
●●कुरान और गीता का संदेश;परमात्मा के रंग में हो परिवेश।●● ॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐﷲॐ रंगो का त्योहार होली आ गया, तन-मन आत्मा सबको संलग्न कर अंतर्रात्मा से परमात्मा के रंग में रंग जाए। इस दृष्टि से रमज़ान और होली दोनो ही हमें परमात्मा से जोड़कर परमात्मा के रंग में रंग जाने का संदेश देते है। कुरान शरीफ की सूरत 2 अल-बकरा की आयात 137 के अनुसार परमात्मा का आव्हान अपने पैग़म्बर से यह संदेश देने का आदेश देते है:- कहो, "अल्लाह का रंग इख्तियार करो। उसके रंग से अच्छा और किसका रंग होगा? और हम उसकी ही बन्दगी करने वाले लोग है।" भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 66 के अनुसार। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को संदेश देते हुए कहते है।:- हे अर्जुन! समस्त धर्मों (कर्तव्यों, नियमों और बंधनों) को त्यागकर केवल मेरी एकमात्र शरण में आ जा। मैं तुझे समस्त पापों (संसार के सारे बंधनों) से मुक्त कर दूँगा। तू चिंता मत कर। इस श्लोक को मेरे द्वारा रचित "गीता-भारती" में 18-74 मुक्तक रूप में हिंदी में इस तरह काव्यात्मक रूपांतरण किया गया है।:- हे अर्जुन! तू मुझमें रम जा, भक्त मन वाला.बन। मुझको ही तू प्रणाम कर, मुझे पूजने वाला बन। ऐसा कर तू मुझे प्राप्त होगा, सत्य वचन है मेरा, क्योंकि तू मेरा अतिप्रिय है, बात निभाने वाला बन। होली रंगों का त्योहार है । बाहरी रंग क्षणिक होते हैं, लेकिन परमात्मा का रंग (भक्ति का दिव्य रंग) स्थायी है। फिर चाहे परमात्मा का स्वरूप अल्लाह के रूप में हो या परमेश्वर के रूप में। जैसे होली में हम गुलाल से रंग जाते हैं और सब कुछ भूलकर आनंद मनाते हैं, ठीक वैसे ही यह श्लोक कहता है — सब कुछ छोड़ दो, केवल परमात्मा (श्रीकृष्ण) के रंग में रंग जाओ। पूर्ण समर्पण कर दो — अपना अहंकार, सारे धर्म, नियम, चिंताएँ, डर सब त्याग दो। इस दृष्टि से कुरान हो या गीता। अनुराग दोनो का परमेश्वर से है। दोनो का यहीं संदेश है, मुझमे समाहित हो जाओ यहीं मुक्ति प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है। दोनो ही धर्म ग्रंथ कर्म आधारित है, गहरे पैठ करने वाले चिंतको के लिए विमर्श के बहुत आधार मिल जाएंगे। साम्य पर चिंतन और क्रियान्वयन आज की महत्ति आवश्यकता है। होली का यहीं संदेश है, हम परमात्मा के रंग मे रंग जाए। रमज़ान में मुस्लिम भाई कुरान की भावनाओ को आत्मसात कर अल्लाह मय हो जाते है, कपड़े भले नहीं रंगते है, परंतु रूह उनकी अल्लाह के रंग में रंग जाते है। जब आत्मा परमात्मा के प्रेम-रंग में रंग जाती है, तब सारे पाप, बंधन और दुख स्वतः जल जाते हैं (जैसे होलिका दहन में बुराई भस्म होती है)। भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं — “मैं तुझे मुक्त कर दूँगा, चिंता मत कर।” होली की सच्ची खुशी यही है — बाहरी रंग खेलने के साथ-साथ मन को भी परमात्मा के रंग में रंगना। जैसे प्रह्लाद ने हिरण्यकशिपु के खिलाफ केवल भगवान की शरण ली और होली बनी, वैसे ही हम भी “मामेकं शरणं व्रज” कहकर परम आनंद प्राप्त कर सकते हैं। रंगो की होली के साथ परमात्मा के रंग में रंग कर आनंदित रहें। जयश्री कृष्ण। अल्लाहो अकबर। पंडित मुस्तफ़ा आरिफ आध्यात्मिक रचनाकार मुंबई आत्मिक निवास उज्जैन। #PanditMustafaArif #panditmustafaaaarif #bhagavadgita #gitabharti #gita #GitaGyan #gitaquotes #Quran #quranquotes #quranverses #quranrecitation #quranquotes #holi #Ramadan @DrMohanYadav51 @DrKumarVishwas @narendramodi




























