
Rakesh Kumar Yadav
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#CAPF Bill को संसद की मंजूरी मिलने के बाद #CRPF_Valour_Day पर डीजी जीपी सिंह, कैडर अफसरों और अधीनस्थ रैंक वालों को भरोसा दिला रहे हैं कि कुछ समय में उनकी पदोन्नति की समस्या हल होगी।MHA में कैडर रिव्यू संस्तुति भेज रहे हैं। दूसरे बलों की तरह CRPF में पदोन्नति मिले, ऐसा प्रयास है।











असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया। और इस बलिदान के बदले मिला क्या? 15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं। यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है। ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है। खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है। यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है। हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है - हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा। क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
















देखिए BJP की हिपोक्रेसी कल सदन में @AmitShah जी ने कहा की नक्सलवाद कम करने का श्रेय CAPF, CRPF, CISF के जवानों को जाता है वहीं दूसरी ओर कल उसी सदन में CAPF Bill 2026 लाए जिससे जवानों के अधिकार छीन लिए, शहादत का दर्जा छीन लिया, पेंशन का अधिकार छीन लिया । देश के 11 लाख CAPF जवानों को किस बात की सज़ा दे रहे हो ?



