ा प्रश्न यही रहेगा — क्या राजस्थान में भर्ती प्रक्रियाएं नियमों से चल रही हैं या परिस्थितियों और दबावों से? @RajCMO @RPSC1 @BhajanlalBjp @BJP4Rajasthan
कुनाल भटनागर tweet media
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@Decentladki1 मकान कम से कम 25 साल पुराना है
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Decent Chaudhary
Decent Chaudhary@Decentladki1·
NEET पेपर लीक कराने वाले BJP नेता द‍िनेश का घर बताया जा रहा है । कोठी अच्छी बनाई है मीडिया खबरों की माने तो पिछले 5/6 साल से अच्छी मेहनत कर रहा था काम तो आपको पता चल ही गया क्या करता था । अब बुलडोजर क्रांति के समर्थक और सरकार कब तक बुलडोजर लेकर पहुंचती हैं। कुछ समर्थक यहां भी जाति और धर्म विशेष के आरोपी पर होने वाली इस क्रांति के लिए बहुत पोस्ट करते थे । उनको भी शायद सांप सूंघ गया है । हमारा इस प्रकार की सस्ती क्रांति से की वास्ता नहीं रहा है । हमारी मांग कानूनी प्रक्रिया से सजा देने की है ।
Decent Chaudhary tweet mediaDecent Chaudhary tweet media
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@Decentladki1 नीचे सीमेंट का plaster तो उखड़ रहा है
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Anil Bedwal retweetledi
Pooja
Pooja@POOJA_VOF·
सवर्ण मीडिया और सवर्ण पार्टी भाजपा राजकुमार भाटी को बार बार अपमानित कर माफ़ी माँगने के लिए मजबूर कर रही थी वह भी एक कहावत के लिए————- ————-लेकिन पढ़ा लिखा गुर्जर है कुछ दिन विवाद को टालते रहे सोचा “साम” से काम चल जाये अब “भेद” की तरफ़ रुख़ कर लिया है अब बोलो माफ़ी मंगवाने के लिए। अब आहत तो राजकुमार भाटी के माफ़ी माँगने से OBC समाज भी होगा जैसे सवर्ण समाज हो रहा है। @rajkumarbhatisp #OBC
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@Rajsthanikaka भील के घर बाजार से लाए दोने पत्तल में शुद्धता और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा गया है
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राजस्थानी काका 💪🙏
भजनलाल जी एकदम साधारण आदमी की तरह है पंगत में बैठकर जीमण की फटकार देने का मजा ही अलग है काका-ताऊ के साथ बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए 🙏
राजस्थानी काका 💪🙏 tweet mediaराजस्थानी काका 💪🙏 tweet media
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Anil Bedwal
Anil Bedwal@AnilbedwalAb·
@POOJA_VOF अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा वर्ल्ड क्लास हो जाए तो आधे लोग खुद ही निजी वाहन चलाना कम कर देंगे। लेकिन एक तरफ गाड़ियों की लाइफ घटाकर कम्पनियों की बिक्री बढ़ाने की नीति और दूसरी तरफ डीज़ल-पेट्रोल बचाने का संदेश — यह स्पष्ट विरोधाभास दिखता है।
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